Beautiful Romantic Poetry:- दर्द भरी शायरी में अकेलापन, विरह, अधूरी इच्छाएँ, बिछड़ने का दुःख और टूटे हुए सपनों की पीड़ा दिखाई देती है।
«"कुछ रिश्ते अधूरे रहकर भी,
ज़िंदगी भर याद रहते हैं।"»
«"दिल टूटने की आवाज़ सुनाई नहीं देती,
लेकिन उसकी गूँज पूरी ज़िंदगी रहती है।"»
«"तेरे जाने के बाद ये शहर सूना लगने लगा,
हर रास्ता तेरी यादों से भीगने लगा।"»
-) तुझसे बिछड़ के यूं लगे जैसे सावन कि हरियाली से
पतझड़ का मौसम हो ।
बहारों की भीड़ में कोई तन्हा राही हो ,
जो आँखें बरसती हैं टिम टिम मानो समंदर कि गहराई हो ।।
-) क्यूं ना जाने क्यों बरसती है निगाहें,
सबको पास चाहती हैं ये निगाहों ।।
किसी एक को हमेशा तलाशती हैं ये निगाहें,
जो ना दिखे वो तो रास्ता निहारती है ये निगाहें।।
सबकुछ रंगीन कर जाती हैं ये निगाहें,
हमको क्या क्या सपने दिखा देती है ये निगाहें।।
-) तुम जो हुक्म करो तो ,
सरेआम सिर को झुका दें।।
हो इज़ाजत तो ,
तेरे हक़ में फ़ैसले तमाम करदें।।
-) किसे क्या सुनाएं जो हमपर गुज़री,
हादसा ऐसा था कि हम देख भी ना पाएं ।।
ख़ंजर भी किसी अपने के हाथ में था ,
जिसका हम कभी सोच भी ना पाएं।।
आख़िर उसने उतार ही दिया सीने में ,
मैंने एक अर्जी भी डाल दी उसके आगे ,
मेरे सीने में दिल आपके नाम से धड़कता हैं,
इसे भी अब शांत करदो ,
मरते हुएं पर ये अहसान कर दो ,
वो ये भी ना कर पाएं ,
जो किया उसको फिर हम सह भी ना पाएं ।।
-) सुना हैं उसको हाथों में मेहंदी की ख़ुशबू महक रहीं हैं,
हमारी दुल्हन किसी और के लिए सज़ रहीं हैं।।
हम उनके हर अंदाज़ पे जान कुर्बान करते थे ,
कहना उनसे बड़ी मोहब्बत करते थे ।।
अब जो किसी के हो जाओगे,
तो हम हम ना रहेंगे ,
दिल तो धड़केगा बस तेरे आशिक़ ना रहेंगे ।।
तेरी सूरत देखके बस ख़ुद में जलेंगे ,
सब कुछ बर्बाद हम करेंगे ।।
-) उसे यूं भी ना दोष दो ,
उसकी मर्जी बस मेरे आगे ही चलती थी ।।
उसका वो भोलापन नादानियों से भरा बचपन ,
सारी हरकतें मेरे आगे ही संवरती थी ।।
-) लाख चाहे इश्क़ को हम ,
वक्त तमाशा दिखा ही देता हैं ।।
जो ना हो लकीरों में कहीं ,
उन्हें ये किस्मत का दोषी ठहरा देता हैं।।
-) सुनो ये सजना संवरना तुम पे चांद सा लगता हैं,
नील गगन में चन्दा सा लगता है ।।
माथे की बिंदिया यूं चमचमाती जैसे बदलो में सूर्य छिपा हो ,
काली जुल्फों का बनना यूं लगता जैसे बदलो का मन बिन मौसम बरसाने को तरसता हैं ।।
-) हमसे यूं ख़ौफ़ भी ना खा ,
हम तेरे क़रीब हर लम्हा रहें ।।
जिस बात से तुझे गिला हैं ,
उस बात से हमें ऐतराज़ हैं ।।
जिस डगर तू ना जाएं ,
उस रास्तें से हमें परहेज हैं ।।
-) कभी किसी से ये ना कहना ,
हम तेरे नहीं है ।।
हर कतरे से तेरे अक्स को निखारा हैं हमने ,
हम तेरे हर अंजाम के साथी हैं।।
-) वक्त बर्बाद कर के ,
ये तमाशा सरेआम ना कर ।।
कुछ भी हासिल नहीं हमको ,
तेरे बाद अपनी जान से लुट गए हम ।।
-) कर वादा उम्र भर का ,
साथ हम सात जन्मों का मांगते हैं ।।
तू कुछ ना पहल करें,
हम फिर भी तुझे ही मांगते हैं।।
-) चांदनी ने नूर बरसाया ,
नूर हमने अपने आप पे आजमाया ।।
कुछ क़ुदरत ने करिश्मा दिखाया ,
कुछ तेरी यादों में हमने ख़ुद को ख़ुदा बनाया ।।
-) तू जो वफ़ा की तालीम कर रहा हैं ,
मेरे जैसे किसी की आस कर रहा हैं।।
तुझको हासिल नहीं जहां में एक भी शख़्स,
बातें जहां भर के लोगों की कर रहा हैं ।।
-) आसमान नूर बरसाने लगा ,
रंग सांझ का सुनहरी होने लगा ।।
तेरे साथ की ख़बर लग गई शायद इन सबको ,
तभी रंग सारा कुछ बदलने लगा ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तेरे प्रेम की सौगंध मुझे, हर जन्म तुझमें रम जाना है।
-) तेरी एक झलक ने मुझको, जीवन भर का चैन दिया।
-) तेरे बिना सब सूना है, तू हो तो हर कोना महके।
-) प्रेम तेरा संजीवनी बन, हर पीड़ा को हरता जाए।
-) तेरा नाम जो लबों पे आया, दिल ने धड़कना छोड़ दिया।
-) तुझसे मिलकर जाना हमने, इश्क़ क्या जादू करता है।
-) तेरे प्रेम में खुद को खोकर, खुदा को पा लिया हमने।
-) तेरे ख्याल की छाया में, हर दिन त्यौहार लगे।
-) तेरे प्रेम में जो भी डूबा, उसे किनारा मिल गया।
-) तू ही सुबह, तू ही शाम, तेरे बिना सब बेरंग।
-).तेरा साथ मिले हर जनम में, यही दुआ है दिल से।
-) तेरे प्रेम की प्यास ऐसी, न जल मिले न शांति।
-) तेरे स्पर्श की सौंधी गंध, रूह तलक समा गई।
-) तेरे बिना ये जीवन मेरा, अधूरा एक गीत लगे।
-) प्रेम तेरा ऐसा मधुर, जैसे बांसुरी की तान।
-) तेरी नजरें बोल पड़ीं, जो लबों से ना कह सका।
-) तू मिला तो सब कुछ पाया, ना हो तू तो क्या रह जाए।
-) तेरे इश्क़ में डूबकर हमने, खुद को समझा फिर से।
-) तुझसे मिलकर हर ग़म भूला, तू ही मेरी बंदगी।
-) तेरे नाम की माला लेकर, हर सांस मैंने जी ली।
-) तेरे प्रेम की जोत जगी है, अब तो उजियारा होगा।
-) तेरा प्यार है मेरा साया, दुख में भी जो साथ रहे।
-) प्रेम तेरा हर रूप में प्यारा, चाहे हँसी हो या आँसू।
-) तेरे प्रेम की अग्नि में जलकर, हमने खुद को शुद्ध किया।
-) तेरे बिना ये दिल मेरा, वीरान शहर बन जाए।
विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव होता है। जब यही विश्वास टूटता है, तब मन गहरे आघात से भर जाता है। टूटे हुए रिश्ते इंसान को बहुत कुछ सिखाते हैं। शायरी इस टूटन को सम्मानपूर्वक अभिव्यक्त करने का माध्यम बन जाती है।
«"जिसे अपना समझा वही अजनबी बन गया,
मेरे सपनों का हर रंग फीका पड़ गया।"»
«"कुछ लोग साथ चलकर भी अपने नहीं होते,
और कुछ दूर रहकर भी दिल के सबसे करीब होते हैं।"»
दर्द भरी शायरी व्यक्ति को अपनी भावनाओं को स्वीकार करना सिखाती है। यह बताती है कि हर अंत के बाद एक नई शुरुआत भी संभव है।
~~~आराध्यापरी~~~
-) इन बारिशो ने फिर किसके घर को घेरा हैं,
लगता है आज आशुतोष के घर का डेरा हैं ।।
-) रोये भी वो इस कदर जो के संभाले भी ना गए,
हाल पूछने आए थे मेरा ,
फिर खुद ही बेहाल हो गए ।
एक सांस मे कितना कुछ कह गए ,
के फिर वर्षो तक ना सुन सके,
इतने भी बेकार ना थे हाल उनके जितना केहर वो मचा गए ।।
-) देखा उसे तो लगा यूँ के जान -ए- बहार आई
रूठी हुई साँसों को फिर सांस आई ।
क्या खूब लगती उसकी आँखे ,
झुका ली उसने तो फिर बहार आई ।
होंठों कि लाली का क्या कहना ,
मेरा नाम सुनते ही बहारों कि याद आई।
उलझी जुल्फों को सुलझाया तो ,
फिर वो ही खुशबू याद आई ।
तुझे देखा महफ़िल मे ,
तो शायरों को गजल याद आई।
मर मिटे जाने जाना ,तेरी चाहत पे,
अब मेरे मरने की बात आई ।
-) मुस्कुराते हुए चेहरे का नूर ना पूछो,
कितने गम छुपाएं बैठा हूँ ।।
मर चुका हूँ पहले ही ,
ना जाने कैसे खुद को बचाए बैठा हूँ।।
-) आईने में तस्वीर ना देखा करो नजर लग जाएगी ।
सिर पर घूंघट उठा करो वरना यह दुनिया इस चेहरे की कायल हो जाएगी ।।
-) गुस्ताख नजरे उसकी क्या कमाल थी ,
दूसरो को देख ले तो मेरे दिल मे आग लगा देती ।।
और मुझे देख ले तो जन्नत से मिला देती।।
-) यूं अचानक वो सामने आ गए ,
वह मेरे दिल के बंजर जमीन पर फूल खिला गए ।।
ना जाने दो पल में क्या क्या सपने दिखाए गए ,
अब वो मेरे इश्क ,खुदा ,महबूब न जाने क्या क्या हो गए ।।
-) मेरी आंखों में आंसू है पानी नहीं जो हर छोटी सी,
बात पे निकल जाने को कहते हैं ।
और मेरे दिल में सिर्फ दर्दो गम है,
जो मुझसे अब सिमट जाने को कहते हैं ।।
-) यूं तेरा आना मेरी धड़कने बढ़ा देता है ।
यूं तेरा मुस्कुराना मेरी सांसे अटका देता है ।।
तेरा शर्मीली निगाहों से देखना मुझे तिलमिला देता है ।
यूं तेरा मुझसे दूर जाना मेरी जान निकाल देता है ।।
-) मेरे जनाजे मे उसको भी बुलाना यारों ,
ना जाने कब मुझ मे जान आ जाए ।
मैंने लाशों को देखा है ,
उठते हुए उसके दीदार होने से ।।
-) बिछड़ना जरुरी हैं मगर ,
फिर मिलेंगे हम इन्ही राहों मे ।।
तुम्हारी कसम तुम भूल जाना हमें ,
मगर हमेशा अपने आप को पाओगे हमारे हर ख्यालों में ।।
-) यूँ उनका मिलना अच्छा था,
फिर हमसे बिछड़ जाना ,
और भी अच्छा था ।
सहमे हुए से थे वो इस दिल में,
इस दिल से निकल जाना भी जरुरी था।
इतनी सी तकरार थी हम दोनों की ,
हमें उनसे ,उन्हें किसी और से चाह थी ।
ना वो इश्क़ का ईजहार कर सके , ना हम ,
हम दोनों का चुप रहना , शायद और भी अच्छा था।
और यूँ रुबरु आ गए वो बर्षो के बाद ,फिर से मिलना अच्छा था।
नम आँखे बहुत कुछ कह रही थी , फिर उनका घूँघट ढकना अच्छा था।।
-) कि तेरे गैर हरगिज अंदाज में तहजीब के रंग को मिला लिया जाए ।
वरना कही इसका मेरे हाथो कत्ल ना हो जाए।।
-) फूलों मे तू गुलाब जैसे ,पढ लू तुझे अखबार जैसे ।
और मैं उलझा सा हुँ, काश तू समझ लेता खुली किताब जैसे ।।
-) याद भी वो आए इस कदर ,
भुलाये से भूले ना गए ,
आँशुओ मे बह गए जज्बात ,
फिर किसी और के ना हो सके ,
अब मेरे जनाजे मे वो आए ,
जो बुलाए भी ना गए ,
उनकी आवाज़ आयी मुझे गहरी नींद में,
इस कदर जागे फिर कभी सुलाए नहीं गये ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) फूल सी तेरी आँखें, खुशबू से भरी,
देखूँ तो ख्वाबों की बारिश लगे हरी।
-) तेरी आँखों में महका सा कोई राज़ है,
जैसे गुलाब में छुपा कोई साज़ है।
-) फूल भी शर्मा जाए तेरी नज़र से,
इनमें बसी है कहानी हर सफ़र से।
-) तेरे नयनों में बग़ीचे का सावन,
फूल भी तरसें तेरे रूप का दर्पण।
-) जब तू देखे, कलियाँ मुस्काएँ,
तेरी नज़रों में जादू समाए।
-) तेरी आँखें हैं ज्यों कोमल पंखुड़ियाँ,
नज़रों से बरसें मीठी फुहारियाँ।
-) इन आँखों में बसी है रौशनी फूलों की,
हर शाम लगे जैसे हो धूप भूलों की।
-) तेरी आँखों का रंग है बसंती,
फूल भी पूछें — ये नज़र इतनी सुगंधी?
-) तेरे नयन हैं जैसे खिला गुलाब,
हर पल लगे मीठा सा ख्वाब।
-) तेरी आँखों से निकले जब नूर,
फूलों से कह दूँ — अब तुम हो दूर।
-) तेरी नज़रों का असर कुछ ऐसा चला,
फूलों ने भी रंगों का रास्ता बदला।
-) तेरी आँखें जैसे महके चमन,
हर दिल में भर दें फूलों सा रँगन।
-) तेरे नयनों में है कशिश ऐसी,
फूल भी झुक जाएँ शर्म से जैसी।
-) इन आँखों में बसी है चुप सी सदा,
जैसे फूलों ने रच दी हो दास्तां जुदा।
-) तेरी नज़र में है फूलों की नमी,
छू ले जो दिल, तो भर जाए कमी।
-) तेरी आँखों की बातें हैं अनकही,
फूलों से भी ज़्यादा नाज़ुक और सही।
-) इन आँखों की गहराई में डूबता चाँद,
फूल कहें — हम तो हैं बस एक छाँव ।
-) तेरे नयनों की रौशनी में है जादू,
हर फूल कहे — हम भी हैं अब बादू।
-) तेरी आँखें हैं जैसे सुबह की पहली किरण,
फूल भी करें उनका नमन।
-) तेरे नयन हैं जैसे खिलता बहार,
इनसे ही सजी है मेरी हर बहार।
-) आंखें तेरी फूल सी, महक सी बिखेरती हैं,
हर नजर में चुपके से कोई ख्वाब उकेरती हैं।
-) तेरी आंखों में बसता है कोई गुलाब सा राज,
देखूं तो खो जाऊं, छुपा है उसमें साज।
-) नज़रों का ये जादू, कोई समझ न पाए,
तेरी आंखों की मुस्कान, दिल को चुरा ले जाए।
-) तेरी आंखों में बसी है सुबह की रौशनी,
जैसे कली से निकली हो कोई नयी कहानी।
-) बोलती हैं कुछ तेरी खामोश आंखें,
फूलों से भी ज़्यादा हसीन हैं ये झलकती आंखे।
"हमारी वेबसाइट पर पाएं दिल को छूने वाली बेहतरीन हिंदी शायरी, जो हर एहसास को शब्दों में ढालकर आपके जज़्बातों को बयां करती है।”
~~~आराध्यापरी~~~






























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