True love shayari for girlfriend -: "हमारी वेबसाइट पर आपको मिलेगी हिंदी की सबसे बेहतरीन शायरी, जो हर दिल की बात को सुंदरता और गहराई से बयान करती है।”
-) किसी से कुछ ना कहने वाले लोग
झूठ को सुनाने वाले लोग ।।
सच को छुपाने वाले लोग,
लोगों को बहुत पसंद आते हैं ऐसे लोग ।।
-) वो बातें झूठ की करके सबके दिलों में राज़ करतें हैं,
हम एक सच को बोल के ,
ना जाने कितने दिलों से उतरतें हैं।।
हम फ़िर भीं सच बोलतें हैं,
ये इनकी दाल रोटी झूठ की भट्टी पे सेकते हैं।।
-) ना जाने कितने दिलों पे राज़ कर रहें हैं हम,
या अपनी ही शाम के बादशाह बन रहें हैं हम ।।
ये तो ख़बर हीं नहीं कि क्या क्या कर रहें हम,
जो कर रहें हैं बहुत ख़ूब कर रहें हैं हम ।।
-) वो मंज़िल से पहले रास्तें में आ बैठा,
उस से मिलने के बाद मैं मंज़िल का रास्ता भूल बैठा ।।
अब ये हाल हैं कि वो मंज़िल हैं,
वो नएं आशियाने का सरताज बन बैठा।
-) मेरे हिस्से में ग़म लिख देना,
मग़र किसी बेवफ़ा का साथ ना लिख देना ।।
तन्हा गुज़ार लेंगे ये जन्म भीं,
किसी धोखेबाज के धोखे में ना रखना ।।
-) हम छोड़ जाएं ये गलियां,
इन्हें आबाद फ़िर कर कौन सकता हैं।।
हम तो ग़म में भी मुस्कुरा सकतें हैं,
हमारे जैसा आख़िर कौन मुस्कुरा सकता हैं।।
-) वे चाहते ही नहीं के में उनके नाम कोई कहानी लिखूं ,
वे हर कहानी से नज़रंदाज़ करना चाहते हैं मुझे ।।
पराएं किसी का साथ अच्छा हैं उन्हें ,
मेरे साथ होनें से मुसीबतें हज़ार हैं उन्हें ।।
-) हमारे हिस्से में और तो कुछ ना आ सका ,
रुसवाई आईं ज़माने की और नया कुछ ना आ सका ।।
हम बग़ैरत हो गएं बातें तमाम सुनकर ,
और तो कुछ मुकाम हासिल ना हुआ ,
बदनसीबी का पैग़ाम सरेआम आ गया ।।
-) जान हमारी रुक रुक गुज़र रहीं हैं,
एकदम निकल जाएं बातें तो इतनी हो रहीं हैं।।
कुछ तो हम ख़ुद भी घुट के मर रहें हैं,
कुछ ज़हरीली फिज़ाओं से मेरा दम घुट रहा हैं।।
-) तू हैं कहीं ख़ुदा तो हाज़िर हो ,
अब हम से हमारा सफ़र कटता नहीं ।।
कुछ तो ज़माने की नज़र हमें ख़ुश देखना नहीं चाहती ,
और ज़्यादा देर दामन खुशियों का हमारे पास ठहरता भीं नहीं ।।
-) ये भीं बहुत ख़ूब हैं कि बातें लोग मेरे पीठ पीछे करते हैं,
वरना इस ज़माने में कौन किससे डरता हैं।।
मैं ना रहूं सामने तो वे मेरी ही बस बात करतें हैं,
जो दिख जाऊं मैं तो कहते हैं हम दुआओं के लिए तुम्हें याद करते हैं।।
-) उनके हक़ में फ़ैसले जब तक किए हमनें,
तब तक उनके सबसे ज्यादा अहम रहें हम ।।
ज्यों ही फ़ैसले हमनें उनके विरोध में किए ,
हमसे बुरा कोई नहीं रहा ,
सच को बस सच कहते रहें हम ,
फ़िर लाखों मुसीबतों को सिर पर लिए रहें हम ।।
-) वक़्त यूं भीं नहीं दिया जाना चाहिए कि,
ख़ुदको ऐसा लगने लगे जो क़रीब था मेरे ,
वो किसी अंजान का हो गया ।।
-) तेरी जुल्फों के सायें में मैंने अपनी एक उम्र गुजारी हैं,
इनसे दूर कहीं एक पल को भीं चैन नहीं ।।
-) हम तेरे क्या हुएं सबसे जुदा हो गएं,
हम औरों की ख़ैर ख़बर से लापता हो गएं।।
अनजाने हो गएं सबसे बैग़ाने हो गएं,
पहले कुछ काम के थे अब बेकाम के हो गएं।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तू ही मेरा सुकून है, तू ही मेरी दुआ है,
तेरे बिना हर लम्हा बस एक सज़ा है।
-) तेरे साथ चलूं तो रास्ते भी मुस्कुराते हैं,
तू जो पास हो तो ग़म भी सुकून पाते हैं।
-) ना शोर चाहिए, ना कोई जुनून,
बस तेरी बाहों का हो सुकून।
-) तन्हाई में भी तेरा एहसास है,
तू पास न हो फिर भी तू मेरे पास है।
-) तेरे ख्यालों से जो दिल महकता है,
वही तो सुकून है जो हर दर्द सहता है।
-) तू दिख जाए तो दिल को चैन आता है,
तेरे बिना तो हर सवेरा वीरान नज़र आता है।
-) तू ही मेरी दुनिया, तू ही मेरा आसमां,
तेरे बिना अधूरी सी है मेरी दास्तां।
-) नशा तेरा नहीं, ये सुकून है कोई,
जो हर सांस में बसा है, जूनून है कोई।
-) तुझसे जुड़ी हर बात सुकून सी लगती है,
जैसे धूप में छांव की जगह मिलती है।
-) तू मुस्कुराए तो मौसम भी बहार बन जाए,
तेरे बिना तो दिल भी बेजार बन जाए।
-) तू मिले तो सब अधूरा पूरा हो जाए,
तेरे बिना हर लम्हा अधूरा रह जाए।
-) तेरा नाम लेकर ही सुबह होती है,
ये दिल तेरे बिन कभी न रोती है।
-) तेरे ख्यालों में जो सुकून मिलता है,
वो किसी और के पास कहां मिलता है?
-) तू पास हो तो सब कुछ अच्छा लगता है,
तेरे बिना तो खुद से भी रिश्ता कटता है।
-) तेरी हँसी में जो राहत मिलती है,
वो दवा नहीं, कोई इबादत मिलती है।
"दिल की गहराई से निकली हर एक शायरी, जैसे चाँद की चाँदनी हो रातों की सवारी। हर लफ्ज़ में बसी है एक नई कहानी, जो दिल से दिल तक पहुँचाए सच्ची जुबानी।”
-) सुकून चाहिए तो तुझे सोच लिया करता हूं,
तेरी यादों में ही खुद को खो दिया करता हूं।
-) तेरी बातों में जो मिठास है,
वो ही तो मेरे सुकून की आस है।
-) तू रूठ जाए तो सब कुछ सुना लगता है,
तेरी एक झलक से दिल भी सजीव लगता है।
-) तेरे बिना सब अधूरा सा लगे,
तेरे साथ हर पल पूरा सा लगे।
-) तू ही मेरा ख्वाब, तू ही मेरा सुकून,
तेरे बिना अधूरा हर जूनून।
-) तेरी नज़रों से जो सुकून मिला,
किसी मंदिर-मस्जिद से ना मिला।
-) तुझमें ही बसी है मेरी हर शाम,
तेरे बिना अधूरी हर सुबह की बात।
-) तेरी एक मुस्कान पर ये जान लुटा दूं,
तू कह दे तो पूरी कायनात भुला दूं।
-) तेरा साथ हो तो हर दर्द भी ग़ज़ल लगे,
तेरे बिना तो हर खुशी भी फ़िज़ूल लगे।
-) तू ही है जो दिल को सुकून देता है,
तेरे बिना सब कुछ अधूरा सा रहता है।
~~~आराध्यापरी~~~
-) अगर वे मेरे भाग्य में नहीं ,
तो उनसे मुलाक़ात ना कराया कर ख़ुदा ।।
उनके मिलने के बाद बस हम उन्हें मांगते हैं,
और किस्मतों का रोना रोतें रहतें हैं ।।
-) अगर हमें लिखना ही हैं तो ,
भाग्य में उसकों पूरा लिख ।।
ये अधूरी दास्तानों को कहां मैं मानने वाला हूं ,
ये अंदाज़ मजाक के किसी और से कर ,
मैं उसको सच में मांगता हूं ।।
-) अगर वो मिला हैं एक मुलाक़ात में ,
तो ताउम्र उसे ही चाहेंगे हम ।।
आना जाना लोगों का लगा रहता हैं,
मग़र उसको संजोए रखना चाहते हैं हम ।।
-) कुछ तो ख़ुदा मेरे पक्ष में नहीं ,
वरना किसी इंसान का मिलना इतना कठिन नहीं।।
कुछ ख़ुदा को भी नहीं भाता हैं,
उसकी जगह कोई इंसान ले ,
तो उसकी मर्ज़ी होती हैं कि बिछड़ ही जाएं हम,
वरना उसकी जगह किसी और से मन्नत मांगने लग जाएं हम ।।
-) ये शहर वीरान हैं,
मेरे मेहबूब के ना होनें से ।।
लाखों की भीड़ हैं,
मग़र हमारा कुछ भी नहीं ,
उस एक शख़्स के ना होने से ।।
-) मुझे मंज़ूर नहीं कोई ,
आँख उठाके देखें उसे ।।
मेरे अलावा बुरी नज़रों का ज़माना हैं,
जो मैं देखूं उसे तो उसपे ख़ुदा की रहमत बरसती हैं।।
ज़माना यूं अच्छा भी नहीं ,
अच्छा बनकर बस अच्छाई से लड़ता हैं।।
उसे देखूं मैं बस काफी हैं,
मेरी निग़ाह उसकी हिफाज़त के लिएं काफी हैं।।
-) ये मलाल नहीं कि उम्र गुज़र रहीं हैं,
मलाल ये हैं तेरे बग़ैर गुज़र रहीं हैं ।।
हम लंबी उम्र भी तो नहीं चाहते आशुतोष,
अगर तू साथ रहें तो दो चार दिन और जीना चाहतें हैं।।
-) मेरे बात करने के सलीके पे ना जा ,
तेरे अलावा सबका दुश्मन बना फ़िरता हूं मैं ।।
तुझसे जिस तरह मिलता हूं,
उस से मुझे नर्म ना समझ ,
ज्वालामुखी सी आग उगलता हूं मैं।।
-) ख़ुद में ख़ुदा को बस समाना हैं हमको ,
इंसानों से पहले ख़ुद को बस इंसान बनाना है हमको ।।
-) मेरे हिस्से में वो आ गएं,
जिन्हें मांगने में किसी ने उम्रें गुज़ार दी ।।
-) मैं हर किसी के मुकद्दर में नहीं ,
मुझे मांगने वाले ने अपनी सारी दौलत लुटाई हैं।।
-) ज़माने की दौड़ में अकेले आ खड़े हैं हम ,
भरी भीड़ में अजनबी से लगते हैं हम ।।
हमें कुछ तो हासिल हो ज़माने में,
कब तक तन्हा रहें हम ।।
-) मेरे हिस्से की खुशियाँ बाँट रहा हैं वो ,
मेरे हक़ की बातें औरों को बाँट रहा हैं वो ।।
मुझे मेरे अधिकारों से वंचित कर रहा हैं वो ,
मेरे नामों ओ निशान को मिटाना चाहता हैं वो ।।
-) तेरे दीदार को आँखें तरस गईं ,
ना जाने कौन से दौर में ,
बिछड़े हैं हम ।।
कुछ तो ख़ुदा भी फिक्रमंद हैं,
यूं मिलन के रास्ते बंद ही कर दियें ,
वरना किसी डग़र पे अपना आशियाना बनाते हम।।
-) लोगों ने रंग बाँट दिए हैं,
वरना ख़ुदा ने सिर्फ इंसान बनाया हैं ।।
जात के नाम पे काट दिया हमने ,
बाक़ी नस्ल एक बनाईं हैं ख़ुदा ने ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) मेरा हमसफ़र है तू, मेरी हर राह की मंज़िल,
तेरे बिना अधूरी है, ये मेरी हर महफ़िल।
-) चलें हैं साथ जब से, सारा जहां बदला सा लगे,
तेरा होना ही जैसे, मेरी दुआओं का सिला लगे।
-) तेरे कंधे से लगकर चलना, सुकून देता है,
हमसफ़र तेरा होना, खुदा का करम लगता है।
-) हमसफ़र तुझको पाया है जैसे रब को पा लिया,
अब ये सफर, अब ये जहां, सब कुछ है नया।
-) तू साथ हो तो अंधेरे भी रोशनी बन जाएं,
तेरी मुस्कान से सारे ग़म दूर हो जाएं।
-) हर मोड़ पे साथ तेरा, जैसे कोई दुआ हो,
तू जो हमसफ़र बना, हर ग़म जश्न सा लगा।
-) तेरे साथ चलना है, बस इतना सा ख्वाब है,
बाकी जो भी होगा, मुझे उस पर एतबार है।
-) मेरा सफर अधूरा था, जब तक तू नहीं था,
अब हर कदम पे तू है, हर रास्ता रोशन है।
-) तेरे साए में ही जिंदगी की शाम ढले,
हमसफ़र तुझसे ही हर सुबह की बात चले।
-) तेरा साथ मिला तो दिल को करार आया,
वरना तो हर सफर में बस इंतजार आया।
-) हमसफ़र तेरा नाम है मेरे हर ख्वाब में,
तू ही तू समाया है हर एक एहसास में।
-) तेरे बिना ये रास्ते वीरान से लगे,
तू साथ हो तो कांटे भी फूलों से लगे।
-) हर दर्द की दवा है तेरा साथ मेरा,
तू है तो मुकम्मल है ये जज़्बात मेरा।
-) हमसफ़र तू जो बना, हर मोड़ आसान हो गया,
कभी जो टूटा था दिल, वो फिर से जवान हो गया।
-) तेरे साथ की आदत अब कुछ ऐसी हो गई,
जैसे सांसों की ज़रूरत हर पल महसूस हो गई।
-) हमसफ़र बना है तू, तो रास्ता आसान है,
तेरे साथ में हर मंज़िल मेरे नाम है।
-) तेरा होना ही काफी है इस दिल को सुकून देने,
तू साथ चले, तो दुनिया से क्या डरने।
-) ना पूछ ये दिल क्यों तुझसे इतना जुड़ा है,
तू मेरा हमसफ़र है, बस ये खुदा ने लिखा है।
-) तेरे साथ चलना, जैसे वक़्त थम सा गया,
हर पल को तेरे संग जीने का मन बन गया।
-) मेरी दुनिया तुझसे है, तू मेरा आसमान है,
हमसफ़र तू है मेरा, ये सबसे बड़ा अरमान है।
-) तू जो साथ हो, तो राहें भी मुस्कुराती हैं,
तेरी बातों में मेरी सांसें बस जाती हैं।
-) कभी जो खाली थी ज़िंदगी, अब भर गई है,
हमसफ़र तू क्या बना, ये कायनात संवर गई है।
-) ना कोई दूरी रहे, ना कोई फासला,
तेरे साथ हर लम्हा लगे जैसे नया।
-) तेरे कदमों से कदम मिलाए हैं,
हमसफ़र बनके तुझे खुदा से पाए हैं।
-) तेरे बिना अधूरा था मैं, ये मान चुका हूँ,
हमसफ़र तू बना, अब खुद को पहचान चुका हूँ।
~~~आराध्यापरी~~~






























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