Shero shayari love in urdu :- मैंने खुली आंखों से उसके ख्वाबों को सजाया हैं।।हम मानते हैं कि शायरी लेखक की नहीं रहती; वह उस हर व्यक्ति की हो जाती है जो उसे अपने दिल से पढ़ता है।
*हमारा उद्देश्य*
“Hindi Best Shayari” का उद्देश्य केवल शायरी प्रकाशित करना नहीं है। हम एक ऐसा मंच बनाना चाहते हैं जहाँ हर पाठक अपने जज़्बातों को पहचान सके। यहाँ हर रचना पूरी ईमानदारी और भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत की जाती है।
हम उन लोगों के लिए लिखते हैं जो महसूस करते हैं, जो अपने दिल की बात कहना चाहते हैं और जो शब्दों में सुकून ढूँढते हैं। हमारा प्रयास है कि हर शायरी पाठकों के दिलों तक पहुँचे और उन्हें एक नई सोच, उम्मीद और अपनापन दे।
-) वो मोहब्बत को सब मानने वाला शख़्स,
ख़ुद को ख़ुदा से कम नहीं आंकता था ।।
मैं लाख चाहता था उस से की ना इठलाए वो ,
वो अपनी मोहब्बत को ख़ुदा मानता था ।।
-) वक्त बदलने वाले लोग ,
ख़ुद को बदलने लगे ।।
पहले सब कुछ बदल देना चाहते थें,
अब एक रास्तें पर ही चलने लगे ।।
-) हम रेत के ढ़ेर पर घर की नींव रख बैठें,
बेखबर थें समन्दर की लहरों से ।।
जब तक होशियार होते ,
हमारे घर को समन्दर अपनी बाहों में ले डूबा था ,
हम करते भीं क्या आख़िर,
अपनी करनी पर हम घर खो बैठें।।
-) राई के पहाड़ बनाना ,
ये भीं आम बात तो नहीं ।।
हमनें अपनी सारी उम्र को एक तराज़ूँ में तौला,
तब जाकर कुछ हासिल हुआ ।।
-) उन्हें रूठने का हुनर इस क़दर था ,
हम ज़रा ना मनाएं उन्हें ।।
वो बातों के बाण से हमारी जान निकाल देता हैं,
बात करता भीं नहीं और करना चाहता भीं हैं,
बस इसी बात में वक़्त निकाल देता हैं।।
-) मेरी क़ब्र को सजाने की कोशिश ना करना ,
मुझे दफ़न के बाद अकेला छोड़ देना ।।
चादर से ना ढकना ,
बस इसी चांदनी से मुझको लपेटें रखना ।।
महफूज़ हो जाऊंगा मैं,
इस आसमान की पनाह में,
बस मुझे इसी पनाह में रखना ।।
-) कुछ तो रूठने वाले,
मेरा भी ख़्याल किया कर ।।
वे वक़्त रूठ जाना ,
आख़िर कहां का इंसाफ हैं।।
-) हमें जान जाओ तो ये भी जान जाना ,
की हम किन राहों मुसाफ़िर हैं।।
इन राहों पर जो भीं गया हैं,
उसे मौत के अलावा कुछ मिला नहीं हैं।।
-) बात ये भीं मेरे हक़ में कर ,
की तेरे जैसे को मैंने किस क़दर संभाल रखा हैं।।
जिस को एक पल ना झेले कोई,
उसे हमने एक अरसे से पास में रखा हुआ हैं।।
-) मेरी बातों का ख़्याल रख ,
मुझे इन इल्ज़ामों आज़ाद कर ।।
कब तक जान जिस्म में रहेगी ये सब सुनकर,
कभीं तो जिस्मों जान की हिफ़ाज़त कर ।।
-) कब तक जान रहती ,
कभी तो निकल ही जाना था इसे ।।
एक अरसे से बांध रखा था हमनें इसको,
तेरे ना आने की ख़बर लगी तो ये जिस्म से फ़नां हो ही गईं ।।
-) फिज़ा हमसे मिली और खिलखिलाने लगीं,
बसंती हवा फिर खलियानों में अपना रंग ज़माने लगी ।।
हम भीं मौसम के आग़ोश में आ ही गएं,
घटाएं छाने लगीं हम कहर मचाने लगें।।
-) मैं विनाश की वीणा का सरगम हूं ,
जब तक ना छेड़ा जाऊँ तब तक समंदर सा शांत हूं ,
और छेड़ दे कोई तो ज्वालामुखी की आग हूं ।।
-) हम दूर आसमान में कहीं उड़ जाएंगे एक दिन ,
उड़ान कितनी हैं पंखों में हिसाब ना लिया करों।।
जितना आसमान नीला सा दिखता हैं,
उस से परेह एक जहां हैं,
उस जहां का सिकंदर हूं मैं।।
-) उसने एक पल की कद्र ना की ,
उसे सारी उम्र मिलकर भी क्या हो जाता ।।
दिल मेरा था टूटा हुआ टूटा ही रह गया ,
वो एक बार अरदास सुन लेता ,
तो जाने उसे क्या हासिल हो जाता ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) मेरी दुनिया बसती है मां की मुस्कान में,
हर सुकून छुपा है उसकी जान में।
-) मां के बिना अधूरी है हर कहानी,
वो है तो लगे हर खुशी हमारी।
-) मां का प्यार नहीं होता कोई हिसाब,
उसके कदमों में ही है सारा आदाब।
-) दुनिया भुला दूं मां की खातिर,
वो है तो सब कुछ है बेहतर।
-) मां के आँचल की छांव निराली,
हर दुख में बनती है वो सवाली।
-) मां की ममता है सबसे प्यारी,
वो बिना बोले सब कुछ समझारी।
-) उसकी दुआओं से चलता है जहां,
मां ही तो है मेरी पहचान।
-) जब भी टूटे दिल या हौसले,
मां के लफ्ज़ फिर से संजो ले।
-) मां का साथ तो जैसे वरदान है,
उसकी गोद में स्वर्ग समान है।
-) मां की आंखों में बसी दुआ,
मेरे लिए सबसे बड़ी खुदा।
-) मां के बिना अधूरा जीवन लगता है,
हर सपना भी अधूरा सा दिखता है।
-) मां की बातों में जादू सा असर,
हर घाव पर बन जाती है मरहम अगर।
-) मां वो दीपक है जो हर रात जलती है,
और हमारी राहों को रोशन करती है।
-) मां के बिना सवेरा नहीं आता,
उसकी पुकार ही दिन को जगाता।
-) मां वो किताब है जो हर ज्ञान सिखाती,
हर दर्द को चुपचाप सह जाती।
-) मां का प्यार नहीं होता कम,
वो तो बहता है जैसे गंगाजल दमदम।
-) मां के शब्दों में दया की धारा,
उसका प्यार है सबसे प्यारा।
-) मां जब पास हो, डर दूर हो जाता है,
उसका आंचल हर दर्द को समेट लाता है।
-) मां का स्पर्श जैसे ठंडी हवा,
उससे मिटता हर तनाव और दवा।
-) मां ही है जो बिना कहे सब जानती है,
हर परिस्थिति में साथ निभाती है।
-) मां के बिना जीवन सूना लगता है,
हर रंग उसमें ही बसता है।
-) मां की आंखें कभी झूठ नहीं बोलती,
उसमें हर वक्त ममता ही झलकती।
-) मां के बिना घर भी घर नहीं रहता,
उसकी हंसी से ही आंगन सजता।
-) मां का आशीर्वाद हर राह आसान कर दे,
हर संकट में वो दे
वता बन कर खड़ा कर दे।
-) मां की मुस्कान है मेरी सुबह,
वो ना हो तो कुछ भी नहीं लगता शुभ।
-) हम बदनामी के डर से परेशान नहीं थें,
ग़म ये हैं कि उसका नाम सरेआम ना हो ।।
जो हम पे गुजरी उस से हम गुज़र जाएंगे ,
उसके दामन पे दाग तनिक भी ना हो ।।
-) एक उम्र लगती हैं समझने में यार को ,
लोग चंद मुलाकातों में बता देते हैं बेवफ़ा यार को ।।
उन्हें मालूम ही नहीं क्या हैं मसला ,
वे बस उलझा देते हैं बात को ।।
-) तेरे बग़ैर जाने कैसी गुजरी ,
जितनी गुजरी बड़ी बुरी गुजरी ।।
हमें मंज़ूर ना थी ये यातना दिल की ,
बड़ी ख़राब हालत थी दिल की ।।
-) किसे मंज़ूर बिछड़ना यार का ,
बिछड़ने के बाद ग़मो का सौदा हैं ।।
तन्हाइयों का आलम हैं,
सफ़र का अंजान रास्ता हैं।।
-) उसके बग़ैर दिल कैसे लगेगा ,
लग भी गया तो क्या पहले जैसा रहेगा ।।
हम सरेआम बदनाम भी होंगे ,
और नाम क्या फ़िर पहले जैसा रहेगा ।।
-) ज़िंदगी की तलाश में हम ना जाने कहां आ गए ,
लगे ऐसा हाथ में जाम लेकर हम जन्नत में आ गए ।।
-) मौत तेरे आने से पहले ,
जो उसकी गोद में सिर रखा जाएं ,
तो क्या बात होगी ।।
जीते जी जन्नत होगी ,
फिर मरने की आस ना होगी ।।
एक तड़प होगी,
और क्या ख़ूबसूरत हमारी मौत होगी ।।
-) उसे देखकर गज़ल ने अपना रूप ले लिया,
जो हक़ीक़त में मुमकिन ना होती ,
वैसी ही शक्ल ले ली ।।
मैं बस ख़्वाबों को लिखता था ,
लगे ऐसा ख़्वाबों की बात ख़ुदा ने गंभीर ले ली ।।
-) ये तमाशा सरेआम करने को जी चाहता हैं,
उसके नाम दिल लिखने को जी चाहता हैं।।
और तो कुछ हैं नहीं पास मेरे,
बस अपने आप को उसे समर्पण करने को जी चाहता हैं।।
-) ये बातें भी सरेआम कर ,
मेरे होने का एहसान कर ।।
बदनाम किया हैं ताउम्र ,
कुछ क्षण के लिए मेरा नाम कर ।।
-) तेरे बाद ये क्या हुआ ,
मेरे जैसा पागल हुआ ।।
कहते हैं लोग ये पहले मैं ही था ,
पूछा तेरा नाम तो ये पक्का हुआ ।।
तेरे नाम का दीवाना ,
अब बेगाना हुआ ।।
-) नज़र ने नजराने क़ैद कर लिए ,
इन्हें नजरों से उतारकर पन्नों पर कैसे पेश करें।।
हम हक़ीक़त से वाक़िफ ना थें,
अपनी बेगुनाही का सबूत कैसे दें ।।
-) कुछ आसमान नूर बरसाता रहा ,
कुछ कुर्बत अपनों ने कर दी ।।
कुछ ग़मों ने घेर लिया ,
कुछ किस्मत ने अपनी कर दी ।।
-) मेरे हिस्से में वो आ गया ,
जो ख़ुदका ही ना हुआ ।।
मैं अपनी सी करता रहा और वो ,
मेरी हा को ना करता रहा,
और फ़ैसला हम दोनों का ही ना हुआ ।।
-) कुछ अपनों के ग़म हैं,
जाने में जाने कितनी उम्र लगेंगी ।।
एक उम्र तो गुज़ार दी याद में उसकी ,
दूसरी उम्र में जाने कितनी साल लगेंगी ।।
-) पहलगाम की वादियों में शांति खो गई,
खून के धब्बे, खुशियों की रोशनी सो गई।
-) जहाँ बहती थीं नदियाँ, अब दुःख की कहानी है,
पहलगाम में छाया, मातम और वीरानी है।
-) वीरों की धरती पर आज मातम छाया,
दगाबाजों के हमले ने सबको रुलाया।
-) चुप हैं फूल, सुनसान है बाग़,
पहलगाम में सन्नाटा, असहमति का धागा।
-) हर बूँद खून की गवाही देती है,
पहलगाम की ज़मीन अब अज़ाब जिएगी।
-) शहीदों की कुर्बानी, अमर रहेगी,
पहलगाम की धरती पर शांति फिर से आएगी।
-) दर्द का अंधेरा, मन में ढल गया,
पहलगाम की हवाओं में आज खून बह गया।
-) जिक्र है उनके साहस का, जो जिए थे वहाँ,
पहलगाम की वीरता का, है जोश नया।
-) कश्मीर की आँखों में आँसू हैं बहे,
पहलगाम की वादियों में हर्ष कभी न रहे।
-) शांति की आस में, ढूंढते हैं राहें,
पहलगाम के दिल में, जख्म अब भी गहरे हैं।
-) किसने सोचा था, ये दिन आएगा,
पहलगाम की खुशियों पर, खून से लिखा जाएगा।
-) बर्बादी का मंजर, आँखों से मिटा नहीं,
पहलगाम की धूप में, साया कोई छिपा नहीं।
-) जिनके दिल में बसी थी, सुबह की किरण,
पहलगाम की रात में, खो गई सब करन।
-) ठंडी हवाओं में, छुपे हैं राज़ बहुत,
पहलगाम के जंगलों में, दर्द की आवाज़ बहुत।
-) हर एक ग़ज़ल में, जख्मों की कहानी है,
पहलगाम की वादियों की, सिसकती फ़ज़ा है।
-) टुकड़े-टुकड़े हैं सपने, बिखरे हुए जो हैं,
पहलगाम की राहों में, अब वीर बहादुर रो रहे हैं।
-) कुर्बानी का जज़्बा, जोश में दबा नहीं,
पहलगाम का हर दिल, आज भी खड़ा नहीं।
-) ख़ामोशी के दरम्यान, गूंजे हैं जज्बात,
पहलगाम की मिट्टी में, बसी हैं उम्मीदों की बात।
-) रंगीनियत भरी थी, जो खुशियों से पहले,
पहलगाम में अब बस, अँधेरा है और डर है।
-) सच्चे वीरों की याद में, किसानों का धरना है,
पहलगाम की मिट्टी में, सिसकियाँ सहमी हैं।
-) आओ मिलकर याद करें, उन बहादुरों को,
पहलगाम की जगहों पर, बिछे थे जो छोड़कर।
-) हर पेड़ की छाँव में, गूंजेगी हाय रे,
पहलगाम के अंगारों में, बसती हैं यादें सदा।
-) संगीन तस्वीरों में, यादें हैं बसी,
पहलगाम की धरती पर, है कश्मीरी कहानी खास।
-) अलविदा उन लोंगों को, जो दे गए जान,
पहलगाम की सुरक्षित राहें, बना दें सबको मान।
-) विजयी झंडे लहराएंगे, जो शहीद हुए हैं,
पहलगाम की मिट्टी में, उनकी गूंज सदियों तक रहेगी।
~~~आराध्यापरी~~~






























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