-) तेरे बिना ज़िन्दगी अधूरी सी लगती है,
हर सुबह तेरी यादों में जगती है।
तेरा नाम होठों पर मुस्कान बन जाए,
तेरी बातें दिल को राहत सी लगती हैं।
-) सपनों में जो तुझसे मुलाकात होती है,
उस एक पल की हज़ारों सौगात होती है।
नींद भी डरती है जागने से कहीं,
क्योंकि तेरे ख्वाबों में राहत की बात होती है।
-) वो तन्हा शामें अब भी याद आती हैं,
तेरे संग बिताई हर बात रुला जाती है।
लोग कहते हैं वक़्त सब ठीक कर देता है,
मगर तेरी यादें हर वक़्त आ जाती हैं।
-) तू चाँद है, मैं तेरा आसमां बन जाऊं,
तेरे हर दर्द का मैं मरहम बन जाऊं।
तेरे बिना अधूरी है ये कायनात मेरी,
तेरी हर खुशी का मैं कारण बन जाऊं।
-) हमने चाहा तुझे खुद से ज़्यादा,
तेरे लिए हर दर्द को समझा साधा।
तू मुस्कुराए यही दुआ है हमारी,
तेरे बिना हर खुशी अधूरी सी आधा।
-) तेरे बिना सन्नाटा हर जगह छाया है,
दिल ने तुझे हर सांस में पाया है।
बिछड़ के भी तू दिल में रहता है,
ये इश्क़ नहीं तो फिर क्या साया है?
-) नज़रों से कह दो कि ठहर जाए वो,
दिल की धड़कनों में उतर जाए वो।
हर पल उसका इंतज़ार करता है ये दिल,
काश एक दिन मेरा प्यार समझ जाए वो।
-) कभी बारिश की बूंदों में, कभी हवाओं में दिखा,
तेरा चेहरा हर तरफ़ मेरे ख्वाबों में दिखा।
कह नहीं सका जो दिल में था हमेशा,
वो एहसास तेरे बिना भी साथ रहा।
-) तू जो मिला तो हर ग़म खो गया,
जैसे वीराने में कोई गुलशन बो गया।
तेरी मुस्कान ने हर ज़ख़्म सी लिया,
तू ना हो तो ये दिल भी रो गया।
-) तन्हा रातों में जब तुझे याद किया,
खुद से भी ज़्यादा तुझसे प्यार किया।
तेरे नाम की हर सांस में खुशबू है,
तेरे बिना हर दिन अधूरा जिया।
-) बादलों की चादर ओढ़े, बरसात आती है,
हर एक बूंद में तेरा एहसास छिपा आता है।
दिल की तरंगों में उठते हैं साज़, जब ये मौसम बहारों का लाता है।
-) जब बरसात होती है, दिल में एक खुशबू बसी होती है,
यादें लवाज़ा करती हैं, जब बारिश की बूंदों से जूड़ी होती है।
तेरा नाम लबों पर लाने के लिए, ये हर बारिश मुझसे ताखा होती है।
-) बरसात में खामोशी, एक गीत गुनगुनाती है,
हर एक बूंद में तेरे साथ की यादों की बातें होती हैं।
ये मौसम फिर से हमें एकबार संग लाने का इरादा बनाती है।
-) बारिश की बूँदों में जैसे मुझसे बातें होती हैं,
तेरी यादों की खुशबू हर घाट पर बसी होती हैं।
इस मौसम में हर ख़ुशी में, तेरा ही आभास होती हैं।
-) बादल की गर्जना से दिल धड़कता है,
बरसात की पहले बूंद से, प्यार का मीत सैकड़ों मटकता है
तेरे बिना ये मौसम अधूरा सा लगता है।
-) बूँदों की सरसराहट में एक कहानी छिपी होती है,
बरसात की रिमझिम में तेरा नाम गूंजता है।
इस मौसम की रिमझिम से, मेरी तन्हाई कसमसाती है।
-) बरसात की बोस जब तू याद आए,
दिल में लहरें उठे, हर बूंद गूंज जाए।
तेरे साथ की खु़शबू ही, इस मौसम की साज सजाए।
-) बारिश की हर बूँद में तेरा नूर है,
इस मौसम की ताज़गी में, सिर्फ तेरा ही सूरत है।
तेरे बिना ये बरसात मुझ पर फीकी सी घटित है।
-) जब चांद बादलों में छुपा हो, और बारिश बहकती हो,
दिल की धड़कनें तेरे लिए ही गूंजती हों,
इस बरसात में बस तेरा ही जिक्र हर कोई करता हो।
-) छत की टेन पर जब बूँदें पड़ती हैं,
यादों की बारिश दिल में जैसे छिपती है।
तेरे बिना ये प्रेम की कहानी अधूरी-सी लगती है।
-) बारिश की बूँदों में, तेरा एक अक्स बसा है,
हर लम्हा तेरे साथ का एहसास उसमें जता है।
तेरे बिना ये मौसम, बस अधूरा सारा सा है।
-) रिमझिम बूंदों की छटा, जैसे तेरे इश्क का इज़हार,
हर एक पल में छिपी है, तेरे संग की खुशगवार।
बरसात की ये दिलकश शाम, हमारे प्यार का बेगार।
-) जब बारिश में तुझसे मिलने का ख्वाब सजता है,
दिल में सारा जहान बस उसी पल हंसता है।
बरसात में बसी इस मोहब्बत की कहानी न रंगती है।
-) बादलों का रंग छाता, प्यास का एहसास लाता है,
बारिश में हर बूँद तेरा नूर फैलाता है।
ये मौसम मेरे लिए सिर्फ तेरा ही जादू दिखाता है।
-) जब बूँदें फिसलती हैं, दिल की धड़कन तेज़ होती है,
तेरे आगोश की ख्वाहिश, इस मौसम में चुपके से होती है।
बरसात की प्रतीक्षा मेरे लिए एक ख्वाब की तरह होती है।
-) जब बादल छाते हैं, दिल में एक हर्ष उठता है,
बारिश की पहली बूँद से, यादों का समंदर बहेता है।
तेरे सिवा कोई नहीं, इस दिल के कोने में बसता है।
-) गरजते बादलों का, धड़कता हुआ दिल बना है,
रिमझिम बूंदों में तेरा एहसास बसा है।
बरसात की हर एक कहानी, मेरे प्यार का सुहाना सिला है।
-) ये बरसात की आवाज़, जैसे तेरे प्यार की गूंज है,
हर बूंद में बसी होती, यादों की एक ताज़गी है।
तेरे साथ बिताए लम्हे, इस मौसम में बनती एक लिंदा है।
-) बादलों की छांव में, तेरी चंचल हंसी बसी है,
जब बरसात आती है, बस तेरा ही ख्वाब सजा है।
इस मौसम की हँसी में, तेरा मेरा साया आता है।
-) बारिश की नर्म बूँदें, जैसे तेरा स्पर्श होता है,
हर एक पल में बसी एक नई कहानी होती है।
तेरे बिना ये बरसात, सिर्फ एक अधूरा गीत होता है।
-) जब पुरानी यादें बरसती हैं, दिल की बारिश में,
तेरे बिना यह मौसम, बस एक तन्हाई की फ़लसफी है।
बरसात में तेरे साथ का ही सपना सजता है।
-) हर बूंद में बसी कहानी, तेरा नाम लहकता है,
बरसात की इस ठंड में, तेरे बिना बस सूनापन घटता है।
खुद को तुझसे जोड़े रखना, यही मेरा अर्ज़ है।
-) काले बादलों में छुपा, तेरा एक प्यारा अक्स है,
बारिश की बूंदों से गूंजता, तेरा हंसता चेहरा रक्स है।
तेरे बिना मौसम मुझ पर, बस एक सन्नाटा बकसा है।
-) जब बारिश की रिमझिम, तुम्हारी याद दिलाती है,
दिल की धड़कनें भी, जैसे जश्न मनाती हैं।
बरसात में बसी होती, वो प्रेम की अद्भुत बातें हैं।
-) बूँदों की आवाज़ में, तेरी हंसी की गूंज होती है,
जब बरसात होती है, दिल की ख्वाहिश छुप जाती है।
इस मौसम में सिर्फ तेरा साथ, मेरी पूरी दुनिया होती है।
-) जब चूड़ा बैलून में, बारिश की रिमझिम साज होती है,
तेरा साथ इस मौसम में, दिल को ख़ुशियों से भर देती है।
बरसात की हर बूंद मुझमें, तेरी यादों की रोशनी लाती है।
-) बारिश की झड़ी में, जैसे तेरा चेहरा उभरता है,
हर लम्हा, हर पल में, तेरा ही नूर बिखरता है।
इस मौसम की बस यही कहानी, तू और मैं, सिर्फ शाम सुहाना है।
-) बूँदों की बूँद पर, मेरा दिल तेरा नाम लिखता है,
रिमझिम बारिश में तेरा ख्याल, ख़ुद को बेबस सा दिखता है।
बरसात के इस मौसम में, सिर्फ तेरा ही प्यार मुझ पर सजीव रहता है।
-) जब बारिश की हल्की बूँदें छूती हैं, दिल की गहराइयाँ,
तेरे साथ बिताए लम्हे, मेरे लिए सजते हैं ख्वाबों की सजावट।
इस मौसम में सिर्फ तेरा साथ, हर ख़ुशी की साजिश लाता है।
-) बारिश की बूँदों में जैसे, तेरी यादों का संगम है,
इस मौसम में जो तू नहीं, वो तन्हाई का एक संगम है।
बरसात की हर धड़कन में बस तेरा ही मंजर हैं ।।
~~~आराध्यापरी~~~
ख़ुद को ख़ुद से जुड़ा होने में वक्त लगता हैं।।
हम भूल रहें है रफ्ता रफ्ता अपने पुराने अंदाज को ,
नए दौर के चलन में सबकुछ नया सा लगता हैं।।
-) ये भी क्या किसी से कम हैं,
हम बिछड़ कर भी एक साथ हैं।।
लोग बिछड़े हुए जाने क्या क्या कहते हैं,
बेवफ़ा, नागिन और ना जाने क्या कहते हैं ।।
हम अब भी अदब से रहते हैं,
एक दूसरे को दिल कहते हैं,
ये भी क्या किसी से कम हैं।।
-) तुम फ़िरसे आना पहली बारिश कि तरह ,
पतझड़ में सावन कि तरह ,
रेगिस्तान में पानी की तरह ,
मेरे दिल के सुने पन में ,
शोर करते हुएं सरगम कि तरह ।।
-) तुम खिलखिलाती धूप सी हो कोहरे में,
तुम रौशन नूर सा हो अंधेरे में ,
तुम साख के पत्तो सी हो सूखे में ,
तुम वसंत हो गर्मी की तपन में ,
तुम मुझ में विलीन हो ,
मेरे पास कुछ भी ना होने में।।
-) कभी किसी के वादे से ना मुकरना ,
जो करलो वादा फिर उसे हमेशा पूरा करना ।।
एक वादे पे कोई उम्र सारी गुज़ार देता हैं,
फ़िर भी तू निभा ना सके कभी ,
वो इसी को सच मान लेता हैं
सांस त्याग देता हैं, ख़ुद को मार लेता हैं।।
-) किसी रोज़ जानने कि कोशिश करना हमें ,
हम वो तो नहीं जो पेश आते हैं तेरे सामने ।।
वो मासूम चेहरा , वो गुस्से को काबू करना
ये जो पेश आ रहा हैं, मैं नहीं मेरे जैसा हैं कोई तेरे सामने ।।
-) याद बनकर चले आओं, कब तक विरह में हम रहें,
इजाज़त दो अगर तो तेरे सामने हाज़िर हम रहें ।।
कभी कुछ तो मेरी बातों का भी ख़्याल कर ,
कब तक यूं ही अपनी मर्ज़ी का मालिक बनता रहेगा,
कब तक तेरी दीद कि मुरीद में ये दिल तन्हा रहें ,
कब तलक जान जिस्म से बंधी रहे।।
-) एक दिन क़ैद दीवारें फांद आएंगे हम भी,
तेरी मर्ज़ी को छोड़ आएंगे हम भी ।।
तुझे उम्र का तकाज़ा नहीं ,
इसको छोड़ जाएंगे हम भी ।।
-) उन्हें रूठने का हुनर सिखाया गया
हमें हुनर ही नहीं ऐसा कुछ ।।
उन्हें अदब से पेश आना सिखाया ,
जबकि हमें अदब से आजमाया गया ।।
-) अंदाज ए करम यूं भी ना कर ,
हमें ज़माने से जुदा ना कर ।।
तू मिल और तामिल कर ,
मेरे होने को यूं हु जाया ना कर ।।
-) कमबख्त इश्क़ ने हमको भी ठिकाने लगा ही दिया,
हम जो सोचते थे कि हमसे आगे कुछ नहीं ,
इसने हमको रास्ता दिखा ही दिया ।।
-) क्या करे कुछ तो ज़िक्र कर ,
बदनामियों के सबब को अब तो हवा कर ।।
सोचते हैं इस शहर को छोड़ जाएं ,
मुझपे पे करम कर , पनाह को खत्म कर
हमें इस शहर से जुदा कर ।।
-) हम ये शहर भी छोड़ देना चाहते हैं,
किसी और की पनाह पा लेना चाहते हैं।।
भरोसा था इसकदर हमको,
तु ख़ुदा था मैं केवल इंसान था
अब उस हक़ से बहुत कुछ मांगना चाहते है,
हम अपने हिस्से से हक़ अदा चाहते हैं।।
-) तुम जो पत्थर बने रहें ,
तो हम में भी कहां मोम से बचेंगे ।।
जज़्बात बहते रहेंगे यूं ही पानी के मोल ,
फ़िर कहां इनमें वो पुराने नुक़्स बेचेंगे।।
-) हम को सोच क्या हैं हम,
अंधेरे का चिराग़ हैं हम ,
ज़माने से जुदा हैं हम
तेरे दिल के मरीज हैं हम ,
सबकुछ तू हैं और तेरे बस मुरीद हैं हम ।।
-) तेरी यादों का सफ़र जारी हैं,
हक़ीक़त से हम दोनों ही वाक़िफ नहीं ।।
लोग जाने मीलों का सफ़र तय कर लेते हैं एक मुलाक़ात को ,
हम क़रीब होकर भीं मिल नहीं पाएं ।।
-) एक वादा ऐसा भीं कर जाना ,
हम उस वादें पर अपनी उम्र संजो कर रख लेंगें ।।
ना आने की ज़िद माना अभी हैं तुम्हारी,
उस बात को हम फ़िर समझ लेंगे ।।
-) मौत बिछड़ने का सवाल पूछने आईं हैं,
साथ में मुझे ले जाने का सवाल लाई हैं ।।
मैं यूं तो रुक भीं नहीं सकता,
तुम जो हुक्म करों तो मैं इसे कुछ पल के लिएं रोक लेता हूं,
बाक़ी फ़िर जीवन डोर समाप्त कर लेता हूं ।।
-) कुछ बदलनें लगा हैं,
आसमानी नीला रंग लाल होनें लगा हैं ।।
किसी ने छेड़ दी बग़ावत कहीं ,
या मेरे शहर का हाल बुरा होनें लगा हैं ।।
-) मन की व्यथाओं को जानता भीं कौन हैं,
ये हम से दूर हैं हम इस से दूर हैं ।।
ये चाहता कुछ हैं और हो जाता कुछ हैं ,
ये आजाद होना चाहता हैं,
मैं इसे समेट लेना चाहता हूं ।।
-) एक उम्र गुज़र रहीं हैं,
तेरे बग़ैर ज़िंदगी कर रहीं हैं ।।
कहीं ऐसा ना हो के उम्र गुज़र ही जाएं ,
हम बस एक जगह ठहर जाएं ,
फ़िर तुम बुलाओ और कोई कहने लगे बहुत देर हो गई ,
कहानी तुम्हारी इस से ज़्यादा नहीं ।।
-) माना कि वो देर से हर काम करता हैं,
मग़र उससे कहना आशुतोष इस बार देर ना करना ।।
जो उसने देर की तो ये लोग ,
मुझे मेरे मुकाम तक पहुंचा देंगे ,
एक ऐसे सफ़र में जाने देंगे जहां से आना मुमकिन नहीं ।।
-) अंत भी देख लिया हमनें अपना ,
जाने कितनों के दिलों में राज़ करतें थें ।।
मौत ने दस्तक जब दी तो अकेले थें,
बाक़ी साथी चाहकर भीं कुछ नहीं कर सकतें थें ।।
-) ज़िंदगी को इतना हसीन समझतें थें हम,
ये भी एक फ़रेब हीं था ।।
जब मौत को गले लगाया हमनें,
तो जाना इस से बेहतर कुछ नहीं ।।
-) ऐ मौत तुझमें जाने कौनसी बात हैं,
जिसने भीं तेरा दामन थामा
उसने फ़िर कभी किसी और का रुख नहीं किया ।।
-) अगर वे मिल जाएं कहीं राह में ,
तो उनसे ये सवाल भीं जरूर करना ।।
आख़िर ख़ता क्या थीं आशुतोष की ,
जो बस तुम्हें चाहता था और तुम उसे कांटो के सफ़र में नंगे पैर छोड़ आएं ।।
-) मन की बातों को ना जानियें,
मन भ्रम फ़ैलाने के सिवा कुछ नहीं करता हैं ।।
ये कहीं दूर की बातों को पास ,
और कभी ना हो सकने वालें कामों की सोच करता हैं।।
-) माना कि पर्वत सा गुमान उनको,
समंदर सा सैलाब उनको ।।
लेकिन वक़्त की मार को समझिएं,
इसने जाने कितने सूरमाओं को धूमिल किया हैं ।।
-) दिल अगर कहीं लगने लग जाएं ,
किसी की राह ताकने लग जाएं ।।
कोई रंगीन ख़्वाबों में आने लग जाएं,
तो क्या कीजिएं पहले उनसे इज़हार ए इश्क़ बयां कीजियें,
फ़िर एक नईं डगर को थाम लिजिएं ।।
-) जिस्म से मोहब्बत ना कर ,
घर रंग रूप से नहीं चलता ।।
ये बातें अगर समझ ना आएँ,
तो जान ये किसी तबायफ़ का घर नहीं बसता ।।
-) उस ज़माने की बात भीं ना कर ,
हम भीं शहंशाह हैं उस पुराने दौर के ।।
-) हमारी भीं सारी उम्र बादशाहत में गुजरी ,
अब ख़ुद को ज़माने के रंग में सहेज रहें हैं,
सल्तनत लूटने के बाद बादशाह कहां बादशाह रहता हैं ।।
-) सियासी खेल खेल रहें हैं वे ,
जिनके दूध के दांतों का टूटना अभी बाकी हैं ।।
हमारे सामने आओ तो सिर झुका कर आओ ,
हम ने इस खेल में बाल सफ़ेद किए हैं ।।
-) माना कि बाजुओं में अब वो ताकत नहीं ,
जिस ताकत पे इतराता फिरता था वो ।।
अपने दौर का सबसे आला इंसान था वो ,
जो अब दर दर की ठोकर खा रहा हैं।।
-) माना कि ये पैग़ाम ऊपर वालें का हैं,
हमारी तबाही का मंज़र यहीं लिखा गया हैं।।
मग़र ये ज़रूरी नहीं ,
सियासतें लूटी तो राजा राजा नहीं ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~






























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