Heart Touching Love Shayari :- कभी आपने सोचा है कि केवल दो पंक्तियाँ पढ़कर आँखें नम क्यों हो जाती हैं या चेहरे पर मुस्कान क्यों आ जाती है? इसका उत्तर शायरी में छिपा है। शायरी वह माध्यम है जो उन भावनाओं को भी आवाज़ दे देती है, जिन्हें साधारण शब्दों में कहना कठिन होता है। यही कारण है कि सदियों से शायरी लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाए हुए है।
आज के डिजिटल युग में शायरी पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हो चुकी है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप, यूट्यूब और ब्लॉग्स ने इसे लाखों लोगों तक पहुँचा दिया है। लोग अपनी भावनाओं को सीधे व्यक्त करने के बजाय अक्सर शायरी के माध्यम से कहना पसंद करते हैं, क्योंकि कुछ पंक्तियाँ वह प्रभाव छोड़ देती हैं जो लंबे भाषण भी नहीं छोड़ पाते।
-) वक्त क्या बदला नजारें बदल गएं,
कभी हम बेपरवाह थें सबकी नज़र में,
आज हम सबसे ज्यादा ज़िम्मेदार हो गएं।।
-) एक तो ये भी कम नहीं ,
कुछ ना पाने वाले कुछ ज्यादा ही पा जाएं,
ज़िद्दी होने का चलो कुछ तो फ़ायदा हुआ ।।
-) हम अपनी आख़िरी हद के साथी हैं,
कोशिशें तमाम की मंज़िल ना मिली,
हद जब हुई तो रास्ता अपने आप बन गया ।।
-) मैं अपने आप को समेट लूं ,
या मंज़िल को पा लूं ।।
कुछ हासिल नहीं तो क्या हुआ ,
उम्मीद की किरण तू हैं,
कुछ पा ही लेंगे अब इतनी मशक्कत के बाद ।।
-) अच्छा समय भी बड़ा ख़राब हैं,
ये पहचान नहीं होने देता अपनों की ।।
-) समय बदलते देर नहीं लगती ,
कल तक जो आँखों में खटकते थें,
समय बदलते वे आँखों के तारें हो गएं।।
-) किसी ने कुछ ना समझा ,
बात हमारी जब अना पर आईं।।
तो हमने ऐसा कुछ कर दिया ,
लोग बस अब हमको समझते हैं।।
-) उसका साथ भी कमाल हैं,
बुरे वक्त का पता नहीं चलता ।।
अच्छे वक्त को गुजरने में ,
उम्र गुज़र जाती हैं।।
-) उसने इस क़दर हाथ थामा हमारा ,
की फ़िर ना हाथ छोड़ा उसने।।
कभी लगता था कि नाव डूब जाएंगी,
जो देखा उसे तो लगा के नहीं हो सकता ये कभीं।।
-) समंदर में तूफ़ान इस क़दर था,
डूबने के सिवा कुछ और रास्ता ना था ।।
हमनें फिर भीं ख़ुद को बचाएं रखा,
हर डूबती चीज़ से बचते रहें ,
बात जब हमारी आईं डूबने की तो तिनके के सहारे वहां से हम निकल लिएं ।।
-) हम किसी के हिस्से ना आएं ,
ये बात भीं कमाल हैं।।
हम ज़िंदगी भर दूसरों के होकर रहें,
फ़िर भी किसी के ना हुएं,
तो अब क्या करें।।
-) मुझसे बातें प्यार मोहब्बत की ना किया करों,
हमनें इन गलियों में अपना बहुत कुछ खोया हैं।।
-) ज़िंदगी भर ये मलाल रहा,
उससे दो बात ना कर सके ।।
जिसे सबकुछ मानते थे,
बस उसको अंत तक ना देख सकें ।।
-) हम उसे ना समझ पाएं ,
जो हमें सबकुछ समझता था ।।
हम उसकी बातों को एकतरफा कर गएं,
जिसकी बातों से सब कुछ होता था ।।
-) आख़िर मंज़िल मिल ही गईं,
जाने कब का निकला था वो घर से।।
एक दशक से हमनें कुछ उसे देखा हीं नहीं था,
जब देखा तो बहुत कुछ बदल गया ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
लेकिन अच्छी शायरी लिखना केवल तुकबंदी करना नहीं है। इसके लिए संवेदनशीलता, भाषा पर पकड़, कल्पनाशक्ति, मौलिक सोच और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। इस लेख में हम जानेंगे कि शायरी क्या होती है, अच्छी शायरी की पहचान कैसे करें, विषय का चयन कैसे करें और अपनी मौलिक शायरी कैसे लिखें।
-) भक्ति में तेरा नाम जपा,
सच्चा सुख उसी पल मिला।
-) ना आरती, ना भोग, ना दीप जलाया,
तेरा नाम ही हर पूजा में अपनाया।
-) तेरे बिना हर रंग अधूरा है,
तू ना हो तो ये जीवन सूना है।
-) मेरी तालीम, मेरी किताब, तेरा नाम है,
तू ही मेरा ज्ञान, तू ही मेरा काम है।
-) तेरी यादों से सजाया हर पल,
तू आराध्य, तुझसे ही मिलती हलचल।
-) तेरे चरणों में ही मिला है ठौर,
तेरी भक्ति में ही जीवन की डोर।
-)जब भी टूटता हूँ, तुझे पुकारता हूँ,
फिर तेरी आराधना में निखर जाता हूँ।
-) तेरे बिना कुछ भी नहीं जान पड़ता,
तू ही आराध्य, तू ही भगवान लगता।
-) ना मंदिर ना मस्जिद, ना कोई गली,
तेरे ख्यालों में ही है मेरी हर चली।
-) तेरे नाम में है वो शक्ति,
जो बदल दे मेरी हर स्थिति।
-) सांसों में जब तेरा नाम आया,
लगता है खुदा ने मुझसे प्यार जताया।
-)तेरे इश्क में ही मिलती है मुक्ति,
तेरे बिना अधूरी है भक्ति।
-) तेरी एक झलक से हो जाता हूँ शांत,
तेरे बिना लगता है सब कुछ अंत।
-) तेरी आराध्या में ही पाया चैन,
वरना जीवन था बस एक दर्द भरा रैन।
-) तेरे चरणों की धूल भी वरदान लगे,
तू ना हो तो सारी दुनिया बेगान लगे।
-) तुझमें ही रमता है मेरा मन,
तू आराध्य, तू ही जीवन धन।
-) तू ही मेरी हर जप की माला है,
तू ना हो तो सब कुछ उजाला है।
-) तेरी पूजा में लिपटी मेरी साँसें हैं,
तू ही मेरी हर आस की आशाएं हैं।
-) तू मिले ना मिले, पर तुझसे प्यार है,
आराध्य है तू, यही सबसे बड़ा उपहार है।
-) तेरे नाम से ही सबकुछ संभव है,
तू ना हो तो जीवन निष्फल है।
-)तेरे नाम का दीया जले,
मेरी आत्मा उसमें पले।
-) तेरी भक्ति में ही सच्चा सुख है,
बाकी सब संसार का दुख है।
-) तुझसे मिला तो जीवन सफल हुआ,
तेरी भक्ति से मन निर्मल हुआ।
-) तू मेरी सुबह, तू ही मेरी रात,
तुझसे जुड़ी हर बात में है बात।
-) आराधना है, इबादत भी तू,
मेरे हर क्षण की जरूरत भी तू।
सरल शब्दों में कहें तो शायरी दिल की तस्वीर है। जैसे कैमरा किसी दृश्य को कैद करता है, वैसे ही शायरी किसी एहसास को शब्दों में कैद कर लेती है।
शायरी एक ऐसी साहित्यिक विधा है जो कम शब्दों में गहरी बात कहने की क्षमता रखती है। जहाँ एक कहानी किसी भावना को विस्तार से समझाती है, वहीं शायरी वही बात दो या चार पंक्तियों में पाठक के दिल तक पहुँचा देती है।
~~~आराध्यापरी~~~
-) किताबों ने रम्ज किया हैं हम पर,
हम किसी के दिल की मोहब्बत नहीं ।।
जो सोचा दिल लगाने का किसी से ,
किताबों ने कहां अभी किसी से मोहब्बत नहीं ।।
-) महफिलों में उनकी नाम बदनाम मेरा कोई कर गया ,
मैं उससे पूछता मगर मेरी मोहब्बत को हवा कोई अंजान कर गया ।।
उसको तो थी खबर मेरी मगर ना जाने फिज़ा कहा की थी,
जाने वालों में सबसे पहले मेरा हमसफर गया ।।
-) मैं ना जाने किस दौड़ का हिस्सा बनके रह गया ,
चले थे लोग कई साथ मेरे मगर,
मैं अकेला सफर में रह गया ।।
किस से कहें हाल- ए -दिल ,
कोई सुनता भी नहीं जज्बात को,
तो फिर मैं अकेला तन्हाई में,
सिर्फ आशुतोष बन कर रह गया ।।
अब मुझसे यूं बात ना करो खुले असमान की ,
मैं पिंजरे में बंद एक द्विज बन कर रह गया ।।
-) अब ना जाने किस दौर में आ उलझा मैं ,
रंजो ग़म के अलावा कुछ भी तो नहीं यहां ।।
इक दौर वो भी था , कयामत के शहर में ,
हर जगह मशहूर मैं था ,
अब जो पूछ लूं कि क्या हूं मैं ।।
जानते नहीं मुझे,तो कहते हैं,
सबकुछ बदल गया , वो यादें अब धुंधली हैं ।।
जान ने वाले सब चले गएं ,
वक्त ने अजीब करवट खाई हैं,
जिन ने वादे किये थे ताउम्र के ,
वक्त से पहले ही उन्होंने अपनी मर्जी चलाई हैं।।
खैर छोड़ो ये जानने की बातें,
जो तस्वीर यादों में हैं मिटा क्यूं नहीं देते उसे ,
ये सब जो तुम कर रहे हों ये खुदा की रुसवाई हैं ।।
बेहतर ये होगा भूल जाओ उन्हें ,
जान ने वाले जान दे गएं,
वो थे तो जानते सब मगर एक बात पर अब गौर करों,
उनके अलावा अब कोई नहीं जानता तुम्हे यहां ।।
-) बिछड़ने की ना जाने किस मोड़ पे उसे याद आईं,
मैंने आंखे भरके बस देखा ही था अभी तो ।।
एक तस्वीर निगाहों से दिल में उतारी थी,
ख्वाबों में उसकी रंगत सवारी थी अभी तो ।।
मौसम बेमौसम बरसात कर ही गया ,
मेरी फ़सल कच्ची थी अभी तो ।।
जो रुक जाता तू तो सबकुछ ठहर जाता ,
ख्वाहिश नहीं यही ख़ुदाई थी मेरी अभी तो ।।
-) तेरे होने का भी अलग ही गुरूर हैं हमको ,
बेवजह ही शहंशाह बने फिरते हैं ।।
तुझको दिल समझके अपनी ,
खूबसूरत कहानी लिखते रहते हैं ,
तू जनता भी नहीं तेरे ना होने का अंजाम क्या हैं ।।
कभी ये कहना भी नहीं कि भूल जाओ मुझे
हम तेरे भूल जाने के अंजाम को मौत लिखा करते हैं ।।
-) तुझे लिखने को दिल चाहता हैं,
लिखें क्या एक कविता बनाने को दिल चाहता हैं ।।
अंधेरी रातों में तुझे पूर्णिमा का ,
चाँद बोलने को दिल चाहता हैं ।।
मैं उलझा हुआ एक नादान हूं,
तुम्हे सुलझा हुआ मन कहने को दिल चाहता हैं ।।
मैं नदियों का पानी हूं ,
तुम्हें समन्दर कहने को दिल चाहता हैं ।।
देखा ही नहीं मैंने अपने आप को कभी,
आपको आईना बनाने का दिल चाहता हैं ।।
-) हम तेरे ना आने का इंतजार एक उम्र तक करेंगे
तू ना आया तो फिर हम न रहेंगे ।।
वास्ता तुझसे हैं,
बस तुझे ही याद करते हैं ,
ऐसे वैसों से हम कल भी दूर थे ,
और आज भी ,
किसी तेरे जैसे का इंतजार नहीं करेंगे ।।
तू उमर यूं ना गुजार देना कि सब खत्म हो जाएं,
हम तेरे ग़म में सबकुछ तबाह कर देंगे ।।
ये हसीन चेहरे कितने खूबसूरत हैं,
मगर हम तुझे चाहने वाले हैं ,
यूं ही हर किसी पे दिल नहीं वार देंगे ।।
तू कितना कुछ और सबकुछ तू ही तो हैं,
ये किस्से वफ़ा किस से कहेंगे
तेरे ना आने पर हम अफ़साने लिखेंगे ।।
-) ऐ इश्क तुझमें बर्बाद होने को जी चाहता हैं,
होकर जुदा सबसे तुझमें मिल जाने को दिल चाहता हैं ।।
सुना हैं इसकी राह में सिर्फ एक शख्स मिलता हैं,
उस एक शख्स को साकी बनाने का दिल चाहता हैं ।।
हम लुट गए हैं सरेबाजार ,
अब सबकुछ लुटाने को जी चाहता हैं ।।
-) अजीब राह पर आ खड़े हैं,
किसी को याद करते हैं ।।
कोई और नजर आता हैं,
किसी की तलाश में निकलते हैं,
किसी और को मिल जाते हैं ।।
अब तो ये शौक भी नहीं कि घर जाएं,
घर पे कौन मेरा हैं ।।
एक दफा सोचा था मैंने बैठूं किसी अपने के पास ,
पहुंचा तो पता चला कौन ही यहां मेरा हैं ।।
अब तो इस हाल को बेहाल करना हैं,
उठा हूं एक सवेरे से मैं,
बस अब सूरज के संग ही ढालना हैं ।।
वो आएगी एक सुकून भरी नींद लेकर ,
ऐसे सोएंगे फिर कहां ही
हमें जागना हैं।।
-) कच्ची उम्र के प्यार में दिल लगाने की सजा क्या खूब हैं
एक ही शख्स को ताउम्र चाहने की सजा भी क्या खूब हैं ।।
एक उम्र साथ गुजारी थीं,
अब उस पल को याद करने की सजा क्या ख़ूब हैं ।।
तेरे शहर में रहकर तुझे हीं भूल जाएं,
ये मुमकिन नहीं ,
तेरी यादों के सहारे जीने की सजा भी क्या खूब हैं ।।
-) हमारे लिए बेहतर ये होगा अब की हम अपने रस्ते हो जाएं,
अदब में बेअदबी हमें मंजूर तनिक भी नहीं ।।
ख्वाहिशों की चाहत में बेइज्जती मंजूर नहीं ,
जानते तुम भी हमें खूब हो ,
किस हद तक हम ठहरेंगे या न जाने कब बिफर जाएंगे ,
इससे बेहतर यहीं होगा हम अजनबी हो जाएं ।।
दुख ये नहीं कि हम जुदा हो रहे हैं,
मसला तो तेरे हमें ना समझने का हैं ।।
खुद को हम एक हद तक खींच लाएं ,
यहां से सफर अकेले गुजार देंगे ,
जज़्बाती होकर फैसले न लेंगे अब हम ,
कहेगा जो दिल कुछ इसको भी समझा लेंगे ।।
की दिमाग के जमाने में यार तेरी कौन सुनता हैं,
हम पागल से हैं जो तेरे हर फैसले को सिर आंखों पर रखते हैं।।
अब जो हमारा दिल टूटेगा इसकदर तो ,
खुद क्या संभालेंगे,
जाम का शौक नहीं हमें ,
हम चाय से काम चला लेंगे ।।
आओगे जो फिर कभी तो बैठाएंगे तुमको,
हमारे दिल की अदालत में ,
गुनहगार तुम यार होगे ,
दिल बेहगुनाह हमारा होगा ,
बहुत खेल लिए खेल दिल से इसकी वकालत का
जिम्मा दिमाग हमारा होगा ,
बड़ा खेल खेलते हो तुम जज़्बात से ,
अबकी दफा जरा संभल कर आना ,
यहां तारीख की बात न होगी ,
अदालत हमारी होगी और तारीख की शिकस्त बस तुम्हारे चेहरे पर होगी,
याद तो आओगे हमें ,
कहते फ़िरोगे सबसे की इश्क में बेवफाई ना हो ,
हो कुछ मगर यूं रुसवाई ना हों ,
दिल तोड़ना खेल है हसीनो का ,
लेकिन ये खेल किसी के साथ ना हो ,
हम जो पेश आयेंगे हमारे अंदाज से तो जान जाओगे अपने अंदाज ए करम को ,
मिला था कोई आशिक़ मेरा ,
मुझे चाहने वाले की मैं ही दुश्मन हो गईं,
वफ़ा करनी थी उससे मगर ,
जाने में क्यों बेवफा हो गईं ,
भूल जाओ मुझे ये बेहतर मेरे लिए होगा ,
जिंदगी आसान हैं तुम्हारी ,
मेरे यार मुझे इस जिल्लत भरी जिंदगी और इस जिंदगानी से अलग करो ।।
-) मंजिलें मिली तमाम लोगों को ,
मैं सफर के इंतजार में बेसुध रहां ।।
पहुंचे वो भी वक्त पर जो मुझसे बाद में घर से निकलें,
मैंने ना जाने किस कदर वक्त गवायां ।।
उम्मीदें तमाम थी खुद से हमकों भी ,
मगर ना जानें कहां ख्वाब टूटे कहां हम ।।
उम्र भी यूं क्यूं बढ़ती हैं,
जरा क्या ठहरे लगने लगा यूं बचपने से बुढ़ापे में आ गुजरे ।।
मैं खुद को तलाशता हूं ,
खुद की तलाश में ,
ना जाने कहां खोया हैं,
वो शख्स हां मैं ही अब खुद
से अनजान हूं ।।
-) फिर वो यूँ मिली ना जाने कितने दिनों के बाद ,
फिर से मिलने में अब वो बात ना थी ।।
पहले जो हस्ती खिल -खिलाती थी,
अब वो कुछ उदास सी थी ।।
पहले जो खुद बालपन में थी ,
देखो आज वो जमाने भर से समझदार सी हैं।।
जो पूछा हल-ए-दिल मैंने उसका,
तो एक झूठ बोलने लगी,
जो कुछ और कहती वो,
तो साँसों कि सिसक ने बता दिया हाल उसका ।।
फिर यूँ देखा नम आँखों से उसने मुझे ,
लगा यूँ के भर लूँ बाहों में ,
मैं उसे फिर खुदने ही जाना ,
के अब वो बात नहीं।
जिसका जिक्र करता ख्वाबों में ,
मैं आज वो मेरे सामने होकर भी मेरे पास नहीं ।
फिर अलविदा कहने लगे वो ,
तो दिल ने जाना के सच में
ये कोई ख्वाब तो नहीं ।।
-) एक नदी किनारे बैठा कोई मेरे जैसा शख्स लगता हैं,
ज़माने के शोरगुल से एकांत सा लगता हैं ।।
एकांत ये मन बहुत खूब जचता हैं,
जो ना हैं पास उन्हीं के सपने बुनता हैं ।।
पानी सा चंचल मन मेरा ना जाने किस ने कंकड़ मारा इसमें,
एक चेहरा बनाया था इसने खूबसूरत बस उसी चेहरे पे जा उलझता हैं ।।
"अगर आप हिंदी शायरी के दीवाने हैं, तो हमारी वेबसाइट पर आपको मिलेंगी दिल को छूने वाली बेहतरीन और अनोखी शायरी जो हर एहसास को खूबसूरती से बयां करती है।"
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तू है तो हर दर्द भी प्यारा लगे,
तेरे बिना दिल बेसहारा लगे।
-) तू साथ है तो रास्ते भी गुलाब हैं,
तेरे बिना सब ख्वाब अधूरे ख्वाब हैं।
-) तेरी मुस्कान में है सवेरा मेरा,
तू है तो मुकम्मल है बसेरा मेरा।
-) तेरा होना ही है सबसे बड़ी दौलत,
तू ना हो तो लगे ज़िंदगी है शरारत।
-) तेरे साथ हर लम्हा खास बन गया,
तू मिला तो जैसे खुदा मिल गया।
-) तू है तो तन्हाई भी गीत सी लगे,
तेरे बिना ये शाम अजीब सी लगे।
-) तेरा नाम लेती है धड़कनें मेरी,
तू है तो सब राहें अपनी सी लगीं।
-) तू है तो हर मौसम रंगीन लगे,
तेरे बिना ये दुनिया सुनसान लगे।
-) तेरे साए में ही सुकून है मिला,
तू है तो जैसे खुदा है मिला।
-) तेरा साथ मिले तो हर जंग आसान है,
तू है तो हर सुबह एक नई पहचान है।
-) तेरे साथ की ये जो चुप्पियाँ हैं,
बोलती बहुत हैं ये फिज़ाएं।
-) तेरे बिना जो अधूरा था मैं,
तू है तो अब खुदा के करीब हूँ मैं।
-) तू है तो हसरतें भी मुस्कराने लगीं,
तेरे बिना खामोशियाँ भी सताने लगीं।
-) तू है तो रंग हैं फिज़ाओं में,
तेरे बिना धुंध है दुआओं में।
-) तेरा साथ हो तो क्या ग़म है,
ज़िंदगी भी एक मखमली मौसम है।
-) तेरा होना जैसे कविता की रचना,
तू है तो हर पल की अपनी एक भावना।
-) तेरे बिना अधूरी सी लगे दुनिया,
तू है तो हर पल लगे जादूभरा।
-) तेरे बिना जो डर लगता था,
तू है तो वही सफ़र अच्छा लगता है।
-) तू है तो हर दर्द में भी सुकून है,
तेरे बिना हर खुशी में भी खामोशी है।
-) तू है तो रोशनी है हर तरफ,
तेरे बिना अंधेरों से भी डर लगे।
-) तेरे नाम से शुरू होती है हर सुबह,
तू है तो हर शाम भी लगे सुनहरी।
-) तेरे बिना जो वीरान थी राहें,
तू है तो महक उठीं वो सारी पनाहें।
-) तू है तो लगता है खुदा करीब है,
तेरे बिना सब कुछ अजीब है।
-) तेरे होने से ही है ये दिल धड़कता,
तू है तो हर ख्वाब है सच लगता।
-) तेरे साथ जो बिताए हैं पल,
तू है तो वही बन गए हैं कल।
~~~आराध्यापरी~~~






























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