Love shayari in hindi for girlfriend :-
ज़िंदगी में दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो बिना किसी स्वार्थ के दिलों को जोड़ता है। सच्चा दोस्त खुशी में साथ हँसता है और दुख में कंधा बनकर खड़ा रहता है। हमारी दोस्ती शायरियों में इसी रिश्ते की गर्माहट और अपनापन झलकता है।
-) जाने कौनसी नौका पर सवार हो बैठें हम,
जो डूबे थें उन्हें तक किनारा हासिल हो गया ।।
हम नौका की सवारी में ही रह गएं,
सोचा कि आसान हैं मंज़िल,
एक अरसा हो गया और इसी सफ़र के होकर रह गएं हम ।।
-) हमनें कोशिश में समन्दर सा रेगिस्तान साफ कर दिया ,
हमको हासिल तिनके भर भीं नहीं वो ।।
ना जाने किस तरह इस फ़ैसले पर क़ायम रहें हम,
बाकी हर फ़ैसले को एक पल में मिटा आएं हम ।।
-) दरों दीवार चाहें लाख कितनी भीं कोशिश क्यों न कर लें,
फिज़ा को क़ैद करना कोई आसान काम तो नहीं ।।
हमनें भी कोशिश की लाख मगर ,
पंख काटने से उड़ने का हुनर नहीं भुला करते ,
कटे हुएं पंख हैं वापिस उगते जरूर हैं।।
-) मैं ख़ुद को तलाशता हुआ ,
बड़ी दूर निकल आया हूं ।।
पहले कुछ मेरे जैसा दिखता था,
अब उस से भीं कोषों दूर निकल आया हूं ।।
-) साथ क़िस्मत का ना हो तो क्या कीजियें,
मेहनत भीं कब तलक साथ दें ।।
भाग्य में लिखा हीं नहीं कुछ ,
तो लकीरों को क्या दोष दें ।।
-) हम इस बात से परहेज़ करतें रहें ,
की हम किसी डगर भटके ही नहीं ।।
सच ये हैं कि हमें मंज़िल का पता कभी मिला हीं नहीं ,
हम सफ़र को तलाशतें रहें और सफ़र का भीं पता नहीं ।।
-) कुछ की बातें अजीब थीं,
कुछ का तरीका काबिल ना था ।।
मैं गुमराह बना रहा ,
ये ज़माना बड़ा अजीब था ।।
-) हम अपनी हस्ती को मिटा देना चाहते थें,
मग़र ये भीं कहां मुमकिन था ।।
वर्षों की बनी इमारत पल भर में ,
कैसे बिखर जाती ।।
-) ज़िंदगी की तलाश में जाने क्या तलाश बैठें हैं हम,
सुकून का एक पल नहीं ।।
जो कुछ हासिल था वर्षों से ,
अब तो उसका भीं पता नहीं ।।
-) कभीं सुनो हमारे दिल की बातें ,
हम तनहाई को पसंद करने वालें लोग
बहुत कुछ छुपा के रखते हैं दिल में,
तुम हाथ थाम के पूछोंं कभीं,
फ़िर हम भीं बन जायेंगे किस्सा बयां करने वाले लोग ।।
-) हमसे जुदा ना हो कुछ तो ख़्याल इस दिल का कर,
तेरे बग़ैर ये किसी और की मानता भीं तो नहीं हैं।।
तेरे बताएं वादें पर उम्र गुज़ार दी हमनें,
ये किसी और वादें को मानता भीं तो नहीं हैं।।
-) मेरे मेहबूब सा कोई हैं भीं तो नहीं,
वो सांझ को खूबसूरत और सुबह को हसीन कर दें।।
उसके जैसा होनें में ना जाने कितनी उम्र गुजारनी होती हैं ,
वो चाहे अगर तो अमावस्या की रात को चांदनी कर दें ।।
-) हम जिनसे बिछड़े वे कहीं के ना रहें फ़िर,
हम पत्थर को भीं ख़ुदा समझ के पूजा करतें थे।।
औरों ने फ़िर पत्थर को बस पत्थर समझा ,
हम हर बेकार चीज को सिर आंखों पर रखते थे ।।
-) वो एक अरसे बाद नज़र आया हमको ,
अब उसे पहले जैसा कैसे देखें ।।
माना जो अपना था कभीं एक ज़माने में,
अब उसे अपनी निग़ाह से अपना कैसे देखें।।
आँखें भर तो आती हैं अब ,
ज़रा ज़रा में उनको नाम आंखों से कैसे देखें ।।
-) हम दिल की सुनने वालें,
दिमाग़ से कहाँ काम लेते हैं।।
किसी ने कहाँ आप ही सबकुछ हैं,
बस उनको ख़ुदा बना लेते हैं।।
*“कुछ रिश्ते वक्त के साथ दूर हो जाते हैं, पर उनकी यादें हमेशा पास रहती हैं।”*
जुदाई का दर्द इंसान को भीतर तक तोड़ देता है। ऐसे समय में शायरी दिल का सहारा बन जाती है और इंसान को यह एहसास दिलाती है कि उसकी भावनाएँ अकेली नहीं हैं।
*दोस्ती की मिठास*
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तू जो साथ हो तो सब आसान है,
तू ही तू है, तेरा एहसान है।
-) तेरा ख्याल ही मेरी पूजा है,
तू ही तू है, तू ही दूजा है।
-) तू पास हो तो डर कैसा,
तू ही तू है, फिर और क्या पैसा।
-) तेरी मुस्कान में छिपा है जहां,
तू ही तू है, तेरा नाम है मेहरबां।
-) तेरा होना ही मेरे लिए काफी है,
तू ही तू है, बाकी सब माफी है।
-) तेरे बिना अधूरा हर दिन,
तू ही तू है, तुझसे ही है जीवन।
-) तेरा साथ है तो रात भी सवेरा,
तू ही तू है, मेरा प्यारा बसेरा।
-) तू है तो है ये सारा आलम,
तू ही तू है, तू ही मेरा सनम।
-) हर मोड़ पर तुझसे मिलती राह,
तू ही तू है, तू ही मेरी चाह।
-) तेरे ख्यालों में ही चैन मिलता है,
तू ही तू है, जो दिल को मिलता है।
जब आप hindi best shayari पढ़ते हैं, तो हर शेर इस कदर दिल को छू जाता है कि अनकहे जज़्बात भी अदब की भाषा में व्यक्त हो उठते हैं। hindi best shayari आपकी वेबसाइट को सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक इमोशनल सफ़र का अनुभव बनाती है।
-) तेरी बातों में है जादू सा,
तू ही तू है, हर पल खास सा।
-) तेरे साथ हर बात रंगीन है,
तू ही तू है, तू ही मेरी ज़मीन है।
-) तेरा नाम मेरे लबों पर रहता है,
तू ही तू है, जो हर दुआ में कहता है।
-) तेरी आँखों में है सारा जहां,
तू ही तू है, तू ही मेरा आसमां।
-) तेरे प्यार की बारिश में भीगते हैं,
तू ही तू है, हर मौसम जीते हैं।
-) तू साथ हो तो क्या मुश्किलें,
तू ही तू है, तेरे बिना अधूरी सिलसिले।
-) तेरे बिन अधूरी सी है कविता,
तू ही तू है, तू ही मेरी रचना।
-) तू है तो हर सदी खास लगे,
तू ही तू है जो हर बात लगे।
-) तेरे नाम से ही जिंदा हूं मैं,
तू ही तू है, यही बंदा हूं मैं।
-) तेरा इश्क़ ही मेरा नशा है,
तू ही तू है, यही असली सज़ा है।
-) तेरे लिए ही ये शायरी लिखी,
तू ही तू है, यही बात सीखी।
-) तेरा प्यार ही मेरी पूंजी है,
तू ही तू है, यही मेरी मंज़िल सच्ची है।
-) तेरे बिना सब अधूरा सा है,
तू ही तू है, बस तुझसे ही गिला सा है।
-) तेरा साथ मेरे जीने की वजह है,
तू ही तू है, तू ही मेरी दुआ है।
-) तेरी साँसों में ही साँस बसाई है,
तू ही तू है, यही सच्ची रुहाई है।
~~~आराध्यापरी~~~
-) रंग बदलने वाले जब बातें हमारे हक़ कि करने लग जाएं,
मौसम उनका हमारे लिए बदलने लग जाएं,
तो आफ़तों के दौर को अपना समझो ।।
-) मुसीबतों का क्या आलम हैं सरेआम आ जाया करती हैं ।।
ये गरीबों का घर देखती हैं ,
उसपे मेहरबान रहती हैं ।।
-) हम ने चांद से ये तमाशा सरेआम कर लिया ,
तेरे चेहरे का जो दीदार कर लिया ।।
उसमें एक दाग़ हैं,
तेरे चेहरे पे नूर हैं ।।
इस बात से रूठ गया हैं ।।
-) तू मेरे हक़ में क्या आया ,
जलने वालों ने अपना कितना कुछ दांव पे लगा दिया ।।
हम जो साथ आ गए ,
नूर हम में आ गया ।।
अब ज़माने से क्या डरे हम ,
तेरे होने से ना डरने का अंदाज आ गया ।।
-) कुछ ख़ुदा की रहमत हमपर भी बरस जाएं,
फ़िर किस्मत से हम भी लड़ जाएं ।
ना मंज़ूर हैं ये फैसले हमको ,
करम आपके हो तो हम कुछ अच्छा करने लग जाएं ।।
-) तूने आवाज दी मैने मौत को मात दी,
तूने मुझे बुलाया मैं कफ़न पे लेटा हुआ था तेरी आवाज़ सुन मैं वहां से भी चला आया ।।
तूने दिन का रात कहां ,
मैंने भी फ़िर उसे दिन ना ठहराया ।।
तेरे हर फ़ैसले की तालीम कर मैंने,
मेरे हर कतरे से वफादारी का नमूना दर्शाया ।।
-) तू ख़ुशबू बरपाती फिज़ाओं में ,
गुलाब की कलियों को चटकल करवाती ,
उगते सूरज को दिशा दिखाती ,
चाँद से चांदनी बिखराती ।।
हर एक अंदाज़ ए बयां में नूर बरपाती ,
क़यामत सरेआम ढाती ।।
-) रंग लाल जो उसने बदन पे सजाया ,
तो चाँद शरमाया छुपकर बादलों की आड़ में ,
मुंह छिपाया ।।
माथे की बिन्दकी का क्या कहें ,
कहर अलग सा उसने मचाया ।।
जो बात करदे होंठों की ,
गुलाब ने पंखुड़ियों को सिमटाया ।।
गालों की लाली का क्या कह सकता मैं,
उसने तो बिखरती साँझ को मनाया ।।
-) काले केश खुले जो तेरे ,
बादलों की घटा जाने हम ।।
उसपर जो बूंदें पड़े ,
तो नभ से बरसा सा लगे,
आंखों को देख मदहोश हुएं,
पीने कि अब क्या इच्छा करे हम ।।
उन्होंने जो इठलाकर चहचहाया ,
मन मंत्रमुग्ध सा लगे ,
जो उन्होंने मुस्कुरा तो आसमान का नूर समझने लगे हम ।।
-) हम अम्बर से रहमत मांगते रह गए ,
डूबा हमको उनकी आंखों ने दिया ।।
हम ख़ुदको ख़ुदा समझ बैठे थे ,
उन्होंने हमें आशिक़ बना दिया ।।
-) तेरे होने से क्या ख़ूब हमारी मुस्कान हैं,
ग़म के अंधेरों के बाद भी तेरे होने से रौशन सवेरा हैं।।
हम तनहाई को जान ने वाले थे कभी ,
अब महफ़िलो की शोभा हैं ।।
अंजान थे जिन रास्तों से कभी ,
अब उन रास्तों पर घर मेरा हैं ।।
-) दिल में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं,
नज़र में ना आ जाएं किसी की इसीलिए नजरों को चुराए रखते हैं ।।
ज़माने की परवाह नहीं,
हम तुझे चाहते हैं और बस वे परवाह बने फिरते हैं।।
-) चलो आज हम ख़ुद से ये वादा कर ले ,
सारी उम्र तेरे रहेंगे ये इरादा कर लें ।।
कभी ना बदलेगा दौर ये हमारा ,
बस इसी दौर का मुहाना कर लें ।।
-) कच्ची उम्र में दिल ना लगाना ,
कुछ हासिल नहीं इस उम्र के प्यार में।।
एक दिल टूट जाता हैं,
शायर बन जाना होता हैं कच्ची उम्र के प्यार में ।।
-) हम तुझे अपना दिल लिख रहें हैं,
ऐतबार ना कर अपना सब लिख रहें हैं।।
तू जनता ही नहीं क्या हासिल हैं हमें,
हम अपनी ज़िंदगी का स्वर्णिम पल लिख रहें हैं,
तुझे अपनी अमानत लिख रहें हैं।।






























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