Deep Romantic Quotes :- भारतीय संस्कृति में शायरी और कविता का विशेष स्थान रहा है। कबीर, रहीम, तुलसीदास, मीर, ग़ालिब, दुष्यंत कुमार, हरिवंश राय बच्चन और आधुनिक दौर के अनेक रचनाकारों ने अपने शब्दों के माध्यम से समाज को प्रेम, संवेदना, संघर्ष और जीवन-दर्शन का संदेश दिया है। समय के साथ शायरी का स्वरूप बदलता गया, लेकिन उसकी आत्मा आज भी वही है—मनुष्य के हृदय की गहराइयों को शब्द देना।
-) चांद को अपनी ख़ूबसूरती का ग़ुमान तब तक हैं,
जब तक मेरे सनम की बात ना हो ।।
ज्यों ही बात मेरे सनम की आईं,
चाँद ने अपनी निगाहें बदल ली ।।
-) फूलों को महकने का हुनर ना दीजिएं,
फिज़ाओं को बहकने का हुनर न दीजिएं।।
उनके राज़ हैं ये क्या ख़ूब,
उन्हें अपना सा रहने दीजिएं ,
प्रकृति के आचरण में अपना हस्तक्षेप ना कीजिए ।।
-) अब हमें पंखों की परख दिखाते हैं वे ,
जिन्हें उड़ने का हुनर हमनें सिखाया।।
हम जिस महफ़िल की शान थें,
उस महफ़िल से हमें निकालना चाहते हैं वे ।।
-) मुझे ज़माने की ख़बर नहीं ,
मैं ख़ुद में खोया हूं ।।
हुनरमंद मेरा हुनर ना आजमाओं,
मैं ना जाने कितनी उलफ़तोँ से ,
ख़ुद को समेट लाया हूं ।।
-) मेरी उम्मीद का बांध भी जाने कैसे रुक पाता,
सारी हदों के बाद मैंने अपने सब्र को खोया हैं।।
मुझे किसी और के अंदाज़ में ना नापों,
मैंने हर एक शख़्स को उसके बराबर ही आंका हैं।।
-) मुझको तूफ़ान का डर ना दिखा ,
मैं तूफ़ानो में पला बड़ा हूं ।।
समंदर की धौंस ना दिखा ,
मैं इसपर राज़ कर चुकां हूं ।।
-) तूफ़ान को मौज करने दें ,
हम भीं इस से बेख़ौफ लड़ेंगे ।।
इन बाजुओं में ज़ोर अभी नया नया हैं,
हम अपने हौसलों से युद्ध लड़ेंगे ।।
-) तेरा नाम ही काफ़ी रहा,
हम मुसीबतों से सुलह कर आएं हैं।।
हमें उम्मीद थीं कि बचना अब मुमकिन नहीं,
हमनें तेरे नाम के सहारे ख़ुद को बचाएं रखा ।।
-) तारे चाँद कुछ कह रहें हैं हमसे ,
चांदनी में तेरा चाँद कहां जा छुपा ।।
उनकी बातें सुनकर हम मुस्कुराने लगें,
वे इठलाने लगे हम शर्माने लगें ,
महबूब सनम चांदनी को फिर ,
अपनी निगाहों में छुपने लगें।।
-) मेरे नाम से मशहूर कोई और हर जगह हो गया,
उसके नाम से मशहूर मैं हो गया ।।
-) ये भी क्या कम हैं तुझे और बस तुझे चाहते हैं,
तेरे बग़ैर तन्हा से रहते हैं,
खिले हुएं बाग में मुरझाए से रहते हैं।।
-) कितना कुछ हो गया फिर भी हम कुछ नहीं कहते,
जानते हैं हम यूं नाराज़गी से रिश्ते भी तोड़े जाते ।।
-) तुम मिल जाओ यकीनन सब बदल लेंगे हम ,
तेरे बग़ैर तो आवारा से हैं हम ।।
-) मंज़िल मुकद्दर नसीब ये कहां हैं पास हमारे ,
हम बस तुझे जानते हैं इसके सिवा क्या हैं तासीर हमारी ।।
-) हाल जान जाओ बग़ैर बताएं तो जाने तुम्हें,
यूं हर बात बयां करना भी इश्क़ कि तौहीन हैं।।
ज़िंदगी भर तुझे चाहते रहे बग़ैर किसी शर्त के ,
बस तेरी बातों को मानते रहे बग़ैर किसी हर्ज के
अब भी तुम इठलाओ तो मेरा ना होना ही ठीक हैं।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) जिम्मेदारी का बोझ उठाना सिख लिया मैंने,
काम की राह में, मंजिल तक पहुँचना सीखा मैंने।
-) काम को समझा, उसे सजा लिया मैंने,
जिम्मेदारी का हर पल, खुद पर गिरा लिया मैंने।
-) मेहनत की राह पर, एक नया सवेरा पाया,
जिम्मेदारियों के उस पहाड़ को मैंने सिमटा लिया।
-) काम में सच्चाई, जिम्मेदारी का नारा,
हर मुश्किल को मुस्कुराकर स्वीकारा।
-) जो काम में जुटा, वही सच्चा सिपाही है,
जिम्मेदारी की धरोहर, उसकी पहचान बनाई है।
-) मेहनत से हमेशा, नाता जोड़ते रहो,
जिम्मेदारी के पंखों से उड़ान भरते रहो।
-) कभी न थकना, यही है जिम्मेदारी की बात,
काम की गोद में मिलती है सच्ची सौभाग्य की रात।
-) जब जिम्मेदारी का हाथ थाम लिया मैंने,
अपने कर्तव्यों को, सच्चाई से निभा लिया मैंने।
-) काम में जो निष्ठा, वही जीवन की पहचान,
जिम्मेदारी को मानते हुए, बढ़ते कदमों का हिंदुस्तान।
-) मेहनत का फल मीठा, यही है सच का नारा,
जिम्मेदारी की राह पर, पाओगे सबका इशारा।
-) वक्त की कीमत समझो, यही है जिम्मेदारी,
काम में लगाओ खुद को, यही है मुहब्बत हमारी।
-) काम की हर लहर में, जिम्मेदारी की आवाज़ है,
उसी संग गुजरता, जिंदगी का हर एक रूमाल है।
-) जब तक काम ना होगा, जिम्मेदारी अधूरी है,
समाज का सच्चा रंग, मेहनत की नूर है।
-) जिम्मेदारी का ताप झेलो, मेहनत करो हर पल,
काम के इस समंदर में, तैरकर निकालो सफलता का जल।
-) काम की हर धड़कन में, जिम्मेदारी का संग है,
सही दिशा में बढ़ते चलो, यही जीवन का रंग है।
-) जब जिम्मेदारी बाजार में बिकने लगी,
तो मैंने मेहनत को हर रोज़ अपनाने लगी।
-) काम की नींव पर, जिम्मेदारी का घर बना,
सच्ची मेहनत से ही, मैंने खुद को समर्पित किया।
-) हर जिम्मेदारी से सजीव, जीवन की सच्चाई है,
काम की दुनिया में, मेहनत की नाई है।
-) जिम्मेदारी के ख्वाब में, काम की रोशनी छुपी है,
अपनी मेहनत के संग, खुशियों की सवारी लिपटी है।
-) जब जिम्मेदारी का बोझ उठाने का मन करों,
तब हाथ में लिए मेहनत, खुद को हर बार निखारो।
-) काम की गहराइयाँ, जिम्मेदारी का बहार है,
सच्चाई से भरी, यही जीवन की सरकार है।
-) जब सब यूँ ही गुनगुनाते, मैंने काम का संग पाला,
जिम्मेदारी को नकारा नहीं, बस सच्चाई से निभा लिया गेला।
-) मेहनत की छांव में, जिम्मेदारी ढलती है,
काम की धार में, जिंदगी की कहानी पलती है।
-) जब तक काम किया, जिम्मेदारी का ख्याल रखा,
सफलता की ओर बढ़कर, मैंने खुद को निखार लिया।
-) काम की चुनौतियों में, जिम्मेदारी का साहस है,
इसी के साथ मैं जीवन की हर मुश्किल का जौहर हूँ।
आज के डिजिटल युग में हिंदी शायरी की लोकप्रियता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप स्टेटस, इंस्टाग्राम पोस्ट, फेसबुक, यूट्यूब और ब्लॉग्स ने शायरी को लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुँचा दिया है। आज लोग अपनी भावनाओं को सीधे शब्दों में व्यक्त करने के बजाय शायरी के माध्यम से कहना अधिक पसंद करते हैं। कुछ पंक्तियाँ ही किसी के दिल की पूरी कहानी बयां कर देती हैं।
~~~आराध्यापरी~~~
-: "अगर आप ढूंढ रहे हैं सबसे बेहतरीन हिंदी बेस्ट शायरी, तो हमारी वेबसाइट पर आपको मिलेगी दिल को छूने वाली शायरी जो आपके हर एहसास को खूबसूरती से शब्दों में ढाल देती है।”
-) उसने कहां था रुकना एक मिनट,
कईं उम्रें गुज़ार दी उसके एक मिनट में ।।
हम यूं ठहर गए मानो बर्फ़ में ज़म गएं,
बस ऐसे रुक गएं जैसे ज़माने गुज़र गएं उसके एक मिनट में ।।
-) आबों हवां शहर की बदलने लगी ,
इससे पहले कुछ ज्यादती हो जाएं ।।
हम इस शहर से जुदा हो जाएं ,
क़यामतें बरसने के आसार लगते हैं,
इससे बेहतर तो ये हैं अब सबसे अलग हो जाएं ।।
-) घर से बेघर होनें का डर सताने लगा ,
अपनी मर्जी से जो में चलने लगा ।।
जी हुजूरी में जाने कितना वक्त गुजरा ,
अब इस घर को पराया कहने को जी करने लगा ।।
-) डर ये हैं मेरे बाद मेरे जैसा कोई नहीं ,
जो मैं भी बदल गया तो फ़िर इस सादगी का हक़दार कोई नहीं ।।
-) मुकाम हर एक को मिले ज़रूरी नहीं,
मेहनत से ही सब हासिल हो ये ज़रूरी नहीं ।।
कुछ तो तमाशा किस्मत का भी हैं,
मुक़ाम रहमत बग़ैर ख़ुदा के हासिल नहीं ।।
-) उसके एक इशारे पर हमनें,
हर उस बात से किनारा किया ।।
जो हमें सबसे ज्यादा मंज़ूर थी ,
उसकी बातों को हमने वफ़ा का नाम दिया ,
जिसकी वो हकदार थी ।।
उसके कहें से बाहर भी जा नहीं सकते ,
उसने जो कहा वो सब पत्थर की लकीर थी ।।
-) हम ख़ुद के खिलाफ जा सकते हैं ,
तुझसे हम अलग नहीं जा सकते ।।
तेरी हर बात को एक किताब में लिख आएं हैं हम,
लिखी हुईं बातों से भाग नहीं सकते हम ।।
वादा तुझसे सारी उम्र का किया हैं,
जबतक पूरी नहीं हो जाती जहां छोड़ नहीं सकते हम ।।
-) बात ना हो तुझसे तो जाने क्या होने लगता हैं,
सूरज डूबा सा मन उलझने लगता हैं।।
तू सिर्फ़ इश्क़ नहीं ,
ज़िंदगी हैं हमारी ।।
-) फिज़ा रंग सतरंगी होने लगी ,
तेरा नूर जबसे छाने लगा ।।
आसमान भी रंग बदलने लगा ,
हमसे जब नज़र आप मिलाने लगें ।।
-) सरेआम बर्बाद करने लगें,
अपने मुझको परेशान करने लगें ।।
कोई भी नहीं हासिल हमें ,
हमसे सब दूर जाने लगें ।।
-) वक्त बर्बाद कर रहें हैं हम ,
अपनी तबाही का तमाशा कर रहें हैं हम ।।
और तो कुछ नहीं पास हमारें,
वे वक्त मरने लगें हैं हम ।।
-) ज़माने की नज़र से बच रहें हैं,
अपनी नज़र से उतर रहें हैं ।।
और किसी से क्या कहें हम ,
अब ख़ुद से बच रहें हैं हम ।।
-) तू उम्मीद का दामन यूं ना थमा ,
हर बात पे आस टूटी हैं ।।
दिल के टुकड़े भरे बाज़ार हुएं हैं,
हम सरेआम बर्बाद हुएं हैं ।।
-) डर से यूं भी ना कतराये ,
डर को हासिल कर एक किरण पे बैठ जाएं ।।
कुछ तो हासिल होगा तुम्हें,
डर से क़दम न डगमगायें ।।
-) आब़ों हवा बदल रही हैं,
शहर में बरसाते मेरे बहाल की बरस रहीं हैं ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~






























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