True Love Shayari -:प्रेम शायरी की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सरलता और भावनात्मक गहराई है। यह कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह देती है।
«"तेरी मुस्कान से रोशन मेरी हर शाम हुई,
तेरे होने से ही मेरी ज़िंदगी तमाम हुई।"»
प्रेम प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। हर व्यक्ति कभी न कभी प्रेम का अनुभव करता है। इसलिए जब कोई शायर प्रेम की भावना को सुंदर शब्दों में व्यक्त करता है, तो पाठक स्वयं को उससे जुड़ा हुआ महसूस करता है।
-) कुछ तो हासिल हमको हो जाएं,
एक घर हो जाएं ।।
सफ़र में थकें हैं बहुत,
एक मंज़िल के हक़दार हों जाएं ।।
-) कुछ राह नज़र अब आता नहीं हमें ,
उम्मीद के बादल भी कहीं दूर जा उड़े हैं ।।
कुछ हमपर बरसने आएं थें,
किसी और पर रहमत बरसा गएं हैं ।।
-) मुझे उम्मीद का दामन ना थमा ,
मैं उम्मीदों की बात से आज़ाद हूं अब ।।
हासिल कुछ भी नहीं ,
मैं बस बर्बाद हूं ।।
-) एक तिनके की तलाश में ,
पूरा बाग़ उजाड़ आएं हैं हम ।।
तिनका भी नसीब ना हुआ ,
उस बाग़ को भी राख़ कर आएं हैं हम ।।
-) किसी से दिल लग जाएं तो ,
दिल्लगी सिर ना चढ़ा लेना ।।
उस एक के जाने के बाद ,
पागल फ़िर लोग तुम्हें कहेंगे ।।
हम जिसको बड़ी मन्नतों से मांगते हैं ,
वह हासिल तुमको क्षणिक पलों में हैं।।
-) आज दिल ही ना टूटा बहुत कुछ हो गया ,
ऐसा लगा आसमान ज़मीन दोनों किसी इंसान को निग़ल गएं।।
हम नम आँखो से उसे तलाशते रह गएं,
वो सब बातें छोड़ बस विलुप्त हो गएं।।
-) ये उम्मीद भी नहीं के वो वापिस आएगा ,
दूर आसमानों से वास्ता हैं उसका अब ।।
मैं चाह कर भीं कुछ नहीं कर सकता ,
मेरी अनिश्चितताओं की निश्चितता हैं वो अब ।।
-) आसमां कभी नूर बरसाता हैं,
कभी तेज़ाब सा रूठ जाता हैं।।
कभी फसलों को हरी भरी कर जाता हैं,
कभी जलमग्न पृथ्वी कर जाता हैं।।
रहमत अजीब सी हैं इसके मन की ,
कभी दोस्त कभी दुश्मन बन जाता हैं।।
-) नदियों ने रास्ता क्या बदला ,
लोगों ने जाना कि ये मैदान छोड़ देती हैं।।
नये रास्ते बना देना किसी और के बस की बात नहीं हैं,
जन्मों का तजुर्बा मन की शांति और ना जाने क्या लाना होता हैं।।
-) हम अपनी करते रहें ,
औरों की मर्ज़ी से ना चलने की कसम खाते रहें ।।
हुआ ये कि फ़िर,
हम ख़ुद के क़रीब रहें ,
बाक़ी दूर जातें रहें ।।
-) मैं किसी का हुआ ही नहीं,
अपने पहले वाले अंदाज़ को भूला ही नहीं ।।
नज़र अंदाज़ करता रहा पहले ख़ुदको,
जब पानी सिर चढ़ा तो ,
खुदमें ख़ुद को पाया ही नहीं ।।
जब लगा कि अब आ जाएं उसी दौर में,
तो देखा कि किसी को करीब पाया ही नहीं ।।
-) मैं सब तबाह कर बैठा ,
किसी और से क्या उम्मीद करता ।।
अपनी हस्ती को मिटाकर,
नईं पहेली से ख़ुद को बनाने बैठा,
ना उम्मीद मिली ना मैं पहले जैसा ,
बस में तन्हा रह गया ,
इसी ग़म को साहिल कर बैठा ।।
-) दूर कहीं आसमानों में,
उसका चेहरा नज़र आता हैं ।।
वो होती जो क़रीब तो ,
मेरा मन शांत सा रहने लगता हैं।।
मैंने ख़ुद को मिटाया हैं,
क्रोधाग्नि में जो दिख जाएं वो तो सब शीतल हो जाता हैं।।
-) ख़ून के रिश्ते भी क्या ख़ूब हैं,
बग़ैर किसी रिश्ते के निभाएं जाते हैं ।।
जो दिल से बन जाएं उन रिश्तों को ,
किनारे पर बैठाएं जाते हैं।।
की समंदर में फिर भी गहराई कम हैं,
इन ख़ून के रिश्तों को समन्दर की दूर गहराइयों से भुनाए जाते हैं,
कांच के खिलौनों से शीश महल बनाएं जाते हैं।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
*प्रेम शायरी लोकप्रिय होने के अनेक कारण हैं—*
- यह प्रेम का इज़हार करने का सबसे सुंदर माध्यम है।
- यह भावनाओं को सरल और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है।
- रिश्तों में अपनापन और विश्वास बढ़ाती है।
- कम शब्दों में गहरी भावनाएँ प्रकट करती है।
- सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है।
आज इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक पोस्ट और व्हाट्सऐप स्टेटस पर प्रेम शायरी सबसे अधिक साझा की जाती है। लोग अपने प्रियजनों के जन्मदिन, वर्षगाँठ, प्रस्ताव या विशेष अवसरों पर शायरी का उपयोग करते हैं क्योंकि यह सीधे दिल तक पहुँचती है।
-) तुझसे मिलने की चाह में,
हर रास्ता अपना लगे।
-) तुझसे प्रेम किया है मैंने,
खुदा से बढ़कर तुझको जाना।
-) प्रेम तेरा ऐसा नशा,
जो उतरे तो भी चढ़ता जाए।
-) तेरे प्यार की दुनिया में,
हर दिन एक सवेरा है।
-) तेरा इश्क़ जो मिला हमें,
सब कुछ फिर आसान लगा।
-) तेरे संग बीते हर लम्हे,
जन्नत का एहसास दिए।
-) तू पास हो तो लगता है,
ये जीवन बहुत खूबसूरत है।
-) तेरे प्रेम की रौशनी से,
अंधेरा भी मुस्कुरा गया।
-) तुझसे इश्क़ हुआ तो जाना,
क्या होता है सच्चा प्रेम।
-) तेरे बिना जो भी जिया,
वो बस एक मजबूरी थी।
-) तेरे प्रेम की गहराई में,
हर दुख बहता जाता है।
-) तेरा नाम लबों पर आया,
हर ज़ख्म खुद भरने लगा।
-) प्रेम तेरा जबसे पाया,
खुद से प्रेम हो गया।
-) तेरी यादों की बरसात में,
भीगा दिल हर शाम हुआ।
-) तेरा स्पर्श जो मिला मुझे,
वो अमृत से भी प्यारा है।
-) प्रेम तेरा मंदिर जैसा,
जिसमें मैं हर रोज़ जपूँ।
-) तेरे बिना लगे है जैसे,
अधूरी मेरी हर सुबह।
-) तू है तो सब कुछ है मेरा,
तू ना हो तो कुछ भी नहीं।
-) तेरे प्रेम में मिट जाना,
सबसे बड़ा सुख लगता है।
-) तेरे प्यार की सौगातों ने,
रूह को महका डाला।
-) तेरे इश्क़ में बहते बहते,
हम खुद को भूल गए।
-) प्रेम तेरा कविता जैसा,
हर शब्द में छुपा जादू।
-) तुझसे मिलकर जाना मैंने,
प्रेम सच्चा धर्म है।
-) तेरे नाम से दिन शुरू हो,
और तुझ पर ही खत्म हो।
-) तेरा प्रेम मिले हर पल में,
बस यही अरमान रहा।
हर प्रेम कहानी का अंत खुशियों में नहीं होता। कुछ रिश्ते अधूरे रह जाते हैं, कुछ समय के साथ बदल जाते हैं और कुछ केवल याद बनकर रह जाते हैं। जब दिल टूटता है, तब मनुष्य के पास शब्द नहीं होते, लेकिन शायरी उसकी आवाज़ बन जाती है।
~~~आराध्यापरी~~~
-) सारी रात करवट बदलते रहें हम ,
जाने क्या सोचते रहें हम ।।
नींद से जाने क्यों दोस्तीं नहीं ,
एक सैलाब मन के अंदर था उसमें बहते रहें हम,
बस अपनी तलाश करते रहें हम ।।
-) जाने किन बातों को सोचने लगता हूं मैं,
जो हैं नहीं उन ख्वाबों को बुनने लगता हूं मैं ।।
एक तो बात ये हैं कि उसके बग़ैर रह नहीं सकता ,
चैन से मर नहीं सकता हूं मैं,
बस ख़ुद को फ़ना कर सकता हूं मैं।।
-) मेरी कहानी में रोमांच ना ढूंढो,
इसमें बस संघर्ष लिखा हैं ।।
किसने क्या बिगाड़ा हमारा उसको भी माफ किया हैं,
इसमें बस लोगों का अच्छा बर्ताव लिखा हैं।।
-) हमपर जो गुज़री बस उसको हम जानते हैं,
किसी और को एक पल की ख़बर भी नहीं ।।
कैसे कांटों से भी ख़ून ना निकला,
हमपर जो गुज़री उसको बस हम जानते हैं ।।
-) कैसे बीते दौर को भूल जाएं ,
इससे बेहतर हम मर जाएं ।।
मुंआफ़ी देना ख़ुदा की रहमत हैं,
हम इंसान हैं कैसे ख़ुदा हो जाएं ।।
-) मुझे अमीरी नहीं पसंद ,
ग़रीबी से नाता ख़ूब हैं मेरा ।।
अमीरी ने केवल दौलत से प्यार किया हैं,
ग़रीबी में लोगों ने मेरे काम से प्यार किया हैं ।।
-) हम जीना हराम कर दूं इन लोगों को ,
जो मेरे सुकून को तबाह कर रहें हैं ।।
मेरी आस को खफा कर रहें हैं,
अब तो हाल बगावत का मेरे जेहन में हैं।।
मैं सर्वनाश को आमंत्रित कर दूं ,
जो मुझसे खेल खेल रहें हैं।।
-) कुछ तो मेरे नाम हो ,
मुसीबत ही सही किसी का नाम हो ।।
रह गुज़रती हैं बड़ी कश कश करके जिंदगी मेरी,
अब तो सारे ज़माने का पिटारा मेरे सिरपर हो ।।
-) मैंने कलम को क्या उठाया ,
जाने कितनों के मन में डर बैठ गया ।।
मैंने झूठ लिखकर जाने कितनों की आबरू बचा ली,
सच कहने में तो ज़माने भर के घर बदनाम हो गएं ।।
-) हाल इस क़दर बदल रहें हैं,
रंग मौसम के बदल रहें हैं।।
मैं कभी अपना समझता था जिन्हें ,
वे मेरे विपक्ष में जाने क्या कह रहें हैं ।।
-) मेरे होने से ये तो हुआ ,
कुछ ने झूठ को सच कहना शुरू किया ।।
मुझे सच से नफ़रत होने लगी ,
जब झूठों ने सच को कहना शुरू किया ।।
मैं करता भी क्या झूठों ने सच को थामा,
मैंने भी फ़िर सच को झूठ कहना शुरू किया ।।
-) मुझ पागल पे क्या इतना भरोसा क्यूं जताते हो ,
शहर में भीड़ समझदारों की भी हैं ।।
मुझ पागल पर तुम इतना क्यों इतराते हो ,
नजारे शहर में और भी हैं।।
-) कुछ हासिल नहीं हुआ इतनी कशमकश के बाद,
सबकुछ ही तो छिन गया इस तूफ़ान के बाद ।।
और तो कुछ बचा नहीं हैं,
एक आशियाना उजड़ ही गया पंक्षी के उड़ जाने के बाद ।।
-) गुज़र रहीं हैं ये तबियत भी नासाज सी हैं,
कुछ तो रहमो करम तुम्हारे भी हैं ।।
कुछ हवा ज़माने की भी ख़राब हैं,
कब तक बचता मैं,
अब बातें मेरे ख़राब हालात कि भी हैं ।।
-) ये राहु काल का दौर जाने कबतक रहता हैं,
कोई अपना क्या सदा के लिए रूठा रहता हैं ।।
कुछ दिन की मोहलत तो होती होगी ,
ये बेरुखी का सदमा उम्र भर रहता हैं ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) सच्चा हमसफ़र तू ही है मेरा,
हर मोड़ पर साथ तेरा ही सवेरा।
-) तन्हा सफर में तेरा ही नाम लिया,
हर कदम पर तुझे ही अपना कहा।
-) तू मिला तो हर ग़म मुस्कराने लगा,
सच्चा हमसफ़र मेरा पहचानने लगा।
-) बिना कहे जो समझे दिल की जुबां,
वही तो होता है सच्चा कारवां।
-) साथ तेरा तो कांटों में भी बहार है,
तू हमसफ़र है, यही तो प्यार है।
-) तू चले साथ तो राहें भी गीत गाएं,
हर मंज़िल हमें खुद बुलाएं।
-) तेरे बिना सब अधूरा लगे,
साथ तू हो तो जहां भी पूरा लगे।
-) तेरा होना ही काफी है ज़िन्दगी में,
तू है तो हर सुकून है दिलगीरी में।
-) तू मिले तो हर रास्ता आसान लगे,
तेरे संग हर मंजर गुलदान लगे।
-) धूप में छांव सा सुकून है तू,
सच्चे हमसफ़र का जूनून है तू।
-) जब भी टूटा मैं, तू साया बना,
सच्चे साथी की ये ही तो पहचान बना।
-) हर आंधी में तू ही तो दीवार बना,
मेरे सफर का तू ही तो इज़हार बना।
-) साथ तेरा हो तो डर किस बात का,
तू है तो क्या ग़म है रात का।
-) तू साथ हो तो हर सफर हसीन लगे,
वरना ये रस्ते भी अजनबी लगें।
-) मेरा हर कल तुझमें ही सजे,
सच्चा हमसफ़र तुझमें ही बसे।
"हमारी वेबसाइट पर पाएं हिंदी शायरी का बेहतरीन संग्रह, जो हर एहसास को शब्दों में पिरोकर आपके दिल तक पहुँचाता है।”
-) तुझसे ही मेरी पहचान बनी,
सच्ची मोहब्बत की ये जान बनी।
-) तू मुस्कराए तो बहारें खिलें,
तेरे बिना दिल की राहें सिलें।
-) तू है तो हर ग़म भी ग़ज़ल लगे,
तेरे बिना ये दिल बेअचल लगे।
-) साथ तेरे हर मंज़िल आसान लगे,
वरना अकेले हर रास्ता सुनसान लगे।
-) हर लम्हा तुझसे जुड़ा सा लगे,
तू हो तो हर दिन खुदा सा लगे।
-) तू है तो अंधेरे भी रोशनी करें,
तेरा नाम दिल हर सांस में धरे।
-) बिना कहे जो दिल समझ जाए,
वही हमसफ़र उम्रभर निभाए।
-) तुझमें ही है मेरा सुकून बसा,
हर मोड़ पे तेरा साथ है खासा।
-) तू मिले तो जहां भी जन्नत लगे,
तेरे बिना सब कुछ बदनसीब लगे।
-) तुझसे शुरू, तुझपे ही खत्म हो बातें,
सच्चे हमसफ़र की बस तुझमें ही सौगाते।
~~~आराध्यापरी~~~






























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