Beautiful Love Shayari with Images :- हिंदी शायरी की शुरुआत भारतीय साहित्य की प्राचीन काव्य परंपराओं से मानी जाती है। प्रारंभिक दौर में कवि अपने विचारों और भावनाओं को दोहों, चौपाइयों और पदों के माध्यम से व्यक्त करते थे। समय के साथ फ़ारसी और उर्दू साहित्य का प्रभाव हिंदी भाषा पर पड़ा, जिससे शायरी की शैली और अधिक समृद्ध हुई।
-) चेहरे पे हँसी, दिल में चालाकी,
बातों में मिठास, पीछे गद्दारी।
ऐसे लोग मिलते हैं हर मोड़ पर,
सच को लजाते हैं झूठी यारी।
-) जो खुद को फरिश्ता कहते हैं,
अक्सर वही ज़हर से भी बदतर होते हैं।
हर बात में झूठ की परत चढ़ा कर,
सच्चाई का मज़ाक उड़ाते होते हैं।
-) सच कहो तो चुभता है उन्हें,
झूठ सुनकर खिलते हैं जो।
चेहरे पर मासूमियत लिए,
दिल में बसा रखते हैं धोखा।
-) झूठ के सहारे जो रिश्ता निभाएं,
वो भरोसे को कब तक बचा पाएंगे।
एक दिन आईना खुद बताएगा,
कितने फरेब दिल में छुपाएंगे।
-) कसमे खाते हैं हर रोज़ वफ़ा की,
हकीकत में मगर हैं जुदा सच्चाई से।
झूठ की चादर ओढ़े हुए लोग,
सच का नाम भी नहीं लेते डराई से।
-) झूठ बोल कर रिश्ते बनते नहीं,
सच को छुपा कर प्यार मिलते नहीं।
एक न एक दिन परतें उतरती हैं,
फिर नकाबदार चेहरे भी चलते नहीं।
-) शब्दों में मिठास, नज़रों में धोखा,
ऐसे लोगों से ही सीखा सबक गहरा।
हर मुस्कान नहीं होती दिल की आवाज़,
कई नकाब पहनते हैं आजकल चेहरा।
-) बड़ा आसान है झूठ बोल देना,
मगर मुश्किल है उसमें टिके रहना।
हर झूठ एक नया झूठ माँगता है,
और फिर सच्चाई से डर लगता है।
-) झूठों का कारवां बड़ा हो गया है,
हर तरफ फरेब का सिला हो गया है।
सच्चे दिल की कद्र कौन करे अब,
झूठ ही अब लोगों का खुदा हो गया है।
-) जो पीठ पीछे करते हैं बातों की बौछार,
सामने आते ही कर लेते हैं प्यार।
ऐसे दोगले चेहरे बहुत मिलेंगे,
पर पहचान लो अब, हो जाओ होशियार।
हिंदी बेहतरीन शायरी वह कला है, जो शब्दों के जरिए दिल की गहरी भावनाओं को उजागर करती है। हर शेर और हर मिसरा किसी खास अनुभव, याद, या संवेदना को दर्शाता है, जो सीधे दिल से निकलकर दूसरे दिलों तक पहुँचता है। जब हम हिंदी बेहतरीन शायरी पढ़ते हैं, तो हमें लगता है जैसे किसी ने हमारी अनकही भावनाओं को शब्दों में ढाल दिया हो। यह शायरी सिर्फ एक साहित्यिक विधा नहीं है, बल्कि एक ऐसा माध्यम है जो हमें अपने अंदर की भावनाओं को समझने और दूसरों के साथ साझा करने का अवसर देती है।
-) गोकुल के मनमोहन जाने कौनसी गलियों में रहने लगें हो
पहले प्रेम गीतों में थे राधा रानी के,
अब जाने कौनसे गीतों में रहने लगें हो।।
-) कभी यमुना के किनारे अठखेलियां करते थें,
अब जाने कहां चुपचाप रहने लगे हो।
-) कदम की डाली ने भी पूछ लिया हमसे,
अब किस ओर डाली कूदने लगें हो।।
-) मधुर बंसी के सुर में क्या-क्या गातें थें,
अब शायद कोई और सुर छेड़ने लगें हो।।
-) गोपियां ये जो बस कान्हा कान्हा करती थीं,
उनके हृदय से क्यों तुम यादों को विश्राने लगें हो।।
-) मावा मिश्री माखन के लालच में गैया चराते थें तुम,
अब बिन मांगे क्या सब खाने लगे हो।।
-) पहले प्रेम की भाषा बोलते थें तुम,
अब क्या सिर्फ सुदर्शन चलाने लगें हो।।
-) लाडली जू जो कहती थीं,
तो चले दौड़े आते थे तुम,
अब बार बार बुलाने पर भीं क्यों नहीं आतें हो।
-) वृंदावन बारी की नजरों में रहते थें,
अब जाने कौनसी पटरानी की आंखों में रहने लगे हो।।
-) प्रेम वाली भूमि गोकुल में रहते थे,
अब जाने द्वारका में क्या-क्या करने लगे हो।।
-) ये भी कहते है लोग पहले रास रचाता था,
अब महाभारत जैसे युद्ध को रचने लगे हो।।
-) पहले ग्वालिनों को रिझाकर माखन खाते थे,
अब बड़े-बड़े शूरवीरों को अपने वश में करने लगे हो।।
-) गोवर्धन उठाने वाला इंद्र के कोप से बचाने वाला,
अब सुना हैं इंद्र के पुत्र की बागडोर चलाने लगें हो।।
-) पहले गोपियों के चीर चुराते थें,
अब सुना है हमनें द्रौपदी की लाज बचाने लगे हो।।
-) पहले नंद के आनंद यशोदा के लाल थें,
अब सुना हैं ख़ुद को द्वारकाधीश बुलवाने लगें हो।।
-) तुम तो आतें नहीं अब वृंदावन में,
ज्ञानी उद्धव के हाथों अपना पत्र भिजवाने लगें हो।।
-) ज्ञानियों के ज्ञान को वृंदावन की भूमि पर,
प्रेम ज्ञान से तुम ब्रह्म ज्ञान समाप्त करवाने लगें हो।।
-) बड़ा गुरूर था हमको अपने आप पर,
वक्त ने तमाचा जब जड़ा तो समझ आ ही गया
साख से बिछड़े पत्तों का कोई मोल नहीं।।
-) आंख मूँझ इस क़दर यकीन था हमें जिसपे,
एक पल ना लगा उसे मेरा यकीन तोड़ने में,
मुझे अकेला छोड़ने में,
मुंह मोड़ने में, साथ छोड़ने में।।
-) उम्मीदें ए वफ़ा सौदा सस्ता नहीं बंदे,
कुछ की अमानत है ये बेशक़ीमती,
जिसके सिवा उनका अहम कुछ नहीं।।
-) बड़ा बुरा हूं मैं, ये कहता फिरता है अब वो,
जिसके आंखों से तस्वीर मेरी नहीं उतरती थी
जो कोई तू भी कहता था मुझे ज्वालामुखी उसके अंदर सुलगने लगती थी,
क्या हुआ कुछ तो पता दे इस बात का,
मसले किसके साथ नहीं मगर तू अब भी साथ दे तेरे यार का।।
-) कोई पूछें कि कौन है हम तुमसे तो,
बस इतना कह देना, इसकी अमानत हूं मैं,
हर घड़ी जो रटता रहता हैं वो शिकायत हूं मैं।।
-) ख़ैर किसी से क्या कहें, जब हमने अपने आप को ही नकार दिया,
उसकी यादों में हर दफा थे हम अब उनको ही ज़हन से निकाल दिया।।
-) लौट आए जो अपने पुराने अंदाज में हम,
ये नए दौर के लोग अपना रास्ता नापते फिरेंगे।।
-) कुछ तो खबर ये भी ना थी प्यार में,
कोई कितना भी प्यारा क्यों ना हो,
सड़न लगती है हमेशा मिठास में।।
-) इतना अच्छा भी ना बन आशुतोष,
कि सब तुझसे ही मिलने लग जाएं,
मिलने के बाद तेरा इस्तेमाल करने लग जाएं,
छोड़ उनके अफसाने ये लोग हैं पता नहीं कब अपना हक़ जताने लग जाएं,
तुझे तबाह करने लग जाएं।।
-) कोई जो गुजरें उनकी गली से तो पूछना उनसे,
कैसे क़ातिल हो तुम जान से मारने गएं थे मेरे यार को,
सबूतों की पोटली रख आएं अपनी तस्वीर उन आंखों में क़ैद कर आएं।।
-) बेवफ़ा वो नहीं जानता उसे में उस से ज्यादा ही हूं,
कुछ तो खेल वक्त का भी होगा, यूं रुसवा वो मुझसे नहीं।।
-) वो मानता ही नहीं कि उसके सिवा कोई नहीं,
जिसके सिवा मेरा कोई भी नहीं,
तू ख़्वाबों में ही नहीं हक़ीकत की भी मल्लिका है।।
-) तुम यादों का साहिल बन गए हो,
कभी ना पा सकने वाली मंज़िल बन गए हो,
दूर बहारों की सौगात लगने लगे हो,
तुम सच में बहुत दूर जाने लगे हो,
हमारे हक़ से अब पराए लगने लगे हो।।
-) कोई मिल जाता तुम जैसा बदहाल हो जाता मेरे जैसा,
आबाद रहना पसंद हैं तुम्हें, बर्बाद ही हैं कोई मेरे जैसा।।
-) कभी किसी रोज़ फ़ुर्सत में बैठों तुम तो जान जाओगें,
कि हमपे क्या गुज़री, कैसे गुज़री,
कैसे हालात में ख़ुदको सम्भाल रखा हैं,
जिंदा मान रखा हैं तबाही के आलम तबाह होकर भी आबाद कर रखा हैं।।
-) वो राह ताकता हैं,
एक ज़माने से हमारी।।
कभी ऐसा ना हो जाएं,
वो रास्तें को ताकता रह जाएं,
और हम उस रास्ते पर नज़र ना आएं।।
-) वक़्त ने बेवक़्त सब छीनने की कोशिश की,
वरना बहुत सारी चीज़ों के हक़दार थे हम भी।।
कुछ ही चीज़ों को पा सके,
बाक़ी सब से दूर रहे।।
-) मौत दस्तक देगी किसी रोज़,
हम भी उससे मुस्कुरा कर पूछ लेंगे।।
कब से इंतज़ार था तेरा,
और तू अब जाकर आई है।।
-) उसने बेवफ़ाई ना की,
रास्ते भी बस दो ही थे उनके पास।।
एक बेवफ़ा हो जाना,
दूसरा मौत को गले लगा लेना।
वो मौत को गले लगा आया।।
-) कभी ये फ़ैसला लेना पड़ जाए,
हम दोनों में किसी एक को चुनना पड़ जाए।।
तो तुम ख़ुद को चुन लेना,
क्योंकि हमने तुमको चुना है,
और तुमने हमको।।
-) वो इस बात में भी मुझसे अक्लमंद हैं,
मैं ज़माने को अपनी नज़र से देखता हूं।।
वो ज़माने भर को,
ज़माने की नज़र से देखता है।।
-) कोई महबूब का ना मेरे पूछ,
हर कहानी का अंज़ाम अच्छा नहीं होता।।
हमने सपने कम ना देखें थे साथ रहने के,
बिछड़ना नसीब में लिख दिया था ख़ुदा ने।।
-) ख़ुदा को याद भी,
दिन रात ना कीजिए।।
आपकी बेकाम सी बातों के अलावा भी,
उसे ज़माने भर की ख़ैर रखनी होती है।।
-) फ़ूल बन जायेंगे हम भी एक दिन,
जबसे पता चला वो फूलों को छूती बहुत हैं।।
भंवरों से बच निकलना है बस,
बाकी तो वो आ ही जाएंगे चूमने हमें।।
-) मेरे जैसा बन जाने में हर्ज क्या है,
मैंने भी ज़माने के रंग देख रखे हैं।।
तभी अपने अंदाज़ को,
सख़्त कर लिया है।।
-) मोहब्बत भी नसीब वालों को नसीब होती है,
हम जैसों को कहां ये नसीब होती है।।
हमको हमारे हक़ की चीज़ें भी ना मिली,
फिर ये तो ख़ुदा का सबसे हसीन तोहफ़ा है।।
-) बातों को यहां तक ना लाइए,
अपने जैसे किसी पर ये आजमाइए।।
हम औरों से अलग यूं भी हैं,
ज़रा सा हमें किसी ने कम आंकना चाहा,
हमने उसे आंकने लायक नहीं छोड़ा।।
-) फिज़ा कितनी खूब है,
ये मौसम बहुत मक़बूल है।।
सभी अपने आप में मस्त हैं,
प्यार करने की यहीं सही रुत है।।
-) समंदर से खौफ खाया करो,
इसकी शालीनता पर मत जाया करो।।
माना कि बुरा वक़्त चल रहा है इसका,
वरना इसके दौर में इसने भी जाने कितनों को ख़ुद में समाहित किया है।।
-) एक दुनिया से अलग हो आया हूं,
मैं अपने घर का रास्ता भटक आया हूं।।
मुमकिन तो कुछ भी नहीं जाने आने को,
बस मैं खालीपन से ऊब आया हूं।।
-) ज़िंदगी को ना जीना भी एक भूल थी,
अंत समय में जाना कि कुछ भी हासिल नहीं हुआ हमें।।
हमने ख़ुद को गुमनाम सफ़र में झोंक दिया,
अब उस सफ़र का कहीं आता-पता भी नहीं।।
-) माना कि सब लौट आता है एक दिन,
उस दिन के लौट आने का इंतज़ार करते-करते,
हमने इंतज़ार करते-करते,
सबकुछ ही ख़त्म कर लिया।।
-) औरों के बारे में सोचना,
ख़ुद को मुसीबतों में ढकेल लाता है।।
ख़ुद बच निकल भी जाओ उन रास्तों से अकेले ही,
किसी और को निकालना मतलब ख़ुद फंस जाना।।
-) हमने देखा है बदलते मौसम का ढंग,
पहले ये ख़ूबसूरत लगता है,
फिर तबाही का मंज़र फैला देता है।।
-) तुझे ना जानने से पहले कुछ और भी नहीं जानते थे हम,
प्यार की बातें ख़ूबसूरत एहसास,
ख़ुद का नर्म दिमाग़ अब सब जान गए हम।।
इन शायरियों का उद्देश्य भावनाओं और जीवन के अनुभवों को रचनात्मक शब्दों में प्रस्तुत करना है। पाठक अपनी पसंद की पंक्तियों को पढ़कर उनके भाव को अपने अनुभवों से जोड़ सकते हैं।
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