About Ishq Shayari

Ishq Shayari में आपका स्वागत है ❤️

यहाँ आपको प्यार, मोहब्बत, रोमांस, विरह, दर्द और जिंदगी से जुड़ी खूबसूरत हिंदी शायरियों का संग्रह मिलेगा। हम कोशिश करते हैं कि हर शायरी आपके दिल की उन भावनाओं को शब्द दे, जिन्हें कहना कभी-कभी आसान नहीं होता।

इस वेबसाइट पर प्रकाशित शायरियाँ हमारी मौलिक रचनाएँ हैं, जिन्हें पाठकों तक सच्ची भावनाओं और एहसासों को पहुँचाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

दर्द, भरोसा और ज़माने पर हिंदी शायरी भावार्थ सहित

हिंदी शायरी का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवपूर्ण रहा है। भारत में काव्य और शेरो-शायरी की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। संत कवियों, भक्त कवियों और बाद में आधुनिक कवियों ने अपने विचारों और भावनाओं को काव्य के माध्यम से व्यक्त किया। कबीर, रहीम, तुलसीदास और सूरदास जैसे महान कवियों ने अपने दोहों और पदों के माध्यम से समाज को ज्ञान, प्रेम और आध्यात्मिकता का संदेश दिया।

इस संग्रह में प्रेम, बिछड़ने के दर्द, टूटे भरोसे और बदलते ज़माने पर लिखी गई शायरियां हैं। हर शायरी के साथ उसका भावार्थ दिया गया है, ताकि पाठक पंक्तियों के पीछे की भावना को आसानी से समझ सकें।

शायरी संग्रह और भावार्थ


-) हम भी अपना सबकुछ वहां छोड़ आए हैं,

जिस शहर पर कभी हम राज करते थे।

हम भी अपना सबकुछ वहां छोड़ आए हैं हिंदी शायरी

भावार्थ- जिस शहर में कभी हमारा बोलबाला था और जहां हमारा सब कुछ था, वहां से हम सब कुछ छोड़कर आ गए हैं। यह शायरी बीते हुए दिनों की कसक और छूट चुकी जगहों की याद को बयां करती है।

-) हमसे खराब हालों का न पूछो,

मुसीबतों का दौर हमें बहुत थका गया,

हम बचकर निकल जाना चाहते थे,

वक़्त ने एक पल की मोहलत न दी।

हमसे खराब हालों का न पूछो हिंदी शायरी

भावार्थ- हमारी बुरी हालत के बारे में मत पूछो, क्योंकि मुसीबतों के दौर ने हमें बहुत थका दिया। हम उस दौर से निकलना चाहते थे, पर वक़्त ने हमें संभलने का एक पल भी नहीं दिया।

-) अपना कोई भी हमारे जैसा नहीं,

हम जिस पर नज़र उठा लें,

बुरा कहीं भी हो वह सब अच्छा हो जाता है,

बात हमारी आए तो अच्छा भी बुरा हो जाता है।

अपना कोई भी हमारे जैसा नहीं हिंदी शायरी

भावार्थ- दुनिया दूसरों की बुराइयों को भी आसानी से अनदेखा कर देती है, पर जब बात हमारी आती है तो हमारी अच्छाई भी बुरी लगने लगती है। इस शायरी में अपने साथ होने वाले दोहरे व्यवहार की शिकायत है।

हम हर किसी को अपने जैसा समझ बैठे,

जबकि ज़माना झूठ और फ़रेब से चल रहा था।

हम हर किसी को अपने जैसा समझ बैठे हिंदी शायरी

भावार्थ- हमने सबको अपने जैसा सच्चा समझ लिया, पर यह ज़माना तो झूठ और धोखे के सहारे चल रहा था। सच्चे दिल वाले इंसान को अक्सर यही भूल भारी पड़ती है।

-) हम जैसे किसी बात को गलत कहने लग जाएं,

हर एक बात को तौलने लग जाएं,

तो समझ जाइए ज़माने के रंग बहुत खराब हो गए हैं।

हम जैसे किसी बात को गलत कहने लग जाएं हिंदी शायरी

भावार्थ- जब भरोसेमंद इंसान भी हर बात को शक की नज़र से परखने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि समय बहुत बिगड़ चुका है। भरोसा टूटने पर ही लोग हर बात की जांच करने लगते हैं।

-) बातों को तौलकर बोलिए,

बिना सोचे कही बातें दूसरों के दिल को गहरी चोट देती हैं,

अच्छे भले इंसान को भी तोड़ देती हैं।

बातों को तौलकर बोलिए हिंदी शायरी

भावार्थ- हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए, क्योंकि बिना सोचे कही गई बात किसी के दिल को बहुत दुख पहुंचा सकती है। शब्दों का घाव लंबे समय तक नहीं भरता।

-) अब वो अपने घर में भी महफूज़ नहीं,

जो बेरोज़गार हैं और सिर्फ़ पढ़ाई करते हैं,

उन्हें हर बात ज़हर सी लगती है,

मन में ज्वालामुखी सी आग जलती है।

बेरोज़गार पढ़ने वालों के दर्द पर हिंदी शायरी

भावार्थ- जो युवा नौकरी की तलाश में दिन-रात पढ़ाई करते हैं, उन्हें घर में भी ताने और सवाल सुनने पड़ते हैं। हर बात चुभती है और मन के भीतर बेचैनी की आग जलती रहती है।

-) समंदर को नादान समझ रहे हैं,

ये आजकल के नादान लोग,

वह जो हिलोरें लेने लगा,

जाने कितनों के पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी।

समंदर को नादान समझ रहे हैं हिंदी शायरी

भावार्थ- जो लोग शांत इंसान को कमज़ोर समझ लेते हैं, वे भूल करते हैं। समंदर जब लहरों में आता है तो बड़े-बड़ों के पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है, इसलिए किसी की खामोशी को उसकी कमज़ोरी न समझें।

-) वो मेरे साथ महफूज़ है,

ये सच रहा, बाकी ज़माने के रंग झूठ और फ़रेब के सिवा कुछ नहीं।

वो मेरे साथ महफूज़ है हिंदी शायरी

भावार्थ- जिसे हम चाहते हैं, वह हमारे साथ सुरक्षित है, बस यही एक सच्ची बात है। इसके अलावा दुनिया के बाकी रंग दिखावे और धोखे से भरे लगते हैं।

-) वो मेरी मोहब्बत का एहसास है,

जो ज़िंदगी के सुनहरे पन्नों को मेरा कर रहा है।

वो मेरी मोहब्बत का एहसास है हिंदी शायरी

भावार्थ- प्रेम का यह एहसास जीवन के सुनहरे पन्नों को अपना बना रहा है। किसी से इश्क़ इतनी पवित्रता से करना चाहिए कि वह अपने जीवन की हर खुशी हमारे साथ बांटने को तैयार हो जाए।

वक़्त को थाम दे,

जो इशारा कर दे वो,

हम सातों आसमान को एक कर दें,

वो ज़रा सी जो हां कर दे।

वक़्त को थाम दे जो इशारा कर दे वो हिंदी शायरी

भावार्थ- प्रेमी के एक इशारे पर समय भी थम जाता है। अगर वह ज़रा सी हां कह दे तो हम सातों आसमान एक करने का हौसला रखते हैं। यह शायरी सच्चे प्रेम की ताकत को दिखाती है।

-) वो सब बिखेर गया हमारा,

जिसे सब संवार देना चाहिए था,

हम उसके भरोसे रह गए,

वो विश्वास को अपने कदमों तले दबा गया।

वो सब बिखेर गया हमारा हिंदी शायरी

भावार्थ- जिससे हमें सहारा मिलना चाहिए था, उसी ने हमारा सब कुछ बिखेर दिया। हम पूरे भरोसे के साथ उसके पास रहे, पर उसने हमारे विश्वास की कद्र नहीं की।

-) हमसे न पूछ क्या-क्या हुआ,

उसके नाम दिल हुआ, ज़िंदगी का सफ़र उससे शुरू और उसी पर थम गया।

हमसे न पूछ क्या-क्या हुआ हिंदी शायरी

भावार्थ- हमसे मत पूछो कि क्या-क्या बीता। हमारी पूरी दुनिया उसी के नाम से शुरू हुई थी और उसी पर आकर ठहर गई। यह शायरी एकतरफा समर्पण की गहराई बताती है।

-) भूल जाएं सब कुछ, ये भी कम नहीं,

जो भूलने लायक नहीं था,

उसे भी भूल आए हैं हम।

भूल जाएं सब कुछ ये भी कम नहीं हिंदी शायरी

भावार्थ- सब कुछ भूल जाना भी कोई छोटी बात नहीं है। जो बातें कभी नहीं भूलनी चाहिए थीं, उन्हें भी हम पीछे छोड़ आए हैं। दर्द से बचने के लिए इंसान कई बार अपनी सबसे प्यारी यादें भी छोड़ देता है।

-) किसी और का हो जाऊं,

ये ख़्याल मेरे मन को बेचैन कर जाता है,

मेरी मोहब्बत तुमसे है, किसी और से नहीं,

किसी और का ज़िक्र भी मुझे बेचैन कर जाता है।

किसी और का हो जाऊं हिंदी शायरी

भावार्थ- किसी और का हो जाने का ख़्याल भी मन को बेचैन कर देता है, क्योंकि प्रेम केवल एक ही इंसान से है। यह शायरी एक वफ़ादार प्रेमी की भावना को दर्शाती है।

-) न पूछो अब उन हालों का,

जिन हालों में हमने सब कुछ खोया है,

उन हालों का ख़्याल भी रूह कंपा देता है।

भावार्थ- उन हालात के बारे में कुछ मत पूछो जिनमें हमने सब कुछ खो दिया। उनकी याद आते ही आज भी मन कांप उठता है।

-) उम्मीद ये न रही कि अब सब ठीक होगा,

ठीक होने वाला समय खुद को बचाने में गुज़र गया।

भावार्थ- अब यह भरोसा नहीं रहा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, क्योंकि जब हालात सुधर सकते थे, तब का सारा समय खुद को संभालने में निकल गया। कई बार मुश्किल दौर हमें आगे बढ़ने का मौका ही नहीं देता।

-) तेरे इश्क़ में दुनिया भूल बैठे हैं हम,

अब हमें ये खबर भी नहीं कि पहले क्या थे हम।

भावार्थ- तेरे प्रेम में हम दुनिया को इस कदर भूल गए कि अब यह भी याद नहीं कि पहले हम कैसे थे। सच्चा इश्क़ इंसान की पूरी पहचान बदल देता है।

-) किस्सा ये था कि न बिछड़ने वाली बातों पर,

हम अपना अंगूठा लगा आए थे,

वे पढ़े-लिखे थे, जो कुछ हमारा था,

शब्दों के जाल में सब छीन ले गए।

भावार्थ- कभी न बिछड़ने के वादों पर हमने आंख मूंदकर भरोसा किया। जो लोग शब्दों के खेल में माहिर थे, वे हमारी सादगी का फ़ायदा उठाकर सब कुछ ले गए।

-) हमसे ही खेल कर रहे हैं वो,

जिन्हें खेलना हमने सिखाया।

भावार्थ- कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों के किए उपकार भूल जाते हैं। जिन्हें हमने सिखाया, वही हमारे सामने चालें चलने लगते हैं।

-) झूठों की दुनिया में सच बोलना सज़ा बन गया,

दिल साफ़ रखने वाला यहां मज़ाक बन गया।

भावार्थ- आज के दौर में सच बोलने वाले की कद्र कम होती है और उसका मज़ाक बनाया जाता है, जबकि झूठ को तरजीह मिलती है। फिर भी सच्चाई का रास्ता ही सबसे भरोसेमंद है।

-) जो हर बात पे झूठी कसम खाते हैं,

वही सबसे ज़्यादा धोखा देते हैं।

भावार्थ- जो लोग बात-बात पर कसम खाते हैं, उनके इरादों पर अक्सर भरोसा नहीं किया जा सकता। जो दूसरों से छल करता है, उसे भी एक दिन उसी का सामना करना पड़ता है।

-) चेहरे से मासूम पर दिल से चालाक,

झूठे लोग करते हैं सबसे ज़्यादा नुकसान।

भावार्थ- कुछ लोग चेहरे से बहुत भोले दिखते हैं, पर उनके इरादे कुछ और होते हैं। ऐसे लोगों से हमें सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचता है, इसलिए सिर्फ़ चेहरा देखकर किसी पर यकीन नहीं करना चाहिए।

-) चेहरे पे मुस्कान और दिल में फ़रेब,

झूठे लोगों का यही खेल अजीब होता है।

भावार्थ- कई लोग दिखावे के लिए मुस्कुराते हैं, जबकि उनके मन में कुछ और चल रहा होता है। वे अपनी बातों में हमें उलझाकर अपना मतलब निकालते हैं।

-) भरोसा किया और टूट गया दिल,

झूठी बातों ने कर दिया बेहाल।

भावार्थ- आज के समय में सबसे मुश्किल काम किसी पर भरोसा करना है। जब कोई झूठी बातों से हमें छलता है, तो दिल टूट जाता है और हम बहुत तकलीफ़ में आ जाते हैं।

-) झूठे लोगों की भीड़ में अब सच कम पड़ गया,

हर रिश्ता दिखावे का बनकर रह गया।

भावार्थ- आज बहुत से रिश्ते दिल से नहीं, सिर्फ़ दिखावे से चलते हैं। झूठ की पहुंच इतनी बढ़ गई है कि सच की जगह कम पड़ने लगी है।

-) जिनसे उम्मीदें थीं वफ़ा की,

वही निकले झूठ की सज़ा सी।

भावार्थ - जिनसे हमने वफ़ादारी की उम्मीद रखी, उन्हीं से हमें निराशा मिली। हम जिससे जितनी बड़ी उम्मीद रखते हैं, उतनी ही बड़ी चोट भी लग सकती है।

-) झूठ बोलते रहे वो हर बार,

हम समझते रहे बस एक प्यार।

भावार्थ- कुछ रिश्तों में झूठ भी प्रेम जैसा लगने लगता है। हम उनकी बातों को सच्चा प्यार समझते रहे, जबकि वे केवल हमें छल रहे थे।

-) मासूम बनकर करते हैं वार,

झूठे लोग सबसे ज़्यादा ख़तरनाक यार।

भावार्थ- जो लोग मासूम बनने का दिखावा करते हैं, वही अक्सर हमारे लिए सबसे ज़्यादा हानिकारक साबित होते हैं। हमें सतर्क रहना चाहिए और सोच-समझकर लोगों पर भरोसा करना चाहिए।

-) सच सुनने का हौसला नहीं जिनमें,

वो झूठ को ही सच मानते हैं हर दिन में।

भावार्थ- जिन लोगों में सच सुनने की हिम्मत नहीं होती, वे अपने भ्रम को ही सच मानकर जीते हैं। वे झूठ को सच साबित करने में लगे रहते हैं।

-) झूठ की इमारत जब गिरती है,

तो साथ में कई दिलों को तोड़ती है।

भावार्थ- जब किसी का झूठ हमारे सामने खुलता है, तो हमें बहुत दुख होता है। झूठ पर टिके रिश्ते जब बिखरते हैं, तो कई दिलों को चोट पहुंचती है।

-) हर रिश्ते में अब शक होने लगा,

झूठे लोगों का असर बहुत गहरा लगा।

भावार्थ- हम जिस माहौल में रहते हैं, उसका असर हम पर ज़रूर पड़ता है। झूठे लोगों के बीच रहने से हमारे मन में भी शक पैदा होने लगता है और हम हर रिश्ते को शक से देखने लगते हैं।

-) सच बोलने वाले अकेले रह जाते हैं,

झूठे महफ़िलें सजाते हैं।

भावार्थ- आजकल अक्सर झूठ बोलने वालों को ही ज़्यादा अहमियत मिलती है। सच बोलने वाले की भावनाएं नहीं समझी जातीं और वह कई बार अकेला पड़ जाता है।

-) झूठ की आदत ऐसी लगती है,

कि इंसान की पहचान ही बदल जाती है।

भावार्थ- झूठ बोलना जब आदत बन जाता है, तो इंसान को सच दिखाई देना बंद हो जाता है। धीरे-धीरे वह अपनी असली पहचान भी खो बैठता है।

-) उनकी बातों में इतनी मिठास थी,

कि झूठ भी शहद सा लगने लगा था।

भावार्थ- कुछ लोग अपनी मीठी बातों से हमें इस तरह प्रभावित कर लेते हैं कि उनका झूठ भी हमें सच्चा और मीठा लगने लगता है। शायर अपनी कल्पना, संवेदनशीलता और अनुभवों को सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करता है। इसी वजह से पाठक उसकी पंक्तियों में खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है और उनसे प्रेरणा भी पाता है।

-) कभी-कभी लोग इतने झूठ बोलते हैं,

कि खुद को भी सच समझ लेते हैं।

भावार्थ- झूठ बोलने वाले लोग अपने ही झूठ पर यकीन करने लगते हैं। उन्हें अपना झूठ ही सच लगने लगता है।

-) हमने दिल दिया, वो धोखा दे गए,

झूठी मोहब्बत में आंखें भी भीग गईं।

भावार्थ- आज कुछ लोग प्यार का दिखावा करते हैं और जब रिश्ता गहरा हो जाता है, तो धोखा दे देते हैं। ऐसे में आंखें नम हो जाती हैं और दिल बहुत दुखी होता है।

-) झूठे लोगों का क्या गिला करें,

सच में अपनी ग़लती मान ली।

भावार्थ- दूसरों को दोष देने से बेहतर है कि हम खुद को देखें और अपनी गलती मान लें। जो अपनी कमी स्वीकार कर लेता है, वही आगे सुधार कर पाता है।

-) झूठ की परछाईं हर बात में दिखी,

सच की जगह जैसे कहीं न मिली।

भावार्थ- आजकल हर बात में झूठ ही झूठ दिखाई देता है और सच बहुत कम हो गया है। ऐसा लगता है कि सच के लिए कहीं जगह ही नहीं बची।

-) हर बात में झूठ की गहराई थी,

फिर भी उसकी सादगी पर भरम आई थी।

भावार्थ- कुछ लोग इतनी गहराई से झूठ बोलते हैं कि हमें उनकी सादगी और उनकी बातों पर यकीन हो जाता है। हम उनका झूठ भी सच समझने लगते हैं।

-) इश्क़ तू हमें यूं बदनाम भी न कर,

कि लोगों से हम नज़र चुराने लग जाएं।

इश्क़ तू हमें यूं बदनाम भी न कर हिंदी शायरी

भावार्थ- इश्क़ में हमें अपने साथी की इज़्ज़त और कद्र करनी चाहिए। प्रेम तभी सुंदर रहता है जब उसमें सम्मान बना रहे और किसी को लोगों के सामने शर्मिंदा न होना पड़े।

-) किसी परदेशी को क्या ख़बर,

जो गुज़री दिल पर, बेबस जानते हैं अपने लोग।

किसी परदेशी को क्या ख़बर हिंदी शायरी

भावार्थ- जो बीत चुका है, उस दर्द को केवल अपने लोग ही समझ सकते हैं। अनजान इंसान को हमारे दिल पर गुज़री बातों की कोई ख़बर नहीं होती।

-) तुम किसी के यूं भी न हो जाना,

यादों में मैं रहूं और हक़ीक़त में उसके न हो जाना,

आंख मूंदकर मानते हैं तुमको, बस इसे भ्रम न बना जाना।

तुम किसी के यूं भी न हो जाना हिंदी शायरी

भावार्थ- प्रेम में जुदाई सबसे बड़ी पीड़ा होती है। प्रेमी सिर्फ़ ख़्यालों में मिले और हक़ीक़त में किसी और का हो जाए, यह सोचना भी मन को तोड़ देता है। प्रेमी से बस इतनी गुज़ारिश है कि हमारा भरोसा भ्रम न बन जाए।

-) कोई अगर खता हो तो बयां करने आ जाना तुम,

किसी और को मेरी खामी गिनवाओ, मुझे गवारा नहीं।

कोई अगर खता हो तो बयां करने आ जाना हिंदी शायरी

भावार्थ- अगर मुझसे कोई गलती हो जाए तो सीधे मुझसे कहना, मुझे अच्छा नहीं लगता कि मेरी कमियां किसी और के सामने गिनाई जाएं। अपनों की शिकायत अपनों से ही होनी चाहिए।

-) माना हममें अदब नहीं अब,

किसने अदब की लाज रखी,

जो ज़रा से हम क्या झुके, लोगों ने हमें और झुकाना चाहा।

माना हममें अदब नहीं अब हिंदी शायरी

भावार्थ- जीवन में सहनशीलता ज़रूरी है। जब हम विनम्रता से थोड़ा झुक जाते हैं, तो कुछ लोग उसे हमारी कमज़ोरी समझकर और झुकाने की कोशिश करने लगते हैं।

-) सुना है अब वो वफ़ाओं के पाठ पढ़ाता है,

ये भी क्या खूब है, गुनाह करके साधु बन जाता है,

हम भी सोचते हैं अब उनके बताए रस्ते पर चल दें,

बेवफ़ाओं के शहर में थोड़ी बेवफ़ाई कर लें।

सुना है अब वो वफ़ाओं के पाठ पढ़ाता है हिंदी शायरी

भावार्थ- जिसने खुद बेवफ़ाई की, वही अब दूसरों को वफ़ा का पाठ पढ़ा रहा है। लोगों की बेवफ़ाई से दिल थक जाता है और इंसान कुछ नया, कोई नई राह चुनना चाहता है।

-) हम हम न रहे, ये भी क्या किसी से कम है,

वो तेज़ आवाज़, वो आंखों में गुस्सा, वो किसी की न सुनना,

ये सब सजो रखे थे हमने बेशकीमती मोतियों जैसे,

अब एक भूला-डरा सा शख़्स है, इससे आगे कुछ नहीं।

हम हम न रहे ये भी क्या किसी से कम है हिंदी शायरी

भावार्थ- जीवन में कुछ हालात इंसान को पूरी तरह बदल देते हैं। जो इंसान कभी निडर और तेज़ आवाज़ वाला था, वही परिस्थितियों के कारण शांत और सहमा हुआ बन जाता है। हमारा लहजा तक बदल जाता है।

-) हवाओं के तेज़ रुख़ ने वो चराग़ बुझा ही दिया,

जिसके न बुझने की कसम हम खाते थे,

वक़्त ने पहलू बदल ही दिए सारे,

जिन्हें हम अपना बुलाते थे।

हवाओं के तेज़ रुख़ ने वो चराग़ बुझा ही दिया हिंदी शायरी

भावार्थ- समय के साथ पता चल जाता है कि कौन हमारा कितना अपना है। जब वक़्त करवट लेता है, तब साफ़ दिखता है कि कौन सच में साथ है और कौन सिर्फ़ दिखावे के लिए चल रहा था।

-) बड़ा दूर शहर है तेरा, मैं सफ़र में ही हताश हो जाता हूं,

ये दूरियां बड़े शहरों की मुझे अधूरे सफ़र में रुलाती हैं।

भावार्थ- रिश्तों की दूरी सफ़र से नहीं, दिल से होती है। अगर दिलों में दूरी आ जाए, तो मिलने के बाद भी मन भारी रहता है। और अगर दिल पास हों, तो लंबा सफ़र भी मिलने की उम्मीद में कट जाता है।

-) एक वादा ये भी कर, हर वादे को मुकम्मल मैं करूं,

तेरी कसमें झूठी खाता नहीं मैं, बस यकीन कर,

अपनी उम्र लंबी कर, खुद को मेरा कर, बस मेरा कर।

एक वादा ये भी कर हर वादे को मुकम्मल मैं करूं हिंदी शायरी

भावार्थ- कुछ रिश्तों का मिल जाना ही सब कुछ मिल जाने जैसा होता है। ऐसे खास लोगों के नाम पर हम झूठी कसम भी नहीं खा सकते। हम बस उन्हें पाने की सच्ची तमन्ना रखते हैं।

-) मुझसे नज़रें न चुरा, मैं इस खेल में अभी कच्चा हूं,

एक उम्र गुज़रने दे तेरे साथ मुझे,

इस खेल का सबसे उम्दा खिलाड़ी बन सकता हूं मैं।

भावार्थ- किसी भी काम में माहिर बनने के लिए समय और अनुभव चाहिए। प्रेम में भी इंसान वक़्त के साथ सीखता है, इसलिए नए प्रेमी को थोड़ा समय देना चाहिए।

-) कोई परदेस में जाने कैसे दिन बिताता होगा,

जिसका महबूब कई दिन तक उससे मिल नहीं पाता होगा,

वो खुद को कितना असहाय पाता होगा,

वो तो इसी बात से बिखर जाता होगा।

कोई परदेस में जाने कैसे दिन बिताता होगा हिंदी शायरी

भावार्थ- महबूब के बिना कहीं भी मन नहीं लगता। जब प्रियतम साथ न हो, तो घर हो या परदेस, सब सूना लगता है। दूरी में रहने वाले प्रेमी का दिल हर पल उसी को याद करता है।

-) हमसे पूछो कोई उसके न बोलने का,

वो चुप रहे तो हज़ारों की भीड़ भी वीराने सी लगती है,

सावन की झड़ी भी बंजर सी दिखती है,

हरियाली भी मरुस्थल सी लगती है।

हमसे पूछो कोई उसके न बोलने का हिंदी शायरी

भावार्थ- जब प्रिय इंसान खामोश हो जाता है, तो हज़ारों की भीड़ में भी तन्हाई महसूस होती है। उसकी चुप्पी के आगे सावन की बारिश भी सूखी और हरियाली भी रेगिस्तान जैसी लगने लगती है।

-) मैं कोई आवारा नहीं जो मुझे नकार देते हो तुम,

जो मैं मिलने को कहूं तो इंकार कर देते हो तुम,

तुम यादों में, दिल के ख्यालों में इस कदर बसते हो जैसे मंदिरों में ख़ुदा,

मेरे प्रेम की सच्ची अर्चना हो तुम।

मैं कोई आवारा नहीं जो मुझे नकार देते हो तुम हिंदी शायरी

भावार्थ- प्रेमी कहता है कि मैं आवारा नहीं हूं, फिर भी मिलने से इंकार क्यों किया जाता है। मेरे दिल में तुम उसी तरह बसे हो जैसे मंदिर में ईश्वर, और मेरा प्रेम तुम्हारे लिए एक पूजा की तरह है।

-) छोड़ आए उस डगर को भी, दिल लगाने के सफ़र को भी,

किसी की उम्मीद थे हम, उस उम्मीद को भी,

तेरे पहलू में आ गिरे, अब फ़ैसले हमारे हक़ में हों या विपक्ष में, सब छोड़ आए हम।

छोड़ आए उस डगर को भी हिंदी शायरी

भावार्थ- प्रेम की राह चुनने के लिए हमने पुराना रास्ता और पुरानी उम्मीदें छोड़ दीं। अब नतीजा चाहे हमारे पक्ष में हो या विपक्ष में, हमने तुम्हारे पास आने का फ़ैसला कर लिया है।

-) कहीं तो वो दूर का मुसाफ़िर नज़र आता होगा,

कभी तो वो किसी डगर पर टकराता होगा।

भावार्थ- बिछड़ चुका इंसान किसी न किसी रास्ते पर कभी तो दिखाई देगा, यह उम्मीद दिल में बनी रहती है। जिनसे विचार नहीं मिलते, वे साथ नहीं रह पाते, फिर भी उनकी तलाश आंखों से जाती नहीं।

-) कुछ तो उसका हाल सुनाया करो,

क्या अब भी वो तस्वीरों को छुपाता होगा,

माना कि बहुत दूर निकल गया मंज़िल से वो,

मगर रास्ते से भी कुछ न कुछ पाता होगा।

भावार्थ- प्रेम में आगे बढ़ जाना और अपने प्रेमी को भुला देना आसान नहीं होता। प्रेमी के बिना दिल को सुकून नहीं मिलता, इसलिए इंसान उसके हाल की ख़बर पूछता रहता है।

-) ज़िंदगी ने मुकम्मल कहां रहने दिया हमें,

एक उम्मीद की किरण थी कि अंत भला होगा,

पता चला उस किरण को हम शुरू में ही छोड़ आए।

भावार्थ- ज़िंदगी ने हमें कभी पूरा नहीं होने दिया। हमें उम्मीद थी कि अंत भला होगा, पर शायद हमने वह उम्मीद शुरुआत में ही कहीं खो दी। फिर भी जीवन में उम्मीद की किरण को थामे रखना ज़रूरी है।

-) कुछ तो उसकी बातें भी हमारी सी नहीं थीं,

मैं ये सोचता भी रहता था,

कि कभी तो बिछड़ना तय होगा ही,

जिससे बातों का मेल न था,

वो दिल में कैसे रह सकता था।

भावार्थ- रिश्तों को उम्र भर निभाने के लिए विचारों और ख़्यालों का मिलना ज़रूरी है। जिससे हमारी सोच ही न मिले, उसका साथ छूट जाना लगभग तय होता है।

-) कुछ आसमां को देख-देखकर डर जाते होंगे,

जिनके घर सड़क किनारे होते होंगे,

ये तूफ़ानी बारिश बड़ी सुहावनी लगती है,

घर की खिड़कियों से,

जिनके घर नहीं होते हैं,

उनको तो ये बारिश मुसीबत लगती है।

भावार्थ- बारिश हर किसी के लिए खुशी नहीं लाती। घर की खिड़की से जो मौसम सुहावना दिखता है, वही सड़क किनारे रहने वालों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। यह शायरी हमें दूसरों की मुश्किलों को समझने की सीख देती है।

-) मैं जाने क्या कर आया,

खुद की तलाश में खुद को भूल आया,

पुराना सा बहुत उम्दा हुआ करता था मैं,

अब इस नए रंग में सब अजीब सा लगता है,

मैं अपनी ज़िंदगी का बहुत गलत फ़ैसला ले आया।

भावार्थ- खुद को पाने की कोशिश में इंसान कई बार अपनी असली पहचान खो बैठता है। बदले हुए रंग में सब कुछ अजीब लगता है और लगता है कि कहीं कोई ग़लत फ़ैसला हो गया। ऐसे समय में अपने पुराने मूल्यों को याद करना मददगार होता है।

-) मिलने की उम्मीद भी थी,

और डर भी ये था कि,

इंसानों की फ़ितरत पर पल भर भी भरोसा नहीं,

मैं उम्मीद में बैठा रहूं और वो कहे अब नहीं।

भावार्थ- मिलने की उम्मीद के साथ यह डर भी था कि इंसान की फ़ितरत पर भरोसा करना मुश्किल है। कहीं ऐसा न हो कि हम इंतज़ार करते रहें और सामने वाला आख़िर में मना कर दे।

-) हमें औरों सा न समझ,

हम अपनी किस्म के भी आख़िरी इंसान हैं,

जहां लोगों ने बर्बाद होना शुरू किया,

हम उस राह से आबाद हुए हैं।

भावार्थ- हमें दूसरों जैसा मत समझो। जिन हालात में लोग टूट जाते हैं, हम उन्हीं से सीखकर आगे बढ़े हैं। मुसीबत में भी धैर्य और सच्चाई का साथ हमें जीत दिलाता है।

-) वो वफ़ा निभा गया जाते-जाते भी,

वरना ये आज के दौर में मुमकिन नहीं,

भूल जाते हैं लोग किसी बेहतर की तलाश में,

उसने उम्र भर निभाई अपने यार की याद।

भावार्थ- उसने जाते समय भी ईमानदारी निभाई, जो आज के समय में बहुत कम देखने को मिलती है। लोग बेहतर की चाह में पुराने रिश्ते भूल जाते हैं, पर उसने अपने दोस्त की याद को हमेशा संजोए रखा।

-) माना कि सब मुमकिन है प्यार में,

इंतज़ार, बेबसी, सुकून, चैन, ज़िंदगी,

बस एक चीज़ नागवार है,

बिछड़ने की बातें न हों प्यार में।

भावार्थ- प्यार में इंतज़ार, मजबूरी और सुकून सब कुछ चलता है, पर बिछड़ने की बातें किसी को अच्छी नहीं लगतीं। सच्चा प्रेमी हर हाल में साथ निभाने की बात ही सुनना चाहता है।

-) वो हद को भी लांघ आए,

ये मुमकिन है तुम अपना वादा निभाओ,

क्या ये मुमकिन है,

वो छोड़ आए सब एक पल में,

तुम ताउम्र साथ उसका निभाओ, क्या ये मुमकिन है।

भावार्थ- प्रेमी सारी सीमाएं पार करके तुम्हारे पास आ गया और सब कुछ छोड़ आया। अब सवाल यही है कि क्या तुम भी उम्र भर उसका साथ निभा पाओगी। यह शायरी वादे की ज़िम्मेदारी को याद दिलाती है।

-) एक आरज़ू थी आशुतोष,

कि उसको दुल्हन बनी देखें,

हमारे नाम की मेहंदी,

उसके प्यारे हाथों में देखें।

भावार्थ- दिल में एक ख़्वाहिश थी कि उसे दुल्हन के रूप में देखें और उसके हाथों में अपने नाम की मेहंदी सजी हो। पर हर सपना पूरा नहीं होता और कई बार नसीब कुछ और ही तय करता है।

-) ख़्वाब मुकम्मल हो जाता मेरा,

ख़ुदा को मंज़ूर न था ऐसा,

वो किसी और के नाम की मेहंदी लगा बैठी,

मैं अपने अधूरे ख़्वाब को दुआओं में सजा बैठा।

भावार्थ- ईश्वर हर बार हमारी चाहत को हमारा जीवनसाथी नहीं बनाता। कई बार जो हमें नहीं मिलता, उसके लिए भी हम दुआ करना नहीं छोड़ते। अधूरे ख़्वाब को स्वीकार कर आगे बढ़ना ही समझदारी है।

-) एक कहानी के किरदार बदल गए,

हम अड़ियल बैल से,

उनके एक इशारे पर बदल गए,

वो चाहता ये नहीं था कि उसके लिए सब बदलें,

हमने चाहा, हम उसके लिए सारे बदल गए।

भावार्थ- किसी एक इंसान के जीवन में आने से हमारा पूरा किरदार बदल जाता है। हमारा लहजा, हमारी आदतें और हमारी सोच सब नए रंग में ढल जाती हैं। प्रेम में इंसान अपनी मर्ज़ी से बदलना चाहता है।

-) माना कि तेरे काबिल नहीं हूं मैं,

मगर तेरे हक़ का हूं मैं,

परिवर्तन प्रकृति का नियम है,

तेरे काबिल भी बन जाऊंगा मैं।

भावार्थ- प्रेमी मानता है कि वह अभी पूरी तरह योग्य नहीं है, पर उसका प्रेम सच्चा है। वह भरोसा दिलाता है कि समय के साथ वह खुद को बेहतर बनाएगा, क्योंकि बदलाव प्रकृति का नियम है।

-) माना कि कुछ भी ठीक न होना,

बुरे वक़्त का निकल जाना सा है,

ये भी अच्छा है,

कि बुरे में बुरा वक़्त निकल रहा है,

अच्छे वक़्त में सब अच्छा सा ही है।

भावार्थ- बुरे वक़्त में हमें धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि समय के साथ वह निकल ही जाता है। थोड़ा वक़्त लगता है, पर हालात सुधरते हैं और अच्छे दिन ज़रूर आते हैं।

-) उसे ज़रा भी कुछ हो जाए,

मन हमारा घबराने लगता है,

वो ज़माने की हवा से अभी अंजान है,

अच्छे-बुरे की उसे परख नहीं है।

भावार्थ- जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनका असर सीधे हमारे मन पर पड़ता है। वह खुश हो तो हम खुश रहते हैं और उसे तकलीफ़ हो तो हमें भी चिंता होने लगती है।

-) मैं ये किससे कहूं,

कि मैं वक़्त के ठहराव में आ फंसा हूं,

जहां से निकलना इतना आसान भी नहीं,

कई थके मुसाफ़िर हैं यहां,

यहां से निकल पाना आसान नहीं।

भावार्थ- हमें समय के साथ आगे बढ़ना सीखना चाहिए। अगर हम वक़्त के किसी मोड़ पर ठहर जाएं, तो वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हिम्मत करके क़दम बढ़ाते रहना चाहिए।

-) ज़माने की हवा को पहचान आशुतोष,

जो तू समझता है सब आसान सा,

वो एक जाल है,

तुझे फंसाने के फिर कभी न निकल पाने के।

भावार्थ- जो चीज़ जैसी दिखती है, हमेशा वैसी नहीं होती। कई लोग मीठी बातों से हमें अपने जाल में फंसाते हैं, ताकि हम उनकी बातों में उलझे रहें और अपने लक्ष्य की ओर आगे न बढ़ सकें। इसलिए ज़माने की हवा को पहचानना ज़रूरी है।

लेखक: आशुतोष दांगी

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