About Ishq Shayari

Ishq Shayari में आपका स्वागत है ❤️

यहाँ आपको प्यार, मोहब्बत, रोमांस, विरह, दर्द और जिंदगी से जुड़ी खूबसूरत हिंदी शायरियों का संग्रह मिलेगा। हम कोशिश करते हैं कि हर शायरी आपके दिल की उन भावनाओं को शब्द दे, जिन्हें कहना कभी-कभी आसान नहीं होता।

इस वेबसाइट पर प्रकाशित शायरियाँ हमारी मौलिक रचनाएँ हैं, जिन्हें पाठकों तक सच्ची भावनाओं और एहसासों को पहुँचाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

Beautiful Love Shayari with Images :- हिंदी शायरी की शुरुआत भारतीय साहित्य की प्राचीन काव्य परंपराओं से मानी जाती है। प्रारंभिक दौर में कवि अपने विचारों और भावनाओं को दोहों, चौपाइयों और पदों के माध्यम से व्यक्त करते थे। समय के साथ फ़ारसी और उर्दू साहित्य का प्रभाव हिंदी भाषा पर पड़ा, जिससे शायरी की शैली और अधिक समृद्ध हुई।


-) चेहरे पे हँसी, दिल में चालाकी,
बातों में मिठास, पीछे गद्दारी।
ऐसे लोग मिलते हैं हर मोड़ पर,
सच को लजाते हैं झूठी यारी।

भावार्थ
आज का दौर ऐसा दौर है लोग यहां मुंह पर कुछ पीठ पीछे कुछ ही कहते है चेहरे पर केवल दिखावे की हंसी रहती है। और मन में चालाकी ईष्या लोग आज के समय में सच के दिखावे में यारी दोस्ती करते है।

-) जो खुद को फरिश्ता कहते हैं,
अक्सर वही ज़हर से भी बदतर होते हैं।
हर बात में झूठ की परत चढ़ा कर,
सच्चाई का मज़ाक उड़ाते होते हैं।

भावार्थ
जो लोग अक्सर मीठा बोलते है असल में वही कड़वे होते है। उनकी हर बात में झूठ की परत होती है। हर बात पे झूठ बोलते है और सच का मजाक बनाते है।

-) सच कहो तो चुभता है उन्हें,
झूठ सुनकर खिलते हैं जो।
चेहरे पर मासूमियत लिए,
दिल में बसा रखते हैं धोखा।

भावार्थ
कुछ लोग मासूमियत का नकाब लगाए चालाकी करते है। यदि उन्हें कोई बात सच कह दी जाए तो उनका चेहरा बन जाता है। वही दूसरे और उनसे झूठ बोल दे तो खिलखिला उठते है। उनके रगो में धोखा बसा रहता है। वह केवल धोखा करना जानते हैं।

-) झूठ के सहारे जो रिश्ता निभाएं,
वो भरोसे को कब तक बचा पाएंगे।
एक दिन आईना खुद बताएगा,
कितने फरेब दिल में छुपाएंगे।

भावार्थ
झूठ कितनी भी बारीकी से बोला जाए वो पकड़ में आ ही जाता हैं। झूठ की नींव पर बनाए गए रिश्ते अधिक समय तक नहीं टिक पाते है।

-) कसमे खाते हैं हर रोज़ वफ़ा की,
हकीकत में मगर हैं जुदा सच्चाई से।
झूठ की चादर ओढ़े हुए लोग,
सच का नाम भी नहीं लेते डराई से।

भावार्थ
लोग वफ़ा के नाम पर अक्सर कसमें खाते है। झूठी कसमों में लोग इतने मदमस्त है कि उन्हें सच्चाई की ख़बर ही नहीं हमेशा खुद को श्रेष्ठ साबित करने को झूठ की चादरें ओढ़े रहते है और सच बोलने से भी डरते है।

-) झूठ बोल कर रिश्ते बनते नहीं,
सच को छुपा कर प्यार मिलते नहीं।
एक न एक दिन परतें उतरती हैं,
फिर नकाबदार चेहरे भी चलते नहीं।

भावार्थ
झूठ से बुने रिश्ते जब टूटते है उनकी परतें उतरती तो प्यार भी खत्म हो जाता है। झूठे रिश्तों में प्यार नहीं चलता। एक न एक दिन सच सामने आता है और सब खत्म हो जाता है।

-) शब्दों में मिठास, नज़रों में धोखा,
ऐसे लोगों से ही सीखा सबक गहरा।
हर मुस्कान नहीं होती दिल की आवाज़,
कई नकाब पहनते हैं आजकल चेहरा।

भावार्थ
आज कल के लोगों के चेहरे पर नकाब लगे रहते है लोग मन में द्वेष की भावनाएं लिए हमारे आगे मुस्कुराते है। और यही लोग हमारे जीवन का सबसे बड़ा सबक होते है जो हमारे लिए चाल चलते है।

-) बड़ा आसान है झूठ बोल देना,
मगर मुश्किल है उसमें टिके रहना।
हर झूठ एक नया झूठ माँगता है,
और फिर सच्चाई से डर लगता है।

भावार्थ
झूठ पर झूठ बोलने पर इंसान डरने लगता है। सच्चाई से बात झूठ बोलने की नहीं उस झूठ पर आड़े रहना या स्थिर रहना है। ताकि वह झूठ आजीवन अदृश्य ही रहे।

-) झूठों का कारवां बड़ा हो गया है,
हर तरफ फरेब का सिला हो गया है।
सच्चे दिल की कद्र कौन करे अब,
झूठ ही अब लोगों का खुदा हो गया है।

भावार्थ
समाज में झूठ बोलने वालो को जड़ तवज्जो दी जाने लगी है। जो लोग सच बोलते है उनकी कोई कद्र नहीं होती उनकी भावनाओं के साथ खेला जाता है। आजकल लोगो के लिए झूठ ही सब कुछ हो गया है। झूठ को ही लोग अपना सब कुछ मानने लगे है।

-) जो पीठ पीछे करते हैं बातों की बौछार,
सामने आते ही कर लेते हैं प्यार।
ऐसे दोगले चेहरे बहुत मिलेंगे,
पर पहचान लो अब, हो जाओ होशियार।

भावार्थ
आजकल हमें हर मोड़ पर दोमुए लोग मिलते है। जो सामने कुछ और कहते है, पीठ पीछे कुछ और। हमें ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत होती है क्योंकि ये लोग कभी हमारे अपने नहीं होते, बस अपने होने का दिखावा करते हैं।

हिंदी बेहतरीन शायरी वह कला है, जो शब्दों के जरिए दिल की गहरी भावनाओं को उजागर करती है। हर शेर और हर मिसरा किसी खास अनुभव, याद, या संवेदना को दर्शाता है, जो सीधे दिल से निकलकर दूसरे दिलों तक पहुँचता है। जब हम हिंदी बेहतरीन शायरी पढ़ते हैं, तो हमें लगता है जैसे किसी ने हमारी अनकही भावनाओं को शब्दों में ढाल दिया हो। यह शायरी सिर्फ एक साहित्यिक विधा नहीं है, बल्कि एक ऐसा माध्यम है जो हमें अपने अंदर की भावनाओं को समझने और दूसरों के साथ साझा करने का अवसर देती है।

-) गोकुल के मनमोहन जाने कौनसी गलियों में रहने लगें हो
पहले प्रेम गीतों में थे राधा रानी के,
अब जाने कौनसे गीतों में रहने लगें हो।।

भावार्थ
अब तो प्रेम भी खोने लगा है ईश्वर भी कहा हैं किस स्थान पर है। कोई जानकारी नहीं है। जो कभी प्रेम गीतों में बसा करते है आज कल वो विरह मोह दर्द में खो गए है।

-) कभी यमुना के किनारे अठखेलियां करते थें,
अब जाने कहां चुपचाप रहने लगे हो।

भावार्थ
जो कभी यमुना नदी के किनारे झूमते थे खेलते थे। मदमस्त रहते थे वो आज का समय आज का दौर देख कर खामोश हो गए हैं। अब वो अठखेलिया देखना मुश्किल हो गया है। आज का दौर ऐसा आ गया जहां ईश्वर प्रेम भक्ति अब खत्म हो गया है।

-) कदम की डाली ने भी पूछ लिया हमसे,
अब किस ओर डाली कूदने लगें हो।।

भावार्थ
कभी-कभी हमारे स्वयं के भाव हमसे पूछने लगते है कि आगे की क्या राय है।

-) मधुर बंसी के सुर में क्या-क्या गातें थें,
अब शायद कोई और सुर छेड़ने लगें हो।।

भावार्थ
एक समय ऐसा था जब चारों ओर बंशी के मधुर स्वर से प्रेम ही प्रेम हुआ करता था और एक दौर ऐसा आ गया है। प्रेम और प्रेम भरी वह धुन विलुप्त हो गई है।

-) गोपियां ये जो बस कान्हा कान्हा करती थीं,
उनके हृदय से क्यों तुम यादों को विश्राने लगें हो।।

भावार्थ
किसी के प्रति अथक प्रेम सदैव दुख का कारण होता है। विरह सदैव हमें तोड़ देता है और भुलाने की कोशिशों के बाद भी यादें हृदय से नहीं जा पातीं।

-) मावा मिश्री माखन के लालच में गैया चराते थें तुम,
अब बिन मांगे क्या सब खाने लगे हो।।

भावार्थ
जो कभी अपनी लीलाओं से अपनी हरकतों से सबको मोह लेते है। एक दौर ऐसा भी आता है कि वह खामोश हो जाते है।

-) पहले प्रेम की भाषा बोलते थें तुम,
अब क्या सिर्फ सुदर्शन चलाने लगें हो।।

भावार्थ
प्रेम के बोल बोलने वाले भी एक दौर आने पर युद्ध पर उतर आते है।

-) लाडली जू जो कहती थीं,
तो चले दौड़े आते थे तुम,
अब बार बार बुलाने पर भीं क्यों नहीं आतें हो।

भावार्थ
जो हमारे लिए सदैव उपस्थित रहते हैं। यदि उनकी भावनाओं की कद्र न की जाए तो वह लाख बुलाने पर भी हमारे जीवन में फिर नहीं आते।

-) वृंदावन बारी की नजरों में रहते थें,
अब जाने कौनसी पटरानी की आंखों में रहने लगे हो।।

भावार्थ
हर एक किन नजरों में भाने वाला शख्स एक समय आने पर सबकी आंखों से ओझल हो जाता है।

-) प्रेम वाली भूमि गोकुल में रहते थे,
अब जाने द्वारका में क्या-क्या करने लगे हो।।

भावार्थ
स्वयं प्रभु ही प्रेम का त्याग कर देते है। सब कुछ त्याग कर साधारण जीवन यापन करते है।

-) ये भी कहते है लोग पहले रास रचाता था,
अब महाभारत जैसे युद्ध को रचने लगे हो।।

भावार्थ
प्रेम को ही सबकुछ समझने वाले जब युद्ध रचने पर आए तो युद्ध बहुत गंभीर होता है। जो लोग साधारण दिखते है असल में वह साधारण नहीं होते।

-) पहले ग्वालिनों को रिझाकर माखन खाते थे,
अब बड़े-बड़े शूरवीरों को अपने वश में करने लगे हो।।

भावार्थ
जो लोग प्रेम की भाषा को ही सब कुछ समझते है। यदि उन्हें प्रेम न मिले तो वह प्रेम के एकदम विपरीत हो जाते हैं। प्रेम से परे उनका एक अलग संसार होता है जिसमें द्वेष और युद्ध यही सब समाहित होता है।

-) गोवर्धन उठाने वाला इंद्र के कोप से बचाने वाला,
अब सुना हैं इंद्र के पुत्र की बागडोर चलाने लगें हो।।

भावार्थ
यदि कोई हमारी विपदा में हमारी सहायता करता है, तो हमारा भी फर्ज बनता है कि हम समय आने पर उनके लिए कुछ कर पाए।

-) पहले गोपियों के चीर चुराते थें,
अब सुना है हमनें द्रौपदी की लाज बचाने लगे हो।।

भावार्थ
जब इंसान समझदार हो जाए तो वह काम करने लगता है जिसकी उससे उम्मीद नहीं की होती। समझ का होना अति आवश्यक होता है।

-) पहले नंद के आनंद यशोदा के लाल थें,
अब सुना हैं ख़ुद को द्वारकाधीश बुलवाने लगें हो।।

भावार्थ
माता-पिता के नाम से जाने जाने वाले शिशु को अपने नाम की पहचान बनाने के लिए सुख-चैन, मोह-माया का त्याग कर परिश्रम करना होता है।

-) तुम तो आतें नहीं अब वृंदावन में,
ज्ञानी उद्धव के हाथों अपना पत्र भिजवाने लगें हो।।

भावार्थ
जीवन में कुछ मोड़ ऐसे आते हैं। परिस्थितियों के चलते हमें अपनी प्रिय वस्तुओं का त्याग करना पड़ता है।

-) ज्ञानियों के ज्ञान को वृंदावन की भूमि पर,
प्रेम ज्ञान से तुम ब्रह्म ज्ञान समाप्त करवाने लगें हो।।

भावार्थ
प्रेम ऐसा शस्त्र है जिससे हम हर परिस्थिति में जीत हासिल कर सकते हैं।

आशुतोष दांगी

-) बड़ा गुरूर था हमको अपने आप पर,
वक्त ने तमाचा जब जड़ा तो समझ आ ही गया
साख से बिछड़े पत्तों का कोई मोल नहीं।।

भावार्थ
स्वयं पर आत्मविश्वास होना अच्छा है। पर अधिक विश्वास होना कभी-कभी हानिकारक भी होता है। क्योंकि जब वक्त तमाचा मारता है तो पता लगता है। मोल पेड़ का होता है, गिरे हुए पत्तियों का नहीं। अर्थात अहमियत आत्मविश्वास की होती है, घमंड की नहीं।

-) आंख मूँझ इस क़दर यकीन था हमें जिसपे,
एक पल ना लगा उसे मेरा यकीन तोड़ने में,
मुझे अकेला छोड़ने में,
मुंह मोड़ने में, साथ छोड़ने में।।

भावार्थ
जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें देखकर लगता है हमारा सब कुछ यही है। किंतु समय आने पर पता लगता है कि लोग सुख तक साथ होते हैं। जिन पर हमें भरोसा होता है कि यह हमारा साथ कभी नहीं छोड़ेंगे, वही लोग हमारा साथ छोड़ते हैं।

-) उम्मीदें ए वफ़ा सौदा सस्ता नहीं बंदे,
कुछ की अमानत है ये बेशक़ीमती,
जिसके सिवा उनका अहम कुछ नहीं।।

भावार्थ
कुछ लोगों के लिए उनका अहम ही सब कुछ होता है। अपने अहम के खातिर कुछ लोग सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं।

-) बड़ा बुरा हूं मैं, ये कहता फिरता है अब वो,
जिसके आंखों से तस्वीर मेरी नहीं उतरती थी
जो कोई तू भी कहता था मुझे ज्वालामुखी उसके अंदर सुलगने लगती थी,
क्या हुआ कुछ तो पता दे इस बात का,
मसले किसके साथ नहीं मगर तू अब भी साथ दे तेरे यार का।।

भावार्थ
जिन लोगों के लिए हमारी अहमियत सबसे अधिक होती थी, एक दौर आने पर उनके लिए हमारा होना न होना समान हो जाता है। जो कभी लड़ जाते थे महफिल में हमारे लिए, वो अब हमारा नाम ही नहीं लेते हैं। कुछ लोग बिन बोले, बिन बताए हमारी जिंदगी से चले जाते हैं।

-) कोई पूछें कि कौन है हम तुमसे तो,
बस इतना कह देना, इसकी अमानत हूं मैं,
हर घड़ी जो रटता रहता हैं वो शिकायत हूं मैं।।

भावार्थ
जब कोई तुमसे पूछे वजूद मेरा तो तुम मुझे अपना सब कुछ कह देना। ठीक उसी तरह जैसे एक बिन एक अधूरा हो। मैं हर पल तुम्हारे आगे शिकायतें करता हूं, पर सच में तुम्हें ही अपना समझता हूं।

-) ख़ैर किसी से क्या कहें, जब हमने अपने आप को ही नकार दिया,
उसकी यादों में हर दफा थे हम अब उनको ही ज़हन से निकाल दिया।।

भावार्थ
जिनको हम सब कुछ मानते हैं, जिनके लिए हम सब कुछ करने को तैयार रहते हैं। पर एक दौर ऐसा आता है कि हम उन्हीं लोगों को त्याग देते हैं। संसार में सब प्रभु के अनुरूप ही होता है।

-) लौट आए जो अपने पुराने अंदाज में हम,
ये नए दौर के लोग अपना रास्ता नापते फिरेंगे।।

भावार्थ
जो लोग साधारण और शांत रहते हैं, यदि वो खुद पर आ जाएं तो सब लोग खामोश हो जाते हैं।

-) कुछ तो खबर ये भी ना थी प्यार में,
कोई कितना भी प्यारा क्यों ना हो,
सड़न लगती है हमेशा मिठास में।।

भावार्थ
प्रेम कितना भी गहरा क्यों न हो, एक समय के बाद उससे मन भर जाता है और प्यार की जो मिठास होती है वो सड़न सी लगने लगती है।

-) इतना अच्छा भी ना बन आशुतोष,
कि सब तुझसे ही मिलने लग जाएं,
मिलने के बाद तेरा इस्तेमाल करने लग जाएं,
छोड़ उनके अफसाने ये लोग हैं पता नहीं कब अपना हक़ जताने लग जाएं,
तुझे तबाह करने लग जाएं।।

भावार्थ
आज के समय में लोग अपने होने का दिखावा करते हैं, पर अपने नहीं होते। आज के लोग अपने मतलब के लिए साथ रहते हैं और अपना काम होने पर छोड़ देते हैं। इस्तेमाल करने पर वह बस अपने होने का दिखावा करते हैं। असल में वह हमारे अपने नहीं होते।

-) कोई जो गुजरें उनकी गली से तो पूछना उनसे,
कैसे क़ातिल हो तुम जान से मारने गएं थे मेरे यार को,
सबूतों की पोटली रख आएं अपनी तस्वीर उन आंखों में क़ैद कर आएं।।

भावार्थ
लोग इश्क़ का दावा कर हमें जीत लेते हैं, पर हमारे नहीं हो पाते। वो जब हमारी जिंदगी से जाते हैं तो हमारे जीवन को मृत बना देते हैं। वह हमारा क़त्ल कर देते हैं इश्क़ के इस झूठे दावे पर।

-) बेवफ़ा वो नहीं जानता उसे में उस से ज्यादा ही हूं,
कुछ तो खेल वक्त का भी होगा, यूं रुसवा वो मुझसे नहीं।।

भावार्थ
चालाकी करने वाले को ये खबर कभी नहीं होती कि सामने वाला उससे अधिक चतुर है। बस वह अपने समय की तलाश में होता है और समय आने पर जवाब देता है।

-) वो मानता ही नहीं कि उसके सिवा कोई नहीं,
जिसके सिवा मेरा कोई भी नहीं,
तू ख़्वाबों में ही नहीं हक़ीकत की भी मल्लिका है।।

भावार्थ
कुछ लोग हमारे जीवन में इतने खास होते हैं कि उनके सिवा हमारा कोई और नहीं होता। वह हमारे सपनों में ही नहीं, हमारी असल जिंदगी में भी महत्वपूर्ण होते हैं। उनका हमारे जीवन में विशेष महत्व होता है।

-) तुम यादों का साहिल बन गए हो,
कभी ना पा सकने वाली मंज़िल बन गए हो,
दूर बहारों की सौगात लगने लगे हो,
तुम सच में बहुत दूर जाने लगे हो,
हमारे हक़ से अब पराए लगने लगे हो।।

भावार्थ
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो केवल यादों में रह जाते हैं। वह केवल यादों में हमारे साथ रहते हैं और जब हकीकत से सामना होता है तो वह लोग असल में हमसे बहुत दूर होते हैं।

-) कोई मिल जाता तुम जैसा बदहाल हो जाता मेरे जैसा,
आबाद रहना पसंद हैं तुम्हें, बर्बाद ही हैं कोई मेरे जैसा।।

भावार्थ
किसी का पूरे तरीके से न मिल पाना हमें बर्बाद कर देता है। किसी को पाने की तमन्ना में अंत में हम स्वयं को बर्बाद कर बैठते हैं।

-) कभी किसी रोज़ फ़ुर्सत में बैठों तुम तो जान जाओगें,
कि हमपे क्या गुज़री, कैसे गुज़री,
कैसे हालात में ख़ुदको सम्भाल रखा हैं,
जिंदा मान रखा हैं तबाही के आलम तबाह होकर भी आबाद कर रखा हैं।।

भावार्थ
किसी को छोड़ने के बाद उसके बारे में एक बार सोचना जरूर चाहिए। अगर वो खुश है तो क्या वह खुशी वास्तविक है? क्योंकि अपनी प्रिय वस्तु को खोने के बाद इंसान खुशी का मोह भी त्याग देता है।

-) वो राह ताकता हैं,
एक ज़माने से हमारी।।
कभी ऐसा ना हो जाएं,
वो रास्तें को ताकता रह जाएं,
और हम उस रास्ते पर नज़र ना आएं।।

भावार्थ
यदि कोई हमारी प्रतीक्षा में है तो हमें उसकी प्रतीक्षा का परिणाम सफल करनी चाहिए, पर कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी हो जाती हैं कि हमें एकदम विपरीत चलना होता है।

-) वक़्त ने बेवक़्त सब छीनने की कोशिश की,
वरना बहुत सारी चीज़ों के हक़दार थे हम भी।।
कुछ ही चीज़ों को पा सके,
बाक़ी सब से दूर रहे।।

भावार्थ
वक्त का बहुत बड़ा महत्व हमारे जीवन में रहता है। और वक्त हमेशा हमसे हमारी सबसे कीमती चीजों को छीन लेता है। वक्त हमेशा हमारे लिए एक अफसोस छोड़ कर जाता है।

-) मौत दस्तक देगी किसी रोज़,
हम भी उससे मुस्कुरा कर पूछ लेंगे।।
कब से इंतज़ार था तेरा,
और तू अब जाकर आई है।।

भावार्थ
मौत हमारे जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। इंसान सब चीज़ों से हार कर अंत में मौत का इंतज़ार करता है। और जब उसकी मौत समीप होती है तो वो एक पल के लिए खुश होता है।

-) उसने बेवफ़ाई ना की,
रास्ते भी बस दो ही थे उनके पास।।
एक बेवफ़ा हो जाना,
दूसरा मौत को गले लगा लेना।
वो मौत को गले लगा आया।।

भावार्थ
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें छोड़ना हमारे बस में नहीं होता। उन रिश्तों को छोड़ने से बेहतर हम मरना मानते हैं।

-) कभी ये फ़ैसला लेना पड़ जाए,
हम दोनों में किसी एक को चुनना पड़ जाए।।
तो तुम ख़ुद को चुन लेना,
क्योंकि हमने तुमको चुना है,
और तुमने हमको।।

भावार्थ
विषम परिस्थितियों में भी रिश्तों में विश्वास, स्नेह और प्रेम बनाए रखना ही एक अच्छे रिश्ते की पहचान है।

-) वो इस बात में भी मुझसे अक्लमंद हैं,
मैं ज़माने को अपनी नज़र से देखता हूं।।
वो ज़माने भर को,
ज़माने की नज़र से देखता है।।

भावार्थ
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जमाने या लोगों की बातों में जल्दी आ जाते हैं। पर आज के समय में चालाकी और समय के अनुसार चलना बहुत जरूरी है। जमाने को जमाने की नजर से देखना बहुत जरूरी है।

-) कोई महबूब का ना मेरे पूछ,
हर कहानी का अंज़ाम अच्छा नहीं होता।।
हमने सपने कम ना देखें थे साथ रहने के,
बिछड़ना नसीब में लिख दिया था ख़ुदा ने।।

भावार्थ
कुछ रिश्तों का मिलना भगवान भी नहीं चाहता और आसान नहीं होता। इन परिस्थितियों से उभर कर आना अपने प्रेमी/प्रेमिका को खोना जीवन खो देने के समान होता है। प्रेम का टूट जाना इंसान को मृत कर देने के ही समान है।

-) ख़ुदा को याद भी,
दिन रात ना कीजिए।।
आपकी बेकाम सी बातों के अलावा भी,
उसे ज़माने भर की ख़ैर रखनी होती है।।

भावार्थ
ईश्वर को केवल हमारी बातों की अहमियत नहीं रखनी होती। ईश्वर के प्रति श्रद्धा, भक्ति और विश्वास जीवित रखना होता है। जिसके लिए वो केवल हमारी नहीं, संपूर्ण जगत की सुनते हैं।

-) फ़ूल बन जायेंगे हम भी एक दिन,
जबसे पता चला वो फूलों को छूती बहुत हैं।।
भंवरों से बच निकलना है बस,
बाकी तो वो आ ही जाएंगे चूमने हमें।।

भावार्थ
प्रेम एक ऐसा भाव है जिसमें हम प्रेमी को प्रसन्न करने के लिए कुछ भी करने में संकोच नहीं करते। प्रेमी के लिए हम हर सम्भव प्रयास करना चाहते हैं।

-) मेरे जैसा बन जाने में हर्ज क्या है,
मैंने भी ज़माने के रंग देख रखे हैं।।
तभी अपने अंदाज़ को,
सख़्त कर लिया है।।

भावार्थ
जमाने के बर्ताव को देख कर मन खामोश होने लगता है और अंत में इंसान मजबूत और कठोर बन जाता है। जमाने के रंग देख-देख कर एक दिन इंसान को ही अपना रंग बदलना पड़ता है।

-) मोहब्बत भी नसीब वालों को नसीब होती है,
हम जैसों को कहां ये नसीब होती है।।
हमको हमारे हक़ की चीज़ें भी ना मिली,
फिर ये तो ख़ुदा का सबसे हसीन तोहफ़ा है।।

भावार्थ
मोहब्बत खुदा का सबसे बड़ा तोहफा होता है और यह तोहफा हर किसी को मिल पाए, ये सम्भव नहीं होता। मोहब्बत पाने के लिए किस्मत का बहुत बड़ा महत्व है। जिसकी किस्मत में यह तोहफा है वह इस संसार का सबसे धनी और किस्मत वाला इंसान है।

-) बातों को यहां तक ना लाइए,
अपने जैसे किसी पर ये आजमाइए।।
हम औरों से अलग यूं भी हैं,
ज़रा सा हमें किसी ने कम आंकना चाहा,
हमने उसे आंकने लायक नहीं छोड़ा।।

भावार्थ
सदैव स्वयं को सर्वोपरि रखिए। कोई आपको लोगों से न तोले, खुद का किरदार ऐसा बना लीजिए। लोगों की तुलना आपसे की जाए। खुद पर इतना काम कीजिए।

-) फिज़ा कितनी खूब है,
ये मौसम बहुत मक़बूल है।।
सभी अपने आप में मस्त हैं,
प्यार करने की यहीं सही रुत है।।

भावार्थ
मौसम के अनुरूप महबूब को भी प्रेम देना चाहिए क्योंकि प्रेम और महबूब दोनों ही इस संसार के सबसे नायाब उपहार हैं।

-) समंदर से खौफ खाया करो,
इसकी शालीनता पर मत जाया करो।।
माना कि बुरा वक़्त चल रहा है इसका,
वरना इसके दौर में इसने भी जाने कितनों को ख़ुद में समाहित किया है।।

भावार्थ
कभी किसी की सरलता पर नहीं जाना चाहिए। यदि बात उसके गुरूर पर चली जाए तो वह एक पल में सब समाप्त करने का हुनर रखता है। पर वह अपने वक़्त का इंतज़ार करता है क्योंकि वक्त के अनुसार दिया गया जवाब बहुत प्रभावशाली होता है।

-) एक दुनिया से अलग हो आया हूं,
मैं अपने घर का रास्ता भटक आया हूं।।
मुमकिन तो कुछ भी नहीं जाने आने को,
बस मैं खालीपन से ऊब आया हूं।।

भावार्थ
इंसान के जीवन में मुमकिन कुछ नहीं होता। हमें खुद सारी चीजों को मुमकिन बनाना होता है और इसके लिए हमें घर-परिवार तक का त्याग करना पड़ता है।

-) ज़िंदगी को ना जीना भी एक भूल थी,
अंत समय में जाना कि कुछ भी हासिल नहीं हुआ हमें।।
हमने ख़ुद को गुमनाम सफ़र में झोंक दिया,
अब उस सफ़र का कहीं आता-पता भी नहीं।।

भावार्थ
हम जो कभी जीवन के पल भर के दुख को पूरा जीवन मान बैठते हैं और उन दुखों को याद करके अपना जीवन यापन करना छोड़ देते हैं। हमें बाद में अंतिम समय पर एहसास होता है कि दुख तो पल भर का था और जिंदगी इतनी लंबी थी। पल भर के दुख के चलते हमने अपना सब छोड़ दिया।

-) माना कि सब लौट आता है एक दिन,
उस दिन के लौट आने का इंतज़ार करते-करते,
हमने इंतज़ार करते-करते,
सबकुछ ही ख़त्म कर लिया।।

भावार्थ
उम्मीदों में जीवन जीते-जीते एक दिन ऐसा भी आता है कि उम्मीद ही मर जाती है और सारे सपने, सुख-दुख खत्म से हो जाते हैं।

-) औरों के बारे में सोचना,
ख़ुद को मुसीबतों में ढकेल लाता है।।
ख़ुद बच निकल भी जाओ उन रास्तों से अकेले ही,
किसी और को निकालना मतलब ख़ुद फंस जाना।।

भावार्थ
कभी-कभी लोगों के बारे में सोचना मतलब खुद को तकलीफें देना होता है। आजकल कोई किसी का नहीं होता। यदि हम किसी का अच्छा सोचते हैं तो हम खुद बुरे बन जाते हैं। लोगों को अच्छी चीजें नहीं, बुरी चीजें जल्दी नजर आती हैं।

-) हमने देखा है बदलते मौसम का ढंग,
पहले ये ख़ूबसूरत लगता है,
फिर तबाही का मंज़र फैला देता है।।

भावार्थ
शुरू में बहुत अधिक भाने वाली चीजें अंत में दुख का कारण बन जाती हैं। जैसे प्रेम जब तक प्रेम हो तब बहुत सुंदर होता है। जैसे ही विरह होने लगे तो तन्हाई और तबाही ही नजर आती है।

-) तुझे ना जानने से पहले कुछ और भी नहीं जानते थे हम,
प्यार की बातें ख़ूबसूरत एहसास,
ख़ुद का नर्म दिमाग़ अब सब जान गए हम।।

भावार्थ
कुछ रिश्ते इतने ख़ास होते हैं कि हमें उनके अलावा किसी और रिश्ते या फिर किसी और चीज की खबर नहीं रहती। पर उन रिश्तों के बिछड़ जाने के बाद सब कुछ समझ आने लगता है। मोह, माया, दर्द, काया सब कुछ।

आशुतोष दांगी

इन शायरियों का उद्देश्य भावनाओं और जीवन के अनुभवों को रचनात्मक शब्दों में प्रस्तुत करना है। पाठक अपनी पसंद की पंक्तियों को पढ़कर उनके भाव को अपने अनुभवों से जोड़ सकते हैं।

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