Romantic Shayari with Images -: दोस्तों के लिए लिखी गई शायरियाँ केवल शब्द नहीं होतीं, बल्कि उन यादों का संग्रह होती हैं जो जिंदगी को खूबसूरत बनाती हैं।
*“दोस्ती वो नहीं जो सिर्फ पास हो, दोस्ती वो है जो हर एहसास में साथ हो।”*
बचपन की शरारतें, कॉलेज के दिन, लंबी बातें और हर मुश्किल में साथ निभाने का एहसास — ये सब हमारी शायरियों में जीवंत हो उठते हैं।
*तन्हाई और खामोशी के एहसास*
-) हम बदनामी के डर से परेशान नहीं थें,
ग़म ये हैं कि उसका नाम सरेआम ना हो ।।
जो हम पे गुजरी उस से हम गुज़र जाएंगे ,
उसके दामन पे दाग तनिक भी ना हो ।।
-) एक उम्र लगती हैं समझने में यार को ,
लोग चंद मुलाकातों में बता देते हैं बेवफ़ा यार को ।।
उन्हें मालूम ही नहीं क्या हैं मसला ,
वे बस उलझा देते हैं बात को ।।
-) तेरे बग़ैर जाने कैसी गुजरी ,
जितनी गुजरी बड़ी बुरी गुजरी ।।
हमें मंज़ूर ना थी ये यातना दिल की ,
बड़ी ख़राब हालत थी दिल की ।।
-) किसे मंज़ूर बिछड़ना यार का ,
बिछड़ने के बाद ग़मो का सौदा हैं ।।
तन्हाइयों का आलम हैं,
सफ़र का अंजान रास्ता हैं।।
-) उसके बग़ैर दिल कैसे लगेगा ,
लग भी गया तो क्या पहले जैसा रहेगा ।।
हम सरेआम बदनाम भी होंगे ,
और नाम क्या फ़िर पहले जैसा रहेगा ।।
-) ज़िंदगी की तलाश में हम ना जाने कहां आ गए ,
लगे ऐसा हाथ में जाम लेकर हम जन्नत में आ गए ।।
-) मौत तेरे आने से पहले ,
जो उसकी गोद में सिर रखा जाएं ,
तो क्या बात होगी ।।
जीते जी जन्नत होगी ,
फिर मरने की आस ना होगी ।।
एक तड़प होगी,
और क्या ख़ूबसूरत हमारी मौत होगी ।।
-) उसे देखकर गज़ल ने अपना रूप ले लिया,
जो हक़ीक़त में मुमकिन ना होती ,
वैसी ही शक्ल ले ली ।।
मैं बस ख़्वाबों को लिखता था ,
लगे ऐसा ख़्वाबों की बात ख़ुदा ने गंभीर ले ली ।।
-) ये तमाशा सरेआम करने को जी चाहता हैं,
उसके नाम दिल लिखने को जी चाहता हैं।।
और तो कुछ हैं नहीं पास मेरे,
बस अपने आप को उसे समर्पण करने को जी चाहता हैं।।
-) ये बातें भी सरेआम कर ,
मेरे होने का एहसान कर ।।
बदनाम किया हैं ताउम्र ,
कुछ क्षण के लिए मेरा नाम कर ।।
-) कमबख्त इश्क़ ने हमको भी ठिकाने लगा ही दिया,
हम जो सोचते थे कि हमसे आगे कुछ नहीं ,
इसने हमको रास्ता दिखा ही दिया ।।
-) क्या करे कुछ तो ज़िक्र कर ,
बदनामियों के सबब को अब तो हवा कर ।।
सोचते हैं इस शहर को छोड़ जाएं ,
मुझपे पे करम कर , पनाह को खत्म कर
हमें इस शहर से जुदा कर ।।
-) हम ये शहर भी छोड़ देना चाहते हैं,
किसी और की पनाह पा लेना चाहते हैं।।
भरोसा था इसकदर हमको,
तु ख़ुदा था मैं केवल इंसान था
अब उस हक़ से बहुत कुछ मांगना चाहते है,
हम अपने हिस्से से हक़ अदा चाहते हैं।।
-) तुम जो पत्थर बने रहें ,
तो हम में भी कहां मोम से बचेंगे ।।
जज़्बात बहते रहेंगे यूं ही पानी के मोल ,
फ़िर कहां इनमें वो पुराने नुक़्स बेचेंगे।।
-) हम को सोच क्या हैं हम,
अंधेरे का चिराग़ हैं हम ,
ज़माने से जुदा हैं हम
तेरे दिल के मरीज हैं हम ,
सबकुछ तू हैं और तेरे बस मुरीद हैं हम ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तू ही तू है मेरे साथ हर मोड़ पर,
जैसे साया चलता हो हर ओर पर।
-) तेरी यादें हैं सांसों के साथ,
जैसे धड़कन हो बस तेरे नाम के साथ।
-) हर पल तुझमें खो जाने का मन है,
तू ही तू है, यही तो जीवन है।
-) तेरा नाम लूं तो सुकून आता है,
तू ही तू है जो दिल को भाता है।
-) तू साथ है तो क्या फिकर की बात,
तेरे बिना तो अधूरी है हर रात।
-) चाँद भी तुझमें ही दिखता है आजकल,
तू ही तू है मेरे ख्वाबों का हलचल।
-) हर धड़कन में तेरा ही एहसास है,
तू ही तू है, यही मेरा आस-पास है।
-) तेरे बिना सूना लगता है जहां,
तू ही तू है मेरा सारा आसमां।
-) तू जो पास हो तो सब अच्छा लगे,
तेरे बिना तो खुद से भी डर लगे।
-) हर राह में तेरा ही नाम लिखा है,
तू ही तू है, जो रूह में बसा है।
-) तेरे ख्यालों में हर दिन बीते,
तू ही तू है जो हर सदी जीते।
-) दिल की हर बात तुझसे जुड़ गई,
तू ही तू है, ज़िंदगी खुद जुड़ गई।
-) तेरा नाम लबों पर हर घड़ी,
तू ही तू है, बाकी सब है खाली।
-) हर सुबह तुझसे होती है रोशन,
तू ही तू है, बाकी सब है अनसुना।
-) तू हो साथ तो सफर भी आसान,
तू ही तू है, यही है पहचान।
*“खामोशी भी कभी-कभी चीखती है, बस सुनने वाला दिल चाहिए।”*
यह उन लोगों के लिए है जो अपने दिल की बात किसी से कह नहीं पाते, लेकिन शब्दों में अपना सुकून ढूंढते हैं।
*ज़िंदगी और प्रेरणा की शायरियाँ*
ज़िंदगी हर दिन एक नया सबक देती है। कभी सफलता मिलती है, कभी असफलता; कभी उम्मीद जागती है, तो कभी निराशा घेर लेती है। ऐसे समय में प्रेरणादायक शायरियाँ इंसान को फिर से आगे बढ़ने का हौसला देती हैं।
-) तेरा चेहरा यादों की किताब है,
तू ही तू है, जो हर बात में जवाब है।
-) हर बात में तेरा नाम आता है,
तू ही तू है जो दिल को भाता है।
-) तू जो पास है तो दुनिया हसीन,
तू ही तू है मेरी हर ताबीर की जमीन।
-) तेरी हँसी है मेरा जहां,
तू ही तू है हर सुबह और हर शाम।
-) तेरे साथ ही जीना है अब,
तू ही तू है हर धड़कन का सबब।
-) तू दूर हो फिर भी पास लगे,
तू ही तू है जो हर एहसास लगे।
-) तेरा नाम लिखूं हर सांस पर,
तू ही तू है हर आस-पास पर।
-) तेरा साया मेरे साथ चलता है,
तू ही तू है जो हर हाल में पलता है।
-) तेरे होने से ही ये जीवन है,
तू ही तू है, तू ही मेरा मन है।
-) तेरा प्यार है रौशनी का उजास,
तू ही तू है, हर दिल के पास।
~~~आराध्यापरी~~~
-) गुजरी दिल पे गुज़र जाती जो किसी और पे तो जाने क्या होता ,
एक जान खोती सबकुछ बर्बाद होता ,
किसी के फैसले में हक़ ना होता ,
मेरे जानने वाला सबकुछ खो चुका होता ।।
-) हम किसी के हो ही गए ,
होने से नूर में आ ही गए ।।
वे अजनबी थे कभी अब दिल में ,
अब दिल में उनका हुक्म चलता है ।।
-) सबकुछ तेरा ही हैं और किसी से क्या कहें ,
दिल तुमने चुरा ही लिया अब किसी और से क्या कहे ।।
अंजान शहर में एक रास्ता मिल ही गया ,
मेरे दिल का मालिक अब दिलदार मेरा हो गया इसके आगे क्या कहे ।।
-) हमसे जुदा ना हो हम बेफिक्र नहीं,
हम तेरे हैं फ्रिकमंद हैं ।।
हमें गिला नहीं कि पूछें किस बात से ऐतराज हैं ,
हम जानते हैं तू हमारा हैं।।
-) तुम दिल लगाने से कतराते हों ,
हम सौदा दिल का कर बैठे हैं,
तुम इस जंजाल कहते हो ,
हम इस जंजाल में फंस बैठे है,
तुम ख़ुदको इश्क़ का बादशाह बुलाते हो,
हम तुम्हारे गुलाम बन बैठे हैं।।
-) तुम बिछड़ने का शौक रखते हो
हम बस तुम्हारे साथ रहने का ।।
तुम ख़ुद से इश्क़ करते हो ,
हम तुम्हारे इश्क़ को ख़ुदा कहते हैं
तुम जागीर बनाने की बात करते हो ,
हम सबकुछ लुटाने को आतुर रहते हैं।।
-) इतना वक्त भी ना लगाओ कि हमें हासिल कुछ भी ना हो,
तेरे इंतजार में वक्त भी कम ना हो
मुलाक़ात का लम्हा आख़िर ना हो
वक्त जाने के बाद आबरू ,
वक्त होने की गुंजाइश ना हो ।।
8 ) एक तुझे याद करता आशुतोष अब तेरे द्वारे आ ही गया ,
सबकुछ मुक्कमल इश्क़ कर ही गया ,
जो रूठा था एक कोई अब उसको मना ही गया ,
तू जाने हाल आशुतोष का ,
वो क्या ख़ूब बेहाल हो ही गया ।।
-) हम नहीं चाहते किसी की आबरू सरेआम लूटे ,
किसी का घर ना चले किसी का दिन ना कटे ।।
आजमाइश ना हो आजमाने कि,
वक्त कि रेखा ऐसे ना कटे ।।
जो हमपे गुजरी उसका साकी ना हो ,
बाकी की ज़िंदगी यूं ही ना कटे ।।
-) तू इश्क़ की खूबसूरत किताब बन गईं,
मेरी महबूबा मेरी जान बन गईं ।।
जो कभी अजनबी थी हमसे,
इस दिल की सरताज बन गई ,
वो जो ना थी कुछ यारों,
वो ही ज़िन्दगी बन गईं ।।
-) हम जो ना रहें तो कहना उससे ,
तुझे चाहने वाला जाने कैसे क्या कर गया ।।
सबकुछ था जिसके पास वो ख़ुदा से एक फरियाद करता रह गया ,
वो तुझसे मिलने कि आस में मर गया ।।
वो तेरा ही था तू उसकी अमानत जान से प्यारी थी,
तेरा आशिक़ तेरा नाम लेकर ख़ुदा के घर गया ।।
-) वो फरियाद करता रह गया ,
उसको एक आस थी ख़ुदा से ,
कभी तो मिलेगी वो जलपरी उसकी ,
ख़्वाबों कि हक़ीक़त ,
क़िस्मत कि क़ीमत
वो अरदास करता ही रह गया ।।
-) हम जानते हैं क्या मिलना हैं किस्मत में ,
कुछ भी नहीं हक़ीक़त में ।।
सब भ्रम हैं दो पल के ये पास नहीं,
क्षणिक पल हैं दो पल के ,
हम अंजान हैं हादसों से या कहें हैं हादसों में ।।
-) तेरे बग़ैर ही अच्छे हैं हम ,
आफतों से परेह हैं हम ।।
तेरे होने से मर्माहत हैं हम ,
बस इस तरह से आबाद है हम ।।
-) तू ख़ुदा की रहमत हैं,
तू हमारी हक़ीक़त हैं ।।
तू जाग़ीर हुस्न की ,
तू नूर चांद की हैं ।।
तू इठलाती किरण ,
तू जाने जा बंदिगी हैं ।।
-) हम बर्बादी की आख़िरी हद थे ,
हम जहां खड़े थे उसके बाद कुछ भी नहीं था ।।
हम सब की आख़िरी उम्मीद थे ,
हमारे बाद हम जैसा कोई ना था ।।
-) मैं तबाह हूं तेरे इश्क़ में ,
ये भी किसी से कम हैं क्या ।।
आजकल के दौर में किसी का कौन हैं ,
मेरा जैसा तेरा हैं ये भी किसी से कम है क्या ।।
-) हम बर्बाद हो हीं गए ,
तेरे इश्क़ में जान हम कुर्बान ही हो गए ।।
क्या बातें करें अब ज़माने की ,
अब ज़माने से बैगाने हम हो ही गए ।।
-) चांद को देखकर ये ख़्याल आने लगा ,
तारों की टिमटिमाहट में कैसा क्या चमकता हैं ।।
बादलों की आहट में कैसे सूरज निकलता हैं,
तेरा होना भी मुझे ऐसा ही लगता हैं।।
-) चांदनी रात में तेरा इंतजार कर रहा हूं मैं,
इस पूर्णिमा में बस तेरा ही नाम रट रहा हूं मैं।।
मुझे तो याद नहीं कुछ भी रास्ता घर का मेरा ,
तेरे ही भरोस सफ़र काट रहा हूं मैं m।
-) अंजान सड़क पर एक राही हूं ,
कोई मिल जाएं अपना बस फिर साकी हूं ।।
हैरान यूं भी ना हो देखकर मुझे ,
मैं तेरा अपना ही हूं ।।
-) ख़ुदा से किसी ने जन्नत को मांगा ,
हम तुझको मांग आएं हैं ।।
सबने धन दौलत भर के मांगा ,
हम ताउम्र तेरा साथ मांग आएं हैं।।
-) गुनहगार ना बना माना कि तेरी अदालत हैं,
गुनाहों को मेरे सिर यूं भी ना मड़ अदालत ख़ुदा की भी हैं ।।
-) हमसे यूं ख़ौफ़ भी ना खा ,
हम तेरे क़रीब हर लम्हा रहें ।।
जिस बात से तुझे गिला हैं ,
उस बात से हमें ऐतराज़ हैं ।।
जिस डगर तू ना जाएं ,
उस रास्तें से हमें परहेज हैं ।।
-) कभी किसी से ये ना कहना ,
हम तेरे नहीं है ।।
हर कतरे से तेरे अक्स को निखारा हैं हमने ,
हम तेरे हर अंजाम के साथी हैं।।
-) वक्त बर्बाद कर के ,
ये तमाशा सरेआम ना कर ।।
कुछ भी हासिल नहीं हमको ,
तेरे बाद अपनी जान से लुट गए हम ।।
-) कर वादा उम्र भर का ,
साथ हम सात जन्मों का मांगते हैं ।।
तू कुछ ना पहल करें,
हम फिर भी तुझे ही मांगते हैं।।
-) चांदनी ने नूर बरसाया ,
नूर हमने अपने आप पे आजमाया ।।
कुछ क़ुदरत ने करिश्मा दिखाया ,
कुछ तेरी यादों में हमने ख़ुद को ख़ुदा बनाया ।।
-) तू जो वफ़ा की तालीम कर रहा हैं ,
मेरे जैसे किसी की आस कर रहा हैं।।
तुझको हासिल नहीं जहां में एक भी शख़्स,
बातें जहां भर के लोगों की कर रहा हैं ।।
-) आसमान नूर बरसाने लगा ,
रंग सांझ का सुनहरी होने लगा ।।
तेरे साथ की ख़बर लग गई शायद इन सबको ,
तभी रंग सारा कुछ बदलने लगा ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~













































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