Romantic Love Shayari to Express Your Feelings
हिंदी शायरी का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवपूर्ण रहा है। भारत में काव्य और शेरो-शायरी की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। संत कवियों, भक्त कवियों और बाद में आधुनिक कवियों ने अपने विचारों और भावनाओं को काव्य के माध्यम से व्यक्त किया। कबीर, रहीम, तुलसीदास और सूरदास जैसे महान कवियों ने अपने दोहों और पदों के माध्यम से समाज को ज्ञान, प्रेम और आध्यात्मिकता का संदेश दिया।
रोमांटिक लव शायरी संग्रह और भावार्थ
-) हम भी अपना सबकुछ वहां छोड़ आएं हैं,
जिस शहर पर कभी हम राज़ करते थें ।।

-) हमसे ख़राब हालों का ना पूछों,
मुसीबतों का दौर हमारी जान ले डूबा,
हम बचके निकल जाना चाहते थें,
वक़्त ने एक पल की मोहलत ना दी ।।

-) अपना कोई भी हमारे जैसा नहीं,
हम जिस नज़र नज़र उठा ले,
बुरा कहीं भी हो वो सब अच्छा हों जाता हैं,
बात हमारी आएं तो अच्छा भीं बुरा हो जाता हैं ।।

-) हम हर किसी को अपने जैसा समझ बैठें,
जबकि जमाना झूठ फ़रेब से चल रहा था ।।

-) हम जैसा किसी बात को ग़लत कहने लग जाएं,
हर एक़ बात को तौलने लग जाएं,
तो समझ जाइए जमाने के रंग बहुत ख़राब हो गए हैं ।।

-) बातों को तौल कर बोलियें,
बग़ैर सोचने वाली बातें दूसरों का सीना छलनी कर देती हैं,
अच्छे भले इंसानों की जान ले लेती हैं।।

-) अब वो अपने घर भीं महफूज़ नहीं,
जो बेरोजगार हैं सिर्फ पढ़ाई करतें हैं,
उन्हें हर एक बात लाख सर्प देशों सी लगती हैं,
ज्वालामुखी सी आग जलती हैं।।

-) समंदर को नादान समझ रहें हैं,
ये आजकल के नादान लोग,
वो जो हिलोरें लेने लगा ,
जाने कितने लोगों के पैरों तलें ज़मीन खिसक जाएंगी ।।

-) वो मेरे साथ महफूज़ हैं,
ये सच रहा बाक़ी ज़माने के रंग झूठ और फ़रेब के सिवा कुछ नहीं ।।

-) वो मेरी मोहब्बत का एहसास हैं,
जो स्वर्णिम पन्नों को मेरा कर रहा हैं ।।

-) वक़्त को स्थिर कर दे,
जो इशारा कर दें वो,
हम सातों आसमान को एक कर दें,
वो ज़रा सी जो हां कर दें ।।

-) वो सब तबाह कर गया हमारा,
जिसको सब बना देना चाहिएं था,
हम उसके भरोसे रह गए,
वो विश्वास को अपने कदमों तले दबा गया ।।

-) हम से ना पूछ क्या क्या हुआ,
उसके नाम दिल हुआ जिंदगी का सफ़र उस से और ज़िन्दगी उसपर ख़त्म हुआ ।।

-) भूल जाएं सब कुछ ये भीं कम नहीं,
जो भूलने लायक़ नहीं था ,
उसको भीं भूल आएं हैं हम ।।

-) किसी और का हो जाऊं,
ये ख़्याल मेरी ज़िन्दगी को तबाह कर जाता हैं,
मेरी मोहब्बत तुमसे हैं किसी और से नहीं,
किसी और का जेहन मेरी ज़िन्दगी को ख़त्म कर जाता हैं।।

-) ना पूछों अब उन हालों का,
जिन हालों मैं हमने सब कुछ खोया हैं,
उन हालों का ख़्याल भीं रह कंपा देता हैं ।।
भावार्थ -
उन हालात के बारे में कुछ मत पूछो जिसमें मैंने सब खो दिया , क्योंकि उन हालात का ख्याल ही रूह कपा देता हैं।
-) उम्मीद ये ना रही कि अब सब ठीक होगा,
ठीक होने वाला समय ख़ुद को बचाने में जा गुजरा ।।
भावार्थ -
यह उम्मीद ही नहीं है कि सब ठीक भी होगा ,जब ठीक होने का समय था तब खुद को बचाने में वह समय लगा दिया ।
-) तेरे इश्क़ में दुनिया भुल बैठें हैं हम,
अब हमें ये ख़बर भीं नहीं की क्या थें पहले हम ।।
भावार्थ -
मैं तेरे प्रेम में दुनिया भूल बैठा अब तो मुझे यह याद नहीं की मैं पहले कैसा था
-) किस्सा ये था कि ना बिछड़ने वाली बातों पर,
हम अपना अंगूठा लगा कर आएं थें,
वे पढ़े लिखें थें जो कुछ हमारा था ,
शब्दों के जाल में उस सबको छीन ले गए।।
भावार्थ -
कभी नहीं बिछड़ने वाली बातों में मैंने अंगूठा लगा दिया , वे पढ़े लिखे थे और शब्दों के झाल में जो भी हमारा था सब छीन ले कर चले गए।
-) हमसे खेल कर रहे हैं वो,
जिन्हें खेलना हमने सिखाया ।।
भावार्थ -
कुछ लोग ऐसे होते है। जो दूसरों के लिए गए उपकार भूल जाते है।
-) झूठों की दुनिया में सच बोलना सजा बन गया,
दिल साफ रखने वाला यहाँ मजाक बन गया।
भावार्थ -
आज के दौर में सच बोलने वाले व्यक्ति की कोई एहमियत नहीं होती। सच बोलने वाले व्यक्ति का मजाक बनाया जाता है। और झूठ को प्राथमिकता दी जाती हैं।
-) जो हर बात पे झूठी कसम खाते हैं,
वही सबसे ज्यादा धोखा देते हैं।
भावार्थ -
जो लोग दूसरे को छ्लते हैं। झूठी कसमें खा कर उसका असर उनके जीवन पर भी होता है। एक समय ऐसा आता है। कि वह हर रिश्ते नाते से धोखा खाते है। क्यूंकि यह नियति का नियम हैं। धोखे का बदला धोखा ।
-) चेहरे से मासूम पर दिल से चालाक,
झूठे लोग करते हैं सबसे ज्यादा नुकसान।
भावार्थ -
कुछ लोग हमारे जीवन में ऐसे होते हैं जो केवल चेहरे से मासूम होते हैं। झूठ बोलने वाले लोग हमेशा हमारे लिए नुकसान करते हैं।
चेहरे में मुस्कान और दिल में धोखा
झूठे लोगों का यही खेल अजीब होता हैं।
भावार्थ -
लोगो के चहरे की मुस्कान भी धोकेबाज वाली होती है। लोग यहां दिखावे के लिए मुस्कुराते है। झूठे लोग झूठ बोलते है और हमे अपने झूठ में फसाते है।
-) भरोसा किया और टूट गया दिल,
झूठी बातों ने कर दिया क़त्ल।
भावार्थ -
आज का समय ऐसा समय हैं। जहां सबसे मुश्किल काम भरोसा करना होता हैं। आज कल लोग हमें दर पर छलते है। और झूठी बातों से हमारा क़त्ल कर देते हैं। झूठ बोल बोल कर हमें तकलीफें देते हैं।।
-) झूठे लोगों की भीड़ में अब सच कम पड़ गया,
हर रिश्ता दिखावे का बनकर रह गया।
भावार्थ -
आज का समय ऐसा समय हैं। जहां कोई भी रिश्ता हृदय से नहीं है। हर रिश्ता दिखावे से चलता है। और झूठ की इतनी पहुंच है।। कि सच कम पड़ गया है।
-) जिनसे उम्मीदें थी वफ़ा की,
वही निकले झूठ की सजा की।
भावार्थ -
हमे किसी से उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए। उम्मीद ही दुख का कारण होती है। हम जिससे जितनी बड़ी उम्मीदें रखेंगे हमे उससे उतनी बड़ी तकलीफें होगी।
-) झूठ बोलते रहे वो हर बार,
हम समझते रहे बस एक प्यार।
भावार्थ -
कुछ रिश्तों का झूठ हमें प्रेम लगने लगता हैं। हम उनकी बातों को प्रेम समझते हैं। जो केवल हमें छलना जानते हैं।
-) मासूम बनकर करते हैं वार,
झूठे लोग सबसे ज्यादा ख़तरनाक यार।
भावार्थ -
जो लोग मासूम बनते हैं। या मासूमियत का दिखावा करते हैं। असल में वहीं लोग हमारे लिए हानिकारक होते हैं। वह कहीं न कहीं हमें अपनी बातों में खींच तो लेते हैं। पर हमें अपने झूठ के अधीन नहीं कर पाते।
-) सच सुनने का हौसला नहीं जिनमें,
वो झूठ को ही सच मानते हैं हर दिन में।
भावार्थ -
आज के लोग सच नहीं सुन पाते उन्हें वहम हाथ है। और वह उसी बहम को सच बनाने का प्रयास करता है। झूठे लोग सच नहीं सुन पाते वो झूठ को सच बनाने की कोशिश करते हैं।
-) झूठ की इमारत जब गिरती है,
तो साथ में कई दिलों को तोड़ती है।
भावार्थ -
जब किसी का झूठ हमारे समाने आता हैं। हमारे सामने आता हैं। तो हमे बहुत तकलीफें होती है। झूठ अक्सर इंसान का दिल तोड़ देता है।
-) हर रिश्ते में अब शक होने लगा,
झूठे लोगों का असर बहुत गहरा लगा।
भावार्थ -
हम जिस परिवेश में रहते है। उसका असर हम पर जरूर होता है। झूठे लोगों के समीप रहने से हमारे भीतर भी उनकी प्रवृति जीवित होने लगती है। और हम रिश्ते में शक करने लगते हैं।
-) सच बोलने वाले अकेले रह जाते हैं,
झूठे महफिलें सजाते हैं।
भावार्थ -
आज कल झूठे लोगों को ही जाता महत्व मिलता हैं। जो सच बोलता है उसकी भावनाएं समझी नहीं जाती है। और अकसर सच बोलने वाले अकेले रह जाते हैं।
-) झूठ की आदत ऐसी लगती है,
कि इंसान भी पहचान से हटती है।
भावार्थ -
झूठ हमें इस कद्र मजबूर कर देता है। कि हमें फिर उसकी आदत ही लग जाती हैं। हमें फिर सच नहीं दिखता हमें केवल झूठ ही नजर आता है। और हम झूठ के आदि हो जाते हैं।
-) उनकी बातों में इतना मिठास था,
कि झूठ भी शहद सा लगने लगा था।
भावार्थ -
कुछ लोग ऐसे होते है। जो हमें अपने अधीन करते हैं। वह झूठ भी क्यों ना बोल ले हमें उनका झूठ भी मीठा लगने लगता है।
प्रेरणा मिलती है और कई बार जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण भी मिलता है। शायर अपनी कल्पना, संवेदनशीलता और अनुभवों को सरल तथा प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक स्वयं को उससे जुड़ा हुआ महसूस करता है।
-) कभी-कभी लोग इतने झूठ बोलते हैं,
कि खुद को भी सच समझ लेते हैं।
भावार्थ -
झूठे लोगों को बहम बहुत होता हैं। वह अपने झूठ को ही सच मानने लगते हैं। उन्हें अपना झूठ ही सच लगता हैं।
-) हमने दिल दिया वो धोखा ले गए,
झूठी मोहब्बत में आँखें भी भीग गए।
भावार्थ -
आज का समय ऐसा हैं। लोग झूठे प्यार का दिखावा करते है। और जब प्यार बढ़ जाए तो धोखा दे देते हैं। और हमारी आंखे छलक आती हैं।
-) झूठे लोगों का क्या गिला करें,
सच में ही अपनी गलती मान ली।
भावार्थ -
दूसरे को दोष नहीं देना चाहिए अपनी गलती मान लेनी चाहिए। दुसरे को बोलने से बेहतर खुद को देखना चाहिए। और अपनी गलती मान लेनी चाहिए।
-) झूठ की परछाई हर बात में दिखी,
सच की तो जैसे मौत ही लिखी।
भावार्थ -
आज कल हर बात में झूठ ही झूठ है हर बात मैं झूठ ही दिखता हैं। सच बहुत कम हो गया हैं। या ये कहे कि बिल्कुल ही मर गया है। अब सच कही और जीवित नहीं रहा।
-) हर बात में झूठ की गहराई थी,
फिर भी उसकी सादगी पर भरम आई थी।
भावार्थ -
कुछ लोग झूठ भी इतनी गहराई से बोलते हैं। कि हमें उनकी सादगी और झूठ पर यकीन हो जाता हैं। और हम उनका झूठ सच समझने लगते हैं।
-) चेहरे पे मुस्कान, दिल में फरेब,
झूठे लोगों का यही है करतब अजीब।
भावार्थ -
लोग चेहरे पर झूठी मुस्कान लिए फिरते हैं। झूठे लोग अपने चेहरे की झूठी मुस्कान से ही हमारा दिल जीत लेते हैं। यह उनका अजीब अंदाज होता हैं।
~~~आराध्यापरी~~~
-) इश्क़ तू हमें यूं बदनाम भी ना कर ,
कि लोगों से हम नज़र चुराने लग जाएं ।।

भावार्थ -
इश्क़ में हमें हमेशा अपने साथी की इज़्ज़त और कद्र करनी चाहिए। इश्क़ इज्जत से चलता हैं।
-) किसी परदेशी को क्या ख़बर,
जो गुजरी दिल पे बेबस जानते हैं अपने लोग ।।

भावार्थ -
कोई परदेशी क्या जानता है जो गुज़री है दिल पर वह सिर्फ अपने लोग जानते हैं।
-) तुम किसी के यूं भी ना हो जाना ,
यादों में मैं रहूं और हक़ीक़त में उसके ना हो जाना,
आंख मूंद कर मानते हैं तुमको बस इसको भ्रम ना बना जाना ।।

भावार्थ -
प्रेम में विरह सबसे बड़ी पीड़ा होती है। प्रेमी को ख्यालों में पाना इस संसार का सबसे बड़ा दुख होता है। प्रेमी के होने की कल्पनाएं हमे तोड़ देती हैं।
-) कोई अगर खता हो तो बयां करने आ जाना तुम,
किसी और को मेरी खामी गिनवाओं मुझे गवारा नहीं ।।

भावार्थ -
मेरी कोई गलती हो तो बताने चले आना, मुझे अच्छा नहीं लगता कि किसी और से मेरी गलतियां कहो।
-) माना हम में अदब नहीं अब ,
किसने अदब की लाज रखी ,
जो ज़रा से हम क्या झुके लोगों ने यहां गर्दनें उड़ाई ।।

भावार्थ -
जीवन में सहनशीलता होना जरूरी है। हम सहनशीलता के चलते कभी थोड़ा झुक जाते है। तो लोग हमें झुकाने का ही प्रयास करते रहते हैं।
"यहाँ पर आपको टूटे दिल के जज्बातों को बयां करने वाली सबसे दर्दभरी और दिल को छू जाने वाली broken heart shayari हिंदी में पढ़ने और अपने चाहने वालों के साथ शेयर करने के लिए मिलेगी।”
-) सुना है अब वो वफाओं के पाठ पढ़ाता हैं,
ये भी क्या ख़ूब हैं ग़ुनाह करके साधु बन जाता हैं,
हम भी सोचते हैं अब उनके बताएं हुए रस्ते पर चल दें
बेवफाओं के शहर थोड़ी सी बेवफ़ाई कर ले ,
अब दिल चाहता हैं किसी और राह पर चल ले ।।

भावार्थ -
हर तरीके के इंसान का मन अगर मृत हो जाए तो वह एक नई राह पर जाना चाहता है। अकसर इंसान का मन लोगों की बेवफाई से मर जाता हैं। इंसान जमाने के मोह से मृत हो जाता हैं। और कुछ नया करना चाहता है। वह जीवन में कुछ नई राह चाहता है।
-) ख़ुद को तबाह करने को जी चाहता हैं,
अकेले रहने के जी चाहता हैं,

भावार्थ -
दुनिया से परेशान लोग जो झूठ फरेब मोह माया से थक जाते हैं। वह अक्सर अपने जीवन में अकेले रहने एक फैसला कर लेते हैं। और अकेले रहने लगते हैं।
-) हम हम ना रहें ये भी क्या किसी से कम हैं,
वो तेज़ आवाज वो आंखों में गुस्सा वो किसी की ना सुनना ,
ये सब सजो रखे थें हमने बेशकिमती मोती जैसे ,
अब एक भुला डरा हुआ शख़्स हैं इससे आगे इसके जैसा कुछ नहीं ।।

भावार्थ -
जीवन में कुछ परिस्थितिया ऐसी आती हैं। जो हमें एकदम विपरीत बना देती हैं।जो हमारा लहजा ही बदल देती है।
-) हवाओं के तेज रुख ने वो चराग़ बुझा ही दिया ,
जिसके ना बुझने कि कसम हम खाते थे
वक्त ने पहलू बदल ही दिए सारे जिन्हें हम अपना बुलाते थे ।।

भावार्थ -
समय के साथ पता चल जाता हैं। कौन हमारा कितना अपना है। जब वक्त अपना असर दिखाता है। तो पता लगता हैं। कौन असल में साथ है। और कौन दिखावे के लिए साथ चल रहा है। वक्त सब दिखा देता है।
-) बड़ा दूर शहर हैं तेरा मैं सफ़र में ही हताश हो जाता हूं,
ये दूरियां बड़े शहरों की मुझे अधूरे सफ़र में रुलाती हैं ।।
भावार्थ -
रिश्तों की दूरियां सफर से नहीं दिल से होती है। यदि रिश्तों में दिल से दूरी आ जाती है। तो मिलने के बाद भी दिल रो जाता है।"टूटे दिल की गहराई से जुड़ी भावनाओं को शब्दों में बयां करने के लिए यहाँ पर आपको सबसे दर्दभरी और दिल छू लेने वाली broken heart sad shayari in Hindi का बेहतरीन संग्रह मिलेगा, जिसे आप अपने जज़्बातों के साथ शेयर कर सकते हैं।"
-) एक वादा ये भी कर हर वादे को मुक्कमल में करूं,
तेरी कसमें झूठी खाता नहीं मैं बस यकीन कर ,
अपनी उम्र लंबी कर ख़ुद को मेरा कर बस मेरा कर।।

भावार्थ -
कुछ रिस्तो का मिल जाना ही हमे सब कुछ मिल जाने के समान होता है। वह लोग इतने खास होते हैं। कि हम उनकी झूठी कसमें भी नहीं खा सकते हम बस उनको पाने की तमन्ना करते हैं।
मुझसे नज़रे मत चुरा मैं इस खेल में कच्चा हूं , एक उम्र बीताने दे फिर मैं भी खिलाड़ी बन सकता हूं।
भावार्थ -
हमें किसी भी चीज में खिलाड़ी बनने के लिए समय की आवश्यकता होती है। एक समय के बाद अब नीपूर्ण हो जाते है। खेलों में।
-) कोई परदेश में जाने कैसे दिन बिताता होगा ,
जिसका मेहबूब कई दिन तक उस से मिल नहीं पाता होगा ,
भावार्थ -
महबूब के बिना कही भी मन नहीं लगता हैं। महबूब साथ न हो तो सब कुछ बिखरा बिखरा सा लगता हैं। महबूब के बिना घर हो या प्रदेश अब वीरान ही लगता हैं।
वो ख़ुद को कितना असहाय पाता होगा
वो तो इसी बात से बिखर जाता होगा ,
जीते जी बस मर जाता होगा ।।

भावार्थ -
कुछ लोग ऐसे होते हैं। जिनकी बातों से हम बिखर जाते है। कुछ लोग ऐसी बाते करते हैं। जो बातें अक्सर हमे प्रभावित करती हैं।
-) हमसे पूछो कोई उसके ना बोलने का ,
वो चुप रहे तो हजारों की भीड़ भी वीराने सी लगती हैं,
सावन की झड़ी बस बंजर सी दिखती हैं,
हरियाली भी मरुस्थल सी लगती हैं।।

भावार्थ -
हम से मत पूछो उसके नहीं बोलने का कारण ,वह चुप रहते हैं तो बहुत वीरान लगता हैं ,खिलता सावन बंजर लगता हैं और हरियाली भी मरुस्थल लगती हैं।
-) मैं कोई आवारा नहीं जो मुझे नकार देते हो तुम ,
जो मैं मिलने का कहूं तो इंकार कर देते हो तुम ,
तुम यादों में दिल के ख्यालों में इस कदर बसते हो जैसे मंदिरों में ख़ुदा,
मेरे प्रेम की कड़ी अर्चना हो तुम ।।

भावार्थ -
मैं अवारा नहीं हूं जो नकार देते हो , मैं मिलने को कहता हूं तो इंकार कर देते हो , तुम यादों में इस तरह हो जैसे मंदिर में ईश्वर होता हैं और तुम इसी प्रेम की पूजा हो।-) छोड़ आएं उस डग़र को भी दिल लगाने के सफ़र को भी ,
किसी की उम्मीद थे हम उसकी उम्मीद को
तेरे पहलू में आ गिरे हम अब फैसले हमारे हक़ में गिरे या विपक्ष में सबकुछ छोड़ आएं हम ।

भावार्थ -
छोड़ दिया रास्ते को और दिल लगाने की डगर को , किसी की उम्मीद थे वह उम्मीद भी छोड़ दिया।
तेरे कदमों में आए यह अब हमारा फैसला है अब हक में गिरे या नहीं यह सब छोड़ कर आए हैं।
-) कहीं तो वो दूर का मुसाफ़िर नज़र आता होगा ,
कभीं तो वो किसी डग़र पर टकराता होगा
भावार्थ -
उसकी कुछ बातें हमारी जैसे नहीं थी मैं यही सोचता था। कभी दूर होना ही होगा तभी तो बातों का मेल नहीं था तो वह दिल में कैसे रह जाएगा।
-) कुछ तो उसका हाल सुनाया करो ,
क्या अब भीं वो तस्वीरों को छुपाता होगा ।
माना कि बहुत दूर निकल गया मंज़िल से वो,
मग़र रास्ते से भीं कुछ ना कुछ पाता होगा
भावार्थ -
प्रेम में आगे बढ़ पाना संभव नहीं होता अपने प्रेमी को भूल पाना सम्भव नहीं होता दोहराती है। चीजें वही बार बार प्रेमी के बिना कही दिल सुकुन नहीं पाता है।।
-) ज़िंदगी ने मुक्कमल कहाँ रहने दिया हमें,
हम ज़िंदगी तलाशने में मौत हासिल कर आएं ।।
एक उम्मीद की किरण थीं कि अंत भला हो होगा,
पता चला उस उम्मीद की किरण को हम शुरू में ही छोड़ आएँ ।।
भावार्थ -
जिंदगी ने मुकम्मल ही नहीं रहने दिया,जिंदगी की तलाश में मौत से मिल आए । एक उम्मीद थी अंत भला होगा पर वह भी नहीं हो सका ।
-) कुछ तो उसकी बातें भीं हमारी सी नहीं थीं ,
मैं ये सोचता भीं रहता था ।।
की कभी तो बिछड़ना तय होगा हीं ,
जिससे बातों का मेल ना था,
वो दिल में कैसे रह सकता था ।।
भावार्थ -
रिश्तों को आजीवन चलने के लिए इंसान की बातें इंसान के ख्याल मिलने चाहिए। जिससे हमारे ख्याल ही ना मिले उससे बिछड़ना निश्चित ही होता हैं।
-) कुछ आसमां को देख देखकर डर जाते होंगे ,
जिनके घर सड़क किनारे होते होंगे ।।
ये तूफ़ानी बारिश बड़ी सुहावनी लगती हैं,
घर की खिड़कियों से ,
जिनके घर नहीं होते हैं,
उनको तो ये खेल मौत का लगता हैं ।।
भावार्थ -
बारिश हर किसी के लिए खूबसूरत नहीं होती बारिश हर किसी को खुशियां नहीं दे देती बारिश रुलाती है। उन लोगों को जिनका घर सड़क किनारे हुआ करते है। जो लोग भूखे रोया करते है। बारिश भी मौत सी लगती हैं।उन्हें जो सड़को के किनारे बसे रहते हैं।।
- ) मैं जाने क्या कर आया ,
ख़ुद की तलाश में ख़ुद को भूल आया ।।
पुराना सा बहुत उम्दा हुआ करता था मैं,
अब इस नए रंग में सब ,
अजीब सा लगता है सब ,
मैं अपनी ज़िंदगी का बहुत गलत फ़ैसला ले आया ।।
भावार्थ -
मुझे मालूम नहीं मैंने क्या कर दिया, खुद की तलाश में खुद को खो दिया। पहले बहुत अच्छा हुआ करता था पर इस रंग ने अजीब लगता हैं, मैंने अपने जिंदगी के बहुत गलत फैसले ले लिए हैं।
-) मिलने कि उम्मीद भीं थी ,
और डर भीं ये था कि ,
इंसानों की फितरत पर पल भर भीं भरोसा नहीं,
मैं उम्मीद में बैठा रहूं और वो कहें अब नहीं ।।
भावार्थ -
मिलने की उम्मीद के साथ डर भी था इंसानो की फितरत का अब भरोसा करना मुश्किल हैं। वह नहीं आए और मैं उम्मीद में बैठा रहा।
-) हमें औरों सा ना समझ ,
हम अपनी क़िस्म के भीं आख़िरी इन्सान हैं
जहां लोगों ने बर्बाद होना शुरू किया,
हम उस राह से आबाद हुएं हैं।।
भावार्थ -
हमें औरों जैसा मत समझ,हम अपनी किस्म के आखिरी इंसान हैं । जहां लोग बर्बाद हुए वही से हम आबाद हुए हैं।हम मुसीबत में भी धैर्य बनाए रखते है। अपनी सच्चाई की राह से ही हम।सब कुछ जीत लेते है।।
-) डोली सजने वाली थी उसकी,
लाल जोड़ें में हूर लगने वाली वो ।।
जाने फ़िर क्या हुआ एकाएक ,
मंज़र बदल गया मंडप का ,
पहले मुस्कुरा रहें थें सब ,
अब शिकस्त और आँखें नम थीं ।।
एक काग़ज़ के टुकड़े ने ,
ज़िंदगी ख़त्म कर दी उसकी ,
जिसपे लिखा था तुम नहीं तो मौत सही ।।
भावार्थ -
लाल जोड़े में परी लगती थी वह पता नहीं क्या हुआ मंडप का मंजर बदल गया। पहले मुस्कुरा रहे थे अब आंखों में हार और नमी थी। एक कागज के टुकड़े ने ज़िंदगी बदल दी जिसमें लिखा था तुम साथ नहीं तो मौत ही सही।
-) वो वफ़ा निभा गया जाते जाते भीं,
वरना ये आज के दौर में मुमकिन नहीं ।।
भूल जाते हैं लोग किसी बेहतर की तलाश में,
उसने ज़िंदगी ख़त्म कर दीं अपने यार की याद में ।।
भावार्थ -
वह जाते हुए ईमानदारी निभा गया नहीं तो अभी में समय में कहा मुमकिन है।भूल जाते है बेहतर मिलने की चाह में सब पर उसने अपनी जिंदगी खत्म कर अपने दोस्त की याद में।
-) माना की सब मुमकिन हैं प्यार में,
इंतज़ार बेबसी सुकून चैन ज़िन्दगी ।।
बस एक चीज़ ना गवारा हैं,
बिछड़ने की बातें ना हो प्यार में ।।
भावार्थ -
माना सब चलता है प्यार में, इंतजार मजबूरी और सुकून जीवन में होता है पर एक बिछड़ने की बातें अच्छी नहीं लगती।
-) वो हद को भी लांघ आएँ,
ये मुमकिन हैं तुम अपना वादा निभाओ
क्या ये मुमकिन हैं ,
वो छोड़ आएं सब एक पल में,
तुम ताउम्र साथ उसका निभाओ क्या ये मुमकिन हैं ।।
भावार्थ -
यह हो सकता हैं वह सारी सीमाएं भूल सकते हैं क्या तुम उम्रभर साथ निभाओगी क्या यह मुमकिन हैं।
-) एक आरज़ू थीं आशुतोष,
के उसको दुल्हन बनीं देखें ।।
हमारे नाम की मेंहदी,
उसके प्यारें हाथों में देखें ।।
भावार्थ -
एक ख्वाहिश की दुल्हन देखे आशुतोष की , हमारे नाम की मेंहदी उसके प्यार भरे हाथों में। सपना पूरा हो जाता पर ईश्वर को यह मंजूर नहीं था पर उसने किसी और मेहंदी किसी और की सजा ली फिर अपनी जान ले बैठी।
-) ख़्वाब मुकम्मल हो जाता मेरा ,
ख़ुदा को मंज़ूर ना था ऐसा ।।
वो किसी और के नाम की मेंहदी लगा बैठीं,
वो पागल सी लड़की अपनी जान गवां बैठीं ।।
भावार्थ-
ईश्वर कभी हमारे प्रव्यक्ति को हमारा जीवन साथी नहीं बनाता। ईश्वर केवल हमें वही देता तो उन्हें हमारे लिए सही लगता है। ऐसे में कही लड़कियां जान गवा देती हैं।
-) एक कहानी के किरदार बदल गएं,
हम अड़ियल बैल से ।।
उनके एक इशारे पर बदल गएं
वो चाहता ये नहीं था कि उसके लिये सब हो,
हमनें चाहा हम उसके लिए सारे बदल गएं
।।
भावार्थ -
एक इंसान के हमारे जीवन में आने से हमारा सम्पूर्ण जीवन परिवर्तित हों जाता है हमारा किरदार हमारा लहजा हमारी आदतें सब बदल जाती हैं। किसी एक के आने से ।
-) माना कि तेरे काबिल नहीं हूं मैं,
मग़र तेरे हक़ का हूं मैं ।।
परिवर्तन प्रकृति का नियम हैं,
तेरे काबिल भीं बन जाऊंगा मैं ।।
भावार्थ -
माना मेरी कहानी उतनी ठीक नहीं है इसमें दुःख के सिवा कुछ नहीं है। लोगों को वह कहानी पसंद आती हैं जिसमें जीवन खिलता हो पर हमारी कहानी ऐसी नहीं हैं।
-) मुझसे नज़रें ना चुरा ,
मैं इस खेल में अभी कच्चा हूं ।।
एक उम्र गुजारने दें तेरे साथ मुझे ,
इस खेल का सबसे उम्दा खिलाड़ी बन सकता हूं मैं।।
भावार्थ -
किसी भी चीज में खिलाड़ी बनने के लिए हमें समय की आवश्यकता होती है। समय मिलने पर हर व्यक्ति खिलाड़ी बन जाता है।।
-) माना कि कुछ भीं ठीक ना होना,
बुरें वक़्त का निकल जाना सा हैं ।।
ये भीं अच्छा हैं,
कि बुरें में बुरा वक़्त निकल रहा हैं
अच्छे वक़्त में सब अच्छा सा हीं हैं ।।
भावार्थ -
बुरे वक्त मैं हमने धैर्य रखना चाहिए बुरा वक्त निकल जाता है समय के साथ साथ थोड़ा समय लगता हैं। पर अब कुछ सही हो जाता हैं। बुरा वक्त निकल ही जाता हैं। आरब जब अच्छा वक्त आता है। तो सब अच्छा अच्छा होता हैं।बस धैर्य रखना चाहिए।
-) उसे ज़रा भीं कुछ हो जाएं,
मन हमारा घबराने लगता हैं ।।
वो ज़माने की हवा से,
अभी अंजान हैं अच्छे बुरे की उसे परख नहीं हैं ।।
भावार्थ -
जीवन में कुछ संबंध ऐसे बन जाते हैं। जिनका असर साफ हमारे जीवन पर पड़ने लगता हैं। वह खुश हो तो हम खुश रहने लगते हैं। उन्हें दुख हो तो हमे भी दर्द होने लगता है।
-) मैं ये किससे कहूं,
की मैं वक़्त के ठहराव में आ फंसा हूं ।।
जहां से निकलना इतना आसान भीं नहीं ,
कईं कंकाल हैं यहां,
यहां के निकल पाना आसान नहीं ।।
भावार्थ -
समय के साथ आगे बढ़ना सीखना चाहिए। वक्त के ठहराव में हमे ठहरना नहीं चाहिए। हमे अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। यदि हम वक्त के आगे ठहर गए तो हमारा निकल पाना मुश्किल होता हैं।।
-) जमाने की हवा को पहचान अशुतोष,
जो तू समझता हैं सब आसान सा ।।
वो एक जाल हैं,
तुझे फ़साने के फ़िर कभीं ना निकल पाने के ।
भावार्थ -
जैसा दिखता है। वैसा कुछ नहीं होता लोग अक्सर मीठा मीठा बोल कर हमें फसाते है । ताकि हम उनके आगे फंसे रहे उनकी बातों में आते रहें। और अपने सफर में आगे न बढ़ पाएं।
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