Love Shayari for Girlfriend in Hindi :- हिंदी शायरी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भावनात्मक शक्ति है। यह कम शब्दों में गहरी बात कहने की कला सिखाती है। शायरी पढ़ते समय पाठक केवल शब्द नहीं पढ़ता, बल्कि उन शब्दों के पीछे छिपे एहसासों को महसूस करता है।
“तेरे नाम से ही मुस्कुराहट आ जाती है, मेरी हर शाम तुझसे सज जाती है।”
-) जब चाँद अपनी रोशनी से,
बारिश की बूंदों को सजाता है,
तेरा अक्स उसमें बस जाता है,
जैसे प्यार की एक नई कहानी बुनता है।
इस मौसम में सिर्फ तेरा साथ,
हर पल को मायने देता है।
-) रिमझिम बूँदों में छिपा, एक अद्वितीय एहसास है,
जब भी ये बारिश होती है, तेरा नाम लिए हर एक खास है।
बरसात के इस मौसम में, बस तू ही सब कुछ है खास है।
-) हर छलकती बूंद में, तेरा दर्द छुपा है,
बारिश की धड़कनों में, सिर्फ तेरा ही हो जादू।
इस मौसम की हर कड़ी, तेरे नाम से युं ही बँधी है।
-) जब बादल घेर लेते हैं, दिल की बातें फिर से कह जाते हैं,
बरसात की हर बूँद में, तेरा नाम उभरकर आता है।
तेरे बिना ये मौसम, सिर्फ एक अधूरा सा रह जाता है।
-) बूँदों के साथ तेरा नाम दिल में बस जाता है,
बारिश की हर रिमझिम में, तेरा खूबसूरत अहसास बस जाता है।
इस मौसम की हर धड़कन, एक नई कहानी सुनाता है।
-) जब बारिश का मौसम आए, दिल की हर ख्वाहिश जगे,
तेरे बिना ये बारिश, बस एक तन्हाई का सफ़र बने।
बरसात में बसी हर बारिश की कहानी, मेरी रूह को भी सजीव लगे।
-) हर बूँद में छिपा, एक नया सपना बनता है,
बरसात की रिमझिम में, तेरा संग सदा चमकता है।
तेरे बिना ये मौसम एक अधूरा गीत लगता है।
-) मौसम का ये नज़ारा, उस प्यार की कहानी कहता है,
जब बारिश आती है, तेरी यादों का इन्द्रधनुष बिखरता है।
बरसात में हर ख़ुशी के साथ, तेरा ही वास होता है।
-) बूँदों की खामोशी, जैसे दिल की हलचल बयाँ करती है,
बारिश में तेरा खयाल आकर, मुझसे बातें करती है।
तेरे साथ का ये मौसम, सब मुश्किलों को भुला देता है।
-) जब बरसात होती है, दिल की धड़कनें तेज़ होती हैं,
तेरा संग पाने की चाहत, हर एक बूंद में जगी होती है।
इस मौसम में तेरे बिना, हर खुशी फिर अधूरी सी लगती है।
-) बारिश की आवाज़ में, तेरा नाम गूंजता है,
दिल के ख़तों में, तेरा जिक्र हर लम्हा झलकता है।
तेरे साथ बिताए लम्हे, इस बरसात में सजीव रहते हैं।
-) बूँदों की सरसराहट, जैसे प्यार की एक नई गूंज है,
बारिश में जब तेरा ख्याल आता है, हर जज़्बात को नयी धारा मिलती है।
इस मौसम में तेरा संग पाना, एक ख्वाब की तरह लगता है।
-) बरसात की हर बूँद में, तेरा नूर बसा है,
हर एक पल में तेरा नाम सुनकर, दिल मेरा हँसता है।
इस मौसम की खासियत, सिर्फ तेरा साथ है, बाकी सब अधूरा सा लगता है।
-) जब बादल बरसात लाते हैं, तेरा नाम दिमाग में जिंदा रहता है,
दिल की हर धड़कन में तरेरा ही साया बना रहता है।
बरसात के इस मौसम में, मेरा तन्हाई का साथी तू ही सच्चा है।
-) बूँदें टपकती हैं, जब यादों का मेला सजता है,
तेरे संग बिताए लम्हे, हर एक पल का दीप जलता है।
इस बरसात में सिर्फ तेरा नाम, दिल के हर कोने में बसे रहता है।
*दर्द और जुदाई की शायरी*
हर प्रेम कहानी मुकम्मल नहीं होती। कुछ रिश्ते समय के साथ बदल जाते हैं और कुछ याद बनकर रह जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में दर्द भरी शायरी इंसान के दिल की आवाज़ बन जाती है।
“कुछ रिश्ते वक्त के साथ दूर हो जाते हैं, पर उनकी यादें हमेशा पास रहती हैं।”
*दोस्ती जीवन का एक अनमोल रिश्ता है। सच्चा मित्र सुख-दुख दोनों में साथ खड़ा रहता है।*
*“दोस्ती वो नहीं जो सिर्फ पास हो, दोस्ती वो है जो हर एहसास में साथ हो।”*
*कई बार इंसान भीड़ में रहकर भी अकेला महसूस करता है।*
*“खामोशी भी कभी-कभी चीखती है, बस सुनने वाला दिल चाहिए।”*
-) बारिश में तेरा नाम जैसे, एक मीठा सुरूर सा होता है,
हर बूंद के साथ तेरी यादें, दिल के हर कोने का जीना होता है।
इस मौसम में तेरा साथ, हर शायरी को खूबसूरत बनाता है।
-) बरसात का शोर, जैसे तेरे ख्यालों का समर्पण है,
हर बूंद में छिपी कहानी, तेरा नाम संग बुनता है।
इस मौसम में तेरे बिना, ये बारिश बस एक सपने सी लगती है।
-) जब रिमझिम बूँदें पड़ती हैं, तेरा चेहरा नज़र आता है,
बरसात की हर धड़कन में, तेरा ही जादू नज़र आता है।
इस मौसम की खूबसूरती में, बस तेरा ही एहसास छुपा है।
-) बारिश के साथ जब भी तेरी याद आती है,
दिल के हर लम्हे में, सिर्फ तेरा ही संग साथ होता है।
इस मौसम में तेरा साथ, मेरा हर दर्द भुलाने का एक सफ़र बनाता है।
-) हर बूंद में तेरी खुशबू, जैसे इक नई कहानी बुनती है,
बरसात की हर पल में, बस तेरा ही नाम जाप करती है।
इस मौसम की हर खुशबू, मेरी तन्हाई को दूर कर देती है।
-) झूठ से जब नकाब हटता है,
तब सच्चाई बहुत तड़पाती है।
-) बोलते हैं इतना झूठ,
कि अब सच की जगह वो ही पूजते हैं।
-) झूठ के साए में जो पलते हैं,
वो अपने ही रिश्तों को जलते हैं।
-) झूठी हँसी, झूठे जज़्बात,
हर बात में बस एक फ़रेब की बात।
-) तस्वीर कुछ और थी, हकीकत कुछ और,
झूठ ने सब कुछ कर दिया कमजोर।
प्रेम शायरी हिंदी शायरी की सबसे लोकप्रिय विधाओं में से एक है। प्रेम इंसान के जीवन का सबसे सुंदर एहसास माना जाता है। जब कोई व्यक्ति किसी से सच्चा प्रेम करता है, तो उसकी भावनाएँ शब्दों में ढलने लगती हैं।
-) हर झूठ बोलने वाला एक दिन रोता है,
क्योंकि सच्चाई खुद को कभी नहीं खोता है।
-) झूठ की जड़ें अब बहुत गहरी हो गई हैं,
सच्चे लोग किताबों में कहानी हो गई हैं।
-) उसके झूठ पर भी यक़ीन कर बैठे,
दिल को तसल्ली देना आदत बन गई।
-) झूठे वादे, झूठा प्यार,
सबक सिखा गया वो बेइंतहा यार।
-) हर दिन उसकी एक नई कहानी थी,
हर कहानी में झूठ की रवानी थी।
-) झूठे लोग अब सजदे में रहते हैं,
और सच्चे लोग तन्हा रहते हैं।
-) झूठ बोलने में माहिर हैं वो,
मगर सच्चे जज़्बात कहाँ समझते हैं वो।
-) झूठ को ओढ़कर आए थे जो,
वो सच्चाई से हमेशा कतराए थे।
-) झूठे लोग जब रोते हैं,
तब भी उनके आंसू नकली होते हैं।
-) उसने झूठ भी ऐसे कहा,
कि सच भी शर्मिंदा हो गया।
-) झूठ से बना रिश्ता रेत सा होता है,
पल भर में हाथ से फिसल जाता है।
-) झूठ बोलते-बोलते वो फनकार बन गया,
हर धोखे में अब कलाकार बन गया।
-) झूठी मोहब्बत की तस्वीर मत बना,
कभी-कभी रंगों में भी ज़हर होता है ना।
-) झूठे लोग खुद को खुदा समझते हैं,
और दूसरों को केवल इस्तेमाल करते हैं।
-) सच को झुठलाना उनका हुनर है,
ऐसे लोग अब हर गली का सफर है।
शायरी का हर रूप, चाहे वह ग़ज़ल हो या नज़्म, हमारी हिंदी संस्कृति और साहित्य का अभिन्न हिस्सा है। हमारी वेबसाइट पर, हम आपको विभिन्न शायरी शैली में बेहतरीन संग्रह पेश करते हैं, जिससे आप अपनी भावनाओं को शब्दों में ढाल सकते हैं। चाहे आप किसी से अपने दिल की बात करना चाहते हों या अपने जीवन के किसी कठिन पल को बयां करना चाहते हों, यहाँ आपको मिलेगी सही शायरी जो हर मूड और एहसास के अनुरूप हो।
~~~आराध्यापरी~~~
-: तुम कोशिश करते थोड़ी जल्दी आने कि,
हम साँसों को जिंदा रख लेते ,
हमने हर नाकाम कोशिश कि आख़िरी झलक पाने को तेरी ,
मैंने आँखें खोल रखी थी ,
मोहब्बत के दुश्मनों ने जनाजे पर लौटाते हुएं इन्हें बंद करदी ।।
-: अब तो तुम्हें कोई शिकायत ना होगी हमसे,
हम शिकायतों के इस शहर से कोसों दूर चलें,
तुम ख़ुदा से क़रीब थें हमको ,
बस अब हम ख़ुदा के पास चले ।।
ये मलाल भी ना रखना दिल में ,
कि आख़िरी मुलाक़ात न हुईं ,
हमसे तेरी आंखों में आंसु देखे ना जाते,
जो देख लेते अंतिम क्षणों में तुम्हें,
फिर ख़ुदा के घर ना आ पाते।।
-: वो आयेगा मेरे जाने के बाद ,
उससे यूं पूछताछ ना करना
जनाजे को देख मेरे वो नदियां भर जाएगां
उसके अश्रुओं का हिसाब ना लेना ।।
-: हम तुमसे जुदा होना तो नहीं चाहते ,
ख़ुदा की मर्जी भी हम नहीं चाहते ।।
मुकम्मल इश्क़ को तन्हा करना नहीं चाहते,
शायद अब हमें जाना होगा ,
ये हंसते खिलखिलाते चेहरे ख़ुदा को भी नहीं भाते।।
-:जनाजे को देख मेरे वो बिफर ही गया ,
जो कहता था कभी कि फ़र्क नहीं पड़ता जाने से तेरे ।।
आंखे भर ही आईं उसकी भी ,
जो पत्थर बना रहता था हमेशा ।।
उसकी यादों में तमाम खुशियां थी ,
मैं उसके भाग्य का बुरा हिस्सा बन ही गया
जिसे उसने नकारा हमेशा ।।
-: किसी के घर का रौशन चिराग हैं वो ,
मैं आवारा सा परिंदा हूं ,
जिसका ना कोई आस्मां अपना ,
ना कोई जमीन का किनारा ।।
-: समंदर को गुमान ये भी था कि उससे विशाल कोई नहीं ,
जो आसमां ने पंख फैलाएं तो इसके आगे फिर कोई नहीं।।
-: किसी के घर का रौशन चिराग हैं वो ,
मैं आवारा सा परिंदा हूं ,
जिसका ना कोई आस्मां अपना ,
ना कोई जमीन का किनारा ।।
-:कभी बैठ तो जाने तू यूं दूर से क्या तकता हैं,
आसमान में एक दफा मैंने भी देखा था , ।।
चाँद बड़ा सुंदर दिखता हैं
ग़म इसको भी तमाम जो करीब से देखा मैंने तो जाना फ़िर क्यों पूर्णिमा के बाद अमावस्या होती हैं।।
-: ना जाने क्या रोग ले आएं हैं हम इश्क़ कर आएं हैं हम,
ख़ुद को फना कर आएं हैं हम इश्क़ कर आएं हैं हम ।।
ज़माने से बेगाने हो आएं हैं हम इश्क़ कर आएं हैं हम ,
तबाही का आलम अब तो ना पूछों इश्क़ कर आएं हैं हम
ख़ुद को खुद से जुदा कर आएं हैं हम इश्क़ कर आएं हैं हम ।।
-: किसी के दिल अब तुम बन ही जाना ,
दर्द को तुम भी जान जाना ,
क्या गुजरती हैं दिल पे जाने के बाद दिल ये तुम भी जान जाना ।।
-: कोई ख़ुदा बन गया इश्क़ में कोई काफ़िर ही बनके रह गया ,
उनको मंज़िल मिल ही गई मैं बस सफ़र में रह गया ।।
उन्हें हक़ थे दिलों से खेलने का ,
हमनें बस उन्हें रखा और तमाशा सरेआम हो गया ।।
-: आओ जरा दूर तक साथी हो जाएं ,
तन्हा हम तुम्हारे हो जाएं ।।
गुजरा जो दौर अकेले अब तुम उसका सहारा हो जाओ
आवारा हम हैं तुमसे मिल जाएं,
तो एक घर हो जाएं ।।
-: उनके चेहरे कि चमक इतनी भी कम नहीं थी ,
चाँद से मिलाया चेहरा तो फ़ीका चाँद का रंग पड़ गया ।।
-: उन्हें इश्क़ लिखने में क्या हर्ज हैं,
काले बादलों सी उसके जुल्फ हैं।।
वो जो मुस्कुराता हैं तो गुलाब शर्माता हैं,
जो देख ले आंख भर के किसी को वो मोहिनी हो जाता हैं।।
-) छोड़ के जाने वाले ये बता दिया होता ,
की चलें ही जओगें एक दिन ।।
तो ऐसा होता ,
फ़िर हम कोशिश ही नहीं करते मिलने ,
नौबत ही नहीं आती फिर बिछड़ने की ।।
-) कुछ तो ख़्याल करा होगा उसने ,
कुछ तो मैं बहुत याद आया होऊंगा उसको ।।
जो दिनभर मेरा नाम लिए नहीं थकता था ,
जाने से पहले कुछ तो सोचा होगा उसने ।।
-) मेरे बग़ैर वो एक पल नहीं गुज़ार सकता था ,
जाने कैसे अकेले सफ़र में चला गया वो ।।
मैं ताकता रह गया राह को ,
वो सबकुछ छोड़ कर चला गया ।।
जाते वक़्त आँखें नम तो होगी उसकी ,
मुझसे बिछड़ने का दर्द बयां करता था वो मुझसे,
जाने कितने दर्द में लिप्त वो था होगा ।।
-) बिछड़ने का मन उसका भीं नहीं था ,
मन की मर्ज़ी आख़िर कहां चलती हैं ।।
वो सहेज कर रख लेना चाहता था हमको,
पर रब चाहता था उसको सहेज कर रख लेना ।।
मेरी ज़िंदगी थीं उस से अशुतोष,
जो कफ़न ओढ़ कर सो गया ।।
-) माना कि नींद अच्छी लगती थीं उसको,
जागने की आदत थीं हमको ।।
एक रोज़ वो इस क़दर सो गया ,
मैं उसको उठाते उठाते थक गया ।।
उसे पसंद नहीं थें आँखों में आंसू मेरे ,
उस दिन वो कुछ ना कह सका ।।
-) हमारी कहानी ख़त्म हो गईं,
एक पल में सोच भीं ना सके कि क्या हो गया ।।
वो सात जन्मों का साथ निभाने वाला ,
कुछ उम्र गुज़ार देने के बाद हीं चला गया ।।
-) किसी से मोहब्बत इतनी भीं ना कर आशुतोष,
वो जब पास ना होगा तो बहुत कुछ होगा ।।
बेचैनी होगी दिल ना लगेगा उसका ही ख़्याल रहेगा ,
ये दिल खोया हुआ सा किसी काम ने नहीं लगेगा ।।
-) ऊपर वालें की वो जाने कैसी दुनिया होगी ,
जहां पर एक बार जो जाएं बस उसी दुनिया के हो जाते हैं ।।
अपना कितना कुछ होता हैं एक जगह ,
वो कैसे अपना सबकुछ यहीं छोड़ जाते हैं ।।
-) हक़ीक़त को जब आजमाया हमनें ,
तो जाना कुछ भीं नहीं हुआ यहां ।।
दो दिन के साथी हैं बातें जो करते है ज़माने भर की यहां ,
अपनी खुशियों को आजमाओ,
ना और कुछ चाहो कोई भी पूछता फिर ख़ैर यहां ।।
-) माना कि हम अड़ियल हैं,
ख़ुद की बातों के लिए हैं ।।
जो मंज़ूर नहीं हमें की ऐसा क्यों,
हम उस बात को फ़िर समझते नहीं ।।
-) सुना हैं उनके शहर की इबादत ना हो सकीं,
जहां के शहंशाह बात करते थें ज़माने भर की।।
वो बेबस कैसे हुआ सोचता ये में भीं हूं,
कुछ तो खेल उसके अपनों का होगा ,
यूं ही बाहर वालों से सियासतें लूटी नहीं जाती ।।
-) कुछ तो मेरे जैसों से भीं बचकर रहिएं ,
जो आप यहां वहां की बातों में मग़्न हैं ।।
हम जब आग़ोश में आ जाएं ,
तो समन्दर सुख देते हैं ।।
-) हमसे ख़ौफ़ खाइएं जनाब,
हम इतने आसान भीं नहीं ,
हमनें अपने दौर में ना जाने कितनी सियासतें लूटी हैं ।।
-) माना तेरे काबिल नहीं हूं मैं,
मग़र मैं बाक़ी काबिलों से बेहतर हूं ।।
मान की मुझमें तहज़ीब नहीं ,
मग़र मैं सच बोलने में माहिर हूं ।।
-) कुछ तो ख़्याल हमारा भीं कर आशुतोष,
एक अरसे से तुझको ढूंढ रहें हैं हम,
और तू हैं कि बेखबरों सा रहता हैं ।।
-) समंदर को गुमान ना होने लग जाएं,
इसीलिएं मंथन ज़रूरी हैं,
इंसान अपनी बुद्धि तेज़ ना चलाने लग जाएं इसीलियें आत्ममंथन ज़रूरी हैं ।।
-) माना कि हुस्न वालों का दौर हैं,
दौलत के नशें में वो मग़रूर हैं ।।
ऐसा भीं आख़िर कब तक होगा ,
ये जो नया नया रंग हैं एक पल में छिन्न भिन्न होगा ।।
-) हम भी ख़ुद को उन हालातों से समेट लाएं हैं,
जिनसे निकलना शायद ही किसी के लिएं आसान हो ।।
बड़ी तनहाईं थीं कभीं उस शहर वीराने में ,
अब जाकर आबाद हुआ ।।
-) तुझसे ना मिल पाने का दुःख इतना हैं,
मैं ख़ुद में टूटा हूं और तबाह हूं,
हाल कोई पूछें हमसे तो तूफ़ानों के साहिल में घिरा हूं ।।
-) ख़ुद को सोच लिजिएं हमसे बेहतर तो शायद ही यहां कोई ,
हम जाने कितनों की धारा से अलग फ़िरते हैं ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~






























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