Breakup Poetry Hindi :- आज इंटरनेट पर लाखों शायरियाँ उपलब्ध हैं, लेकिन सच्चा शायर वही है जो अपनी पहचान स्वयं बनाता है।
*मौलिक शायरी लिखने के लिए—*
- दूसरों से प्रेरणा लें, लेकिन नकल न करें।
- अपने जीवन के अनुभवों को शब्द दें।
- हर विषय को अपने अलग दृष्टिकोण से देखें।
- लिखने के बाद इंटरनेट पर मिलान कर लें कि आपकी पंक्तियाँ किसी प्रसिद्ध रचना से मेल तो नहीं खा रहीं।
मौलिकता ही आपकी सबसे बड़ी पहचान बनती है।
नए शायरों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ
-) तेरी तलाश में निकल आएं हैं हम ,
जाने किस शहर में आ गएं हैं हम ।।
एक तो कोई अपना सा भीं नहीं जिससे पता पूछें,
मग़र फ़िर भीं बख़ूबी सफ़र को निभा गएं हम ।।
-) कुसूर वार हैं हम ,
अपनी ही गलतियों के ।।
किसी और के सिर ,
अपनी ग़लती थोपना,
ये तो बात जायज़ नहीं ।।
-) दिल ये भीं समझ नहीं पा रहा हैं,
सब अपना सा हैं लेकिन अपना सा भीं नहीं ।।
बातें किससे से कहें अपने हाल ए दिल कि,
कोई उन बातों को समझने वाला भीं तो नहीं ।।
-) अपना क्या हैं सब किसी ना किसी कि मोहलत लगती हैं,
जो किसी पे अपना हक़ जताना चाहें,
वो हक़ की बातें ग़ैरों सी लगती हैं।।
-) टूटते तारों से क्या मांगे ,
मांगने के लायक अब हम हैं भीं नहीं ।।
उनसे जो मुरादें माँगी पूरी की ,
इन टूटते तारों ने ,
क़िस्मत में ग़म ही लिखा तो ये सब क्या करें ।।
-) मुझ जैसा मैं हूं और किसी का ना होना ,
ये इस बात को भीं दर्शाता हैं।।
जिस हालात से हम गुजरें,
कोई और होता तो गुज़र ही जाता।।
-) बातें ये भीं ख़ास हैं,
तेरे होनें का दिल मेरा शुक्र गुज़ार हैं।।
किसी और से दिल में हलचल नहीं ,
तू जो हैं तो मन मेरा चंचलताओंं का शिकार हैं।।
-) चाँद से ख़ूबसूरत चेहरा उसका ,
आँखें देख मोहिनी छा जाती हैं।।
उसके चेहरे की रंगत ,
सांझ को महकाती हैं।।
होँठों की लाली उसकी,
ग़ुलाब की पंखुड़ियों को शर्माती हैं।।
-) उसके जैसा कोई हैं ही नहीं ,
उसके जैसे कि तलाश में करता नहीं ।।
उसका हूं उसका ही रहूंगा ,
उसके बग़ैर एक पल जीना नहीं ।।
-) एक तो बात ये भीं कमाल हैं,
जनता वो भीं मुझे ख़ूब हैं।।
अब बातें क्या कहें हमारे कुछ ना कहने की ,
बग़ैर बोलें आंखों की जुबां वो समझता बहुत हैं।।
-) अंजान सफ़र का रास्ता मिल गया,
कोई इसपर साथी तो नहीं ,
ख़ैर छोड़ो अब जो हैं नया हैं ।।
इस नएं दौर का कुछ तो मिल गया ,
अब अकेले इसे गुज़ार देना हैं,
अपने आप को इसी सफ़र में ढाल लेना हैं,
मंज़िलो का पता नहीं,
रास्तों का पैग़ाम मेरे सिर लिखा गया हैं।।
-) हम दिलों की सुनने वालों से ,
दिमाग़ की बात ना किया करो ।।
फ़ैसले हम दिल से लेते हैं,
सोच विचार की मर्यादा हमारी नहीं ।।
-) वो चाहत के समंदर में गोता लगाने वाला हैं,
मेरे दिल के अंदर रहने वाला हैं।।
ख़ूबसूरती उसकी सिर्फ़ ,
चाँद से चेहरे की ही नहीं,
वो शब्दों का इस्तेमाल भीं ,
बड़ी ख़ूबसूरती से करता हैं।।
-) हज़ार मिलें जिंदगी की दौड़ में,
हमें साथ तेरा भा गया ।।
इस साथ के अलावा मांगें भीं क्या ,
जो चाहिएं था वो सबकुछ हासिल हो गया ।।
-) आशुतोष तुम भी कमाल हो,
ख़ुद की ख़बर नहीं तुम्हें,
और ज़माने की बात करा करते हो ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
शुरुआत में लगभग हर लेखक कुछ सामान्य गलतियाँ करता है।
- केवल तुक मिलाने पर ध्यान देना।
- कठिन और अनावश्यक शब्दों का प्रयोग करना।
- दूसरों की शायरी की नकल करना।
- एक ही शायरी में कई भावनाएँ जोड़ देना।
- बिना संशोधन किए तुरंत प्रकाशित कर देना।
इन गलतियों से बचकर आपकी लेखनी अधिक प्रभावशाली बन सकती है।
-) मेरी कहानी कुछ अधूरी सी लगी,
तेरे बिना हर खुशी भी अधूरी सी लगी।
-) मेरी तन्हाई ने मुझसे बात कर ली,
तेरी खामोशी ने हर हद पार कर ली।
-) लफ्ज़ों में बयान नहीं होती है मेरी दास्तान,
ये आंखें ही हैं जो बयां करती हैं मेरी जान।
-) जो बीत गया वो सपना था,
अब जो बाकी है वो अपना था।
-) हर मोड़ पे तेरी यादें मिल जाती हैं,
मेरी कहानी वहीं से चल पड़ती है।
-) ख्वाबों में तुम, हकीकत में तन्हाई,
मेरी कहानी बस इतनी सी आई।
-) मुस्कुराहट के पीछे दर्द छुपा रखा है,
मेरी कहानी ने मुझे पत्थर बना रखा है।
-) तेरे जाने के बाद भी कुछ बाकी रहा,
मेरी कहानी में तेरा किरदार बाकी रहा।
-) दिल ने जो सहा, वो लफ़्ज़ों में नहीं,
मेरी कहानी बस अश्कों में सही।
-) हर दर्द को मुस्कान बना दिया,
मेरी कहानी को अफ़साना बना दिया।
-) मेरी चुप्पी भी कुछ कहती है,
ये कहानी अक्सर तन्हा रहती है।
-) कभी खुद से भी मुलाकात कर ली होती,
मेरी कहानी कुछ और बात कर ली होती।
-) रिश्तों के रंग उड़ गए फिजाओं में,
अब मेरी कहानी है खाली हवाओं में।
-) तेरा नाम था मेरी दुआओं में,
अब कहानी है अधूरी सदाओं में।
-) चलो ठीक है, तू नहीं मेरा,
मेरी कहानी में फिर भी तू ही सवेरा।
-) रातों को नींद नहीं आती,
मेरी कहानी उन्हें रोज़ सुनाती।
-) मेरी तहरीर में बस तू ही तू है,
बाकी तो सब अधूरी आरज़ू है।
-)जो बीत गया वो लम्हा बन गया,
मेरी कहानी का पहला हिस्सा बन गया।
-) जिंदगी से शिकवा नहीं मुझे,
बस मेरी कहानी तुझसे जुड़ी थी।
-) कोई समझ न सका मेरी खामोशी को,
मेरी कहानी चुपचाप बहती रही।
-) हर अल्फ़ाज़ में तेरा जिक्र होता है,
मेरी कहानी का तू ही फ़िक्र होता है।
-) वो चला गया तो क्या हुआ,
मेरी कहानी में वो ही रहा।
-) तू भी मेरी कहानी का हिस्सा था,
कभी हँसी, कभी आँसू जैसा था।
-) जब तुझसे दूर हुए,
तब खुद से भी दूर हुए।
-) जो लिखा नहीं गया,
वही मेरी असली कहानी रहा।
*शायरी एक कला है और हर कला की तरह इसमें भी अभ्यास आवश्यक है।*
- प्रतिदिन कम से कम एक शेर लिखें।
- रोज़ कुछ समय पढ़ने के लिए निकालें।
- अपने विचार तुरंत नोट करें।
- पुराने लेखन को सुधारते रहें।
- अलग-अलग विषयों पर लिखने का अभ्यास करें।
धीरे-धीरे आपकी भाषा, कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति स्वतः विकसित होने लगेगी।
*सोशल मीडिया पर शायरी कैसे शेयर करें*
~~~अराध्यापारी~~~
-) ये उजड़े आशियानों के चमन ,
अब आशियाना बनाना चाहते हैं ।।
हम मुकम्मल इश्क में अब उजड़ जाना चाहते हैं,
ख़ुद को बस भुलाना चाहते हैं ।।
दोस्ती हो गई थी ज़माने भर से कुछ गहरी सी,
बस उन गहराइयों से उभर जाना चाहते हैं ।।
तेरे शहर में बिता दिया एक ज़माना हमनें,
अब हाल दिल का ये हैं कि इस शहर से जाना चाहते हैं ।।
मुसीबतों का दौर झेला हैं मैंने वीराने में ,
ये ज़माना मुझसे अब मेरी ख़ुशी बांटना चाहता हैं।।
-) कब तक चाँद आंचल में छुपेगा कभी तो निगाह में आना होगा ,
कब तक पर्दे की आड़ में रहेगा कभी तो महफ़िल में आना होगा ।।
-) उसने जान निकाल ही दी,
जिसे हम ने अपनी जान बना रखा था ।।
इतना सब कुछ एक पल के लिए कर दिया ,
जिसे हमने वर्षों तक सजा रखा था ।।
जिसे हर वक्त ख़ुद में सजा रखा था हमने ,
उसने जब उसकी मर्जी चलाई तो हमारे ख़्वाबों से यादें मिटा दी उसने ।।
-) एक तो शौक़ ये भी नहीं किसी के दिल में उतर जाएं ,
हर एक कि निग़ाह में समां जाएं ।।
कुछ तो उसूल ज़िंदगी में बना रखे हमने ,
दुआ बस यहीं हैं कि उन्हीं को निभा जाएं ।।
ख़ैर ख़ुद की जंग में ख़ुद भुला रहे हैं
उससे दुआ बस यही हैं अब जो चाह रहे हैं उसे ही कर जाएं ।।
-) वक्त बेवक्त यूं भी ना आईए ,
नींदों को ये भी एहसास ना दीजिए ।।
आपके आने से एक अलगपन हम में आने लगता हैं,
बनने संवरने का फिर दिल करने लगता हैं।।
वैसा डरा सा रहता हूं मैं भी ,
और जो आप आते हो तो दिल ना जाने क्या करने लगता हैं।।
-) हम खुद को समेट रहे हैं,
शायद इश्क़ कर रहे हैं ।।
तभी बहकी बहकी बातें कर रहे हैं,
हम दिल को उनके नाम कर रहें हैं।।
इस मौसम में क्या क़माल कर हैं,
हम बसंत को उनके नाम कर हैं ।।
चांद चांदनी से नाराज़ हैं,
हम फ़िर भी हम ये काम कर रहे हैं।।
अबके दिल जुड़ा हैं,
अब ये पैग़ाम लिख रहें हैं।।
उनकी महफ़िल सजती ख़ूब हैं वो गुलाब और भंवरे ,
अब हम उनके होकर एक और मेहमान बन रहे हैं।।
हम इश्क़ मुकम्मल करके ये हवा बाजी सरेआम कर रहे हैं,
हम इश्क़ कर रहे हैं,
दिल उनके नाम कर रहें हैं।।
-) इश्क़ में तेरे एक काम कर रहे हैं,
हम खुद को अंजान कर रहे हैं।।
कभी आए थे दूर कहीं शहर से ,
अब ख़ुद को इस शहर के नाम कर रहे हैं।।
बेबुनियादों ,झूठों के शहर में ,
सच की राह पकड़ रहे हैं ।।
ये हवाएं सर्द फिजाएं ख़ुद को,
आजाद कर रहे हैं।।
हम खुद को आबाद कर रहे हैं,
या कहो ख़ुद को बर्बाद कर रहें हैं।।
-) तेरे इश्क़ में रंग हजार आ गए ,
हमने दो ही रंगों को जाना हैं ताउम्र ।।
नौ रंगों में भी दो ही नज़र आएं हैं,
एक काला एक सफेद जाना हमने ताउम्र ।।
भरोसा करते रहे आंख मुझ कर हम ,
आंखे खुली तो जाना हमने बंद आंखों से क्या क्या खोया ताउम्र ।।
-) तेरे इश्क़ ने हमको जमाने से अलविदा कर दिया
वरना हम भी मशरूफ खूब थे ज़माने में ।।
जानता कौन नहीं था हमें ,
अब बस जानती हैं तेरे शहर की गलियां हमें ।।
-) हम सफ़र में यूं मशरूफ हुएं ,
मंज़िल पाने के बाद भी सफ़र में रहें ।।
किसी ने उम्र बिता दी मंज़िल की तलाश में ,
हम सबकुछ पाकर भी बर्बाद से आबाद रहें ।।
हमसे ये भी ना पूछों कि चाहत क्या हैं तुम्हें,
हम चाहतों के इरादे से बस परे रहें ।।
-) तेरे शहर में हम हैं ये भी क्या खूब हैं,
हम हैं, और केवल अकेले हम हैं।।
तेरा ना होना किसी रंजो ग़म से कम नहीं ,
पूछता दिल भी हैं कि हम क्यूं हैं।।
कभी तू जो नज़र ना आता था तो ,
हम खुद से रूठ जाते थे ,
तू अब हैं भी नहीं इस शहर में ,
जब भी ख़ुद को मना रखा हैं।।
तेरे बग़ैर किसी ख़ुशी के हकदार नहीं,
तेरे साथ में ग़म भी ग़म सा नहीं ,
लगता सब ऐसा हैं जैसा खुशियों का पिटारा हैं।।
-) हाथों कि लकीरों में कुछ भी तो नहीं ,
ईमानदारों के ईमान में अब वो ईमान भी नहीं ।।
जो जाने रिश्ते दिल के वे दिलबर भी नहीं ,
ख़ुद को तलाशता एक शख़्स अब वो मैं भी नहीं ।।
जाने बागियों कि बाते मन मेरा मगर ये पूरा बागी भी नहीं,
चंबल पुकारती हैं जिसे वे अब डाकू भी नहीं ।।
खोजता हैं रेगिस्तान में कोई पानी कि बूंदें,
अब सूखे में पानी भी नहीं ।।
-) तू हासिल हमको चांद सा हैं,
हम रात का सफ़र करते नहीं ।।
चांदनी से रिश्ता हमारा बनता नहीं ,
और सूरज से तेरा वास्ता नहीं ।।
-) एक मुलाक़ात को तरस गएं वो ,
जो कभी हरवक्त के हक़दार थें ।।
कुछ तमाशा किस्मत सरेआम कर गईं,
कुछ फ़ैसले उनके हक़ में ना थें ।।
-) हम उसके हो गएं पूरे होंशों हवास में ,
जो आँख उठा के देखा उसने तो खो गएं
उसकी आँख में ।।
कुछ हासिल शायद हो जाता हमें ,
जो रहते होश में ,
शायद वो ही मिल जाता ,
खो रहा था जिसके ख़्याल में ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तुम हो सागर, मैं हूँ लहर,
संग तुम्हारे बीते हर एक पल मेरा खेमा।
-) तेरी मुस्कान से होती है सुबह की शुरुआत,
तू ही है मेरी हर चाहत, हर ख़्वाब की पहचान।
-) तेरे बिना अधूरी है ये हर एक धड़कन,
तेरा नाम लूँ जुबां से, यही है मेरी हर दुआ।
-) स्नेह भरी बाहों में छुपा है सारा जहां,
तुमसे मिलकर हर ग़म बन जाता है एक कहानी।
-) तुम मेरी तन्हाई में जैसे चाँद की रौशनी,
हर रात तुम्हारी यादों में बुनती है खुशबू।
-) तेरे इश्क का दिया जलाकर रखा है दिल में,
तुमसे मिलने की ख्वाहिश है, हर सांस का अदान।
-) तेरे बिना यह दिल है बंजर,
तेरा साथ हो तो हर लम्हा है बसंती।
-) तुम्हारी प्यार में छुपा है सारा जहां,
जैसे सुबह की किरने हों तुम, मेरे जीवन की रागिनी।
-) तेरी धड़कन में है मेरी पहचान,
तू है मेरी छांव, तू है मेरा आसमान।
-) जब से देखा तुम्हें, सब खो गया,
तुम मेरी जिंदगी में जैसे नया रंग भर गया।
-) तुम्हारी हर बात में छुपा है जादू,
तुमसे ही बनता है मेरा हर एक ख्वाब।
-) तू है हमारी दुआओं का फल,
जब से मिले तुम, सब कुछ है अनमोल।
-) तेरे साथ चलना है जीवन का महाकविता,
तुम मेरी प्रीति, तुम मेरी कविता।
-) तेरा नाम लूँ जब, ये दिल मचलता है,
तेरे बिना हर एक पल यह उलझता है।
-) जब तू साए में हो, ग़म भुला दूँ,
तेरे बिना अब मैं अधूरा सा हूँ।
-) तुम हो तो मौसम भी खुशगवार सा लगे,
तेरे बिना हर सुबह बस बंजर सी लगे।
-) तेरा इश्क सजा है मेरे दिल के कोने में,
जैसे चाँद छिपा हो बादलों की ओट में।
-) तेरी हंसी में छुपा है हर दर्द का इलाज,
तुमसे मिलकर हर ग़म बन जाता है छुट्टी का आगाज़।
-) तुमसे शुरू हर एक कहानी,
तुम ही हो मेरी जिंदगानी।
-) तेरे बिना ये राहें हैं वीरान,
संग तेरे हर पड़ाव है सुहाना।
-) तेरा नाम लूँ हर सुबह,
तुमसे ही है मेरा हर दिन खूबसूरत।
-) जब तुम पास हो, हर ख़्वाब हकीकत,
तुम मेरी मोहब्बत, तुम मेरी चाहत।
-) तेरी आँखों में बसी है दुनिया मेरी,
तेरा हाथ थाम लूं, यही है कश्मकश मेरी।
-) जब से तुम मिले, हर दिन हो खास,
तुम मेरी खुशी, तुम मेरी सांस।
-) तेरे बिना अधूरे हैं ये ख्वाब मेरे,
तुम हो तो हर लम्हा है हसीन बेड़ियाँ।
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~~~आराध्यापरी~~~






























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