Breakup Shayari in Hindi :- सकारात्मक शायरी मानसिक स्वास्थ्य पर अत्यंत सकारात्मक प्रभाव डालती है। यह तनाव कम करती है, आत्मविश्वास बढ़ाती है और व्यक्ति को भविष्य के प्रति आशावादी बनाती है।
«"खुद पर भरोसा रखना सीखो,
रास्ते अपने आप बन जाएंगे।"»
«"हर सुबह नई उम्मीद लेकर आती है,
बस उसे पहचानने की ज़रूरत होती है।"»
ऐसी शायरियाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों, नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और संघर्षरत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।
-) फिर वो यूँ मिली ना जाने कितने दिनों के बाद ,
फिर से मिलने में अब वो बात ना थी ।
पहले जो हस्ती खिल -खिलाती थी,
अब वो कुछ उदास सी थी ।
पहले जो खुद बालपन में थी ,
देखो आज वो जमाने भर से समझदार सी हैं।
जो पूछा हल-ए-दिल मैंने उसका,
तो एक झूठ बोलने लगी,
जो कुछ और कहती वो,
तो साँसों कि सिसक ने बता दिया हाल उसका । ।
फिर यूँ देखा नम आँखों से उसने मुझे ,
लगा यूँ के भर लूँ बाहों में ,
मैं उसे फिर खुदने ही जाना ,
के अब वो बात नहीं।
जिसका जिक्र करता ख्वाबों में ,
मैं आज वो मेरे सामने होकर भी मेरे पास नहीं ।
फिर अलविदा कहने लगे वो ,
तो दिल ने जाना के सच में ये कोई ख्वाब तो नहीं ।।
-) मोहब्बत का ज़िक्र इस दहलीज के अंदर ना किया करो ,
हम दोनों ने मोहब्बत में कई दहलींजे लांघी थीं।।
हुआ क्या फिर वो अपने रास्ते ,
और हम अपने रास्ते हो गए ।।
उसको तो अब शायद याद भी नहीं मैं,
लेकिन मेरे दिल पे उसके ताजे जख्म रह गए ।।
भुलाने चाहते हैं उसको मगर ,
लेकिन हर दफा उसकी यादों में उसके होकर रह गए ।।
अब जो हम ना रहें तो कहना उनसे ,
कोई था जो खुदा समझता था आपको और आप केवल इंसान बनके रह गए ।।
खैर छोड़ो अब उसकी बातें अब दामन हमनें माटी का थामा हैं,
इस माटी के थें ,और इसी माटी के होकर रह गए ।।
-) यूं अचानक वो सामने आ गए ,
वह मेरे दिल के बंजर जमीन पर फूल खिला गए ।।
ना जाने दो पल में क्या क्या सपने दिखाए गए ,
अब वो मेरे इश्क ,खुदा ,महबूब न जाने क्या क्या हो गए ।।
-) ना जाने किस कैद में आ गये हम ,
ना तो खुला आसमां दिखता ,
ना चांदनी दिखती ।।
तारो की टिमटिमाहट को ढूंढते फिर रहे हैं ,
हम अमावस्या की रात में ।।
-) अगर हम ही दिल - ए - शमसीर खींचने लगे तो,
फिर ये फासले कम करेगा कौन ।।
अगर हम ही नाराज़ होने लगे ,
तो फिर उन्हें मनायेगा कौन ।।
अगर हम ही उन्हें ना चाहने लगे
तो फिर उन्हें चाहेगा कौन ।
अगर हम ही उसकी जुल्फों को बिखारने लगे
तो फिर उन्हें सवारेगा कौन ।
अगर हम ही ना हुए रौशन आँगन में उसके
तो फिर चांदनी बिखेरेगा कौन ।
अगर हम ही हाल -ए- दिल वयां ना करें
तो फिर हाल -ए- दिल वयां करेगा कौन ।
अगर हम ही बेअदबी दिखाने लगे
तो फिर अदब दिखायेगा कौन ।
अगर हम में हम ही ना रहे
तो फिर हम में उसको ढूढेगा कौन ।।
-) ए जिंदगी कुछ तो रेहम कर हम नादान बच्चों पर ,
अभी पंख आए भी नहीं और तूने सफर समंदर लांघने का शुरू कर दिया ।।
-) लोगों से ज़रा गौर से पुछो किसने क्या गवायां हैं,
फिर हमसे पूछो हमनें क्या गवायां हैं ।।
चैन सुकून वो क्या होता हैं ,
ये सब तो हमनें बचपन में खोया हैं ।।
एक उम्र तो गुजार दी जागते जागते हमने ,
इन आंखों पर भी हमने बड़ा जुल्म ढाया हैं।।
ये चाहती थी बंद हो जाना मगर
हमने इनको हर पल खुला रखा हैं।।
अब मरीज से इलाज पूछते हैं वो
जिन्होंने हमें मरीज बनाया हैं।।
की इतनी खूबसूरत क्यों होती हैंये राते ,
मैंने टिमटिमाते तारों में उसको पाया हैं।।
सोचता हूं बंद आंखें क्या देखेगी ख्वाबों को ,
मैंने खुली आंखों से उसके ख्वाबों को सजाया हैं।।
-) तेरे ना आने का इंतजार एक उम्र तक करेंगे हम ,
फिर भी जो तुम ना आए तो बस खुद को तबाह करेंगे हम ।।
-) तुम अपने ही वादे की आंच रख लेते ,
हमारी बातें तो कल भी झूठी थी तुम्हारे लिए और आज भी ,
कम से कम कुछ पल के लिए ठहर जाते ,
हम सारी उम्र तुम्हें इश्क़ लिख जाते ।।
-) मेरी बातों का असर भी यूं था उसपे ,
उसकी बातों को छोड़ बस में झूठ था उसे ।।
-) दूर आसमानों में कहीं जा छुपा हैं वो ,
मेरी आंखों के आंसु का सबब बन गया है वो ।।
काली रात में रौशनी था अब मेरी ज़िंदगी में काली रात हैं वो ,
वो सब जानता था उसके बग़ैर क्या हूं में ,
मुझे मगर अकेला छोड़ गया हैं वो ।।
-) साधारण से लोग भी अब साजिशों का विचार करने लगे हैं,
जाने दिल पे कितनी गुजरी उनके अपने आप को भूल कर जमाने के रंग में मिलने लगे हैं।।
-) मुझे हराने वो आएं ,
जिसके आगे मैं अस्त्र ही ना उठा पाया ।।
होता क्या हार कबूल ना थी बग़ैर लड़े ,
मैं फ़िज़ूल में अपनी जान गंवा आया ।।
-) उसके आगे हर फ़ैसला मुझे क़बूल था ,
वो मौत लिखता मुझे फांसी का फ़ैसला मंज़ूर था ।।
जो मुकदमा फ़िर किसी और के हाथ गया ,
ये बाघी फ़िर बग़ावत पे आ गया ।।
कायदे क़ानून सबकी आँखों में धूल झोंक गया ,
फ़िर मैं हवा हो गया आंधी सा छा गया ,
मेघों की तेज़ गरजना सा गरज ही गया ।।
-) तू ख़ुशबू फूलों की ,
चमकती चांदनी सी ,
काली नागिन सी जुल्फ़े ,
लगती परी सी ।।
~~~आशुतोष दांगी ~~~
-) तुमसे मिलकर चाँद भी शर्मा जाता है,
तेरी खूबसूरती में हर लम्हा खो जाता है।
-) चाँद की चाँदनी में तेरा साथ हो,
हर रात मेरी ख्वाबों में तेरा ही रूप हो।
-) तुमसे रोशन है ये चाँदनी रात,
तेरी हंसी से महकी है मेरी हर बात।
-) चाँद की छवि में तेरा एहसास है,
तुम ही मेरी रातों का खास काफी राज है।
-) जब भी देखूं चाँद, तुम याद आती हो,
तुम्हारे बिना ये रातें अधूरी लगती हो।
-) चाँद की किरणों में तेरी परछाई है,
दिल में बसी हो तुम, यह सच्चाई है।
-) चाँद से पूछूं मैं, क्या वो भी तेरा दीवाना है,
तेरी मोहब्बत में हर कोई है बेहोश, बस तेरा फसाना है।
-) चाँद की चाँदनी से सजती है ये रात,
तुम संग बिता दूँ, यही है मेरी चाहत।
-) रात का चाँद तेरी याद में खो जाता है,
मोहब्बत का ये किस्सा हमेशा जियाता है।
-) चाँद की रौशनी में तेरा नाम लूँ,
हर ख्वाब में तेरा साथ पाऊँ।
-) चाँद सजा है तुम्हारी यादों के संग,
तुम्हारे बिना ये रातें सुनी सुनी संग।
-) चाँद की चमक तुम्हारी आँखों में बसी है,
मोहब्बत की हर कहानी यहाँ लिखी है।
-) तुम और चाँद जब भी एकसाथ होते हैं,
दुनिया की हर खुशी इस पल में होते हैं।
-) रात के आसमान में तुम मेरा चाँद हो,
हर ख्वाब में तेरा ही साया साथ हो।
-) चाँद की किरणें तेरी मुस्कान सिखाती हैं,
मोहब्बत की लहरें दिल को बहकाती हैं।
-) चाँद की खूबसूरती से तेरा मुकाबला क्या?
तुम तो हो सजीव ख्वाब, चाँद तो बस एक सितारा है।
-) चाँद की रोशनी में जब तुम हों पास,
हर पल बन जाए सुखद अहसास।
-) चाँद की उगन में तेरा ही जिक्र होता है,
मोहब्बत का हर लम्हा बस तेरा इंतज़ार होता है।
-) जब चाँद चमकता है, तुमसे बात होती है,
दिल की बातें फिजाओं में लहराती होती हैं।
-) चाँद की बाहों में मैंने तुझको पाया,
तेरा दीदार करते-करते दिल ने गाया।
-) चाँद के बिना रात का क्या गिला,
तुम ही हो वो जिनसे मेरा दिल है मिला।
- )चाँद की जुगनू से रौशनी चुराई है,
तेरे एहसास ने मेरी रातों में रौनक बिखेराई है।
-) चाँद का कोई साथी नहीं, पर तेरा साथ क्या कम है?
तुम मेरे ख्वाबों की सच्चाई, तुम मेरी सबसे अनमोल धरोहर हो।
-) चाँद की ठंडी हवा और तेरा मुझे जाना,
प्यार की इस चर्चा में मुझे लुभाना।
-) चाँद की रातें तुम्हारे बिना अधूरी हैं,
तुम हो तो हर पल में खुशियों की फुहारें हैं।
*शायरी केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि महसूस करने का अनुभव है। इसके प्रभाव कई स्तरों पर दिखाई देते हैं—*
1. भावनात्मक जुड़ाव – पाठक अपनी ही कहानी महसूस करता है।
2. मानसिक सुकून – तनाव और अकेलेपन में राहत मिलती है।
3. प्रेरणा – कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।
4. रिश्तों में निकटता – प्रेम और दोस्ती के संबंध मजबूत होते हैं।
5. आत्मचिंतन – व्यक्ति अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से देखता है।
6. यादों का संरक्षण – विशेष अवसर और भावनाएँ लंबे समय तक स्मरणीय रहती हैं।
-) वो जो हैं, जिससे हम मोहब्बत करते हैं
वो क़यामत ढाते हैं ।
अगर जिक्र हो उनकी काली जुल्फों का ,
तो मेघ गरजना शुरू कर देते हैं ।
अगर दीदार हो उनकी झील सी गहरी आँखों का,
तो समन्दर रूठ जाते हैं ।
सुना हैं गुलाबो से भी उनकी कुछ खास बनती नहीं,
जो देख ले उनके होंठो की लाली ,
तो गुलाब अपनी पंखुड़ियों के रंग बदल ले ।।
-) आजकल खुद ही के गमों को देख मुस्कुरा देता हूं मैं,
वरना जमाना तो मेरी खुशियों में भी गमों की बारिश कर देता हैं ।।
जाने क्यों रूठ जाते हैं मुझसे मेरे परवाने बस ,
सारी उम्र उन्हीं को मनाने में गुजार देता हूं मैं ।।
-) एक बार जो तेरे दर पर आए, फिर कोई दर ना चाहा हमने,
माँगा तुझसे बस, और किसी से कुछ ना माँगा हमने ।।
श्रापित चंद्र को जब कोई ना सहारा,
तब मस्तक पर सजाया तुमने ।।
तुम त्रिलोकी नाथ इस जहां भर को तुममें झांका हमने ,
जब गंगा भागीरथी बनने चली, तब जटाओ में समाया तुमने।।
अंधकार मय जब ये जहाँ हुआ,
तब सूर्य बनकर उभारा तुमने,
जब आन पड़ा संकट धरा पर,
विष को कंठ में उतारा तुमने।।
मैं अज्ञानी हूँ मुझ पर कृपा कर दो,
जिस तरह शनि को तारा तुमने ।।
-) मृत को जीवित करदे वह संजीवनी हैं शिक्षक ,
अंधकार को प्रकाश करदे वह सूर्य की किरण हैं शिक्षक ,
अज्ञानी को ज्ञानी करदे वह गीता का सार हैं शिक्षक ।।
खुद स्थिर रहकर पूरे विश्व को घुमादे वह मन की गति हैं शिक्षक,
शब्दों से जिसका बखान ना किया जाए वह शब्दकोश हैं शिक्षक ।।
-) एक तो गफलत भरी जिंदगी मेरी ,
ऊपर से ना जीने का सवाल ,
फिर उसपे बाजारों में मैं सरेआम बदनाम मेरा नाम ।।
-) महफिलों में उनकी नाम बदनाम मेरा कोई कर गया ,
उसको तो थी खबर मेरी मगर ना जाने फिज़ा कहा की थी,
जाने वालों में सबसे पहले मेरा हमसफर गया ।।
मैं उससे पूछता मगर मेरी मोहब्बत को हवा कोई अंजान कर गया ।।
-) ना जाने किस दौड़ का हिस्सा हूं मैं,
जब भी किसी मुकाम पे पहुंचा तो लगा कि जैसे यह मेरा मुकाम नहीं।।
भटकता तो नहीं मैं कहीं मगर ,
अभी तक उस ठिकाने का अंजाम भी हासिल नहीं।।
चले थे कुछ लोग साथ में मेरे मगर जाने कहां गुम हो गए सारे ,
खाली रास्तों पे कोई साथी भी तो नहीं।।
जिंदा हूं मैं एक लाश सा ,
मगर फिर भी मुझे मौत का इंतजार क्यूं नहीं।।
जाने वालों को रोका तो मैंने बहुत ,
लेकिन उन तक मेरी आवाज भी तो पहुंची नहीं।।
समझ लेते बस बात इतनी वो ,
तो दरबदर ना भटकता मैं,
खैर छोड़ो उनको तो इसकी खबर भी नहीं।।
-) आप से पहले हम कुछ खास तो ना थें ,
माना कुछ थें पर यार जो हैं अब वो तो ना थें ।।
खुदमें यूं मसरूफ थें ,
जमाने से कुछ यूं बेगाने थें ।।
पहले पूछते लोग तो कह देते थें ,
जैसे भी थे ठीक थें ।।
अब जो नयापन हमपर आया ऐसे तो ना थें ,
लोग जलते हैं अब मेरे खुश रहने पे ,
कहते हैं जैसे ये पहले थे बिलकुल ठीक थें ।।
-) लोगों से ज़रा गौर से पुछो किसने क्या गवायां हैं,
फिर हमसे पूछो हमनें क्या गवायां हैं ।।
चैन सुकून वो क्या होता हैं ,
ये तो हमनें बचपने में खोया हैं ।।
एक उम्र तो गुजार दी जागते जागते ,
हमने आंखों पर भी बड़ा जुल्म ढाया हैं।।
ये चाहती थी बंद हो जाना ,
मगर हमने इनको हर पल खुला रखा हैं।।
अब मरीज से इलाज पूछते हैं,
वो जिन्होंने हमें मरीज बनाया हैं।।
की इतनी खूबसूरत क्यों होती हैं,
ये राते मैंने टिमटिमाते तारों में उसको पाया हैं।।
सोचता हूं बंद आंखें क्या देखेगी ख्वाबों को ,
मैंने खुली आंखों से उसके ख्वाबों को सजाया हैं।।
-) मंजिलें मिली तमाम लोगों को ,
मैं सफर के इंतजार में बेसुध रहां ।।
पहुंचे वो भी वक्त पर जो मुझसे बाद में घर से निकलें,
मैंने ना जाने किस कदर वक्त गवायां ।।
उम्मीदें तमाम थी खुद से हमकों भी ,
मगर ना जानें कहां ख्वाब टूटे कहां हम ।।
उम्र भी यूं क्यूं बढ़ती हैं,
जरा क्या ठहरे लगने लगा यूं बचपने से बुढ़ापे में आ गुजरे ।।
मैं खुद को तलाशता हूं , खुद की तलाश में ,
वो शख्स हां मैं ही अब खुद से अनजान हूं ।।
-) मोहब्बत का ज़िक्र इस दहलीज के अंदर ना किया करो ,
हम दोनों ने मोहब्बत में कई दहलींजे लांघी थीं।।
हुआ क्या फिर वो अपने रास्ते ,
और हम अपने रास्ते हो गए ।।
उसको तो अब शायद याद भी नहीं मैं,
लेकिन मेरे दिल पे उसके ताजे जख्म रह गए ।।
भुलाने चाहते हैं उसको मगर ,
लेकिन हर दफा उसकी यादों में उसके होकर रह गए ।।
अब जो हम ना रहें तो कहना उनसे ,
कोई था जो खुदा समझता था आपको और आप केवल इंसान बनके रह गए ।।
खैर छोड़ो अब उसकी बातें अब दामन हमनें माटी का थामा हैं,
इस माटी के थें ,
और इसी माटी के होकर रह गए ।।
-) हसीनाओं को तो बेवजह बदनाम किया गया हैं,
मेरी जवानी तो किताबों ने खायीं हैं।।
मैं उलझा रहा इन किताबों में कहीं ,
आशिकी ना जाने जमाने में किस - किस ने कहां लड़ाई हैं।।
-) तू नहीं तो ये सावन भी अच्छा नहीं लगता,
सबकुछ होता हैं पास लेकिन तेरे होने सा नहीं लगता ।।
मैं बैठ जाता हूं नदी किनारे,
मगर अब तो दिल वहां भी नहीं लगता ,
चिल्लाता हूं वादियों में तेरे नाम को,
लेकिन वहां भी कोई जवाब नहीं मिलता।।
हम तन्हां हैं आकर देख यूं गैरों से हाल मेरा पूछना,
मेरी जान मुझको तो तेरा ये रवैया बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता ।।
-) फूल गुलाबों को मुझसे जाने गिला इतनी क्यूं ,
हर वक्त पूछते हैं,
गुलाब को गुलाबों कि जरूरत क्या ।।
-) हमारी शान तिरंगा,
हर दिल हिंदुस्तान तिरंगा ।।
इसकी खातिर वीरों ने त्यागे प्राण ,
उनका बलिदान तिरंगा ।।
जिसके प्रथम रंग से शौर्य भर जाए रगों में,
ऐसा चिंहित मान तिरंगा ।।
अमन शांति
का पाठ पढ़ाए,
रंग सफेद से हमें बताएं,
ऐसे गुरु का मान तिरंगा ।।
जिसके रंग आखिरी से,
उन्नति हरियाली की दिख जाए,
झलक एक ऐसी पहचान तिरंगा ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~
-) तेरी आँखों में जो नशा है, वो शराब से कहीं गहरा है,
पी भी लूँ अगर, होश फिर भी तेरा ही चेहरा है।
-) वो जब देखती है पलट के, सारा शहर झूम जाता है,
तेरी आँखों का ये नशा हर दिल पे छा जाता है।
-) शराब पी के भी जो नशा न चढ़ा,
तेरी आँखें देख लीं — और दिल बहका।
-) तेरी नजरों का असर कुछ ऐसा चला,
पीने वालों ने जाम को ठुकरा दिया।
-) उसकी आँखों में देखा जो, जाम खुद से टूट गया,
नशा ऐसा चढ़ा कि खुद को ही भूल गया।
-) तेरी आँखों की गहराई में डूबा जो,
फिर न किनारा मिला, न खुदा मिला।
-) तेरी नजरों की मस्ती जब चली,
सारा आलम झूमने लगा दिल से दिली।
-) उसकी एक नजर का असर क्या कहें,
शराब से ज़्यादा तलब तेरी आँखें बन गईं।
-) तेरी आँखें हैं या साक़ी की साजिश,
हर नज़र में घुलता गया नशा धीरे-धीरे।
-) तेरी आँखों से जो पी ली एक बार,
फिर न जाम भाया न कोई त्यौहार।
-) तेरी निगाहों का जादू कुछ ऐसा चला,
होश संभालते-संभालते उम्र निकल चली।
-) तेरी आँखों ने जो डाला असर,
अब शराब भी लगती है फीकी मगर।
-) तेरी नज़रों की धुन पे दिल ऐसा थिरका,
जैसे हर सांस ने रक्स करना सीख लिया।
-) तेरी आँखों का नशा जब से चढ़ा,
अब जाम भी खुद बेहोश लगता है।
-) तेरी आँखों के साए में जो आ गया,
फिर किसी और को चाह न सका।
-) तेरी निगाहों में डूबा जो एक बार,
फिर नशे की जरूरत न रही हर बार।
-) तेरी आँखों की शराब ने जो चखा,
फिर खुदा भी कहे — ये इश्क़ सच्चा।
-) तेरी आँखों से बंधी कुछ ऐसी डोर,
जो न टूटे न छूटे, बस खिंचती ही जाए।
-) तेरी आँखों की कशिश में जो डूबा,
फिर लौटना न चाहा उस जमीं से।
-) तेरी निगाहों में जो सुकून है,
वो मयखाने के हर जाम में नहीं।
-) तेरी आँखें जब बोलती हैं चुपचाप,
तो हर शायर बना देता है इश्क़ की किताब।
-) तेरी आँखों में जो चमक है,
वो किसी जाम की बात नहीं करती।
-) तेरी निगाहों का असर कुछ यूं हुआ,
मेरी कलम भी अब तेरी ग़ज़लें लिखती है।
-) तेरी आँखें नहीं, एक समंदर हैं नशे का,
उतरोगे तो डूबने से बच न पाओगे।
-) तेरी आँखों से जो किया पहला इश्क़,
आज तक कोई दूसरा नशा चढ़ा ही नहीं।
~~~आराध्यापरी~~~






























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