Sad Love Quotes:- "हमारी वेबसाइट पर आपको मिलेगी हिंदी में बेहतरीन शायरी, जो आपके भावनाओं को एक नया रंग और गहराई देती है, और हर शब्द में दिल की आवाज़ छुपी होती है।"
-) कहानी हमारी अधूरी ही रह गईं,
कुछ तो क़िरदार ही ख़त्म हो गएं।।
कहानी हमारी सुनने वाले थें वे,
कुछ कह ना सकें वे अंजाने सफ़र के हो गएं।।
-) कहानी पूरी यूं भीं ना हो सकी हमारी,
एक मुलाक़ात की बात थीं।।
शाम के पहर में बैठनें की,
उसने फ़िर ऐसी शाम की ,
की शाम ही ना हुईं फ़िर।।
-) बातें अधूरी ही रह गईं,
उनसे मिल ना सके हम ।।
एक आरज़ू थीं हमें,
की मिलके कुछ तो सुलह करें ।।
-) मेरे हिस्से में जाने कौनसा वक़्त आ गया ,
इसकी कल्पना होना भी संभव ना थीं ।।
खिलखिलाती हसीन कलियां थीं बाग़ में मेरे,
जब हमनें उन्हें हाथों से उठाना चाहा ,
तो मुरझाईं कलियों के सिवा कुछ ना थीं।।
-) मुझे किसी और जैसा ही बना देना ,
मेरे जैसे इस ज़माने के लायक नहीं ।।
लोगों की दुकानें झूठ फ़रेब से चल रहीं,
मेरा सच के सिवा कोई साथी नहीं ।।
-) चाँद भीं सुर्ख लाल हो गया,
कब तक ये भी शीतलता बरसाता ।।
सारी हदें पार हो गईं लोगों की ,
फ़रेब करके बेचारे चाँद की झूठी कसमें खाने लगें,
शांत सा रहने वाला चाँद भीं,
फ़िर आग़ बरसाने लगा ।।
-) ज़माने की बातें ना कर,
जमाना अब कहाँ बात करने लायक बचा ।।
इस ज़माने की बातों ने ,
बेगुनाहों की जान ली हैं।।
-) दूर आसमान में जाने वालें,
क्या सच में तारे बन जातें होंगे ।।
जो हमें क़रीब से नज़र ना आते हैं,
वे हज़ारों कोष ऊपर से हमें देख पाते होंगे ।।
जिनसे बातें क़रीब से ना हो पाईं,
क्या वे इतनी दूर से सुन पाते होंगे ।।
क्या सच में वे तारे बन जातें होंगे ।।
-) हमने नज़र भरके उन्हें देखा ही नहीं फ़िर कभी ,
जब उन्होंने कहां की अब हमारा साथ तुम्हारे साथ नहीं ।।
कहना बहुत कुछ था हमें,
बस एक बात कह सकें कि आबाद रहों ख़ुश रहो,
इस से ज़्यादा और कुछ चाहत नहीं ।।
-) कभी मेरे जैसे किसी से मिलो ,
तो उससे इस अंदाज़ से पेश ना आना ।।
मेरे जैसों की अना में ,
लाखों घर जलें हैं।।
-) बात ये ना थीं कि वो नहीं रहा ,
बात ये हैं कि वो मेरे होते हुएं नहीं रहा।।
शिकवा ज़माने से हज़ार हो सकती थीं उसे ,
बात और थीं औरों की,
मलाल ये रहा कि मैं कुछ ना कर सका,
और वो फ़िर ना रहा।।
-) एक आरज़ू थीं कि निग़ाह भरके देखें उसे ,
देख पाते इससे पहले उसने सिर ढक लिया ।।
चाँद से चेहरे को देखना चाहते थें हम,
उन्होंने मज़ाक ही मज़ाक में मना कर दिया।।
अना यूं भी अच्छी नहीं मेरी ,
उसके मज़ाक ने मुझे उससे ही जुदा कर दिया।।
जो लौटा में पहर के बाद,
तो उन्होंने ख़ुद को ख़त्म कर लिया ।।
-) किसी से कुछ ना कहिएं,
कहीं हुईं बातें अक्सर इंसान छीन लेती हैं।।
-) उनके जानें के बाद ,
हमनें जाना कि अब उन जैसा कोई नहीं ।।
दिल ना लगेगा अब ,
दिल लगाने का हक़दार कोई नहीं ।।
राहों में वफ़ा की बातें तमाम हुईं,
उनके जैसा वफादार कोई नहीं ।।
-) मुझे चाहें ग़म दें ,
औरों को जीने का हुनर दें।।
कुछ तो ग़म मेरे अपने नहीं हैं,
वे भीं किसी और के हैं,
मग़र ठीक हैं मुझको वे भीं दें ,
मग़र औरों को ख़ुश रहने दें ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तेरे खयाल से मैं हूँ, तुझसे ही रौशन मेरा जहाँ है,
वरना अकेले तो हर रास्ता वीरान सा है।
-) तू न हो फिर भी तेरी खुशबू हवा में है,
मैं तुझमें नहीं, पर तेरा असर मेरी दुआ में है।
-)तेरे बिना भी तेरी बात करता हूँ,
जैसे बेमौसम बारिश का जिक्र हर रात करता हूँ।
-) तू सोचे तो सही, मैं क्या-क्या सोचता हूँ,
तेरे हर खयाल में खुद को खोजता हूँ।
-) तेरी यादें हैं जो नींदों को चुराती हैं,
वरना थकी ज़िन्दगी कबकी सो जाती है।
-) तू मिल जाए तो हर बात मुकम्मल लगे,
तेरे बिना हर पल अधूरा सा लगे।
-) तू करीब हो या दूर, एहसास तो है,
हर धड़कन में तेरा नाम खास तो है।
-) मुस्कान तेरी लबों से हटे नहीं,
तेरे खयालों से मेरी रात कटे नहीं।
-) तेरी आवाज़ सुनूं तो सुकून मिलता है,
जैसे तन्हा दिल को कोई घर मिलता है।
-) तेरे खयाल में डूबा हूँ यूँ आजकल,
कि आईना भी अब तुझे दिखाने लगा है हर पल।
-) तू पास नहीं फिर भी पास लगती है,
तेरी खामोशी भी मेरे सवालों का जवाब लगती है।
-) तेरे खयालों की लहर में बहता चला गया,
खुद से ही दूर होकर तुझमें ही रह गया।
-) तेरे इश्क़ का नशा कुछ ऐसा चढ़ा,
कि होश में रहकर भी मैं बेसुध रहा।
-) तेरी मुस्कान का जादू कुछ ऐसा चला,
कि उदासियों का चेहरा भी हँसने लगा।
-) तेरे खयालों से जो रिश्ता बना,
वो किसी नाम या पहचान से भी गहरा निकला।
-) तेरी यादों ने मुझे रोका नहीं,
पर हर मोड़ पर तेरा ज़िक्र छोड़ा नहीं।
-) तेरी हर बात में कुछ बात सी होती है,
दिल अनसुना करे पर वो मान ही लेता है।
-) तेरे खयाल ने ऐसा समा बाँधा है,
कि तन्हाई भी अब महफिल सी लगती है।
-) तेरे बिना सब कुछ अधूरा लगता है,
जैसे बिना सुर के कोई गीत लगता है।
-) तेरे इश्क़ ने वो एहसास दिया,
जो किसी किताब ने भी कभी नहीं लिखा।
-) तेरे खयाल में जो लम्हा गुज़रता है,
वो किसी सदी से भी ज़्यादा हसीं लगता है।
-) तेरे बिना जीना तो सीखा है,
पर हर पल तुझे महसूस करना नहीं छोड़ा है।
-) तेरी नज़रों की एक झलक चाहिए,
फिर चाहे सारी दुनिया रूठ जाए।
-) तेरे खयालों में जो गुम हूँ,
तो क्या हुआ अगर दुनिया से थोड़ा कम हूँ?
-) तेरी बातें, तेरा नाम, तेरा साया,
सब कुछ लगता है जैसे मेरा साया।
~~~आराध्यापरी~~~
-) कुछ तो हासिल हमको हो जाएं,
एक घर हो जाएं ।।
सफ़र में थकें हैं बहुत,
एक मंज़िल के हक़दार हों जाएं ।।
-) कुछ राह नज़र अब आता नहीं हमें ,
उम्मीद के बादल भी कहीं दूर जा उड़े हैं ।।
कुछ हमपर बरसने आएं थें,
किसी और पर रहमत बरसा गएं हैं ।।
-) मुझे उम्मीद का दामन ना थमा ,
मैं उम्मीदों की बात से आज़ाद हूं अब ।।
हासिल कुछ भी नहीं ,
मैं बस बर्बाद हूं ।।
-) एक तिनके की तलाश में ,
पूरा बाग़ उजाड़ आएं हैं हम ।।
तिनका भी नसीब ना हुआ ,
उस बाग़ को भी राख़ कर आएं हैं हम ।।
-) किसी से दिल लग जाएं तो ,
दिल्लगी सिर ना चढ़ा लेना ।।
उस एक के जाने के बाद ,
पागल फ़िर लोग तुम्हें कहेंगे ।।
-) तुमसे दिल क्या लगाया ,
मैं अपने दिल से निकल गया ।।
सावन के मौसम में ,
मैं पतझड़ सा हो गया ।।
कह ये सकते नहीं कि क्या कर लिया ,
जीते जी बस मौत से सौदा हो गया ।।
-) वो मोहब्बत की किताब पढ़के आया था ,
मैं उस किताब को बस देख आया था ।।
वो सर्वोच्च था इस मुकाम में ,
मैं बस अभी नया नया आया था ।।
उसे मालूम था कि बातें मनवाई कैसे जाती हैं,
मैं कहां बात को मनवा सकता था ।।
उसे सारे फ़रेब मालों थें,
मैं नादान ना समझ सा था ।।
-) घर की कीमत ये हुईं,
शांति समझौते की क़ीमत ये हुईं ।।
हमारा निकल जाना ही,
सब कामों से बेहतर हुआ ।।
-) ख़ुद को चुप रखना भी बड़ा अजीब हैं,
अपनी जान का सौदा सा लगता हैं ।।
कुछ कहो तो कुछ अलग सा होता हैं,
कुछ ना कहो तो सब शांत रहता हैं ।।
-) एक पल में ये क्या कर बैठें हम ,
अपनी ज़िंदगी किसी और की कर बैठें हम ।।
हमको ख़बर ये ना थीं,
ज़िंदगी के बाद मौत मंज़ूर थीं ,
अब अपनी मौत का सौदा कर बैठें हम ।।
-) ये क्या हो रहा हैं,
समझ हम सकते भी नहीं ।।
हैं कोशिश लाख अच्छा करने की ,
मगर अच्छा कर सकते भीं नहीं ।।
-) उम्मीद ये थी कि ये उम्र साथ गुज़र जाएगी,
हक़ीक़त ये हैं कि उम्र अब और नहीं ।।
-) मैं अपने लहज़े को नर्म रख आया ,
हुआ ये मैं अपनी सादगी का समझौता कर आया ।।
कर गुज़र सकता था मैं बहुत कुछ,
मगर मैं एक चुप में सब ठीक कर आएं ।।
-) आशुतोष को मुबारक हो ज़िंदगी,
हमें तो दीदार मौत का करना हैं ।।
तिल तिल कर वो जियें,
हमें तो एक बार में मरना हैं।।
-) उनकी आंखों में हम हैं,
और वे नाम छिपाते हैं ।।
तस्वीर हमारी सजाते हैं,
क़ैद दिल में रखते हैं ।।।
हमने आईने को देखना छोड़ दिया ,
अब बस उनकी निग़ाह में ख़ुद को देख आते हैं।।
-) उसका हाथ थामा तो लगा,
जैसे ज़िन्दगी को कोई रास्ता मिला।
-)उसके हाथ की लकीरों में,
शायद मेरा नाम छुपा बैठा है।
-) जब उसका हाथ थामा,
तो तन्हाई भी मुस्कुरा उठी।
-) उसके हाथ का स्पर्श,
जैसे सुकून की चादर ओढ़ ली हो।
-) उसका हाथ थामकर चलना,
हर तूफ़ान को छोटा कर देता है।
-) हाथ थामे उसका,
और फिक्रें सब हवा हो गईं।
-) उसका हाथ पकड़ कर
मैंने डर को पीछे छोड़ दिया।
-) तेरा हाथ थामा है,
अब मंज़िलें खुद रास्ता दिखाती हैं।
-) जिस दिन उसने मेरा हाथ थामा,
वो दिन मेरी ज़िन्दगी बन गया।
-) उसका हाथ थामते ही,
कायनात ने मुस्कुरा दिया।
-) उसके हाथ की गर्मी में,
मोहब्बत की रौशनी बसती है।
-) हाथ उसका थाम कर,
खुद को मुकम्मल पाया है।
-) तेरे हाथ में जो अपनापन है,
वो लफ़्ज़ों में कहाँ बयां होता है।
-) उसका हाथ थामना,
जैसे वक़्त को थाम लेना।
-) हाथ उसका थामा,
तो अंधेरों से डरना छोड़ दिया।
-) उसकी उंगलियों में जब मेरी उंगलियां उलझती हैं,
जैसे दो रूहें गले मिलती हैं।
-) तेरा हाथ थामा है,
अब रास्ते नहीं भटकते।
-) उसका हाथ छूकर,
दिल ने पहली बार चैन लिया।
-) उसके हाथ की पकड़,
मेरे हौसले की वजह है।
-) उसका हाथ मेरे हाथ में हो,
तो दुनिया हसीन लगती है।
-) जब थामा था तेरा हाथ,
तब से टूटा ही नहीं हूँ मैं।
-) उसके हाथों की ठंडक में,
इश्क़ की गर्माहट मिली।
-) तेरे हाथ की पकड़ है,
जो मुझे कभी गिरने नहीं देती।
-) उसका हाथ थामना,
जैसे रब को पा लेना।
-) तेरा हाथ थामे रहूं उम्रभर,
बस यही दुआ है हर दफा।
~~~आराध्यापरी~~~






























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