हम मानते हैं कि प्रेम केवल दो लोगों के बीच का रिश्ता नहीं, बल्कि आत्माओं का गहरा जुड़ाव है। इसलिए हमारी शायरियों में केवल आकर्षण नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम की गहराई भी दिखाई देती है।
“तेरे नाम से ही मुस्कुराहट आ जाती है, मेरी हर शाम तुझसे सज जाती है।”
प्रेम में सपने होते हैं, विश्वास होता है और साथ निभाने की चाह होती है। हमारी रोमांटिक शायरियाँ इन सभी भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त करती हैं ताकि हर प्रेमी अपने दिल की धड़कन को उनमें महसूस कर सके।
*दर्द और जुदाई की सच्ची आवाज़*
-) तेरे नाम का क्या ख़ूब असर है ,
मुझे याद करते हैं लोग अक्सर तेरा नाम लेकर ।।
मैं कभी मंद मंद मुस्कुरा देता हूं,
इतने प्यार से पुकारा जाता है तेरा नाम मैं दुनिया भुला देता हूं ।।
-) सौ गज जमीन से मेरा मन कभी जीते जी भर नहीं ,
मैं जिंदगी भर इसी कशमकश रहा,
और हमेशा इससे ज्यादा चाहता रहा,
सब अपना करता रहा ।।
लेकिन एक एहसान यह करना केवल दो गज जमीन को मेरे नाम करना ,
सुकून के पल देना हो सके तो उसपर एक पीपल की छांव करना,
फिर मुझे इस जहां से जुदा करना ।।
-) आखिरी वक्त जब भी हो तो पास केवल तुम बैठना,
मुझे मुस्कुरा कर विदा करना ,
तुम्हारे बाद सफर बहुत कठिन है ।।
दुआएं करना मेरा रास्ता सुगम करना ,
तुम आंखों में आंसू ना भरना ,
बाकी फिर मुस्कुरा कर मुझे ख़ुदा के नाम करना ।।
-) तबीयत यु भी थी हमारी,
चेहरे की हंसी सब गमों को छुपाती थी ।।
किसी को सुकून है क्या कहीं,
फरेब था हंसते चेहरे का,
जो रंजिशें को छुपा कर रखती थी ।।
-) न जाने क्या-क्या पा लिया ,
कितना कुछ मिटा लिया,
जाने पर यह सब साथ तो ना होगा ,
मोह माया का यह नाता इस जन्म के बाद ना होगा ।।
-) यह भी बता किस हाल में तुम हो ,
जानो हाल मेरा फिर यह बताओ क्या इससे बेहतर हाल में तुम हो ।।
खुले आसमान में अब पंछियों की सूरत भी नहीं,
क्या तुम भी क़ैद पंछियों से लगते हो ।।
-) अदब से पेश आना भी क्या जुर्म है,
तहजीब के रंग में रहना भी क्या जुर्म हैं।।
अपनी मेहनत की कमाई पर ईतराना भी क्या जुर्म है,
अपने निस्वार्थ को ना रखना भी क्या जुर्म है ।।
-) मौत तेरे ना आने से हम खफा हैं,
हमें इतना तरसाने से हम खफा हैं,
तुझे ना जाने कब से तलाश रहे थे ,
विश्वास था आयेगी तू वक्त पर ,
देर से आने से हम खफा हैं।।
-) हो सके तो उनके आने से पहले हमें ,
दो ग़ज ज़मीन में दफ़न करना ।।
उनकी हर बात को मैंने सिर आंखों पर सजा रखा है,
जो अब के वह कुछ बोले और मैं सुन ना पाऊं,
तो उनकी तौहीन होगी ।।
-) मौत के पहलू से कौन बचा ,
इसके ठिकाने से कौन बचा हैं।।
बस पल दो पल की आँख मिचौली हुईं थी ,
इसके साथ इससे ज्यादा कौन रहा हैं।।
-) कर कुछ इंतजाम कैसे सफ़र कटेगा ,
मन भटकेगा फिर कैसे मन लगेगा ।।
राहें ख़ाली पड़ी हैं क़यामत कि,
हो मर्ज़ी तेरी तो मेरा ठिकाना यहीं बसेगा ।।
-) ज़रा जरा पे तुम उबाल आते हो ,
ये बताओं किसके दम पर इतराते हो ,
हम भी बादशाह थे कभी यहां के ,
तुम्हारे जैसों से कप उठवाते थे ।।
बात करते हैं संयम कि ये ,
हम जो रौद्र रूप को अपनाते थे।।
-) तुझे तलाशता कोई आशिक तेरे शहर में आ गया ,
देख के हाल यहां का वह इस जहां से जुदा हो गया ।।
-) तू दिल ही नहीं जान पे हक़ जताया कर ,
हमने ख़ुद से पहले तुझे रखा हैं।।
-) ये आजकल के बच्चे ना जाने क्या चाहते हैं,
हमें सिखा रहें है ये दिल लगाया जाता हैं ,
मोहब्बत को अपनाया कैसे जाता हैं,
ये जिस्म के भूखे क्या जाने ,
बग़ैर छुअन का प्यार ,
दूर से निहारने का ,
मर्यादाओं में बंधे रहने का प्यार ।।
हर प्रेम कहानी मुकम्मल नहीं होती। कुछ रिश्ते समय की धूल में खो जाते हैं, कुछ लोग याद बनकर रह जाते हैं और कुछ एहसास दिल में हमेशा के लिए बस जाते हैं। ऐसी ही भावनाओं को शब्द देने के लिए हमारे मंच पर दर्द भरी और उदास शायरियों का एक विशेष संग्रह मौजूद है।
टूटे हुए दिल की खामोशी अक्सर बहुत कुछ कहती है। “Hindi Best Shayari” उन अनकहे जज़्बातों को लफ़्ज़ों में ढालती है जिन्हें लोग अक्सर अपने भीतर दबाकर रखते हैं।
~~ आशुतोष दांगी















Post a Comment