Broken heart shayari Hindi -: आज के समय में शायरी केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, कवि सम्मेलन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से यह लोगों तक आसानी से पहुँच रही है। विशेष रूप से युवा वर्ग अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शायरी का सहारा लेता है। अंत में, शायरी प्रेम, संवेदना और रचनात्मकता की पहचान है। यह मनुष्य के हृदय की आवाज़ है, जो शब्दों के माध्यम से दूसरों के दिलों तक पहुँचती है और जीवन को अधिक सुंदर एवं अर्थपूर्ण बनाती है।
-) दामन पे दाग़ लगने वाला हैं,
अब तो देर ना कर ।।
मेरी आबरू भरे बाज़ार उतरने वाली हैं,
ये गुनाह ना कर ।।
कुछ तो बयां कर ,
मेरी बेगुनाही का सबूत पेश कर ।।
जो हमने किया नहीं ,
उस इल्ज़ामात बरी कर ।।
-) वो मुझसे ख़फ़ा नहीं,
और मुझसे बात करता भी नहीं ।।
वो नाराज़ मुझसे हैं भी नहीं ,
और मेरी सुनता भी नहीं ।।
उसे मुझसे कहना बहुत कुछ हैं ,
मगर वो कुछ कहता ही नहीं।।
मैं उसका हूं हर लम्हा ,
लेकिन वो ये पेश करता ही नहीं।।
-) गुनहगारों ने अब जिम्मा बेगुनाह को सज़ा देने का उठाया हैं ,
कत्लेआम करने वालों अब ,
अहिंसा परमो धर्मा कहते हैं।।
क्या ख़ूब हैं इस जहां की बातें,
झूठ बोलने वाले सच का बेड़ा उठाते हैं।।
-) हम अपने आप से नाराज़ रहें ,
किसी और पे क्या इल्ज़ाम रखें।।
किसी से ना पूछ कर एक फ़ैसला किया था हमनें,
अब बातें क्या सबसे कहें ।।
जो कर लिया वो मंज़ूर ना भी हो तो क्या करें ,
एक वादें पर उम्रे गुज़ार दें ।।
-) फ़रेंबे इश्क़ में यूं ना बदनाम कर ,
मैं ज़माने में पहली ही बदनाम हूं ।।
इश्क़ गलियों में ये पैग़ाम कर
मेरे नाम से तू मशहूर हैं और तेरा मैं पहला नाम हूं ।।
-) हम धड़कनें सुनना छोड़ रहें हैं,
तेरे इश्क़ में ज़माना छोड़ रहें हैं ।।
आबाद गलियों में बर्बादी की महक छोड़ रहें हैं,
तू बात घर की ना कर हम ये शहर छोड़ रहें हैं ।।
-) कुछ रह गुज़र गईं हो तो ,
वो कसर भी पूरी करलें ।।
मैं तबाह हूं इश्क़ में तेरे ,
कुछ तबाही से बच गया हो उसे भी पूरा करले ।।
मैं राही था हवा नहीं ,
राह से क्या भटका अब हवा बन गया हूं,
हो रहमो करम तेरे तो इस हवा को क़ैद करले ।।
-) तमाशा करके पूछते हो ,
भीड़ कैसे हुईं आपने ख़बर दी ,
हम अकेले थे अकेले में बातें आम थीं,
रहमत तेरी हैं ये बातें सबके सामने हैं,
चार दिवारी में रहता था मैं,
तेरे इस हुनर ने सरेआम मशहूर कर दिया ।।
जानते लोग थे शायद कल कोई दो चार सादगी से मुझे ,
अब उनके सामने बदनाम मुझे कर दिया ।।
-) मैं चांद को ताकता रहा रात भर ,
मन में सुकून की तलाश ना थी एक पल ।।
मैं इस दिल को समझाता रहा,
वो अब किसी और का हैं,
जिसके बग़ैर लगता ना था मन तेरा एक पल ।।
-) वो फ़रियाद को भी कमाल सुनता ,
मैं उसकी बातें कमाल सुनता ।।
वो हर पहलु में ख़ुद को संजोके रखता ,
मैं बिखरी जुल्फ़ों में उलझा रहता ।।
-) यू इतराकर उन्होंने बहुत कुछ कह दिया,
वह हमारी खामोशी नहीं समझे ।।
कोई बताओ इन उम्र के कच्चों को ,
तूफान के आने से पहले अक्सर खामोशी होती है ।।
-) समंदर की गहराई पता ना हो तो,
गोता लगाया नहीं जाता ।।
अपने उसूलों का पता नहीं हो तो,
ऐसे इठलाया नहीं जाता ।।
तुमने बंदिशों को ही हथियार बनाया ।।
ये दिल तड़पता रहा मिलने को ,
तुमने बंदिशों को दोषी ठहराया ।।
ये जो भी था इतना न होता ,
तुम्हारे दिल में अगर चाहते होती ,
तो तुम बंदिशे भी तोड़ देते ।।
-) आईने को ना घुरा करो इतना टूट जाएगा ।।
प्यार ना किया करो उनसे इतना,
एक दिन दामन छूट जाएगा ।।
-) तेरी आंखों ने हमें मदहोश कर दिया,
वरना एक किताब तो हम तुझ पर भी लिख देते ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) अधूरी बातें ही तो सबसे गहरी होती हैं।
-) तेरा नाम ही मेरी पहचान बन गया।
-) तुझसे शुरू, तुझपे खत्म मेरी दास्तां।
-)तू गया तो क्या हुआ, कहानी तो रह गई।
-) कुछ रिश्ते अल्फाज़ नहीं, एहसास मांगते हैं।
-) तेरे जाने के बाद भी, हर बात में तू रहा।
-) तेरे बिना कुछ अधूरा सा लगता है।
-) मेरी तन्हाई भी तुझसे बातें करती है।
-) जो तेरे बिना गुज़रा, वो वक़्त नहीं गुज़ारा था।
-) तेरे ख्यालों से ही ये दिल बहलता रहा।
-) तू पास नहीं, पर एहसास में है।
-) मैं तुझमें जिंदा हूं, तू मुझमें खोया है।
-) कुछ किस्से अधूरे ही अच्छे लगते हैं।
-) तेरी बातों ने ही तो मुझे जीना सिखाया।
-) ये जो हमारी कहानी है, बस एहसासों की रवानी है।
-) न कोई वादा था, न कोई गिला — फिर भी था प्यार।
-) कुछ तेरी बातों में जादू सा था।
-) तेरे ख्वाबों में जीना, मेरी आदत बन गई थी।
-) ये जो तेरी मेरी चुप्पी थी, उसमें मोहब्बत बहुत थी।
-) तुझसे मिला, तो खुद से भी मिल गया।
-) तेरा नाम आते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
-) तुझसे दूर होकर भी तुझसे जुड़ा रहा।
-) हर लम्हा तुझसे शुरू होता, तुझ पर ही खत्म होता।
-) तेरी मेरी कहानी कुछ ऐसी बनी, जो कभी पुरानी ना हो सकी।
-) तेरा नाम अब भी मेरी हर दुआ में शामिल है।
-) काज़ल लगी आँखें सुर्ख थी उसकी ,
काजल के बग़ैर खूबसूरत कमाल लगती वो ।।
जो लगाया आंखों पे उसने ,
परियों की शहजादी लगती वो ।।
-) झलक एक जो पा ले उसकी ,
जाने कितनी बार गंगा नहा ले वो ।।
हम पापों में घिरे थे जाने कबसे ,
अब पाप मुक्त हो गएं हैं हम ।।
-) उसके दीदार को आशुतोष तरस जाते हैं,
बातें तमाम करते हैं लोग कि ना देखो उसे ।।
हमको लगता ऐसा हैं कि ,
मौत को गले लगा ले और फिर ना देखें उसे ।।
-) हम मोहब्बत की पहली दहलीज पर हैं,
इसके पहले ऐसा अहसास ना हुआ हैं हमको ।।
हम गलतियों का पिटारा रहें हैं,
अब उसके सिर गलती बनना हैं हमको ।।
-) जाने लोग क्यों पहली मोहब्बत का तमाशा करते हैं,
किसी और पर उस मोहब्बत का गुनाह मड़ते हैं ।।
वफ़ा अगर होती उन्हें ,
तो जाते क्यों छोड़ कर ।।
और तुम जो बेवफ़ा उसको कहते हो ,
फ़िर दिल दूसरे से लगाते कैसे उसे भूल कर ।।
जो हैं नहीं उसका क्या जिक्र करतें हो अब ,
दूसरी मोहब्बत को पहली क्यों नहीं समझते तुम ।।
-) हम गाँव हमारा छोड़ आएं हैं,
जाने किसको रोता छोड़ आएं हैं।।
दिल तो ना था शहर जाने का,
कुछ अपनों की बातों से अपना घर छोड़ आएं है ।।
-) मुझसे मेरी आशिक़ी का सवाल ना कर ,
दिल मेरे गांव से क्या ख़ूब लगाया था मैंने ।।
कैसे छोड़ आया सब ये सवाल ना कर ,
कहीं सूरज उगता था मेरा ,
कहीं शाम ढलती थी मेरी ,
अब जो वीरान कर आएं हैं
अपनी शामों को हम छोड़ आएं हैं ।।
-) कहीं दिन गुज़र रहा हैं,
शाम की ख़बर ना लो ।।
हम अपना घर छोड़ आएं हैं,
हमें अब बंजारा बना लो ,
किसी दामन में छुपा लो ।।
-) हमने फ़ैसला ये क्या कर लिया ,
एक बात पे घर छोड़ दिया ।।
और तो करते क्या ,
कुछ उम्मीद भी ना थीं,
अपने आप से बस सब अलग कर लिया ।।
-) लोग बातें करते हैं,
जाने किस आसमान की ।।
हम अपने घर का आंगन देखते हैं,
लोगों को फ़ुर्सत ही नहीं बाहर की दुनिया से,
अपने किरदार में ज़मीन देखते हैं।।
-) मेरे मेहबूब से मोहब्बत में ,
जान की बाज़ी सी बात हैं ।।
उसके एक इशारे पर,
ज़िंदगी उसके नाम हैं ।।
-) मैं अफवाहों से बचा रहता हूं ,
आंखों के सामने जो घटे,
बस उसे सच कहता हूं ।।
लोगों की बातों का क्या ,
ये अफवाहों में जिया करतें हैं,
मैं अफवाह की आस को ख़ारिज किया करता हूं ।।
-) ज़िंदगी में कुछ और तो ग़म नहीं ,
जो हासिल था कभी ,
अब पास में वो भी नहीं ।।
ख़ुद से क्या हैं हमें,
जो था किसी और का था ,
अब हमारे पास हम ही नहीं ।।
-) उसकी आँखों में नूर नज़र आता हैं,
मेरे चेहरे की शक्ल का चेहरा नजर आता हैं ।।
और तो ज्यादा उनमें डूबा नहीं मैं,
वरना उनमें मुझे मेरा वर्तमान भविष्य सबकुछ नज़र आता हैं ।।
-) मेरे मेहबूब मेरी मोहब्बत का तमाशा मुझसे ना कर ,
तेरे होने की ख़बर जमाने को ना कर ।।
और तो कुछ होता नहीं ज़माने में ,
नज़र लगाते हैं लोग ,
मेरी मोहब्बत को नज़र के हवाले ना कर ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
"दिल की गहराई में बसी है वो शायरी, जो शब्दों से नहीं, एहसासों से लिखी जाती है।”
-) मैं हूँ बदनाम, मगर दिल से सच्चा हूँ,
झूठों की दुनिया में अकेला ही अच्छा हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, फिर भी लोग जलते हैं,
मुझसे नहीं, मेरी हिम्मत से डरते हैं।
-) मैं हूँ बदनाम, हर नज़र में सवाल हूँ,
जिनसे मिला नहीं, उनके भी खयाल हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, क्योंकि सच कहता हूँ,
भीड़ में नहीं, अपनी राह चलता हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, पर चेहरा उजला है,
झूठों के बाज़ार में बस दिल ही कच्चा है।
-) मैं हूँ बदनाम, तेरा किया तो नहीं,
लोगों ने जो सुना, वो मेरा लिखा तो नहीं।
-) मैं हूँ बदनाम, फिर भी शान से जीता हूँ,
जो कहते हैं पीछे से, उन्हें सामने सीता हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, अपने फन में माहिर,
अफ़वाहों से डरूं, मैं नहीं वो शायर।
-) मैं हूँ बदनाम, फिर भी मशहूर हूँ,
तू जो भुला न सके, मैं वही हूर हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, इश्क़ के अफसाने में,
नाम नहीं मेरा, पर चर्चा हैं फसाने में।
-) मैं हूँ बदनाम, कड़वी सच्चाई जैसा,
जो चुभता है दिल में, पर होता है वैसा।
-) मैं हूँ बदनाम, मगर खुद्दार हूँ,
तूफानों में भी अपनी पहचान बरक़रार हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, लेकिन दर्द का इलाज भी,
जो टूटते हैं, उनके लिए आवाज़ भी।
-) मैं हूँ बदनाम, पर नीयत साफ़ रखता हूँ,
जो भी पास आया, उसे ही माफ़ रखता हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, क्योंकि मैं अलग हूँ,
झूठ की भीड़ में बस थोड़ा सच हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, फिर भी दिलवाला हूँ,
जिसको चाहा, उसे निभा देने वाला हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, मगर अपने लिए खास,
लोगों की सोच से कहीं ऊँचा मेरा पास।
-) मैं हूँ बदनाम, नाम नहीं काम से,
बातें बहुत हैं, पर पहचान है अंदाज़ से।
-) मैं हूँ बदनाम, मगर वजह तू थी,
ख़ुद को मिटा दिया, और शोहरत तू थी।
-) मैं हूँ बदनाम, फिर भी बेख़ौफ हूँ,
सच की राह पर चलने वाला सौफ़ हूँ।
-) मैं हूँ बदनाम, तेरे जिक्र की तरह,
हर जुबां पर हूँ, तेरी फिक्र की तरह।
-) मैं हूँ बदनाम, कुछ तेरे कारण भी,
वरना लोग तो मुझे फरिश्ता कहते कभी।
-) मैं हूँ बदनाम, फिर भी अकेला नहीं,
मेरे साथ मेरी सच्चाई है कहीं।
-) मैं हूँ बदनाम, और यही मेरी क़ीमत है,
सस्ती नज़रों में नहीं, ऊँची हिम्मत है।
-) मैं हूँ बदनाम, फिर भी अफ़साना हूँ,
जिसे दुनिया मिटा न सकी, वो दीवाना हूँ।
~~~आराध्यापरी~~~






























Post a Comment