Romantic Love Shayari to Express Your Feelings:- हिंदी शायरी का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवपूर्ण रहा है। भारत में काव्य और शेरो-शायरी की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। संत कवियों, भक्त कवियों और बाद में आधुनिक कवियों ने अपने विचारों और भावनाओं को काव्य के माध्यम से व्यक्त किया। कबीर, रहीम, तुलसीदास और सूरदास जैसे महान कवियों ने अपने दोहों और पदों के माध्यम से समाज को ज्ञान, प्रेम और आध्यात्मिकता का संदेश दिया।
-) हम भी अपना सबकुछ वहां छोड़ आएं हैं,
जिस शहर पर कभी हम राज़ करते थें ।।
-) हमसे ख़राब हालों का ना पूछों,
मुसीबतों का दौर हमारी जान ले डूबा,
हम बचके निकल जाना चाहते थें,
वक़्त ने एक पल की मोहलत ना दी ।।
-) अपना कोई भी हमारे जैसा नहीं,
हम जिस नज़र नज़र उठा ले,
बुरा कहीं भी हो वो सब अच्छा हों जाता हैं,
बात हमारी आएं तो अच्छा भीं बुरा हो जाता हैं ।।
-) हम हर किसी को अपने जैसा समझ बैठें,
जबकि जमाना झूठ फ़रेब से चल रहा था ।।
-) हम जैसा किसी बात को ग़लत कहने लग जाएं,
हर एक़ बात को तौलने लग जाएं,
तो समझ जाइए जमाने के रंग बहुत ख़राब हो गए हैं ।।
-) बातों को तौल कर बोलियें,
बग़ैर सोचने वाली बातें दूसरों का सीना छलनी कर देती हैं,
अच्छे भले इंसानों की जान ले लेती हैं।।
-) अब वो अपने घर भीं महफूज़ नहीं,
जो बेरोजगार हैं सिर्फ पढ़ाई करतें हैं,
उन्हें हर एक बात लाख सर्प देशों सी लगती हैं,
ज्वालामुखी सी आग जलती हैं।।
-) समंदर को नादान समझ रहें हैं,
ये आजकल के नादान लोग,
वो जो हिलोरें लेने लगा ,
जाने कितने लोगों के पैरों तलें ज़मीन खिसक जाएंगी ।।
-) वो मेरे साथ महफूज़ हैं,
ये सच रहा बाक़ी ज़माने के रंग झूठ और फ़रेब के सिवा कुछ नहीं ।।
-) वो मेरी मोहब्बत का एहसास हैं,
जो स्वर्णिम पन्नों को मेरा कर रहा हैं ।।
-) वक़्त को स्थिर कर दे,
जो इशारा कर दें वो,
हम सातों आसमान को एक कर दें,
वो ज़रा सी जो हां कर दें ।।
-) वो सब तबाह कर गया हमारा,
जिसको सब बना देना चाहिएं था,
हम उसके भरोसे रह गए,
वो विश्वास को अपने कदमों तले दबा गया ।।
-) हम से ना पूछ क्या क्या हुआ,
उसके नाम दिल हुआ जिंदगी का सफ़र उस से और ज़िन्दगी उसपर ख़त्म हुआ ।।
-) भूल जाएं सब कुछ ये भीं कम नहीं,
जो भूलने लायक़ नहीं था ,
उसको भीं भूल आएं हैं हम ।।
-) किसी और का हो जाऊं,
ये ख़्याल मेरी ज़िन्दगी को तबाह कर जाता हैं,
मेरी मोहब्बत तुमसे हैं किसी और से नहीं,
किसी और का जेहन मेरी ज़िन्दगी को ख़त्म कर जाता हैं।।
-) ना पूछों अब उन हालों का,
जिन हालों मैं हमने सब कुछ खोया हैं,
उन हालों का ख़्याल भीं रह कंपा देता हैं ।।
-) उम्मीद ये ना रही कि अब सब ठीक होगा,
ठीक होने वाला समय ख़ुद को बचाने में जा गुजरा ।।
-) तेरे इश्क़ में दुनिया भुल बैठें हैं हम,
अब हमें ये ख़बर भीं नहीं की क्या थें पहले हम ।।
-) किस्सा ये था कि ना बिछड़ने वाली बातों पर,
हम अपना अंगूठा लगा कर आएं थें,
वे पढ़े लिखें थें जो कुछ हमारा था ,
शब्दों के जाल में उस सबको छीन ले गए।।
-) हमसे खेल कर रहे हैं वो,
जिन्हें खेलना हमने सिखाया ।।
~~~ आशुतोष दांगी ~~~
-) झूठों की दुनिया में सच बोलना सजा बन गया,
दिल साफ रखने वाला यहाँ मजाक बन गया।
-) जो हर बात पे झूठी कसम खाते हैं,
वही सबसे ज्यादा धोखा देते हैं।
-) चेहरे से मासूम पर दिल से चालाक,
झूठे लोग करते हैं सबसे ज्यादा नुकसान।
-) भरोसा किया और टूट गया दिल,
झूठी बातों ने कर दिया क़त्ल।
-) झूठे लोगों की भीड़ में अब सच कम पड़ गया,
हर रिश्ता दिखावे का बनकर रह गया।
-) जिनसे उम्मीदें थी वफ़ा की,
वही निकले झूठ की सजा की।
-) झूठ बोलते रहे वो हर बार,
हम समझते रहे बस एक प्यार।
-) मासूम बनकर करते हैं वार,
झूठे लोग सबसे ज्यादा ख़तरनाक यार।
-) सच सुनने का हौसला नहीं जिनमें,
वो झूठ को ही सच मानते हैं हर दिन में।
-) झूठ की इमारत जब गिरती है,
तो साथ में कई दिलों को तोड़ती है।
-) हर रिश्ते में अब शक होने लगा,
झूठे लोगों का असर बहुत गहरा लगा।
-) सच बोलने वाले अकेले रह जाते हैं,
झूठे महफिलें सजाते हैं।
-) झूठ की आदत ऐसी लगती है,
कि इंसान भी पहचान से हटती है।
-) उनकी बातों में इतना मिठास था,
कि झूठ भी शहद सा लगने लगा था।
प्रेरणा मिलती है और कई बार जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण भी मिलता है। शायर अपनी कल्पना, संवेदनशीलता और अनुभवों को सरल तथा प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक स्वयं को उससे जुड़ा हुआ महसूस करता है।
-) कभी-कभी लोग इतने झूठ बोलते हैं,
कि खुद को भी सच समझ लेते हैं।
-) हमने दिल दिया वो धोखा ले गए,
झूठी मोहब्बत में आँखें भी भीग गए।
-) झूठे लोगों का क्या गिला करें,
सच में ही अपनी गलती मान ली।
-) झूठ की परछाई हर बात में दिखी,
सच की तो जैसे मौत ही लिखी।
-) हर बात में झूठ की गहराई थी,
फिर भी उसकी सादगी पर भरम आई थी।
-) चेहरे पे मुस्कान, दिल में फरेब,
झूठे लोगों का यही है करतब अजीब।
~~~आराध्यापरी~~~
-) इश्क़ तू हमें यूं बदनाम भी ना कर ,
कि लोगों से हम नज़र चुराने लग जाएं ।।
-) किसी परदेशी को क्या ख़बर,
जो गुजरी दिल पे बेबस जानते हैं अपने लोग ।।
-) तुम किसी के यूं भी ना हो जाना ,
यादों में मैं रहूं और हक़ीक़त में उसके ना हो जाना,
आंख मूंद कर मानते हैं तुमको बस इसको भ्रम ना बना जाना ।।
-) कोई अगर खता हो तो बयां करने आ जाना तुम,
किसी और को मेरी खामी गिनवाओं मुझे गवारा नहीं ।।
-) माना हम में अदब नहीं अब ,
किसने अदब की लाज रखी ,
जो ज़रा से हम क्या झुके लोगों ने यहां गर्दनें उड़ाई ।।
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-) सुना है अब वो वफाओं के पाठ पढ़ाता हैं,
ये भी क्या ख़ूब हैं ग़ुनाह करके साधु बन जाता हैं,
हम भी सोचते हैं अब उनके बताएं हुए रस्ते पर चल दें
बेवफाओं के शहर थोड़ी सी बेवफ़ाई कर ले ,
अब दिल चाहता हैं किसी और राह पर चल ले ।।
-) ख़ुद को तबाह करने को जी चाहता हैं,
अकेले रहने के जी चाहता हैं,
-) हम हम ना रहें ये भी क्या किसी से कम हैं,
वो तेज़ आवाज वो आंखों में गुस्सा वो किसी की ना सुनना ,
ये सब सजो रखे थें हमने बेशकिमती मोती जैसे ,
अब एक भुला डरा हुआ शख़्स हैं इससे आगे इसके जैसा कुछ नहीं ।।
-) हवाओं के तेज रुख ने वो चराग़ बुझा ही दिया ,
जिसके ना बुझने कि कसम हम खाते थे
वक्त ने पहलू बदल ही दिए सारे जिन्हें हम अपना बुलाते थे ।।
-) बड़ा दूर शहर हैं तेरा मैं सफ़र में ही हताश हो जाता हूं,
ये दूरियां बड़े शहरों की मुझे अधूरे सफ़र में रुलाती हैं ।।
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-) एक वादा ये भी कर हर वादे को मुक्कमल में करूं,
तेरी कसमें झूठी खाता नहीं मैं बस यकीन कर ,
अपनी उम्र लंबी कर ख़ुद को मेरा कर बस मेरा कर।।
-) कोई परदेश में जाने कैसे दिन बिताता होगा ,
जिसका मेहबूब कई दिन तक उस से मिल नहीं पाता होगा ,
वो ख़ुद को कितना असहाय पाता होगा
वो तो इसी बात से बिखर जाता होगा ,
जीते जी बस मर जाता होगा ।।
-) हमसे पूछो कोई उसके ना बोलने का ,
वो चुप रहे तो हजारों की भीड़ भी वीराने सी लगती हैं,
सावन की झड़ी बस बंजर सी दिखती हैं,
हरियाली भी मरुस्थल सी लगती हैं।।
-) मैं कोई आवारा नहीं जो मुझे नकार देते हो तुम ,
जो मैं मिलने का कहूं तो इंकार कर देते हो तुम ,
तुम यादों में दिल के ख्यालों में इस कदर बसते हो जैसे मंदिरों में ख़ुदा,
मेरे प्रेम की कड़ी अर्चना हो तुम ।।
-) छोड़ आएं उस डग़र को भी दिल लगाने के सफ़र को भी ,
किसी की उम्मीद थे हम उसकी उम्मीद को भी ,
तेरे पहलू में आ गिरे हम अब फैसले हमारे हक़ में गिरे या विपक्ष में सबकुछ छोड़ आएं हम ।
-) कहीं तो वो दूर का मुसाफ़िर नज़र आता होगा ,
कभीं तो वो किसी डग़र पर टकराता होगा ।।
कुछ तो उसका हाल सुनाया करो ,
क्या अब भीं वो तस्वीरों को छुपाता होगा ।।
माना कि बहुत दूर निकल गया मंज़िल से वो,
मग़र रास्ते से भीं कुछ ना कुछ पाता होगा ।।
-) ज़िंदगी ने मुक्कमल कहाँ रहने दिया हमें,
हम ज़िंदगी तलाशने में मौत हासिल कर आएं ।।
एक उम्मीद की किरण थीं कि अंत भला हो होगा,
पता चला उस उम्मीद की किरण को हम शुरू में ही छोड़ आएँ ।।
-) कुछ तो उसकी बातें भीं हमारी सी नहीं थीं ,
मैं ये सोचता भीं रहता था ।।
की कभी तो बिछड़ना तय होगा हीं ,
जिससे बातों का मेल ना था,
वो दिल में कैसे रह सकता था ।।
-) कुछ आसमां को देख देखकर डर जाते होंगे ,
जिनके घर सड़क किनारे होते होंगे ।।
ये तूफ़ानी बारिश बड़ी सुहावनी लगती हैं,
घर की खिड़कियों से ,
जिनके घर नहीं होते हैं,
उनको तो ये खेल मौत का लगता हैं ।।
- ) मैं जाने क्या कर आया ,
ख़ुद की तलाश में ख़ुद को भूल आया ।।
पुराना सा बहुत उम्दा हुआ करता था मैं,
अब इस नए रंग में सब ,
अजीब सा लगता है सब ,
मैं अपनी ज़िंदगी का बहुत गलत फ़ैसला ले आया ।।
-) मिलने कि उम्मीद भीं थी ,
और डर भीं ये था कि ,
इंसानों की फितरत पर पल भर भीं भरोसा नहीं,
मैं उम्मीद में बैठा रहूं और वो कहें अब नहीं ।।
-) हमें औरों सा ना समझ ,
हम अपनी क़िस्म के भीं आख़िरी इन्सान हैं ।।
जहां लोगों ने बर्बाद होना शुरू किया,
हम उस राह से आबाद हुएं हैं।।
-) डोली सजने वाली थी उसकी,
लाल जोड़ें में हूर लगने वाली वो ।।
जाने फ़िर क्या हुआ एकाएक ,
मंज़र बदल गया मंडप का ,
पहले मुस्कुरा रहें थें सब ,
अब शिकस्त और आँखें नम थीं ।।
एक काग़ज़ के टुकड़े ने ,
ज़िंदगी ख़त्म कर दी उसकी ,
जिसपे लिखा था तुम नहीं तो मौत सही ।।
-) वो वफ़ा निभा गया जाते जाते भीं,
वरना ये आज के दौर में मुमकिन नहीं ।।
भूल जाते हैं लोग किसी बेहतर की तलाश में,
उसने ज़िंदगी ख़त्म कर दीं अपने यार की याद में ।।
-) माना की सब मुमकिन हैं प्यार में,
इंतज़ार बेबसी सुकून चैन ज़िन्दगी ।।
बस एक चीज़ ना गवारा हैं,
बिछड़ने की बातें ना हो प्यार में ।।
-) वो हद को भी लांघ आएँ,
ये मुमकिन हैं तुम अपना वादा निभाओ ।।
क्या ये मुमकिन हैं ,
वो छोड़ आएं सब एक पल में,
तुम ताउम्र साथ उसका निभाओ क्या ये मुमकिन हैं ।।
-) एक आरज़ू थीं आशुतोष,
के उसको दुल्हन बनीं देखें ।।
हमारे नाम की मेंहदी,
उसके प्यारें हाथों में देखें ।।
ख़्वाब मुकम्मल हो जाता मेरा ,
ख़ुदा को मंज़ूर ना था ऐसा ।।
वो किसी और के नाम की मेंहदी लगा बैठीं,
वो पागल सी लड़की अपनी जान गवां बैठीं ।।
-) एक कहानी के किरदार बदल गएं,
हम अड़ियल बैल से ।।
उनके एक इशारे पर बदल गएं
वो चाहता ये नहीं था कि उसके लिये सब हो,
हमनें चाहा हम उसके लिए सारे बदल गएं ।।
-) माना कहानी मेरी ,
इतनी अच्छी भीं नहीं ।।
इसमें ग़मोँ की बारिश के सिवा कुछ भीं नहीं,
लोगों को पसंद आती हैं वो ,
जिनमें ज़िंदगी खिलखिलाएं ,
हमारी कहनी में ऐसा कुछ नहीं ।।
-) माना कि तेरे काबिल नहीं हूं मैं,
मग़र तेरे हक़ का हूं मैं ।।
परिवर्तन प्रकृति का नियम हैं,
तेरे काबिल भीं बन जाऊंगा मैं ।।
-) मुझसे नज़रें ना चुरा ,
मैं इस खेल में अभी कच्चा हूं ।।
एक उम्र गुजारने दें तेरे साथ मुझे ,
इस खेल का सबसे उम्दा खिलाड़ी बन सकता हूं मैं।।
-) माना कि कुछ भीं ठीक ना होना,
बुरें वक़्त का निकल जाना सा हैं ।।
ये भीं अच्छा हैं,
कि बुरें में बुरा वक़्त निकल रहा हैं
अच्छे वक़्त में सब अच्छा सा हीं हैं ।।
-) उसे ज़रा भीं कुछ हो जाएं,
मन हमारा घबराने लगता हैं ।।
वो ज़माने की हवा से,
अभी अंजान हैं अच्छे बुरे की उसे परख नहीं हैं ।।
-) मैं ये किससे कहूं,
की मैं वक़्त के ठहराव में आ फंसा हूं ।।
जहां से निकलना इतना आसान भीं नहीं ,
कईं कंकाल हैं यहां,
यहां के निकल पाना आसान नहीं ।।
-) जमाने की हवा को पहचान अशुतोष,
जो तू समझता हैं सब आसान सा ।।
वो एक जाल हैं,
तुझे फ़साने के फ़िर कभीं ना निकल पाने के ।।
~~आशुतोष दांगी






























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