Bewafa Shayari in Hindi :-अच्छी हिंदी शायरी लिखने के लिए सरल और सहज भाषा का प्रयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है। अत्यधिक कठिन शब्दों का उपयोग शायरी को बोझिल बना सकता है। पाठक वही शायरी पसंद करता है जिसे वह आसानी से समझ सके और महसूस कर सके।
सरल भाषा का अर्थ यह नहीं कि शायरी साधारण हो जाए। इसका अर्थ है कि भावनाओं को स्पष्ट और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाए।
*“तेरी यादों का असर कुछ ऐसा है,*
*हर शाम तेरा नाम याद आता है।”*
-) हम इस खेल के सबसे उम्दा खिलाड़ी थें,
हम से बेहतर इसकी गहराई कोई नहीं जानता था ।।
हमें साजिशों ने इस मैदान से निकाल दिया ,
वरना हमारे होते हुएं तो हार जाना नामुमकिन सा था ।।
-) बहुत देर भीं ना करिए ,
इंतजार अब अच्छी बात नहीं ।।
कुछ इसी ताक में रहतें हैं,
कब मौकों को सबसे पहले लपका जाएं ।।
-) दिल हमारा जाने कितनी दफ़ा टूटा हैं,
अब तो इसका इलाज़ भीं मुमकिन नहीं ।।
लोग इतने के बाद शख़्स बदल लेते हैं,
इसकी चाहत उस एक से हटती नहीं ।।
-) हम जैसों को अगर बेइज्जती का स्वाद कोई चखाने लगें,
तो उनके पतन का रास्ता हम बनाने लगें ।।
हमें ये मंज़ूर नहीं कि हमारी आन पर आंच आएं,
हम चाहें तो ज़माने में आग़ लगा दें ।।
-) क़िरदार बदल जाएं तो कैसा होगा ,
सबकुछ ख़ाक़ जैसा होगा ।।
ये मुमकिन तो नहीं कि एक जैसा ही रहा जाएं ,
लोग बदलते नज़र आएंगे तो हमें भीं ख़ुद को बदलना होगा ।।
-) सीने पर पत्थर रख कर ,
कैसे जिया जाता हैं ।।
सबकुछ सुन कर कुछ ना कहां जाता हैं,
बेशर्मों जैसा रहा जाता हैं ।।
-) उनके बदलें रुख का क्या कहें,
हमारे अलावा सबकुछ उन्हें भाता हैं ।।
हम क़रीब थें एक ज़माने से उनके ,
अब हम ही दूर हैं सबसे उनसे ।।
-) आरज़ू ये थीं कि सेहरा हम बांधेंगे,
दुल्हन सी वो सजेगी ।।
हाल ये हैं हम दोनों भाग आएं हैं,
अदालत के दरवाज़े पर अब बारात लगेंगी ।।
-) हो इरादा अगर साथ देने का ,
तो ताउम्र के लिएं साथ देने का वादा कर ,
एक वादें पर हम अपनी सारी उम्र गुज़ार देंगे ।।
-) तुम जानते नहीं कि ,
हम क्या हैं हम महफ़िलों की शान हैं ।।
हम महकदें की जान हैं,
हम जाम की पहचान हैं ।।
-) हम सारी उम्मीदें ऊपर वालें के हाथ छोड़ आएं हैं,
अपनी कस्ती को किनारा मिल ही जाएगा ।।
दुखियों के मन की अरदास पूरी होती हैं,
जो उनके भरोसे छोड़ दें सब उसकी कस्ती भी किनारे लगती हैं ।।
-) ज़िंदगी जी तो ना सकें हम,
जैसी होनी चाहिएं थीं ।।
उम्मीद अब मौत से हैं,
ये सबसे आला सी होनी चाहिएं ।।
-) माना कि हम ठहर नहीं सकतें,
ज़्यादा बंदिश में रह नहीं सकतें ।।
मग़र कुछ तो बात ऐसी भीं हैं,
जिनके आगे हम बेबस हैं ।।
-) फ़ूल को तोड़ ना माली ,
कली से खिला हैं तो कुछ तो आज़ाद रहने दे इसे ।।
इसने अपनी उम्र को अभी जिया भीं नहीं ,
और तू इसे तोड़ कर सारी आस ख़त्म कर देना चाहता हैं ।।
-) फूलों को ये ख़बर किसने दी ,
की हम बाग़ में बागवानी कर रहें हैं।।
पहले इनकी रंगत देखी थीं मैंने,
कुछ मुरझाएं से थें अब खिलखिलाकर हँस रहें हैं ।।
आज सोशल मीडिया पर वही शायरियाँ अधिक लोकप्रिय होती हैं जिन्हें हर आयु वर्ग का व्यक्ति आसानी से समझ सके। इसलिए सरल भाषा का प्रयोग शायरी को अधिक प्रभावशाली और व्यापक बनाता है।
*तुक और लय का ध्यान रखें*
शायरी की खूबसूरती उसकी लय और तुक में भी छिपी होती है। यदि शब्दों का प्रवाह सहज हो और पंक्तियों में तालमेल हो, तो शायरी पढ़ने और सुनने दोनों में आनंद आता है।
तुक और लय शायरी को यादगार बनाते हैं। यही कारण है कि लोग कई शायरियाँ वर्षों तक याद रखते हैं।
*“राह कठिन हो फिर भी चलना,*
*हिम्मत कभी न कम होने देना।”*
-) ये इश्क़ का जंजाल जाने कहां से ले आएं ,
लगे यूं ख़ुद को बर्बाद कर आएं ।।
-) हम ख़ुद को भुला के भी ख़ुश हैं ,
हम इस हाल में हैं और ये हाल क्या किसी अमृत से कम हैं ।।
-) तेरे बगैर उम्र गुज़ार देंगे ,
टूटे हैं रफ्ता - रफ्ता एक ज़माने बाद ख़ुद को संभाल लेंगे ।।
-) कुछ तो गैर हम ख़ुद से भी हैं ,
ज़माने को इतनी फुर्सत कहां जो वक़्त यूं ही जाया करे ।।
-) तेरे बाद दिल तेरी तलाश में जाने कहां ले आया ,
मैं भीड़ का हिस्सा था कभी अब मुझे ये एकांत में ले आया ।।
-) भरे बाज़ार लूटा हैं शख़्स कोई मेरे जैसा ,
अब तन्हा रास्तों से क्या खौफ़ खाउं मैं ।।
-) ये भी क्या किसी से कम हैं ,
तेरी यादों के जो सितम हैं,
बच ना पाता इतने के बाद कोई भी ,
और हम अब भी यहीं हैं ।।
-) तू जो रुबरु ना हो तो दिल बैठ जाता हैं,
ख़ुद से मेरे जैसा कोई रूठ जाता हैं ,
ना माने ये शख़्स बस तेरी मौजूदगी चाहता हैं ।।
-) जब आओगे तो जान जाओगे दीवाने ने कितना इंतज़ार करा ,
तेरे ना आने का सफ़र एक विष के प्याले जैसा पिया ,
अबके जो तुमने इंतज़ार कि झड़ी लगाईं तो ये शख़्स कफ़न में मिलेगा ।।
-) एक सितम ये भी हैं कि ,
हम सबके हैं बस हमारा कोई नहीं ,
हम जान लुटाते हैं सबपे , और लोग जान चाहते हैं हमारी ।।
एक अच्छा शायर लिखने के बाद अपनी शायरी को ज़ोर से पढ़ता है। इससे उसे पता चलता है कि शब्दों का प्रवाह स्वाभाविक है या नहीं।
*कम शब्दों में गहरी बात*
शायरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह कम शब्दों में गहरा संदेश दे सकती है। जहाँ एक लंबा लेख किसी भावना को विस्तार से समझाता है, वहीं शायरी कुछ पंक्तियों में वही प्रभाव उत्पन्न कर देती है।
“कुछ लोग याद बनकर रह जाते हैं,
और कुछ ज़िंदगी बन जाते हैं।”
कम शब्दों में प्रभाव पैदा करने के लिए अनावश्यक वाक्यों से बचना चाहिए। हर शब्द का अपना महत्व होना चाहिए।
-) सबसे जुदा हैं हम बस इस बात से खफां हैं हम ,
किसी से हाल ए दिल बयां करे कभी ,
ख़ुद के ऊपर जो लाद रखा उस बौझ को जुदा करे तन्हा हैं
-) नएं दौर की कहानी लिखने जा रहे हैं हम ,
अपनी कस्ती को किनारा करने जा रहें हैं हम ।।
बहुत कुछ तो बदला नहीं इतने सालों में,
सारी हक़ीक़त बदलने जा रहें है हम ।।
-) मैं तेरे जैसे किसी की तलाश में नहीं ,
मुझको तो बस तू चाहिएं ।।
कीमत चाहे जो भी चुकानी पड़ें ,
हर क़ीमत के बदलें तू चाहिए ।।
-) बिखरी जुल्फ़ों को कौन संवारने लगा ,
मेरे हक़ पे कौन अपना हक़ ज़माने लगा ।।
ये क्या बात हैं कि मेरे ही बाल हैं,
तुझसे पहले अब इप हक हमारा होने लगा ।।
-) मैंने ये कब कहां इश्क़ में मंज़िल नहीं ,
ये भीं तो कहां था प्यार की मंज़िल नहीं ।।
जो रुक गया किसी एक पर ,
उसे इतिहासकारों ने किसी शहंशाह से नवाज़ा कम नहीं ।।
-) थकें हुएं हम हैं,
बातें फ़िर भीं हमसे दो हाथ की हैं ।।
तो जान ना ये भीं ,
घायल शेर की मार ज्यादा खतरनाक होती हैं।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
ज़िंदगी हर दिन एक नया सबक देती है। कभी सफलता मिलती है, कभी असफलता; कभी उम्मीद जागती है, तो कभी निराशा घेर लेती है। ऐसे समय में प्रेरणादायक शायरियाँ इंसान को फिर से आगे बढ़ने का हौसला देती हैं।
“हार कर बैठ जाना मंज़िल नहीं होती, हर गिरावट के बाद नई उड़ान होती है।”
हमारी प्रेरणादायक शायरियाँ यह संदेश देती हैं कि संघर्ष जीवन का हिस्सा है और हर अंधेरी रात के बाद एक नई सुबह आती है।
-) सब ऐसे ख़त्म हुआ कि कुछ था ही नहीं ,
वर्षों का सफ़र ऐसे गया जैसे कभी मिले ही नहीं ।।
बातें कर लेनी चाहिए थी हमें कुछ देर तो ,
वो यूं रूठा जैसा जनता ही नहीं।।
-) मैं अजनबी सा उनके सामने आ खड़ा हुआ ,
कभी जिनके बग़ैर एक पल ना गुजारा था ।।
जो आँख देख हाल समझ जाता था ,
वो सबकुछ देख के भी अजनबी सा था ।।
-) वक्त बदला तो सबसे पहले वे बदल गए ,
जो कहते थे हम ताउम्र ऐसे ही रहेंगे ।।
वो जो साथ निभाने का सात जन्मों का कह गए ,
एक पल में उन ने मेरी किस्मत बदली ।।
-) अकेले राह में आ खड़े हैं,
किसे क्या कहे जो अपना था ।।
वो जाने किस बात से खफा ,
होकर रूठा है , मुझसे बहुत दूर बैठा हैं।।
-) ये लोग समझते है इनके बग़ैर हम जी ना पाएंगे ,
हम केवल कुछ छड़ में भूल जाएंगे ।।
हम अपनी पे जिस दिन आयेंगे ,
शांति के शहर में तबाही मचा आएंगे।।
-) मुझसे दूर कहीं हैं एक दुनिया ,
खौफनाक मंजरों से बद्तर है वो दुनिया ।।
मैंने कुछ समय क्या अहिंसा के मार्ग पर बिताया ,
ये समझते हैं मुझसे अंजान हैं वो दुनिया ।।
-) कभी मेरे नाम से बस्तियां खाली हुईं हैं,
और आजकल के नौजवान मुझे दादागिरी का पाठ पढ़ाते हैं।।
-) कुछ लोगों की उम्र भी कम हैं मुझे जानने में ,
किसी ने सारी उम्र खर्च की और कोई एक पल में जान गया मेरा किस्सा ,
मैं प्रेमियों का प्रेम और अभागों का दुर्भाग्य हूं ।।
-) तुम अपने ही वादे की आंच रख लेते ,
हमारी बातें तो कल भी झूठी थी तुम्हारे लिए और आज भी ,
कम से कम कुछ पल के लिए ठहर जाते ,
हम सारी उम्र तुम्हें इश्क़ लिख जाते ।।
-) मेरी बातों का असर भी यूं था उसपे ,
उसकी बातों को छोड़ बस में झूठ था उसे ।।
-) दूर आसमानों में कहीं जा छुपा हैं वो ,
मेरी आंखों के आंसु का सबब बन गया है वो ।।
काली रात में रौशनी था अब मेरी ज़िंदगी में काली रात हैं वो ,
वो सब जानता था उसके बग़ैर क्या हूं में ,
मुझे मगर अकेला छोड़ गया हैं वो ।।
-) साधारण से लोग भी अब साजिशों का विचार करने लगे हैं,
जाने दिल पे कितनी गुजरी उनके अपने आप को भूल कर जमाने के रंग में मिलने लगे हैं।।
-) बड़ा बुरा दौर है ये जाने कैसे हम जिएंगे ,
उसको चाहते हैं हम उसके बग़ैर कैसे रहेंगे ।।
सबकुछ तो माना हैं उसे ,
सबकुछ छोड़ के जाने क्या करेंगे ।।
-) जब जब दिल ने कुछ अच्छा सोचा जाने कहां से ,
बुरी नज़र बालों ने नज़र लगा दी ,
मेरे दो पल सुकून को ,
मातम में तब्दील कर दिया ।।
-) पहले जो जान कहता था मुझे ,
अब उसे मेरी शक्ल देखना भी मंजूर नहीं ,
उसके बग़ैर मैं मैं तो नहीं ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~






























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