«"ज़िंदगी हर दिन नया सबक देती है,
बस समझने वाला दिल चाहिए।"»
«"ठोकरों ने ही चलना सिखाया है मुझे,
गिरकर फिर संभलना सिखाया है मुझे।"»
जीवन की शायरी व्यक्ति को आत्मचिंतन करने के लिए प्रेरित करती है। कई बार एक छोटी-सी शायरी वह सच्चाई बता देती है जिसे लंबा भाषण भी नहीं समझा पाता।
-) उनका चेहरा मासूमीयत से भरा एक गुब्बारा हैं ,
खिल -खिलाते हुये बागों में गुलाब से भी प्यारा हैं ।।
लाख रंजिशे हो दिल में फिर भी ,
उनको देख के मुस्कुराना सारे जहां से न्यारा हैं ।।
-) उदासी का आलम हमसे ना पूछो कितने दर्द दबाये बैठे हैं ।।
मर तो चुके हे पहले ही ना जाने कैसे जिंदा बैठे हैं ।।
-) दिल पर लिख दिया बस नाम तेरा मेरी तकदीर ने ,
अब ख्वाहिशों से कहो ,
तुम्हारी के उनपे हक मेरा हैं अब ।।
-) मार रही जिंदगी बड़े जोर से ,
अब तुम ही कोई करम करो ।।
वरना रुकसत हो ले हम इस जहाँ से ।।
-) ना जाने किस कैद में आ गये हम ,
ना तो खुला आसमां दिखता , ना चांदनी दिखती हैं ।।
तारो की टिमटिमाहट को ढूंढते फिर रहे हैं ,
हम अमावस्या की रात में ।।
-) ना जाने कहाँ रहती होगी वो ,
ना जाने कैसी दिखती होगी वो ।।
सुना हैं आसमान मे परिया रहती हैं,
तो क्या परियों जैसी दिखती हैं वो ।।
-) अब जंग लगे हथियारों को धार दी जाएं ,
जंग कि तैयारी हैं।।
शंखनाद से जय घोष हो अबकी हमारी बारी हैं।।
-) किसी की यादों ने रुलाया ,
किसी की बातों ने उलझाया ।।
हम ही अनजान थे इस जहान वालो से ,
जिसने भी डुबाया हमको ही डुबाया हैं ।।
-) हो मंज़ूर ख़ुदा को अगर तो दिल लगा ले हम ,
सारे फ़ैसले हो हमारे ही हक़ में तो कचहरी में ये मुद्दा भी उठा ले हम ,
हमें मंज़ूर नहीं अपने सिर पर इल्ज़ामात ,
इल्जामों से परे अपनी छवि बना ले हम ।।
-) तुमसे दिल लगाना ना जाने कितनी आफ़तों कि पुड़िया हैं ,
ये गुनाह हैं और मैं अब गुनहगार हूं ,
ऐसा फैसला मेरे हक़ में कर दिया हैं।।
-) आ भी जा के अब ज़िंदगी बागडोर कम लगे हैं,
पास तू ना हो तो सांसे कम लगे हैं,
कोई वादा मिलन का कर ,
बगैर वादें के सब झूठ सा लगे हैं।।
-) बिछड़ने वाले ये भी सोच की मिलने में कितनी ज़ुस्तज़ु थी ,
आफत थी बदनामिया थी मुसीबतों कि मारी किस्मत थी ,
जुदा होने में एक पल लगता हैं,
मिलने में सारी उम्र सी लगती हैं, ।।
खैर इसमें दोष किसी का भी ना तेरा ना मेरा ,
जमाने कि नज़र थी और बुरी नजर लगती हैं ।।
-) कुछ वादा ऐसा भी था ,
मेरे ना आने का था ,
दौर मुसीबतों का था ,
अच्छे बुरे का था ,
मेरे बिछड़ने का था।।
-) आंखे आज भी तेरा वो मुड़कर देखना ना भूली
सबकुछ भूली हैं तेरा वो हंसना ना भूली ।।
मुझे याद करता है जमाना ,
में तेरी वो यादें नहीं भूली ,
तू मुस्कुरा देता था मैं वो हँसी नहीं भूली ।।
-) तू ये भी वफ़ा का पैगाम ला ,
आशिक़ो का नाम ला,
किसने उड़ाई ये अफ़वाह मेरे बर्बाद होने की,
दिलो के महफ़िल से बेघर होने की ,
तू ये अहसान कर नाम कर,
वो जो है नहीं कुछ भी वो पैगाम ला ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तुमसे बिछड़कर भी एक रिश्ता कायम है,
तुम्हारी यादें मेरे दिल में एक साया धारण है।
-) जब भी यादें ताज़ा हो जाती हैं,
मेरी आँखें चुपके से भीग जाती हैं।
-) तेरे बिना हर सुबह अधूरी सी लगती है,
तेरी यादों में ही मेरी हर खुशबू बसी है।
-) ख़्वाबों में आती हो, यादों में बसी हो,
तुम मेरी जिंदगी की एक बेहद ख़ास वजह हो।
-) तुम मुस्कुराती हो जब हवा में चलती है,
तेरी यादों का सुरूर मेरी धड़कन में बहती है।
-) लम्हे गुज़रे हैं तेरे संग, ये सच है,
पर तेरी यादें आज भी मुझे तरसाती हैं।
-) पलकों पर रखा है तेरा नाम,
तेरी यादों का सफर मेरा है पैगाम।
-) दिल की गहराइयों में बसी हो तुम,
जब कभी याद आती हो, ख़ुद से बयाँ हो तुम।
-) कभी तेरा चेहरा, कभी तेरा नाम है,
यादों का ये सागर, बस तेरा ही जाम है।
-) हर जज़्बा, हर लम्हा तेरा एहसास है,
तेरे बिना ये जीवन बस एक उदास है।
-) हवा में तेरी खुशबू अब भी महकती है,
तेरे बिना हर सुबह सर्द रात की तरह अधूरी लगती है।
-) तेरा दीदार हर सुबह मेरी दुआ है,
तेरी यादें मेरे दिल की एक अनकही कहानी है।
-) हर शाम यादों में तन्हाई का साया है,
तेरी यादें फिर से मुझसे बातें करती हैं।
-) तन्हाई में अपने दिल से तेरा नाम लूँ,
यादों की इस चादर में खुद को ढक लूँ।
-) खोने का ग़म भूलकर, अब हंसता हूँ,
तेरी यादों में खुद को बसाता हूँ।
-) कभी ना भुला पाएंगे तेरा नाम,
तेरी यादें बन गई हैं हमारे अरमान।
-) आंसू बहते हैं जब तेरा ख्याल आता है,
मेरी यादों में तू हर लम्हा समाता है।
-) तुझे भुलाने की कोशिशें की हैं मैंने,
पर तेरी यादें हर बार मुझसे हंसकर मिली हैं।
-) तेरे बिना हर दिन इक अंधेरा है,
तेरी यादें ही तो, इस दिल का सवेरा है।
-) मेरी तन्हाई में तेरा आवाज़ है,
तेरी यादों में बसी मेरी हर ख्वाब है।
-) चुपके से आती हो तुम हर रोज,
तेरी यादों का आलम है सबसे अलग।
-) रुखसात होकर भी तेरी यादें न जाएँगी,
मेरा दिल हमेशा तेरा इंतज़ार करेगा।
-) तुमसे जो बिछड़े, वो पल तलवार है,
तेरी यादें मेरी ज़िन्दगी का राज़ है।
-) शाम ढलते ही तेरा ख़्याल आता है,
तेरी यादों में बसा मेरा हर सवाल आता है।
-) जब भी टूटती है शाम पलकें,
तेरी यादों की हसीन बातें फिर से सजती हैं।
संघर्ष जीवन की वास्तविक पाठशाला है। सफलता केवल उन्हीं लोगों को मिलती है जो कठिनाइयों का सामना करने का साहस रखते हैं।
संघर्ष पर आधारित शायरी यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी है।
«"रास्ते कठिन हैं तो क्या हुआ,
मंज़िल भी तो शानदार होगी।"»
«"जो गिरकर फिर उठना सीख जाता है,
वही इतिहास लिख जाता है।"»
ऐसी शायरियाँ विद्यार्थियों, युवाओं और जीवन में कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
~~~आराध्यापरी~~~
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-) उनका चेहरा मासूमीयत से भरा एक गुब्बारा हैं ,
खिल -खिलाते हुये बागों में गुलाब से भी प्यारा हैं ।।
लाख रंजिशे हो दिल में फिर भी ,
उनको देख के मुस्कुराना सारे जहां से न्यारा हैं ।।
-) उदासी का आलम हमसे ना पूछो कितने दर्द दबाये बैठे हैं ।।
मर तो चुके हे पहले ही ना जाने कैसे जिंदा बैठे हैं ।।
-) दिल पर लिख दिया बस नाम तेरा मेरी तकदीर ने ,
अब ख्वाहिशों से कहो ,
तुम्हारी के उनपे हक मेरा हैं अब ।।
-) मार रही जिंदगी बड़े जोर से ,
अब तुम ही कोई करम करो ।।
वरना रुकसत हो ले हम इस जहाँ से ।।
-) ना जाने किस कैद में आ गये हम ,
ना तो खुला आसमां दिखता , ना चांदनी दिखती ।।
तारो की टिमटिमाहट को ढूंढते फिर रहे हैं ,
हम अमावस्या की रात में ।।
-) ना जाने कहाँ रहती होगी वो ,
ना जाने कैसी दिखती होगी वो ।।
सुना हैं आसमान मे परिया रहती हैं,
तो क्या परियों जैसी दिखती हैं वो ।।
-) अब जंग लगे हथियारों को धार दी जाएं ,
जंग कि तैयारी हैं।।
शंखनाद से जय घोष हो अबकी हमारी बारी हैं।।
-) किसी की यादों ने रुलाया ,
किसी की बातों ने उलझाया ।।
हम ही अनजान थे इस जहान वालो से ,
जिसने भी डुबाया हमको ही डुबाया हैं ।।
-) अगर हम ही दिल - ए - शमसीर खींचने लगे तो फिर ये फासले कम करेगा कौन ।।
अगर हम ही नाराज़ होने लगे तो फिर उन्हें मनायेगा कौन ।।
अगर हम ही उन्हें ना चाहने लगे तो फिर उन्हें चाहेगा कौन ।।
अगर हम ही उसकी जुल्फों को बिखारने लगे तो फिर उन्हें सवारेगा कौन ।।
अगर हम ही ना हुए रौशन आँगन में उसके तो फिर चांदनी बिखेरेगा कौन ।।
अगर हम ही हाल -ए- दिल वयां ना करें तो फिर हाल -ए- दिल सुनाएगा कौन ।।
अगर हम ही बेअदबी दिखाने लगे तो फिर अदब दिखायेगा कौन ।।
अगर हम में हम ही ना रहे तो फिर हम में उसको ढूढेगा कौन ।।
+) मेरी नाराजगी जायज है बस तुम से ,
क्योंकि रूठे हुए आशुतोष को मनाना किसी और को आता नहीं ।।
-) नादान हैं हम ए जिंदगी ,
इतनी नराज मत हो ।।
ना जाने कब - कहाँ,
दफन हो जाए हम तुझे मनाने में ।।
-) इश्क़ हो रहा था हम दोनों को थोड़ा -थोड़ा ,
शामें हसीन होने लगी थी ,
फिर किसी ने खबर उसके घर में कर दी ,
फिर मेरी शख्सियत को रुकसत करने वो,
काले लिबास में कफ़न- ए- पोशाक लेके आए ।।
-) फिर वो यूँ मिली ना जाने कितने दिनों के बाद ,
फिर से मिलने में अब वो बात ना थी ।।
पहले जो हस्ती खिल -खिलाती थी,
अब वो कुछ उदास सी थी ।।
पहले जो खुद बालपन में थी ,
देखो आज वो जमाने भर से समझदार सी हैं ।।
जो पूछा हल-ए-दिल, मैंने उसका तो एक झूठ बोलने लगी,
जो कुछ और कहती वो, तो साँसों कि सिसक ने बता दिया हाल उसका ।।
फिर यूँ देखा नम आँखों से उसने मुझे ,
लगा यूँ के भर लूँ बाहों में ,
मैं उसे फिर खुदने ही जाना ,
के अब वो बात नहीं ।।
जिसका जिक्र करता ख्वाबों में ,
मैं आज वो मेरे सामने होकर भी मेरे पास नहीं ।।
फिर अलविदा कहने लगे वो ,
तो दिल ने जाना के सच में ये कोई ख्वाब तो नहीं ।।
-) तुम तो तुम हो लेकिन ,
मैंने अपने ख्वाबों से तुम्हारी खुशबू चुराई हैं ।।
-) काफिरों से कहो अबके बसेरा उनके शहर में होगा ।।
फिजाओं ने रुख आशुतोष के नाम का किया हैं ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) मेरा मन एक सागर है, लहरों से भरा,
हर नई ख़ुशी में, वो फिर से उबरा।
-) सोचों की परतों में, ख़ुद को ढूंढूं,
मेरा मन कहीं खो गया, उसे क्यों छोड़ूं।
-) बहारों की खुशबू से, मेरा मन महके,
दिल की गहराईयों में, सपनों के फूल खिले।
-) मन की हर धड़कन में, एक नया ख्वाब है,
ज़िंदगी की मोहब्बत, मेरा सबसे बड़ा जवाब है।
-) ख़ामोशी की चादर में, छिपा मेरा मन,
जब सब हो जाए सन्नाटा, वो बोले हर दिन।
-) मेरा मन चंचल है, हर एक पल में बसा,
खो जाए नए ख्यालों में, जैसे बादल में नशा।
-) खुद से किया जंग, जब मन ने कहा,
फिर मिली एक सच्चाई, जो दिल से गहरी सहा।
-) बेताबियों की गूंज में, मेरा मन गाता है,
ख़ुद को पहचानने की जद्दोजहद, हर दिन सिखाता है।
-) पलकों पर रखा है मैंने, अपने मन को,
ख़्वाबों का हर लम्हा, मेरे ज़िंदगी का धन को।
-) खामोशी की आग में, जब जलता है मेरा मन,
खुद ही बुनता हूं मैं, ख़ुद के सपनों का फसाना।
-) चाँद की रौशनी में, मेरा मन खिलखिलाए,
हर कहानी के मोड़ पर, नए गीत गाए।
-) बादलों की गोद में, मेरा मन उड़ता जाए,
आसमान के सिरे तक, वो नादान मुस्कुराए।
-) हो जब सुबह की रोशनी, बेकरार मेरा मन,
उम्मीदों के रंगों में, छिपा एक नया क्षण।
-) बातें जो दिल में हैं, वो मेरे मन की गहराई,
हर लफ्ज़ में छुपा है, मेरे अस्तित्व का साया।
-) मेरा मन एक बाग है, हर रंग में भरा,
खुशियों की खुसबू से, हर गम को भुला दिया।
-) मेरा मन बहकता है बादल की चाल में,
ढूँढता है सुकून हर एक सवाल में।
-) मेरा मन चुप है फिर भी कहता बहुत कुछ,
हर ख़ामोशी में छुपा है उसका रूप कुछ।
-) मेरा मन उड़ चला है ख़्वाबों के गाँव में,
जहाँ न हो भीड़, न कोई दाव-पेंच भाव में।
-) मेरा मन भीगता है सावन की तरह,
हर दर्द छुपाता है मुस्कान की तरह।
-)मेरा मन चलता है तेरे ख़यालों के संग,
हर मोड़ पे बस तू, हर धुन में तेरा रंग।
-) मेरा मन वो पंछी है जो बंधा नहीं,
उड़ना जानता है, पर राह चुनी नहीं।
-) मेरा मन आईना है, पर धुंधला सा लगे,
हर अक्स में वो चेहरा आज भी जले।
-)मेरा मन शोर करता है तन्हाई में,
कुछ न कहते हुए भी भर आयी आँखें।
-) मेरा मन टूटकर भी जुड़ा सा लगे,
तेरे नाम से अब भी खुदा सा लगे।
-) मेरा मन समंदर है, गहराइयों से भरा,
ऊपर से शांत, पर अंदर से हिला।
"हमारी वेबसाइट पर आपको मिलेगी बेहतरीन हिंदी शायरी, जो आपके दिल की गहराईयों को छू जाए और हर एहसास को खूबसूरती से शब्दों में पिरोने का काम करे।”
~~~आराध्यापरी~~~






























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