Alone shayari in Hindi -: हिंदी शायरी भारतीय साहित्य की सबसे लोकप्रिय, प्रभावशाली और संवेदनशील विधाओं में से एक मानी जाती है। यह केवल शब्दों का सुंदर संयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय में उठने वाली भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति है। जब मन प्रेम से भर जाता है, विरह की पीड़ा से टूट जाता है, जीवन के संघर्षों से जूझता है या भविष्य की उम्मीदों को संजोता है, तब वही भाव शायरी का रूप ले लेते हैं। यही कारण है कि शायरी को भावनाओं का दर्पण, आत्मा की आवाज़ और दिल की भाषा कहा जाता है।
-) हम बर्बादी की आख़िरी हद थे ,
हम जहां खड़े थे उसके बाद कुछ भी नहीं था ।।
हम सब की आख़िरी उम्मीद थे ,
हमारे बाद हम जैसा कोई ना था ।।
-) मैं तबाह हूं तेरे इश्क़ में ,
ये भी किसी से कम हैं क्या ।।
आजकल के दौर में किसी का कौन हैं ,
मेरा जैसा तेरा हैं ये भी किसी से कम है क्या ।।
-) हम बर्बाद हो हीं गए ,
तेरे इश्क़ में जान हम कुर्बान ही हो गए ।।
क्या बातें करें अब ज़माने की ,
अब ज़माने से बैगाने हम हो ही गए ।।
-) चांद को देखकर ये ख़्याल आने लगा ,
तारों की टिमटिमाहट में कैसा क्या चमकता हैं ।।
बादलों की आहट में कैसे सूरज निकलता हैं,
तेरा होना भी मुझे ऐसा ही लगता हैं।।
-) चांदनी रात में तेरा इंतजार कर रहा हूं मैं,
इस पूर्णिमा में बस तेरा ही नाम रट रहा हूं मैं।।
मुझे तो याद नहीं कुछ भी रास्ता घर का मेरा ,
तेरे ही भरोस सफ़र काट रहा हूं मैं m।
-) अंजान सड़क पर एक राही हूं ,
कोई मिल जाएं अपना बस फिर साकी हूं ।।
हैरान यूं भी ना हो देखकर मुझे ,
मैं तेरा अपना ही हूं ।।
-) ख़ुदा से किसी ने जन्नत को मांगा ,
हम तुझको मांग आएं हैं ।।
सबने धन दौलत भर के मांगा ,
हम ताउम्र तेरा साथ मांग आएं हैं।।
-) गुनहगार ना बना माना कि तेरी अदालत हैं,
गुनाहों को मेरे सिर यूं भी ना मड़ अदालत ख़ुदा की भी हैं ।।
-) हमसे यूं ख़ौफ़ भी ना खा ,
हम तेरे क़रीब हर लम्हा रहें ।।
जिस बात से तुझे गिला हैं ,
उस बात से हमें ऐतराज़ हैं ।।
जिस डगर तू ना जाएं ,
उस रास्तें से हमें परहेज हैं ।।
-) कभी किसी से ये ना कहना ,
हम तेरे नहीं है ।।
हर कतरे से तेरे अक्स को निखारा हैं हमने ,
हम तेरे हर अंजाम के साथी हैं।।
-) वो कोई मांगने की चीज़ ना थीं,
उसपे पूरा हक़ था मेरा ,
मैं क्यों मांगू उसे ,
उसे मुझे बग़ैर किसी बात के दिया जाना चाहिए था।।
-) ज़िंदगी में कुछ और बचा ही नहीं ,
जो था एक पल में छिन गया।।
अब पाने को जमाना हैं,
और खोने को उसकी यादों का सफ़र रह गया ।।
-) ज़िंदादिली हमारी ख़ूब हैं,
जो अपना था उसे भीं दान कर आएं ।।
अपनी क़िस्मत को किसी और तराजू पर तौल आएं,
हम अपनी कहानी बस अंजान रास्तें पर छोड़ आएं ।।
-) महफूज़ हैं मेरी बाहों के घेरें ,
किसी और की बाँह नापना ,
सजाएं मौत से कम नहीं ,
मेरी अदालत में बेवफ़ाई का कानून मौत हैं।।
-) उसे देखना देखकर आँखें भरना ,
दस्तूर बुरा हैं ये ,
उसका सहम जाना ,
फ़िर मुझे वापिस देख कर ख़ुश हो जाना ,
बड़ा अजीब हैं ये ।।
ये बात नहीं कि वो साथ नहीं मेरे,
मेरे होनें से ख़ुश हो जाती वो ,
काफ़ी हैं ये ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
मानव जीवन भावनाओं का अथाह सागर है। प्रेम उसकी सबसे कोमल अनुभूति है, दर्द उसकी सबसे गहरी परीक्षा है, संघर्ष उसकी सबसे बड़ी शिक्षा है और उम्मीद उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। इन सभी भावनाओं को यदि किसी साहित्यिक विधा ने सबसे सहज, सरल और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है, तो वह हिंदी शायरी है।
-) जिम्मेदारी का हाथ थामों, काम की राह पर बढ़ो,
जीते रहो सच्चाई में, दुनिया को दिखाओ खुद को कैसे जियो।
-) मेहनत का फल मीठा, जब जिम्मेदारी हो सच्ची,
तो जीवन के हर मोड़ पर, खुशियों की सवारी ना रुकी।
-) जब काम बन जाता है जुनून, जिम्मेदारी का ये प्रमाण है,
हर मुश्किल में छिपा है, सफलता का ये सामान है।
-) जिम्मेदारी का कंधा हो, काम का है जोश,
दोनों संग चलें तो मिले, जिंदगी का हसीन रोश।
-) मेहनत की राह में, जिम्मेदारी की संगिनी,
साथ चलते हुए, जिंदगी की बनती है सुनी।
-) जब तक काम में न हो जिम्मेदारी, सोचो जरा,
खुशी का असली रंग, तब भी है अधूरी सजा।
-) मेहनत की गली में, जिम्मेदारी हो संग,
तो हर सपना हकीकत की ओर बढ़ेगा पंखागंगा।
-) जब काम में समर्पण हो, जिम्मेदारी का एहसास है,
जीवन की हर कड़ी में, यही सबसे बड़ा खास है।
-) जिम्मेदारी का वजन जब सहो, न हो कोई डर,
काम के इस सफर में, यही है जिंदादिली का घर।
-) मेहनत की नींव पर, जिम्मेदारी की दीवार,
सच्चाई से बनती है, हमारी पहचान का इज़हार।
-) जब काम की खुमारी छाई, जिम्मेदारी की सब बातें,
जीवन के सफर में, यही हैं सबसे हसीन पल और यादें।
-) काम में जो सच्चाई, जिम्मेदारी का उधार है,
सभी को सिखाती है, मेहनत का ये बहार है।
-) जिम्मेदारी की लहर में, काम का ये सागर है,
मेहनत से भरी हर ऋतु, सच्ची खुशियों का दाग़ है।
-) काम की लय में जिम्मेदारी का साज है,
सुखद भविष्य का, यही रास्ता आज है।
-) जब काम में जुटा, जिम्मेदारी की परछाई बन के,
हर कठिनाई में भी, सफलता का साम्राज्य चाहिए तुमसे।
-) मेहनत की फसल में, जिम्मेदारी का पानी हो,
खुशी की हर बात में, मिलनसार जज्बात हो।
-) जिम्मेदारी के रंग में बसा, काम का हर मोड़ है,
मेहनतनामे की कचौड़ी में, सफलता का हर जोड़ है।
-) जब ठान लिया काम करना है, जिम्मेदारी का है कसम,
सफलताओं की ओर चलो, बढ़ते जाओ हर गज़ बज़ नतम।
-) जिम्मेदारी का ऐहसास, काम की खासियत बनाता है,
मेहनत की सच्चाई में, हर सपना नजर आता है।
-) काम की बुनियाद पर, जिम्मेदारी का महल खड़ा है,
मेहनत से भरी जिंदगी, यही वीरता का जज़्बा है।
-) जब काम की गूंज में, जिम्मेदारी की लय बसी,
हर कदम पर मिलती खुशी, यही जिंदगी की सिसी।
-) मेहनत की राह में, जिम्मेदारी का दीदार हो,
जीवन की हर सहर में, खुशियाँ सिरफिरा हंसोगा।
-) जब नहीं कोई डर हो, जिम्मेदारी का संग हो,
काम में लगना है, तो फिर खुद पर भी विश्वास हो।
-) जिम्मेदारी का हाथ हो, काम से हो प्यारा नाता,
मेहनत की बनावट में, यही तो है सच्चा साज़।
-) काम की दुनिया में, जिम्मेदारी का साथ है,
सच्चाई की राह पर, फिर कौन कहे कि ये अधूरा हाथ है।
~~~आराध्यापरी~~~
-) रंग जो मौसम ने बदला तो इंसानों को गिला होने लगी ।।
हम अपनी सी करने लगे तो ,
बग़ावत सरेआम होने लगी ।।
जिनके पास था ना कुछ एक भी ,
बातें उनकी भी आसमान छूने लगी ।।
-) ख़ुद से लड़ रहां हूं मैं,
जाने कैसे दिन काट रहां हूं मैं ।।
साथी कुछ साथ थे एक दो ,
लगता हैं उनकी जान जोख़िम में डाल रहां हूं मैं ।।
-) हमारा हक़ मारा गया ,
जो पास था वो सब छीना गया ।।
और तो कुछ ना था पास दो वक्त की रोटी और तन पे कपड़ा था,
उनके करम हुएं ऐसे हासिल जो था ,
सभी डाका डाल लिया गया ।।
-) अब तो लगे ऐसा जान जाने वाली हैं,
सबकुछ बर्बाद होने वाला हैं।।
कुछ किस्मत का साथ ना था ,
कुछ बातों पर में जोर ना था ,
इन सब में बस आशुतोष जाने वाला हैं।।
-) ख़ुदा रहमत बक्शे तो कुछ सोच आएं हम ,
अपनी ज़िंदगी का सौदा कर आएं हम ,
मेरी जान के बदले मांग लो कुछ ,
उसकी जान की कीमत अपनी जान देकर चुका आएं हम ।।
-) जाने किस दौर में आ बैठें हैं,
गिरती बिजलियों में आ बैठें हैं।।
कभी रहम ओ करम बरसतें थें,
अब मुसीबतों के दौर में आ उलझें हैं।।
-) बातों के दौर में बादलों सी बरसात हो रहीं ,
रहमत के दौर में आफ़तें आ रहीं ।।
हम अपनी सी सोचते रहें,
बातें जाने कहां से उल्टी सी आ रहीं।।
-) मुझसे मिलके मेरे से हो जाना ,
मेरा कोई भी नहीं हैं ।।
मैं बातें तमाम करता हूं ,
मगर ग़ैरों सा सलूक हैं ।।
मैं अपना सा होता हूं ,
मगर फ़ैसले पराएं से हैं ।।
-) मैं चाह कर भी ये ना कर पाया ,
जिस रास्तें पर चला उस रास्तें का भी नहीं हो पाया ।।
मंज़िल जाने कौनसी थीं मेरी,
अब जिस सफ़र में हूं ,
इसकी मंज़िल न तलाश पाया ।।
-) अब तो अपने भी अपनों से ना रहें,
ग़ैरों सा बर्ताव नजर आता हैं ।।
जान लुटाई थी कभी किसी पे ,
अब लगे ऐसा बे मौत ही ,
मरने आएं हैं ।।
-) हो सके तो इतना करना ,
फ़ैसला जो भी हो इंसाफ मुझसे करना ।।
जाने कितनी बुरी गुजर रहीं हैं हमपे,
बस दो पल का साथ देना ।।
-) मैं खुद से नाराज़ होने लगा हूं ,
लगता ऐसा हैं बर्बाद होने लगा हूं ।।
कुछ भी तो नहीं मुमकिन हमको ,
बस ख़ुद से अलग होने लगा हूं ।।
-) वो एक वादा करके गएं,
हम उस वादे के हो गए ।।
उम्मीद थी ताउम्र उस के रहेंगे ,
उसने जो भुलाया हम बस ग़मों के होकर रह गए ।।
-) अब तो घर भी घर नहीं लगता ,
जाने कैसा ये दौर आ गया हैं।।
हमें अपने घर में परायों सा लगने लगा ,
जैसे अजनबी शहर में किसी अंजान के घर में मैं आ गया ।।
-) कुछ देर जो मैं ठहर जाता तो कत्लेआम हो जाता,
मेरे नाम पे वे यूं इठलाएं जैसे ,
भुजंग को देखकर नेवले ललाहित होने लगें हो ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) धोखे की हर कहानी ने, दिल को चुराया है,
सच्चाई के जिस रस्ते पर, कभी चाँद भी आया है।
-) वे चेहरे जो मुस्कुराते हैं, असलियत छुपाते हैं,
धोखे के इस बाजार में, हम सब बिक जाते हैं।
-) प्यार की कसमें खाकर, बेवफाई का नाम लिया,
यही तो है धोखा, जिसे आज मैंने समझ लिया।
-) आँखों में है वो जादू, जो बातें नहीं कहता,
पर हर बात में छिपा है, एक नया धोखा वो करता।
-) विश्वास की दीवारों पर, लिखा है झूठ का नाम,
धोखे की इस दुनिया में, सभी हैं बेगानी शाम।
-) तुमने जो कहा वो किया नहीं, फिर भी दिल को बहलाया,
ये क्या है सच्चाई या, बस एक बड़ा धोखा पाया।
-) पलकों की छांव में छुपे, आँसू जब छलकते हैं,
वो धोखे की साज़िश है, जो बिना बोले महकते हैं।
-) वो वादे जो किए थे, अब अधूरे हैं ख्वाबों में,
धोखे की इस उलझन में, खो गए हैं सब हाथों में।
-) रिश्ते जुड़ते हैं जैसे, धागे से बनती हैं जाल,
बस एक धोखे की प्रथा, और बिखरते हैं अरमान।
-) हर मुस्कान में छुपी है, एक कहानी चुपचाप,
धोखे का ये सिलसिला, बना देता है सबको बेताब।
-) शब्दों में मिठास है, पर आंचल में छिपा जहर,
धोखे के इस खेल में, नहीं जोड़ा मैंने धैर्य।
-) जब भी चाहा मैंने सच्चाई, तुमने दिखाया झूठ,
इस धोखे के सफर में, दिल की हर बात हुई सूठ।
-) हम कमज़ोर पन में जीते, पर नहीं समझ पाए,
धोखे के इस खेल में, हमने खुद को ही बर्बाद किया।
-) आँखों की जो भाषा है, वो कभी समझी नहीं,
धोखे की इस दास्तान में, सच्चाई रह गई कहीं।
-) तुमने कहे थे झूठे वादे, मैं ही रह गया बेबस,
पर ये धोखे की आदत, मुझे अब नहीं रास।
-) हर धोखे की परत में, छिपा है एक राज़,
ये सच्चाई के रास्ते में, है बस एक अलिखित ताज़।
-) कभी जो साथ रहे तुम, अब वो भी अपना नहीं रहा,
धोखे की इस कहानी में, प्यार का किवाड़ खुला नहीं रहा।
-) जिनसे मिला था विश्वास, उन्हीं ने किया है धोखा,
अब तो बस यादें हैं, जो मुझे चुभती हैं जैसे शोक।
-) ख्वाबों की बुनाई में, छिपा है एक दर्द बड़ा,
धोखे की इस दुनिया ने, दिल को किया है बुरा।
-) हर चेहरे की एक परत है, जो सच्चाई छुपाए,
धोखे के इस जाल में, हम सबको बहलाए।
-) आँखों में बसी नमी, बोले जब मन का हाल,
धोके की शिकार हुई, हर एक चाह का कमाल।
-) खुद को कोसते हैं लोग, धोखे के बाद में,
सच्चाई का ये खेल है, मुश्किल है समझना इस जाल में।
-) तूने जो कहा वो दिखा नहीं, अब समझ में आया,
धोखे की इस दुनिया में, मानवता ने पहला नारा।
-) प्रेम के बंधन में छुपा है, एक बड़ा धोखा,
देखो कितने मासूमों ने, रिश्ते को भुलाया है सोखा।
-) ज़िंदगी के सफर में, सच्चाई की कश्ती चलाई,
पर धोखे की लहरों ने, मन को फिर भी रुलाया।
~~~आराध्यापरी~~~






























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