Best Sad Shayari for WhatsApp
*शायरी लिखने के लिए आवश्यक अभ्यास*
अच्छी शायरी अचानक नहीं बनती। इसके लिए निरंतर अभ्यास आवश्यक है।
* प्रतिदिन कुछ न कुछ लिखना।
* प्रसिद्ध शायरों और कवियों की रचनाएँ पढ़ना।
* नई उपमाओं और बिंबों पर ध्यान देना।
* अपनी लिखी हुई शायरी को दोबारा पढ़कर सुधारना।
* विभिन्न विषयों पर लिखने का प्रयास करना।
जितना अधिक व्यक्ति लिखता है, उसकी अभिव्यक्ति उतनी ही परिपक्व होती जाती है।
-) हम अपने दामन पर क्यों ऐसा दाग़ लगाएं,
हम किसी के रूठ जाने का इल्ज़ाम क्यों अपने सिर लेने लग जाएं।।
हम चाहकर भीं नहीं चाहते ऐसा कुछ ,
इस से अच्छा तो यहीं होगा ,
हम सारे फ़ैसले ख़ुद लेने लग जाएं ।।
-) प्रेम हमारा भीं अमर हो ही गया ,
हम श्याम और वो राधा सा हो गया ।।
कहानी पूरी हो सकती थीं हमारी ,
मग़र मिलन में बिछड़ने की साज ,
क़िस्मत ने रख दीं और हमारा बिछड़ना तय हो ही गया ।।
-) इन किताबों से निकल ,
इनके पार भीं एक दुनियां हसीन हैं आशुतोष।।
ये सच बताती हैं अक़्सर,
वहां झूठ की दुकान चलती हैं ।।
ये मोहब्बत का हमेशा फ़र्ज़ निभाती हैं,
वहां बेवफ़ाई को बड़ी आसानी से लिखा जाता हैं ।।
-) हम अपने अच्छे बर्ताव को भूल जाएं तो कैसा होगा,
सिर्फ बुरा बन कर पेश आने लगे तो कैसा होगा ।।
हमसे सब सहजता से पेश आते हैं,
हम असहज होनें लग जाएं तो कैसा होगा ।।
-) हम जैसा अपने क़िरदार को भुलाने लगें,
तो समझ जाइयेगा ज़ख्म बड़े गहरें से हैं ।।
ये करम किसी ग़ैर के नहीं,
अपने हीं किसी ख़ास के हैं ।।
-) तुम याद किया करों हमें ,
हम कोषों दूर से भीं पल भर में आ जाएंगे ।।
-) समंदर से यूं भीं ना ऐंठिये ,
ये चाहें तो ना जाने कितने जहाज़ डूबालें ।।
इसकी सादगी को मज़बूरी ना समझिएं,
ये शांत हैं इसका मतलब ये नहीं,
इसपे ज़बरदस्ती जताई जाएं ।।
-) कस्ती डूबने का मन कर रहीं हैं,
मेरी हस्ती डूबने का मन कर रहीं हैं ।।
हम चाहतें हैं कुछ और दिन जी जाना चाहते,
हालात हमें मारने का मन कर रहें हैं ।।
-) हम ख़ुद को समझ ही नहीं पा रहें,
की हम क्या हो गएं ।।
पहले हम जरा जरा सी बातों पर ख़ुदको आक्रोश में ले आतें थें,
अब तो कुछ भीं हो जाएं हम ख़ुदको शांत से माहौल में ढाल आएं हैं ।।
-) बेख़ौफ से घूमने वालें ,
जब खौफ खानें लग जाएं ।।
तो समझ जाइयेगा कि ज़माने की हवा बदलनें लगीं,
कुछ हुनरमंदों को इस आग से बच निकलना आता हैं
ये बात नहीं कि सब खाक हो जाएं,
जहां बड़े बड़े जानवर जल जाते है वहां चूहे जैसे भीं बच निकल ते हैं।।
-) छोड़िए इश्क़ में जनाब मुआफ़ी क्या हैं,
ग़लती मोहतरमा की हो तो भीं मेहबूब को माफी मांगनी पड़ती हैं ।।
-) अब ये रास्ता छोड़ रहें हैं हम ,
इतने सालों की मेहनत को ।।
इस मुकाम पर लाकर अलविदा कह रहें है हम,
इसने बड़े बुरें वक़्त में हाथ थामा था ,
मग़र इस साथ को यहीं छोड़ रहें है हम ।।
-) बेहतर की तलाश ना कीजियें,
जो हैं उसे ही बेहतर बना लिजिएं ।।
क्या पता बेहतर की ख़ोज में ,
वाहियात सा हासिल हो जाएं ।।
-) हम इस अंदाज़ के एक मात्र हीं ऐसे इंसान थें,
हमारे बाद कोई भीं ऐसा ना था ।।
जो जुबान की बातें आंखों से ,
समझ जाया करता था ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
भावनात्मक जुड़ाव
पाठक अपनी ही भावनाओं को शायरी में महसूस करता है। यही जुड़ाव शायरी को लोकप्रिय बनाता है।
मानसिक सुकून
कई लोग अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। जब वे किसी शायरी में अपने मन की बात देखते हैं, तो उन्हें मानसिक राहत मिलती है।
-) अल्फ़ाज़ों में छुपी हुई तस्वीर सी लगती है,
कविता दिल की सबसे गहरी बात कहती है।
-) जब लफ्ज़ों से बहता है दर्द का दरिया,
कविता बन जाती है उस दर्द की जड़िया।
-)कुछ एहसास लफ्ज़ों में नहीं समाते,
कविता बनकर ही खुद को जताते।
-) कविता नहीं बस शब्दों का मेल,
ये है जज़्बातों का अनकहा खेल।
-) भावों की नाव में बैठकर चलो,
कविता के समंदर में धीरे-धीरे डुबो।
-) जब मन उलझे तो कविता सुलझाए,
हर चिंता को धीरे-धीरे मिटाए।
-) कविता वो आईना है जिसमें हम दिखते हैं,
बिना बोले भी सब कुछ कह देते हैं।
-) कभी उदासी में मुस्कान सी लगती है,
कविता हर रंग में जान सी लगती है।
-) कविता में ही बसी होती है सुकून की बात,
जैसे तपते दिल पर पड़ती हो बरसात।
-) कविता है खामोश लबों की आवाज़,
जो कह देती है दिल की हर राज़।
-) चुप्पी की जुबां है कविता की बात,
हर दर्द का बनती है ये सौगात।
-) हर अल्फ़ाज़ में मिलती है रूह की रौशनी,
कविता जैसे कोई छुपी हुई कहानी।
-) कविता एक पल की सोच नहीं होती,
ये दिल के हर ज़ख्म की सोच होती।
-) कविता वो जादू है जो दिल से निकले,
और काग़ज़ के ज़रिए दुनिया से बोले।
-) जब खुद को समझ न पाओ,
एक कविता लिख कर देखो, जवाब पाओ।
-) शब्दों से रंग भरती है कविता,
दिल के कैनवस पर उड़ती तितली सी।
-) कविता वो राह है जो दिल तक जाती है,
हर भावना को सच्चाई बनाती है।
-) जो किताबें कह न सकीं,
वो कविता ने दो लाइन में कह दी।
-) कविता सिर्फ़ कलम की ताक़त नहीं,
ये है रूह की सबसे बड़ी बगावत सही।
-) जब कोई अपना साथ न दे,
कविता तब भी साथ चलती है रे।
-) कविता है आत्मा की पुकार,
जज़्बातों की खुली बाज़ार।
-) लफ़्ज़ बिखरते नहीं, कविता में सवरते हैं,
जैसे आँसू पलकों पर ठहरते हैं।
-) कविता में जो रोता है,
वही असल में जीता होता है।
-) कविता से जुड़ती हैं हर एक रूह,
ये नहीं
बस शब्दों की कुछ बूंद।
-) कविता किसी मज़हब की मोहताज नहीं,
ये हर दिल की आवाज़ है कहीं।
~~~आराध्यापरी~~~
-) ना जाने किस बात से खफ़ा हैं वो ,
मुझसे रूठा हैं वो ,
कोई कहे उस से क्या हाल हैं मेरा ,
मेरा सबकुछ ही हैं वो ।।
-) वो जो एक शख़्स है बहुत खास हैं मुझे ,
उसके बग़ैर क्या हासिल मुझे ,
सब बर्बाद हैं कुछ ना पास हैं,
तू आ जाएं पास मेरे फ़िर क्या चाहिए मुझे ।।
-) ये शाम भी ढ़ल रही अब तो करीब आ बैठो ,
परिंदे सुबह के जाने वाले शाम को पेड़ पे ना वापिस आए,
तो सब वीरान लगता हैं।।
-) अब के ना जा जाने से कुछ नहीं हासिल हमें ,
जो तू गया तो सांसे टूट के बिखर जाएगी ।।
-) बड़ी मन्नतों से तुझे पाया हैं,
ऐसे एक छड़ में कैसे जाने दे ,
सारी उम्र की कमाई हो तुम ,
ऐसे कैसे बर्बाद होने दे ।।
-) आ जाओ रूठ के जाने वाले ,
तुझे मनाने में सारी उम्र लुटा देंगे ,
हासिल कुछ भी नहीं हमें ,
जो तू ना रहा तो जाने क्या कर देंगे ।।
-) बसंत की बहार का क्या करे ,
जब तू ही नहीं हासिल हमें ।।
ये रंगीन शामों का क्या करे ,
जब तू ही दूर हमसे ।।
ये ज़माने की महफ़िल भी जनाजा लगे ,
तू जब हासिल नहीं हमें ।।
-) चाहे लाख बुरा हूं मैं तुम तो ख़ुदा कि रहमत हो ,
मंजिलों से दूर हूं मैं तुम मंज़िल हो।।
मैं भ्रम का जंजाल हूं ,
तुम हक़ीक़त हो ।।
मैं झूठ की स्याही सही ,
तुम सच की सूरत हो ।।
मैंने दिल लगाना छोड़ दिया ,
तुम मेरी दिल्लगी हो ।।
-) कुछ हासिल होता तो ये वीरानापन ना होता ,
मैं खोजता रहता हक़ीक़त तू होता तो ये सफ़र ना होता ।।
हमसे एक वादा कर लो हमें हासिल हो जाओ तुम,
सबकुछ होता तो झंझटों का सफ़र ना होता ।।
-) तू ये बता तेरे नुक़्स में क्या बयान हैं,
मेरे हक़ में क्या बयान हैं ।।
मुझे ज़माने कि परवाह नहीं ,
मैं तुझसे हूं तू मेरा ही हैं,
जमाने कि बात बस फरेब हैं ।।
तू इस फ़रेब से जुदा हो ,
ये जान ले तेरा नाम मेरा हैं।।
-) क्या छोड़ आएं हम लगे सब छोड़ आएं हम ,
एक साथी करीब था बातों की उलझन में उसे छोड़ आएं हम ।।
ख़ुद से जुदा होने लगे ,
ज़िंदगी कि डगर बहुत दूर छोड़ आएं हम ।।
-) तेरे बग़ैर ये क्या हो रहा हैं,
तेरा दीवाना सरेआम बदनाम हो रहा हैं ।
आंखों में आंसु भर रहा हैं,
लगे ऐसा दिल से जुदा हो रहा हैं।।
सब लुटा रहा हैं,
तन्हाइयों का आशिक मिज़ाज हो रहा हैं।।
-) तेरे बग़ैर था कुछ नहीं लेकिन मुसीबतों का दौर ना था ,
खालीपन था पास मेरे,
मगर वीरानापन ना था ,
आवारा था मैं कभी ,
मगर बंजारा ना था ।।
घर कि ख़बर ना थी मुझे ,
मगर उस जगह से अंजान ना था ।।
पास में दिल ख़ाली था उसमें कोई कोई ना था ।।
-) तू मेरी करामातों का हिसाब दें ,
कुछ नहीं मेरा मुझे सुकून की तलाश दें ।।
वक्त कितना गुज़ारा मैंने,
उस वक्त का हिसाब दें ।।
-) भुला बैठा कोई शख़्स तनहाई को पसंद करने लगा,
तुझे चाहने वाला बे मौत मरने लगा ,
उम्मीद थी ताउम्र साथ की अब एक पल का साथ मांगने लगा ।।





























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