-:Two Line Love Shayari in Hindi:-
हिंदी शायरी लोगों के दिलों को सीधे छूती है। जब कोई व्यक्ति वही भाव पढ़ता है जो वह स्वयं महसूस कर रहा होता है, तो उसे अपनापन और सुकून मिलता है। यही कारण है कि शायरी सदियों से लोकप्रिय बनी हुई है।
• कम शब्दों में गहरी बात कहना
• आसानी से साझा किया जा सकना
• भावनात्मक जुड़ाव
• हर आयु वर्ग के लिए उपयुक्त होना
-) ए नए दौर के ढ़ंग हमसे अदब से पेश आ,
हमनें उस दौर में जाने कितनी क़यामत ढाई हैं
-) अंदाज़ ए करम ऐसा हों ,
जन्नत की हक़ीक़त जैसा हों,
देखें तुझे फ़िर ये ना पूछें कहां हैं,
ऐसे लगें जैसे ख़ुदा की महफ़िल हों ।।
-) जाने किस दहलीज के होकर रह गए हम,
लांघ जाना था जिन्हें बस उन्हीं के होकर रह गएं हम ।।
-) बंजर बस्ती की बातें कर रहें हैं वे ,
जिनके गुलशन बहार में फूल खिलते हैं,
वे दर्द क्या जाने ख़राब हालों का,
जो ऐश की बारिश में सोते हैं ।।
-) ज़िंदगी बर्बाद कर गएं हो,
हमें इस हाल में बदहाल कर गएं हो ,
कुछ तो ख़राब हालों का ख़्याल कर जाते तुम,
हमारे मुसीबतों के साथ को,
जाने किसके गुमान में सब ख़त्म कर गएं हो ।।
-) वक्त वक्त की बात है,
कभी किस्मत, कभी मात की बात है।
-) वक्त ने दिखाया आईना,
जहां मैं और मेरी खामोशी थी।
-) वक्त वक्त की बात है,
कभी हँसी, कभी आंसुओं की रात है।
-) वक्त बुरा हो तो सब कुछ छूटता है,
और अच्छा हो तो खुदा भी मिल जाता है।
-) वक्त वक्त की बात है,
कभी शुरुआत, कभी समाप्त की बात है।
-) वक्त की चोट बड़ी गहरी होती है,
जो न दिखे पर दिल में उतर जाती है।
-) वक्त वक्त की बात है,
आज जो दूर हैं, कल करीब हो सकते हैं।
-) वक्त बदलने में देर नहीं लगती,
रिश्ते बदलने में और भी कम।
-) वक्त वक्त की बात है,
कभी खाली जेब, कभी सोने की थाली साथ है।
-) वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है,
बस यादें वहीं रह जाती हैं।
-) मन को रिझाने वाले सुन ले,
दिल बस तुम पर आने लगा है ।।
और किसी की बात नहीं है,
दिल बस तुमको चाहने लगा है ।।
तुम पर दिल ये अटका ऐसे ,
फूलों पर भंवरे हो जैसे ।।
हम ना जाने कब कैसे ये,
हुआ हैं बस पल दो पल में ये ।।
अब तुमको हर सीरत में ये,
मेरे दिल के प्रेम गीतों में तुमको बस ये खोजने लगा हैं।।
-) मन को रिझाने वाले सुन ले,
दिल बस तुम पर आने लगा है ।।
मंदिर में भी देखा जाकर,
प्रभु मूरत में तुमको पाने लगा है ।।
प्रेम सुधा को पी लूं मैं ,
माधव जैसे रंग में रंगने लगा हैं ।।
खुदको हम प्रेमी माने ,
तुमको प्रेमिका बनाने लगा हैं ।।
हम कहे क्या अब यह तुमको,
दिल ये हमारा सबकुछ तुमको मानने लगा है ।।
-) मन को रिझाने वाले सुन ले ,
दिल बस तुम पर आने लगा है ।।
पायल की छन-छन को तेरी,
बारिश की छम छम में तुझको खोजने लगा है ।।
बदरिया से बरसती बूंदे ,
मन मेरा चंचल पानी सा बहने लगा हैं ।।
सावन के आने पर जैसे ,
हर्षित होकर मयूर नाचने लगा हैं ।।
हमसे ना पूछों अब तन की ,
ये हमारी सुध बिश्राने लगा हैं।।
-) मन को रिझाने वाले सुन ले,
दिल बस तुम पर आने लगा है ।।
तेरी सुनी आंखों में काजल को ,
मन मेरा सजाने लगा है ।।
तेरे बालों का कहना क्या,
काली नागिन सी उनको समझने लगा है ।।
-) किसी रोज़ इश्क़ बर्बाद लिखेंगे ,
सबकुछ करने के बाद इसे बेकार लिखेंगे ।।
ख़ुद जानेंगे पहली इसकी हक़ीक़त ,
फिर इसे प्यार लिखेंगे ।।
-) हम अकेले हैं इसमें जूर्म क्या हैं,
किसी बेवफ़ा से दूर हैं इसमें हर्ज क्या हैं ।।
वे जो किसी के हो जाते है,
बस बदनामी का सबब बन जाते हैं।।
हम बदनामी के सबब से दूर हैं,
फिज़ा माना इश्क़ की हैं,
लेकिन इसकी रंगत से हम बहुत दूर हैं।।
-) जानो तो मेरे दिल का हाल ,
दूर से क्या पता चलता हैं,
पास आओ देखों इन निगाहों में ,
तो जानो कि क्या अंगार सा जल रहा हैं।।
मन भ्रम आस सब टूटा हैं,
ये मैं नहीं मेरे जैसा जी रहा हैं।।
-) तुम जो ख़ुद पे इतना इतराते हो,
हर दफ़ा मुकर जाते हो ।।
ये तो समझो कब तक क्या होगा ,
ये जो सामने तेरे हैं,
कबतक ऐसा ही रहेगा ,
जानो हाल क्या गुजरती होगी दिल पे इसके,
तुम जैसा होता ये ,
तो सच बताओ ये सफ़र कहां तक का हुआ होता।।
-) हमसे ना कर ये चाल फ़रेब कि बातें ,
तुझसे जो मिल रहा हैं अब ।।
वो अपने ज़माने का शातिर रहा हैं,
जो सोच रहे हो तुम उसके आगे से वह ,
कबसे चल रहा हैं ।।
-) किसी रोज़ मेरी जगह ख़ुद को रखना ,
मेरे हाल को फ़िर समझना ।।
कितना रुलाया हैं तुमने हर दफ़ा मुझे ,
इसे बस ख़ुदा कि रहमत समझना ,
तुमपे भी गुजरेगी कभी ऐसी ही दामिनी ,
फ़िर बस हमको याद करना ।।
-) कुछ तो दिल से भी काम लिया कर ,
हरजगह दिमाग को ना रखा कर ।।
प्यार वफ़ा वादों का ऐतबार किया कर,
क्या ग़ुमराह करती रहती हैं मुझे ,
तू यार ख़ुद को बेवफ़ा कहां कर ।।
-) इश्क़ ना कर छोड़ ये झंझट ,
क्यूं ख़ुद पे बौझ ढोती हैं ।।
मेरे जैसे साधारण से ,
कहां चक्रव्यू सी चाल चलती हैं।।
-) वफ़ा की अब तुझसे क्या बात रखे,
तूने बफ़ाओं को सूली पे चढ़ा रखा हैं।।
मैं इश्क़ करता रहा दिल से ,
तूने मुझे दिल से निकाल रखा हैं ।।
-) हमें वफ़ा खेल ना सिखा इश्क़,
हम अपनी पे आए तो बर्बादियों का शिखर बना दे।
-) कुछ तो इस बात से भी डर ,
जान तुझे भी ख़ुदा के घर हैं।।
पूछेंगे सवाल ख़ुदा तुझसे भी ,
झूठों कि वहां इबादत नहीं ।।
-) ये जो तुम ख़ुद पे नाज़ करके इतराते हो ,
ये बताओं हम को तड़पाकर तुम सच में चैन पाते हो।।
-) ये भी किसी से कम नहीं कि हम नादान हैं,
अजनबियों से अंजान ही सही ,
फ़रेबो के झूठ से दूर हैं ,
और ईमानदारों के ईमान में हैं।।
-) ये भी बता कैसे अजनबियों से दोस्ती होती हैं,
बातें फिर उनकी होती हैं ।।
हम कोषों दूर रहें इन सबसे ,
हमें केवल मोहब्बत एक से होती हैं।।
-) तू ये भी वादा कर के हर वादें को झूठा कर ,
मैं सच के सिवा कुछ ना था ,
तू मुझको भी झूठ की दीवार कर ,
मुझे अपने रंग में निजात कर,
तेरे इश्क़ से आजाद कर ।।
~~~आशुतोष दांगी~~~






























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