Deep love shayari with images -: "हमारी वेबसाइट पर पढ़ें हिंदी की बेहतरीन शायरी, जो आपके जज़्बातों को सटीक शब्दों में ढालकर दिल को छू लेगी और आपकी भावनाओं को एक खास अंदाज़ में व्यक्त करेगी।”
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-) हमसे ये ना पूछों वक़्त क्या हैं,
तुम्हारी यादों का एक सुहाना सफ़र हैं ।।
औरों को कमी हैं इसे पाने की ,
हमारी तो पूरी कहानी बस इसी पर हैं ।।
-) वक़्त ना मिलें ये भी बातें झूठी हैं,
उसके बग़ैर वक़्त कहाँ ही गुज़रता हैं ।।
उसकी यादों का सफ़र हैं,
जो उसके साथ ना होनें पर भी उसके साथ ही गुज़रता हैं ।।
-) मेरी दास्तां इतनी सी रहीं,
मिलें ही नहीं कभी मिलनें के बाद ।।
बिछड़ें लोग तो फिर सोचतें हैं मिलनें का,
हम मिलकर बिछड़ने वालें कैसे सोचें मिलने का ।।
-) वो कौन हैं बस उसी की याद दिल में रहती हैं,
वो अंजाना अजनबी उसकी बातें सबसे क़रीब रहती हैं।।
वो दूर का मुसाफ़िर था कभी मेरे लिएं,
अब वो मेरे दिल में अपना आशियाना बनाके रहता
हैं।।
-) वो फ़िक्रमंद हो जाएं ,
मेरे लिए इससे ज़्यादा और क्या चाहिएं।।
हम राह से भटके मुसाफ़िरों को ,
राहें मंज़िल मिल जाएं इससे ज़्यादा और क्या चाहिएं।।
-) तेरे बग़ैर रंग होली के रंग से तो ना लगेंगे ,
बड़ी आरजू थीं कि पहला रंग तुझे लगाएं ।।
तेरे गालों को रंग जाएं ,
तू खिलखिलाती रहें हम तेरे जीवन को रंगों से भर जाएं ।।
-) रंग गुलाल ये सबको इतने अच्छे क्यों लगते हैं,
उसके जाने के बाद इन रंगों से हमें नफ़रत सी होने लगी ।।
-) एक आस थीं जो कभी पूरी ना हो सकी ,
उसके गालों की लाली हमारी ना हो सकी ।।
आँखें ख़ूब जानती थी उसको ,
मग़र उसकी तस्वीर भी आंखों में क़ैद ना हो सकी ।।
-) दिल टूट जाएं इस बात का मलाल क्या करना ,
दुःख तो ये हैं कि जाने कैसे सनम को दिल दें बैठें।।
अपने कीमती वक़्त को किस नामुराद का कर बैठें ,
अपने ख़ूबसूरत सफ़र में रजों ग़म को ले बैठें ।।
-) मैं कुछ मांगू और वो मिल जाएं ,
ये भी आसमां के टूटते तारों से कम नहीं ।।
एक मुराद मांगी थीं हमने उसे अपना समझ के ,
वो भीं पूरी ना हुईं ,
उसके लिए नामुमकिन ना था उसे पूरा करना ,
बस बात ये थी उसके लिए हम ग़ैर के सिवा कुछ नहीं ।।
-) जो बातें पूरी ना हो सकें,
दिल जाने उनसे उन बातों की ज़िद क्यों करता हैं।।
उसे अच्छा नहीं लगता ख़ुद की शक्ल दिखाना,
मेरा दिल बग़ैर देखें उसे लगता नहीं ।।
-) मैं ना जाने कितनी मन्नतें कर ,
उसे मांग लाया हूं।।
मेरे रब ने मुझसे उसे मिलाने के बदलें,
सारी उम्र का चैन छीना हैं।।
-) अच्छा होता की दिल अकेला रहता ,
ना वो होता ना दिल उसकी यादों में रोता ।।
वो तो बस लापरवाह सा रहता हैं,
मैंने जो पूछ लिया कभी तो वो भीं ख़बर मेरी ले लेता हैं ,
जो मैं ना याद करूं उसे तो ,
वो अपनी दुनिया में खोया रहता हैं ।।
-) मैंने जिसे अपने से पहले समझा ,
वो भीं मुझे नज़रंदाज़ करते हैं।।
पंख मैंने ही दिए खुला आसमान दिखाया ,
और ये उस आसमान में राज़ करने को कहते हैं।।
-) मैं चाहता ही नहीं बेअदबी दिखाऊं ,
अपने हुनर की इनपर आजमाउं ।।
कुछ तो ये जानते भीं नहीं गहराई कितनी हैं दरिया की,
कैसे अपनी नैया को दरिया के पार लाऊं।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) मंजिल दूर है, पर हौसले की रौशनी साथ है,
हर ठोकर कहती है, तू अब भी ज़िंदा जज़्बात है।
-) रास्ते थकाते हैं, पर रुकने नहीं देते,
मंज़िलें दूर सही, पर खुद को खोने नहीं देते।
-) हर मोड़ पर अंधेरा है, फिर भी चलते जाते हैं,
मंज़िल की उम्मीद में, दर्द भी मुस्कराते हैं।
-) कदम लड़खड़ाए हैं, पर रुके नहीं हैं,
मंज़िल दूर है, पर हम झुके नहीं हैं।
-) सपनों की राख से ही उड़ान मिलती है,
मंज़िल दूर हो तो क्या, पहचान मिलती है।
-) रास्ते थमे हैं, दिल थमा नहीं,
मंज़िल दूर सही, जज़्बा कम नहीं।
-) पसीने की बूंदों में जो सुकून है,
वो मंज़िल के बाद भी कहाँ नसीब है।
-) हर सुबह कहती है, चल उठ फिर से,
मंज़िल दूर है, पर तू हार मत मान।
-) बेखौफ चल पड़ा हूँ मैं धूप में,
क्योंकि मंज़िल ने छाँव से बुलाया है।
-) जो हारे नहीं, वही मंज़िल पाते हैं,
राहों से दोस्ती कर, तू खुद को आज़माते हैं।
-) एक सपना देखा है, जो नींद से बड़ा है,
मंज़िल दूर है, पर हौसला खड़ा है।
-) हवाओं से लड़कर, चलना सीखा है,
मंज़िल नहीं मिली तो क्या, खुद को देखा है।
-) हर पत्थर से रास्ता बना लिया,
मंज़िल दूर थी, पर सफ़र सजा लिया।
-) बढ़ते रहे, गिरते रहे, पर थके नहीं,
मंज़िल दूर थी, पर अपने थे हम कहीं।
-) उम्मीद की लौ जब तक जलती है,
मंज़िल की दूरी भी चलती है।
-) आँधियाँ भी हौसले से हार गईं,
मंज़िल दूर थी, पर हम डटे रहे।
-) जब मन में मंज़िल बस जाए,
तो हर राह आसान लगने लगती है।
-) थकान से कह दिया है, अभी नहीं,
मंज़िल से पहले रुकना मना है।
-) तू चला तो सही, रास्ता खुद बनेगा,
मंज़िल दूर है, पर यक़ीन तेरे संग चलेगा।
-) बड़ी दूर है, ये कहकर ना थम जाना,
हर पड़ाव पे खुद को आज़माना।
-) कुछ लोग डर से रुक जाते हैं,
हम मंज़िल की ज़िद से चल पड़ते हैं।
-) हर रात से कहता हूँ, सवेरा ज़रूर होगा,
मंज़िल दूर है, पर सफर प्यारा होगा।
-) तू रुक मत, ये राहें देख रही हैं,
तेरे कदमों की आवाज़ से मंज़िल जी रही है।
-) सिर्फ पहुंचना नहीं, सीखना भी है,
मंज़िल से पहले, खुद को भी पाना है।
-) कभी थमा नहीं, कभी झुका नहीं,
मंज़िल दूर थी, पर जज़्बा रुका नहीं।
~~~आराध्यापरी~~~
-) हमारी अच्छाई बस इतनी सी हैं,
लोगों की हां के बाद हमारी ना हैं।।
फ़िर उनकी तकरार हैं,
और हमारी हाँ हैं।।
-) वो किसी एक जगह रुकने को कहता था ,
मैं जैसे सूर्य के रथ का सारथी ।।
रुकना मेरे ज़हन में ना था ,
मैं करता भी तो क्या वक़्त मेरा ना था ,
मैं उलफ़तोँ में क़ैद था ।।
-) इस शहर की अबों हवा से दम घुटने लगा हैं,
ना जाने अब दिल घबराने लगा हैं।।
कुछ तो ख़्याल गांव की हवा का हैं,
शांत मन एकांत सा हैं,
-) कुछ तो उसूलों में मैं मारा गया ,
वरना मेरे दुश्मन की इतनी हिमाकत ना थीं।।
मुझे मौत ना थीं,
साजिशों ने उलझाया मुझको ,
फ़रेब से बच ना पाया मैं,
वरना इस हालात का दोषी ना होता ।।
-) कुछ रहम कर गुज़र हमपर ,
तेरे दीद की मुराद हैं ।।
वरना चाहत मेरी भी कम नहीं,
तेरे इश्क़ में जहां ख़ूबसूरत हैं।।
-) काले वालों के रंग में ,
बदरिया नज़र आती हैं हमको ।।
घटाओं की ख़बर आती हैं हमको ,
क़यामत के शहर में ,
तूफ़ान नज़र आता हैं हमको ।।
-) तेरे बग़ैर दिल का हाल बुरा सा हैं,
बरसातों में भी सुख सा हैं।।
हम खुशियों को ग़म में भी ढूंढ लेते थें,
अब खुशियों के आलम में भी ग़म सा हैं।।
-) हम नज़रंदाज़ हो बैठें हैं अपने हाल से ,
अब बेहाल हो बैठें हैं ख़ुद से ।।
पहले नज़र में थें अपने किसी के ,
अब उठ बैठें हैं ख़ुद की नज़र से ।।
-) हमसे दिल लगाना खता हैं,
हम किसी से दिल लगाने की चीज़ नहीं हैं ।।
हम ख़ुद को कभी अपना भी नहीं पाएं हैं,
हम जाने किस इरादें से ख़ुद को तबाह कर आएं हैं।।
-) अब किसी से क्या बात करें,
हमारे लहजे में बस बेरुखी हैं ।।
हमसे ना पूछों हमारी खता क्या हैं,
हम अंदाज ए करम से टूटे हैं।।
-) हमें हमारे हाल पे छोड़ दो ,
या अपने हाल को बदल लो ।।
हमें नापसंद हैं अपना लहज़ा बदलना,
कोशिश ये हैं तुम भीं अपने लहज़े में रहो,
हमें बस अपने हाल पे छोड़ दो ।।
-) तेरे हो चुके हैं हम ,
अब तुझसे हम क्या गिला करें ।
जो हैं तेरे हैं,
तेरे बाद वादें वफ़ा तुझसे ही हैं और किसी से क्या करें।।
-) हम दहलीज लांघ आएं हैं,
अब घर की ख़बर ना लो हमसे ।।
रोकने वालें ने एक पल को रोका भी नहीं,
हालात बुरे थें हमारे वक़्त नाराज़ था हमसे ।।
-) किसी रोज़ हम रह गुज़र जाएंगे ,
फिजाएं चलेंगी सुनसान सी ,
और हम जहां से अलविदा हो जाएंगे ।।
-) मदहोश से हम हैं,
हाल की ख़बर ना लो मेरी ।।
इस जँजाल में हम हैं,
किसी पहर के ख़त्म होने में हम हैं ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) मेरा ख्वाब है तुझमें खुद को पाना,
हर सुबह तुझसे होकर ही जगना।
-) तेरे ख्वाबों में बसी है मेरी दुनिया,
नींद भी अब तेरे नाम की गुलाम है।
-) ख्वाब भी अब हकीकत से लगते हैं कम,
जबसे तुझसे मिलने की चाहत बढ़ी है।
-) हर रात तुझे सोचते-सोचते बीतती है,
ख्वाब कहां, ये तो इबादत सी लगती है।
-) मेरा ख्वाब है एक छोटा सा जहां,
जहां तू हो, मैं हो, और कुछ भी ना हो वहां।
-) तेरे बिना अधूरी है मेरी हर कल्पना,
ख्वाबों में भी तुझसे कम कुछ नहीं चाहिए।
-) ख्वाब तुझसे हैं, वरना सोना क्या,
नींद भी तेरे नाम की दीवानी है।
-) तेरे ख्यालों में ही बुनता हूं सपने,
तू ही मेरा ख्वाब, तू ही मेरी तन्हाई।
-) मेरा ख्वाब है तुझमें खुद को देखना,
तेरे लबों से अपने नाम को सुनना।
-) ख्वाबों में भी तुझसे मिलने की आरज़ू,
जागते हुए भी तेरे ख्यालों की जुस्तजू।
-) तू मिले तो हर ख्वाब मुकम्मल लगे,
वरना तो ज़िंदगी भी अधूरी सी लगे।
-) मैंने तुझे ख्वाबों में नहीं,
दुआओं में मांगा है।
-) तेरे साथ बिताए लम्हे ही मेरे ख्वाब हैं,
बाकी तो बस गुज़रते वक्त की बात है।
-) मेरा ख्वाब है वो सुबह,
जब तू मेरे साथ जागे।
-) तेरे बिना ख्वाब अधूरे,
जैसे चांद बिना नूर के।
"यहां पाएँ हिंदी की बेहतरीन शायरी, जो हर लम्हे को खूबसूरत शब्दों में ढालकर आपकी भावनाओं को एक नए अंदाज़ में प्रस्तुत करती है।”
-) हर ख्वाब तुझसे होकर गुजरता है,
जैसे हर नदी सागर की ओर जाती है।
-) तेरी मुस्कान में ही बसा है मेरा सुकून,
मेरा ख्वाब है तुझे हमेशा मुस्कुराते देखना।
-) मैंने अपने ख्वाबों में बसाया है तुझको,
अब नींदें भी तुझसे इश्क करने लगी हैं।
-) तेरे ख्वाबों में इतनी गहराई है,
कि हर रोज़ डूबता हूं, फिर भी ज़िंदा हूं।
-) मेरा ख्वाब है एक सुकून भरी शाम,
जहां तेरे साथ हो बस तेरे नाम।
-) तेरे ख्वाबों की कश्ती में सवार हूं मैं,
तू अगर चाहे तो किनारा बन जाए।
-) मेरा ख्वाब सिर्फ तुझसे मिलना नहीं,
तेरे साथ उम्र भर जीना है।
-) तेरे ख्वाबों की चुप सी रवानी,
मेरे दिल को हर पल सुनाई देती है।
-) मैंने अपने ख्वाबों को तुझसे जोड़ दिया,
अब तेरा हर लम्हा मेरा सपना है।
-) तेरे ख्वाबों ने सिखा दिया प्यार क्या है,
अब हर रात मेरी मोहब्बत की गवाही देती है।
~~~आराध्यापरी~~~






























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