Emotional Breakup Quotes :- आज डिजिटल युग में इसकी लोकप्रियता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। सोशल मीडिया ने शायरी को करोड़ों लोगों तक पहुँचाया है और हर आयु वर्ग का व्यक्ति इससे जुड़ रहा है। बदलते समय के बावजूद शायरी का महत्व कम नहीं हुआ, बल्कि इसकी पहुँच और प्रभाव दोनों बढ़े हैं।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि हिंदी शायरी प्रेम, दर्द, जीवन, संघर्ष, उम्मीद और आत्मविश्वास की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है। यह केवल साहित्य की एक विधा नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय की धड़कन है। प्रेम शायरी दिलों को जोड़ती है, दर्द भरी शायरी टूटे हुए मन को सहारा देती है, जीवन शायरी अनुभवों से सीखने की प्रेरणा देती है और प्रेरणादायक शायरी आगे बढ़ने का साहस प्रदान करती है।
वास्तव में, शायरी केवल पढ़ी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है। जब शब्द हृदय की गहराइयों से निकलते हैं, तो वे सीधे दूसरे हृदय तक पहुँचते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
«"शायरी पढ़ी नहीं जाती,
महसूस की जाती है।"»
और शायद यही कारण है कि जब तक मनुष्य प्रेम करेगा, सपने देखेगा, संघर्ष करेगा और उम्मीदों के साथ आगे बढ़ेगा, तब तक हिंदी शायरी उसकी आत्मा की आवाज़ बनकर सदैव जीवित रहेगी।
-) हम जैसा अगर आंखों में आंसु लाने लग जाएं ,
कोई और बात बनाने लग जाएं ,
तो समझना गहरे ज़ख्म आ गए हैं दिल पर ।।
-) हम इश्क़ के दहलीज की आख़िर हद थे,
इसके बाद बस बेबस थे ।।
हम इश्क़ को मज़हब,
और तुझे धर्म समझते थे ।।
हम कैद में रहकर भी ख़ुद को महफूज समझते थे,
वे खुले आसमान में भी ख़ुद को कैद समझते थे ।।
-) ख़ुद से लड़ रहां हूं मैं,
जाने कैसे दिन काट रहां हूं मैं ।।
साथी कुछ साथ थे एक दो ,
लगता हैं उनकी जान जोख़िम में डाल रहां हूं मैं ।।
-) हमारा हक़ मारा गया ,
जो पास था वो सब छीना गया ।।
और तो कुछ ना था पास दो वक्त की रोटी और तन पे कपड़ा था,
उनके करम हुएं ऐसे हासिल जो था ,
सभी डाका डाल लिया गया ।।
-) तुम जो हुक्म करो तो ,
सरेआम सिर को झुका दें।।
हो इज़ाजत तो ,
तेरे हक़ में फ़ैसले तमाम करदें।।
-) किसे क्या सुनाएं जो हमपर गुज़री,
हादसा ऐसा था कि हम देख भी ना पाएं ।।
ख़ंजर भी किसी अपने के हाथ में था ,
जिसका हम कभी सोच भी ना पाएं।।
आख़िर उसने उतार ही दिया सीने में ,
मैंने एक अर्जी भी डाल दी उसके आगे ,
मेरे सीने में दिल आपके नाम से धड़कता हैं,
इसे भी अब शांत करदो ,
मरते हुएं पर ये अहसान कर दो ,
वो ये भी ना कर पाएं ,
जो किया उसको फिर हम सह भी ना पाएं ।।
-) सुन हैं उसको हाथों में मेहंदी की ख़ुशबू महक रहीं हैं,
हमारी दुल्हन किसी और के लिए सज़ रहीं हैं।।
हम उनके हर अंदाज़ पे जान कुर्बान करते थे ,
कहना उनसे बड़ी मोहब्बत करते थे ।।
अब जो किसी के हो जाओगे,
तो हम हम ना रहेंगे ,
दिल तो धड़केगा बस तेरे आशिक़ ना रहेंगे ।।
तेरी सूरत देखके बस ख़ुद में जलेंगे ,
सब कुछ बर्बाद हम करेंगे ।।
-) घर की कीमत ये हुईं,
शांति समझौते की क़ीमत ये हुईं ।।
हमारा निकल जाना ही,
सब कामों से बेहतर हुआ ।।
-) ख़ुद को चुप रखना भी बड़ा अजीब हैं,
अपनी जान का सौदा सा लगता हैं ।।
कुछ कहो तो कुछ अलग सा होता हैं,
कुछ ना कहो तो सब शांत रहता हैं ।।
-) एक पल में ये क्या कर बैठें हम ,
अपनी ज़िंदगी किसी और की कर बैठें हम ।।
हमको ख़बर ये ना थीं,
ज़िंदगी के बाद मौत मंज़ूर थीं ,
अब अपनी मौत का सौदा कर बैठें हम ।।
-) वो अपने घर की इज़्ज़त का ख्याल कर बैठे ,
हम तमाशा भरे बाज़ार कर बैठें ।।
उन्हें दहलीज के अंदर तक ना जान पाया कोई,
हम सारे शहर में उनका नाम कर बैठें।।
-) मोहब्बत की तौहीन मैं ख़ुद हूं ,
सरफिरों को आशिक़ी ख़ुदा लगती हैं ।।
मैं ख़ुदा को एक पल में भुला आया,
और बातें इश्क़ की करता हूं ।।
-) एक तो ये ग़फलत हैं कि मैं अब भी ज़िंदा हूं ,
लाश जैसा हूं मग़र मैं जिंदा हूं ।।
कुछ तो मर ही जाते हैं बर्बादियों के बाद,
मगर मैं अब भी ज़िंदा हूं ।।
सब छोड़ के चले गए उस मौसम में ,
उस मौसम के भी सब चले गए,
मगर मैं अब भी ज़िंदा हूं ।।
-) अब तो घर भी घर नहीं लगता ,
जाने कैसा ये दौर आ गया हैं।।
हमें अपने घर में परायों सा लगने लगा ,
जैसे अजनबी शहर में किसी अंजान के घर में मैं आ गया ।।
-) कुछ देर जो मैं ठहर जाता तो कत्लेआम हो जाता,
मेरे नाम पे वे यूं इठलाएं जैसे ,
भुजंग को देखकर नेवले ललाहित होने लगें हो ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) पहली बारिश की बूँदों में तेरी यादें छुपी,
हर धड़कन कहती है, मेरा दिल तुझसे जुड़ा है।
-) बूंदों की सरसराहट, जैसे तेरा नाम लाए,
पहली बारिश में तुझसे फिर से मिलने की ख्वाहिश जगाए।
-) बादलों की गडगड़ाहट, दिल की धड़कन बन जाए,
इस पहली बारिश में, तेरा साथ हर पल बस जाए।
-) मन की हर बात बूँदों से कह दूँ मैं,
पहली बारिश में तुझसे हो जाए ये मंझिल का गगन।
-) बरसात की पहली बूँद जैसे प्यार का इकरार,
तेरे बिना अधूरी है, ये रिमझिम की बहार।
-) काले बादल छाए, जैसे तेरे आंखों का जादू,
पहली बारिश में तेरा साथ, हर ग़म का हुआ दफ़्न।
-) बारिश की ठंडी हवाएँ, जैसे तेरा स्पर्श,
तू हो पास तो हर लम्हा, लगे जैसे कोई खुशबू की बर्श।
-) बूँदों की नर्तकी, तेरे संग थिरकती है,
हर पहली बारिश में, दिल की धड़कन तेरा नाम लेती है।
-) पहली बारिश की खुशबू, में तेरा रंग खोजूँ,
तेरे बिना अधूरी है, यह जीवन की हर एक जोश।
-) बादलों की काली चादर, मेरी तन्हाई को ढक ले,
पहली बारिश में बस तुझे, मेरे दिल की हर ख्वाब सजा ले।
-) बूँदों की चूंदीली, जैसे तेरे होंठों की शान,
पहली बारिश में तेरा साथ, मेरे दिल की है पहचान।
-) बारिश की बूँद झरने से, तेरा नाम सुनूँ मैं,
इस पहली बारिश में, तेरा इंतज़ार करूँ मैं।
-) काली घटाएँ घेर लें, फिर भी न होगी कमी,
पहली बारिश में तेरा प्यार, हर दर्द दिल से लेगी।
-) बूँदों की रिमझिम में लहराए तेरा इश्क,
पहली बारिश की चादर में बिछ जाए मेरा विश्वास।
-) पेड़ों की साखों पर, जैसे तेरा चाँद मुस्काए,
पहली बारिश में तु ही तेरा साथ, सब ग़म भुलाए।
-) बादल बोले गूँजकर, तेरा मेरा रिश्ता है प्यारा,
पहली बारिश में तेरा साथ, दिल में जादू सा उतारा।
-) जब से तू संग है, बारिश का मौसम खास है,
हर बूँद में तेरा इश्क, जैसे कोई नया अहसास है।
-) पहली बारिश में बहेगा, प्यार का ये नया जज़्बा,
तेरे साथ चलूँ मैं, जैसे सारा जहाँ मेरा।
-) घिर आए बादल, लाए खुशियाँ मन में,
पहली बारिश में तेरा साथ, जैसे सपना बनके सजे।
-) बारिश की बूँदों में खोकर, बातें करें हम यार,
तेरे संग हर बारिश, जैसे हो प्यार का त्यौहार।
-) बूँदों की हर गिरावट में, तेरा मेरा अफसाना,
पहली बारिश में बहेगा, इश्क का ये फ़साना।
-) काली रातों में, जैसे चाँद की रौशनी,
पहली बारिश में तेरा साथ, हर क़दम पर हो खुशी।
-) बारिश की हर बूँद मेरा तेरा रिश्ता बताए,
इस पहली बारिश में, हम फिर से प्यार के रंग छिड़कें।
-) पेड़ की छाँव में, तेरा नाम लिपटा हो,
पहली बारिश में हर लम्हा, जैसे तुझसे लिखा हो।
-) जब तक ये बारिश बहे, तेरा हाथ थामूँ मैं,
जिंदगी की पहली बारिश में, तेरा मेरा संग रहूँ मैं।
~~~आराध्यापरी~~~
शायरी केवल शब्दों का सुंदर मेल नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की भावनाओं, अनुभवों और विचारों की सबसे प्रभावशाली अभिव्यक्ति है। जब दिल में प्रेम उमड़ता है, दर्द गहराता है, दोस्ती की यादें मुस्कुराने पर मजबूर करती हैं या जीवन संघर्षों से गुजरता है, तब इन्हीं भावनाओं को सुंदर शब्दों में व्यक्त करने की कला को शायरी कहा जाता है।
-) वो जो हैं, जिससे हम मोहब्बत करते हैं
वो क़यामत ढाते हैं ।
अगर जिक्र हो उनकी काली जुल्फों का ,
तो मेघ गरजना शुरू कर देते हैं ।
अगर दीदार हो उनकी झील सी गहरी आँखों का,
तो समन्दर रूठ जाते हैं ।
सुना हैं गुलाबो से भी उनकी कुछ खास बनती नहीं,
जो देख ले उनके होंठो की लाली ,
तो गुलाब अपनी पंखुड़ियों के रंग बदल ले ।।
-) आजकल खुद ही के गमों को देख मुस्कुरा देता हूं मैं,
वरना जमाना तो मेरी खुशियों में भी गमों की बारिश कर देता हैं ।।
जाने क्यों रूठ जाते हैं मुझसे मेरे परवाने बस ,
सारी उम्र उन्हीं को मनाने में गुजार देता हूं मैं ।।
-) एक बार जो तेरे दर पर आए, फिर कोई दर ना चाहा हमने,
माँगा तुझसे बस, और किसी से कुछ ना माँगा हमने ।।
श्रापित चंद्र को जब कोई ना सहारा,
तब मस्तक पर सजाया तुमने ।।
तुम त्रिलोकी नाथ इस जहां भर को तुममें झांका हमने ,
जब गंगा भागीरथी बनने चली, तब जटाओ में समाया तुमने।।
अंधकार मय जब ये जहाँ हुआ,
तब सूर्य बनकर उभारा तुमने,
जब आन पड़ा संकट धरा पर,
विष को कंठ में उतारा तुमने।।
मैं अज्ञानी हूँ मुझ पर कृपा कर दो,
जिस तरह शनि को तारा तुमने ।।
-) मृत को जीवित करदे वह संजीवनी हैं शिक्षक ,
अंधकार को प्रकाश करदे वह सूर्य की किरण हैं शिक्षक ,
अज्ञानी को ज्ञानी करदे वह गीता का सार हैं शिक्षक ।।
खुद स्थिर रहकर पूरे विश्व को घुमादे वह मन की गति हैं शिक्षक,
शब्दों से जिसका बखान ना किया जाए वह शब्दकोश हैं शिक्षक ।।
-) एक तो गफलत भरी जिंदगी मेरी ,
ऊपर से ना जीने का सवाल ,
फिर उसपे बाजारों में मैं सरेआम बदनाम मेरा नाम ।।
-) महफिलों में उनकी नाम बदनाम मेरा कोई कर गया ,
उसको तो थी खबर मेरी मगर ना जाने फिज़ा कहा की थी,
जाने वालों में सबसे पहले मेरा हमसफर गया ।।
मैं उससे पूछता मगर मेरी मोहब्बत को हवा कोई अंजान कर गया ।।
-) ना जाने किस दौड़ का हिस्सा हूं मैं,
जब भी किसी मुकाम पे पहुंचा तो लगा कि जैसे यह मेरा मुकाम नहीं।।
भटकता तो नहीं मैं कहीं मगर ,
अभी तक उस ठिकाने का अंजाम भी हासिल नहीं।।
चले थे कुछ लोग साथ में मेरे मगर जाने कहां गुम हो गए सारे ,
खाली रास्तों पे कोई साथी भी तो नहीं।।
जिंदा हूं मैं एक लाश सा ,
मगर फिर भी मुझे मौत का इंतजार क्यूं नहीं।।
जाने वालों को रोका तो मैंने बहुत ,
लेकिन उन तक मेरी आवाज भी तो पहुंची नहीं।।
समझ लेते बस बात इतनी वो ,
तो दरबदर ना भटकता मैं,
खैर छोड़ो उनको तो इसकी खबर भी नहीं।।
-) आप से पहले हम कुछ खास तो ना थें ,
माना कुछ थें पर यार जो हैं अब वो तो ना थें ।।
खुदमें यूं मसरूफ थें ,
जमाने से कुछ यूं बेगाने थें ।।
पहले पूछते लोग तो कह देते थें ,
जैसे भी थे ठीक थें ।।
अब जो नयापन हमपर आया ऐसे तो ना थें ,
लोग जलते हैं अब मेरे खुश रहने पे ,
कहते हैं जैसे ये पहले थे बिलकुल ठीक थें ।।
-) लोगों से ज़रा गौर से पुछो किसने क्या गवायां हैं,
फिर हमसे पूछो हमनें क्या गवायां हैं ।।
चैन सुकून वो क्या होता हैं ,
ये तो हमनें बचपने में खोया हैं ।।
एक उम्र तो गुजार दी जागते जागते ,
हमने आंखों पर भी बड़ा जुल्म ढाया हैं।।
ये चाहती थी बंद हो जाना ,
मगर हमने इनको हर पल खुला रखा हैं।।
अब मरीज से इलाज पूछते हैं,
वो जिन्होंने हमें मरीज बनाया हैं।।
की इतनी खूबसूरत क्यों होती हैं,
ये राते मैंने टिमटिमाते तारों में उसको पाया हैं।।
सोचता हूं बंद आंखें क्या देखेगी ख्वाबों को ,
मैंने खुली आंखों से उसके ख्वाबों को सजाया हैं।।
-) मंजिलें मिली तमाम लोगों को ,
मैं सफर के इंतजार में बेसुध रहां ।।
पहुंचे वो भी वक्त पर जो मुझसे बाद में घर से निकलें,
मैंने ना जाने किस कदर वक्त गवायां ।।
उम्मीदें तमाम थी खुद से हमकों भी ,
मगर ना जानें कहां ख्वाब टूटे कहां हम ।।
उम्र भी यूं क्यूं बढ़ती हैं,
जरा क्या ठहरे लगने लगा यूं बचपने से बुढ़ापे में आ गुजरे ।।
मैं खुद को तलाशता हूं , खुद की तलाश में ,
वो शख्स हां मैं ही अब खुद से अनजान हूं ।।
-) मोहब्बत का ज़िक्र इस दहलीज के अंदर ना किया करो ,
हम दोनों ने मोहब्बत में कई दहलींजे लांघी थीं।।
हुआ क्या फिर वो अपने रास्ते ,
और हम अपने रास्ते हो गए ।।
उसको तो अब शायद याद भी नहीं मैं,
लेकिन मेरे दिल पे उसके ताजे जख्म रह गए ।।
भुलाने चाहते हैं उसको मगर ,
लेकिन हर दफा उसकी यादों में उसके होकर रह गए ।।
अब जो हम ना रहें तो कहना उनसे ,
कोई था जो खुदा समझता था आपको और आप केवल इंसान बनके रह गए ।।
खैर छोड़ो अब उसकी बातें अब दामन हमनें माटी का थामा हैं,
इस माटी के थें ,
और इसी माटी के होकर रह गए ।।
-) हसीनाओं को तो बेवजह बदनाम किया गया हैं,
मेरी जवानी तो किताबों ने खायीं हैं।।
मैं उलझा रहा इन किताबों में कहीं ,
आशिकी ना जाने जमाने में किस - किस ने कहां लड़ाई हैं।।
-) तू नहीं तो ये सावन भी अच्छा नहीं लगता,
सबकुछ होता हैं पास लेकिन तेरे होने सा नहीं लगता ।।
मैं बैठ जाता हूं नदी किनारे,
मगर अब तो दिल वहां भी नहीं लगता ,
चिल्लाता हूं वादियों में तेरे नाम को,
लेकिन वहां भी कोई जवाब नहीं मिलता।।
हम तन्हां हैं आकर देख यूं गैरों से हाल मेरा पूछना,
मेरी जान मुझको तो तेरा ये रवैया बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता ।।
-) फूल गुलाबों को मुझसे जाने गिला इतनी क्यूं ,
हर वक्त पूछते हैं,
गुलाब को गुलाबों कि जरूरत क्या ।।
-) हमारी शान तिरंगा,
हर दिल हिंदुस्तान तिरंगा ।।
इसकी खातिर वीरों ने त्यागे प्राण ,
उनका बलिदान तिरंगा ।।
जिसके प्रथम रंग से शौर्य भर जाए रगों में,
ऐसा चिंहित मान तिरंगा ।।
अमन शांति
का पाठ पढ़ाए,
रंग सफेद से हमें बताएं,
ऐसे गुरु का मान तिरंगा ।।
जिसके रंग आखिरी से,
उन्नति हरियाली की दिख जाए,
झलक एक ऐसी पहचान तिरंगा ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तेरी आँखों में जो नशा है, वो शराब से कहीं गहरा है,
पी भी लूँ अगर, होश फिर भी तेरा ही चेहरा है।
-) वो जब देखती है पलट के, सारा शहर झूम जाता है,
तेरी आँखों का ये नशा हर दिल पे छा जाता है।
-) शराब पी के भी जो नशा न चढ़ा,
तेरी आँखें देख लीं — और दिल बहका।
-) तेरी नजरों का असर कुछ ऐसा चला,
पीने वालों ने जाम को ठुकरा दिया।
-) उसकी आँखों में देखा जो, जाम खुद से टूट गया,
नशा ऐसा चढ़ा कि खुद को ही भूल गया।
-) तेरी आँखों की गहराई में डूबा जो,
फिर न किनारा मिला, न खुदा मिला।
-) तेरी नजरों की मस्ती जब चली,
सारा आलम झूमने लगा दिल से दिली।
-) उसकी एक नजर का असर क्या कहें,
शराब से ज़्यादा तलब तेरी आँखें बन गईं।
-) तेरी आँखें हैं या साक़ी की साजिश,
हर नज़र में घुलता गया नशा धीरे-धीरे।
-) तेरी आँखों से जो पी ली एक बार,
फिर न जाम भाया न कोई त्यौहार।
-) तेरी निगाहों का जादू कुछ ऐसा चला,
होश संभालते-संभालते उम्र निकल चली।
-) तेरी आँखों ने जो डाला असर,
अब शराब भी लगती है फीकी मगर।
-) तेरी नज़रों की धुन पे दिल ऐसा थिरका,
जैसे हर सांस ने रक्स करना सीख लिया।
-) तेरी आँखों का नशा जब से चढ़ा,
अब जाम भी खुद बेहोश लगता है।
-) तेरी आँखों के साए में जो आ गया,
फिर किसी और को चाह न सका।
-) तेरी निगाहों में डूबा जो एक बार,
फिर नशे की जरूरत न रही हर बार।
-) तेरी आँखों की शराब ने जो चखा,
फिर खुदा भी कहे — ये इश्क़ सच्चा।
-) तेरी आँखों से बंधी कुछ ऐसी डोर,
जो न टूटे न छूटे, बस खिंचती ही जाए।
-) तेरी आँखों की कशिश में जो डूबा,
फिर लौटना न चाहा उस जमीं से।
-) तेरी निगाहों में जो सुकून है,
वो मयखाने के हर जाम में नहीं।
-) तेरी आँखें जब बोलती हैं चुपचाप,
तो हर शायर बना देता है इश्क़ की किताब।
-) तेरी आँखों में जो चमक है,
वो किसी जाम की बात नहीं करती।
-) तेरी निगाहों का असर कुछ यूं हुआ,
मेरी कलम भी अब तेरी ग़ज़लें लिखती है।
-) तेरी आँखें नहीं, एक समंदर हैं नशे का,
उतरोगे तो डूबने से बच न पाओगे।
-) तेरी आँखों से जो किया पहला इश्क़,
आज तक कोई दूसरा नशा चढ़ा ही नहीं।
~~~आराध्यापरी~~~






























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